Monthly Archives: June 2019

मानव नेत्र की संरचना , structure of human eye in hindi , नेत्र गोलक , स्वच्छ मंडल या कॉर्निया 

structure of human eye in hindi , मानव नेत्र की संरचना नेत्र गोलक , स्वच्छ मंडल या कॉर्निया से सम्बन्धित प्रश्न उत्तर , मानव नेत्र का नामांकित चित्र नोट्स इन हिंदी , कार्य , कार्यविधि समझाइये ? नेत्र संरचना : नेत्र एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण तथा सुग्राही ज्ञानेन्द्री है जो की हमें देखने के योग्य… Continue reading »

दृष्टि दोष तथा उनका संशोधन , नेत्र का दूर– बिन्दु  , निकट दृष्टि दोष या निकटदृष्टिता , दीर्घ–दृष्टि दोष या दूर–दृष्टिता 

सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी या नेत्र का निकट बिन्दु किसी वस्तु की आँखो से न्यूनतम दूरी जिस पर वह वस्तु बिना तनाव के अत्यधिक स्पष्ट देखी जा सकती है नेत्र का निकट बिन्दु कहलाता हैं। किसी समान्य दृष्टि के मनुष्य के लिए निकट बिन्दु की आँख से दूरी लगभग 25 cm होती है। नेत्र… Continue reading »

प्रिज्म से प्रकाश का अपवर्तन , light refraction prism in hindi , द्विफोकसी लेंस , मोतियाबिन्द , प्रिज्म

द्विफोकसी लेंस द्विफोकसी लेंस दो अलग अलग प्रकार के लेंस से बना होता है। द्विफोकसी लेंस अवतल लेंस तथा उत्तल लेंस से मिलकर बनाया जाता है। द्विफोकसी लेंस के उपरी भाग में अवतल लेंस को तथा उत्तल लेंस को निचले भाग में लगाया जाता है जिससे व्यक्ति आँखों को उपर करके दूर की वस्तुओं को… Continue reading »

तारों की मिथ्या या अवास्तविक स्थिति , तारों के टिमटिमाने का कारण , ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते हैं ,

तारों की मिथ्या या अवास्तविक स्थिति तारे जब क्षितिज पर होते हैं तो वे उनकी वास्तिविक स्थिति से थोड़ा उपर अर्थात मिथ्या स्थिति में दिखाई देते हैं। अपवर्तनांक वायुमंडल के घनत्व पर निर्भर करता है। वायुमंडल का घनत्व हर जगह सामान नहीं होता है बल्कि यह उँचाई के साथ बदलता रहता है।घनत्व बदलने के कारण… Continue reading »

स्वच्छ आकाश का रंग नीला क्यों होता है? , सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सूर्य का रंग नारंगी–लाल (रक्ताभ) क्यों प्रतीत होता है? 

स्वच्छ आकाश का रंग नीला क्यों होता है? वायुमंडल में उपस्थित कण का आकार छोटा होता है। ये कण अधिक तरंगदैर्घ्य वाले प्रकाश की तुलना में कम तरंगदैर्घ्य वाले प्रकाश का प्रकीर्णन अधिक प्रभावी तरीके से करते हैं।लाल रंग के प्रकाश की तरंगदैर्ध्य नीले रंग के प्रकाश की तुलना में लगभग 1.8 गुणा होती है।अत: जब सूर्य का… Continue reading »

विधुत आवेश , धन आवेशित तथा ऋण आवेशित वस्तुएँ  , आवेश का मात्रक (SI unit of charge) electric charge in hindi

पहले मनुष्य की तीन आवश्यकता होती थी रोटी , कपड़ा , मकान और आजकल विधुत भी इनमे से एक है। आज विधुत मनुष्य की एक बहुत ही महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है। बिना इलेक्ट्रिसिटी के मनुष्य का कोई भी उपकरण कम नहीं कर सकता हैं। विद्युत (Electricity) एक प्रकार की उर्जा (energy) है जिसका उपयोग… Continue reading »

विधुत विभव तथा विभवांतर , विधुत धारा के प्रवाह की दिशा , electric potential and potential difference class 10

विधुत धारा विधुत आवेश किसी सुचालक में प्रवाह करते है अर्थात् एक स्थान से दुसरे स्थान पर किसी समय में पहुचते है विधुत धारा कहलाती है। यदि देखा जाये तो विधुत धारा इलेक्ट्रॉन का प्रवाह है। दूसरे शब्दों में सुचालक के द्वारा इलेक्ट्रॉन का प्रवाह विधुत धारा कहलाती है। विधुत धारा के प्रवाह की दिशा… Continue reading »

रेशे उत्पादित करने वाले पादप , उत्पत्ति के आधार पर रेशों के प्रकार , उपयोग के आधार पर रेशो के प्रकार 

रेशे उत्पादित करने वाले पादप : प्राचीन समय से मनुष्य के द्वारा जन्तुओ से प्राप्त रेशे के अंतीरिक्त पादप से प्राप्त रेशो का उपयोग किया जा रहा है क्योंकि जन्तु रेशो का जा रहा है क्योंकि जन्तु रेशों का उपयोग सिमित है तथा मनुष्य की भोजन के पश्चात् दूसरी आवश्यकता वस्त्र है जिनका निर्माण मुख्यतः… Continue reading »

अरण्ड / एरण्ड क्या है , उत्पत्ति तथा उत्पादक देश , अरण्ड पादप की बाह्य आकारिकी , एरण्डी तेल का संघटन

(spurge in hindi) अरण्ड / एरण्डी : वानस्पतिक नाम : riccinus communis कुल : Euphor biaceace उपयोगी भाग : बीज तथा भ्रूण पोष उत्पत्ति तथा उत्पादक देश :  प्राचीन स्रोतों के अनुसार अरण्ड की उत्पत्ति भारत तथा उत्तरी अफ्रीका में हुई है। इस पादप को उष्णकटिबंधीय जलवायु वाले क्षत्रो में उगाया जाता है।  इसे मुख्यतः… Continue reading »