HSAB सिद्धांत , कठोर अम्ल , मृदु क्षारकी परिभाषा क्या है hsab theory in hindi

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(hsab theory in hindi) HSAB सिद्धांत : पीयरसन वैज्ञानिक ने अम्ल एवं क्षार अभिक्रिया के आपेक्षिक स्थायित्व (relative stability) को समझाने के लिए एक सिद्धांत दिया जिसे अम्ल क्षार का HSAB सिद्धान्त कहते है।

इस सिद्धांत के अनुसार बंध बनाने हेतु कठोर अम्ल , कठोर क्षार की मृदु अम्ल मृदु क्षार की वरीयता देता है।

अत: इस सिद्धान्त के अनुसार

1. कठोर अम्ल + कठोर क्षार = स्थायी संकुल

2. मृदु अम्ल + मृदु क्षार = स्थायी संकुल

3. मृदु अम्ल + कठोर क्षार = अस्थायी संकुल

4. कठोर अम्ल + मृदु क्षार = अस्थायी संकुल

HSAB सिद्धांत के अनुसार कठोर एवं मृदु अम्ल तथा क्षार

1. कठोर अम्ल : इनमे निम्न गुण पाए जाते है –
(a) उच्च धनात्मक आवेश घनत्व अर्थात उच्च आयनन विभव
(b) छोटा आकार कम ध्रुवीयता
(c) d-electron की अनुपस्थिति अथवा बहुत कम d-electron. । d-electron की संख्या में वृद्धि से स्पीशीज की ध्रुवीयता में वृद्धि होती है जिससे कठोरता में कमी हो जाती है।
इस प्रकार स्पीशीज में मृदुता बढ़ जाती है।
(d) अधिक संख्या में कठोर अर्द्धाश के एकत्रित होने से केंद्र अधिक कठोर हो जाता है जैसे – BH3 एक मृदु अम्ल होता है लेकिन BF3 व BCl3 कठोर  होते है।
2. सीमांत अम्ल : इनके गुण कठोर तथा मृदु अम्ल के लगभग मध्य में होते है।
3. मृदु अम्ल : इनमे निम्न गुण होते है
(a) शून्य अथवा निम्न ऑक्सीकरण अवस्था
(b) d एवं f electron की अधिक संख्या
(c) कम आयनन विभव
(d) बड़ा आकार
कठोर अम्ल के उदाहरण – H+ , Cl+ , Na+ , K+ , Mg2+ , Ca2+ , Sr2+ , Sc3+ , La3+ , Bf3 आदि
सीमान्त अम्ल के examples : Fe2+ , Co2+ , Ni2+ , Cu2+ , Zn2+ , No+ आदि।
मृदु अम्ल example : क्यूप्रस (Cu+) , Ag+ , Hg2+ , Pd2+ , Au+ , BH3 , Pt2+ , I , Br2 आदि।
कठोर क्षार : इनके निम्न गुण है –
(a) छोटा आकार
(b) अधिक विद्युत ऋणता
(c) अधिक ध्रुवीयता
(d) d-electron की संख्या कम
मृदु क्षार : इनके निम्न गुण है –
(a) बड़ा आकार
(b) कम  विद्युत ऋणता
(c) d-electron की संख्या अधिक
(d) अत्यधिक ध्रुवीयता
(e) ध्रुवणीय अर्दाश का एकत्रिक होना।
कठोर क्षार के उदाहरण : R-NH2 , NH3 , NH2-NH2 , R-OH , R-O , R-O-R , H2O , OH , O2- , f , Cl , CH3COO आदि।
मृदु क्षार examples : H , C6H6 , CN , CO , SCN , R-S-R , I आदि।