Monthly Archives: July 2019

उपसहसंयोजक यौगिको में आबन्धन , VBT – valence bond theory (संयोजकता बंध सिद्धांत) , VBT – valence bond theory (संयोजकता बंध सिद्धांत)

उपसहसंयोजक यौगिको में आबन्धन : उपसहसंयोजक यौगिको में केन्द्रीय धातु आयन व लिगेंड के मध्य आबंधन को समझाने के लिए निम्न सिद्धांत दिए गए। 1. VBT – valence bond theory (संयोजकता बंध सिद्धांत) 2. CFT – crystal field theory (क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धांत) 3. LFT – legend field theory 4. MOT – molecular orbital theory 1. VBT – valence bond… Continue reading »

समावयता : उपसहसयोजक यौगिको में समावयता (isomerism in coordination compounds) , प्रकार

उपसहसयोजक यौगिको में समावयता (isomerism in coordination compounds) : समावयता : दो या दो से अधिक ऐसे यौगिक जिनके अणुसूत्र समान हो लेकिन संरचना सूत्र या त्रिविमीय विन्यास में भिन्नता के कारण उनके गुण भिन्न भिन्न हो तो वे यौगिक एक दुसरे के समावयवी कहलाते है तथा उनका यह गुण समावयता कहलाता है। समावयाता के… Continue reading »

उपसहसंयोजक यौगिको का IUPAC नामकरण एवं सूत्रीकरण , होमोलेप्टिक संकुल , हैटरोलेप्टिक संकुल

(coordination complex compound naming) उपसहसंयोजक यौगिको का IUPAC नामकरण एवं सूत्रीकरण : [A] यौगिक के सूत्र से नाम लिखना : सूत्र से नाम लिखने के नियम निम्न है – (i) साधारण लवणों की भाँती संकुल लवणो का नाम लिखते समय पहले धनायन तथा फिर ऋणायन का नाम लिखते है , चाहे आयन संकुल हो या सरल… Continue reading »

लिगेंड का वर्गीकरण (types of legends in hindi) , एकदन्तुक , द्विदन्तुक , त्रिदन्तुक लिगेंड , उभय दन्तुक

लिगेंड का वर्गीकरण (types of legends in hindi) : लिगैंड का वर्गीकरण निम्न आधार पर कर सकते है – 1. दाता परमाणुओं की संख्या के आधार पर लिगेंड के प्रकार – दाता परमाणु : लिगेंड में उपस्थित वह परमाणु जो केन्द्रीय धातु आयन के साथ उपसहसंयोजक बंध बनाता हो दाता परमाणु कहलाता है। इन दाता… Continue reading »

उपसहसंयोजक यौगिक (coordination compounds in hindi) , योगात्मक यौगिक (addition compounds)

(coordination compounds in hindi) उपसहसंयोजक यौगिक : योगात्मक यौगिक (addition compounds) : जब दो या दो से अधिक सरल स्थायी यौगिको को आण्विक अनुपात में मिश्रित करके वाष्पित किया जाता है तो इसके फलस्वरूप नए स्टाइकियो-मिट्रिक पदार्थो के क्रिस्टल प्राप्त होते है , इन्हें ही योगात्मक यौगिक कहते है। उदाहरण : K2SO4 + Al(SO4)3 + 24H2O → K2SO4.Al(SO4)2.24H2O… Continue reading »

वृद्धि नियामक पदार्थ , growth Regulating substances in hindi , वृद्धि प्रवर्धक हार्मोन , Auxin (औक्सिन) की खोज

वृद्धि नियामक पदार्थ : इन्हे growth Regulating substances के नाम से जाना जाता है। पादपो में पाए जाने वाले कार्बनिक पदार्थ जिनकी अल्प मात्रा प्रभावी रूप से पादपों की वृद्धि को नियंत्रित करती है , वृद्धि नियामक पदार्थ कहलाते है। पादपो में पाए जाने वाले वृद्धि हार्मोनो का सुजाव सन 1882 में Sachs नामक वैज्ञानिक… Continue reading »

पादप वृद्धि , पादप वृद्धि स्थल  , शीर्ष विभज्योतकीय उत्तक , अन्तर्वेशी , पाशर्व विभज्योतकीय उत्तक

(plant growth in hindi) पादप वृद्धि : प्रश्न 1 : वृद्धि किसे कहते है ? उत्तर : सजीवो के आकार तथा आयतन में होने वाली स्थायी तथा अपरिवर्तनशील परिवर्तन , वृद्धि कहलाती है तथा वृद्धि के फलस्वरूप सजीव के शुष्क भार में बढ़ोतरी होती है। नोट : सामान्यत: पादपो में पाए जाने वाली वृद्धि निरन्तर… Continue reading »

जीवाणु संक्रमण तथा गुलिका निर्माण की क्रियाविधि , Leghemoglobin , Nodulin protein , नाइट्रोजन स्थिरीकरण की क्रियाविधि

जीवाणु संक्रमण तथा गुलिका निर्माण की क्रियाविधि : राइजोबीयम नामक जीवाणु मृदा में पाया जाने वाला एक ग्राम ऋणात्मक जीवाणु है तथा यह जीवाणु डंडाकार या बेसिलस प्रकार का होता है।  राइजोबियम जीवाणु दलहनी पादपो की मूल रोम के पास एकत्रित होकर ग्रंथि या गुलिका का निर्माण प्रारंभ करता है। उपरोक्त जीवाणु द्वारा निर्मित की जाने… Continue reading »

नाइट्रोजन उपापचय तथा नाइट्रोजन चक्र , नाइट्रोजन का स्थिरीकरण , अजैविक , जैविक नाइट्रोजन का स्थिरीकरण

नाइट्रोजन उपापचय तथा नाइट्रोजन चक्र (nitrogen cycle in hindi) : वायुमण्डल में सर्वाधिक मात्रा में पायी जाने वाली गैस नाइट्रोजन है। वायुमंडल में नाइट्रोजन लगभग 78% पाई जाती है। कोशिका में पाए जाने वाले जीवद्रव्य में उपस्थित प्रोटीन का प्रमुख घटक नाइट्रोजन है।  इसके अलावा यह पादपों में कार्बनिक यौगिको के रूप में पाया जाता… Continue reading »

श्वसन को प्रभावित करने वाले कारक , factors that affect respiration , श्वसन की दर (respiration rate in hindi)

प्रश्न : पादपो में संपन्न होने वाली श्वसन की क्रिया का महत्व बताइये। उत्तर : श्वसन की क्रिया का महत्व निम्न प्रकार से है – 1. श्वसन की क्रिया के अन्तर्गत विमुक्त होने वाली ऊर्जा पादपों के द्वारा विभिन्न उपापचयीक क्रियाओ के लिए उपयोग की जाती है। 2. श्वसन की क्रिया के अंतर्गत पादपो में विभिन्न… Continue reading »