Monthly Archives: April 2018

CFT के अनुप्रयोग Applications of crystal field theory in hindi

Applications of crystal field theory in hindi CFT के अनुप्रयोग : CFT की सहायता से संकुल यौगिकों के चुम्बकीय गुण , रंग , ज्यामिति एवं स्पेक्ट्रम आदि गुणों की व्याख्या की जाती है। 1. चुम्बकीय गुण वे संकुल यौगिक जिनमे अयुग्मित e होते है , अनु चुम्बकीय होते है एवं वे संकुल यौगिक जिनमे एक भी… Continue reading »

क्रिस्टल क्षेत्र विभाजन ऊर्जा को प्रभावित करने वाले कारक crystal field split energy in hindi

crystal field split energy in hindi क्रिस्टल क्षेत्र विभाजन ऊर्जा : t2g एवं eg कक्षकों के मध्य के उर्जा अंतर को क्रिस्टल क्षेत्र विभाजन उर्जा कहते है। क्रिस्टल क्षेत्र स्थायीकरण उर्जा (crystal field stabilization energy ) (CFSE) : d कक्षकों के उच्च उर्जा के eg एवं निम्न उर्जा के t2g कक्षकों में विभाजन के पश्चात् e… Continue reading »

क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धांत (crystal field theory in hindi) CFT

(crystal field theory in hindi) CFT क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धांत :  संक्रमण धातु संकुल यौगिकों में धातु आयन एवं लेगेंड के मध्य बने बंध की प्रकृति को समझाने के लिए निम्न सिद्धांत काम आते है – 1. VBT सिद्धांत (संयोजकता बंध सिद्धान्त) 2. CFT सिद्धांत (क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त) (crystal field theory in hindi) 3. MOT (अणु कक्षक… Continue reading »

HSAB सिद्धांत पर आधारित प्रश्न उत्तर , कठोरता , मृदुता , अम्ल क्षार , कठोर मृदु आदि

Answer questions based on HSAB theory प्रश्न 1 : निम्न संकुलो के स्थायित्व की व्याख्या कीजिये –   [CO(CN)5I]3-and [CO(CN)5f]3- [CO(NH3)5F]2+and [CO(NH3)5I]2+ उत्तर : HSAB सिद्धांत के अनुसार कठोर अम्ल Rxm के लिए कठोर क्षार को व मृदु अम्ल मृदु क्षार को वरीयता देता है  अर्थात कठोर लिगेंड , मृदु लिगेंड के साथ जुड़ना चाहता है।… Continue reading »

HSAB का सैद्धान्तिक आधार , सिद्धांत , अनुप्रयोग , सीमाएं The theoretical basis of HSAB

(The theoretical basis of HSAB) HSAB का सैद्धान्तिक आधार : कठोर एवं मृदु अम्ल तथा क्षार अवधारणा को सैद्धान्तिक आधार देने के लिए अनेक स्पष्टीकरण दिए गये जो निम्न है – 1. आयनिक एवं सह्संयोजी बंध सिद्धांत इस सिद्धांत के अनुसार कठोर कठोर परस्पर क्रिया द्वारा आयनिक बंध बनता है। इस अवधारणा के अनुसार छोटे… Continue reading »

केंद्र में कठोरीकरण अथवा मृदुकरण का सहजीवन , कठोर अम्ल एवं मृदु अम्ल हैं ?

Hardness or softening at the center किसी केंद्र में कठोरीकरण अथवा मृदुकरण का सहजीवन : किसी कठोर केन्द्र से मृदु एवं ध्रुवणीय अर्दाशो के जुड़ने से कठोर केंद्र की कठोरता कम हो जाती है। इसी प्रकार किसी मृदु केन्द्र से कठोर एवं अध्रुवणीय अर्दाशो के जुड़ने से मृदु केंद्र की मृदुता कम हो जाती है। … Continue reading »

HSAB सिद्धांत , कठोर अम्ल , मृदु क्षारकी परिभाषा क्या है hsab theory in hindi

(hsab theory in hindi) HSAB सिद्धांत : पीयरसन वैज्ञानिक ने अम्ल एवं क्षार अभिक्रिया के आपेक्षिक स्थायित्व (relative stability) को समझाने के लिए एक सिद्धांत दिया जिसे अम्ल क्षार का HSAB सिद्धान्त कहते है। इस सिद्धांत के अनुसार बंध बनाने हेतु कठोर अम्ल , कठोर क्षार की मृदु अम्ल मृदु क्षार की वरीयता देता है।… Continue reading »

जालक की विशिष्ट ऊष्मा , Dulong petit law , आइंस्टीन मॉडल , डिबाई सिद्धान्त

Specific heat of the lattice in hindi जालक की विशिष्ट ऊष्मा : जब ठोसो को heat दी जाती है तो ठोसों का ताप व आन्तरिक उर्जा में वृद्धि होती है। solids में internal energy में वृद्धि दो प्रकार से हो सकती है 1. ठोसों के atom अपनी साम्यवस्था के इर्द गिर्द कम्पन्न के कारण कम्पन्न… Continue reading »

फोनोन्स की परिभाषा क्या है Phonons in hindi

(Phonons in hindi) फोनोन्स की परिभाषा क्या है : जिस प्रकार क्वांटम यांत्रिकी में उर्जा के क्वांटम फोटोन कहा जाता है उसी प्रकार lattice के क्वाण्टम को फोनोन कहते है , जो ध्वनिक क्षेत्र में होता है। phonons की कम्पन्न आवृति लगभग 104 से 1013 Hz होती है। अर्थात फोनोन्स IR region (ध्वनिक क्षेत्र ) में आता है। Properties of… Continue reading »

x rays विवर्तन , Reciprocal lattice in hindi , x rays diffraction

(x rays diffraction in hindi) x rays विवर्तन : जब किसी कण पर उसके आकार की कोटि के बराबर wave length की किरणें आपतित करवाई जाती है तो उस कण द्वारा ये किरणें अपने मार्ग से विचलित हो जाती है अर्थात किरणों का विवर्तन हो जाता है।  यदि कणों का समूह हो तो इन कणों… Continue reading »