Category Archives: 10th science

जाति उद्भवन क्या है , जाति उद्भव , जाति उद्भव का कारण , उपार्जित लक्षण , आनुवंशिक लक्षण 

उपार्जित लक्षण वह लक्षण जो की जीव अपने पुरे जीवनकाल में प्राप्त करते है उपार्जित लक्षण कहलाते है। उदाहरण = भृंगों के शरीर के भार में कमी। उपार्जित लक्षण के गुण =  1. उपार्जित लक्षण जीव अपने पुरे जीवनकाल में प्राप्त करते है। 2. उपार्जित लक्षण जनन कोशिकाओं के डी-एन-ए- के संगठन पर कोई प्रभाव… Continue reading »

जीवाश्म , Fossil in hindi , विकास , समजात अंग , समरूप अंग , जीवाश्म की आयु का आंकलन 

विकास की प्रारंभिक स्थिति तक पहुँचने के लिए स्पीशीज के ऐसे समूह का निर्माण करते हैं जिनके पूर्वज निकट अतीत में समान थे इसके बाद इन समूह का एक बड़ा समूह बनाते है जिनके पूर्वज अपेक्षाकृत अधिक दूर के होंते है। इस प्रकार से अतीत की कडि़यों जोड़ते हुए हम विकास की प्रारंभिक स्थिति तक… Continue reading »

मानव में लिंग निर्धारण , वंशागति का नियम , आनुवंशिकता कार्य विधि , लिंग गुणसूत्र , मानव में लिंग निर्धारण प्रक्रिया 

F2 पीढ़ी में फिनोटाइप = गोल ,पीले बीज : गोल,हरे बीज : झुर्रीदार ,पीले बीज : झुर्रीदार ,हरे बीज 9      :         3          :             3              :      1 वंशागति का नियम  1.एकल संकरण वंशागति का… Continue reading »

प्रतीक : विद्युत परिपथ आरेख में प्रयुक्त विभिन्न प्रतीक , device symbols used in electric circuit in hindi

विधुत परिपथ  विधुत परिपथ जो की अलग अलग विधुत अवयव तथा संयोजी तारों से मिलकर बनता है। आरेख जो की विधुत धारा के पूर्ण प्रवाह को को दर्शाता है को विधुत परिपथ या विधुत परिपथ आरेख कहते हैं। विधुत परिपथ जो की अलग अलग अवयव जैसे की एक सेल अथवा एक बैटरी, एक प्लग कुंजी… Continue reading »

ओम का नियम , ohm’s law in hindi , ओम के नियम का विभिन्न व्यंजक , ओम के नियम की व्याख्या

(ohm’s law in hindi) ओम का नियम  1827 में जार्ज साईमन ओम जो कि एक भौतिक विज्ञानी तथा गणितज्ञ थे, ने किसी तार में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा (I) तथा उसके सिरों के बीच विभवांतर (V) के बीच परस्पर संबंध का पता लगाया। इस संबंध को ही ओम का नियम कहते है। ओम के… Continue reading »

प्रतिरोधक, सुचालक तथा अवरोधक , प्रतिरोध या प्रतिरोधकता का कारण , कुचालक तथा अवरोधक 

एक समान मोटाई वाले किसी भी चालक का प्रतिरोध उसकी लम्बाई (l) के समानुपाती होता है तथा उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती होता है। R∝l ——(1) तथा R∝1/A ——(2) समीकरण (1) तथा (2) से R∝l/A R = ρl/A —-(3) जहाँ ρ एक स्थिरांक है जिसे चालक के पदार्थ की विधुत प्रतिरोधकता कहते… Continue reading »

श्रेणीक्रम में संयोजित प्रतिरोधकों , पार्श्वक्रम में संयोजन , प्रतिरोध का पार्श्व क्रम में संयोजन , combination of resistance in hindi 

जब किसी विधुत परिपथ में विद्युत उपकरणों या अवयवों को श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है तो 1. विधुत परिपथ के सभी अवयवों में विधुत धारा का प्रवाह समान रहता है। 2. . विधुत परिपथ के सभी अवयवों में वोल्टेज विभक्त हो जाता है। उदाहरण: शादी या त्योहारों के अवसर पर सजावट के लिये लगाये गये… Continue reading »

प्रतिरोध श्रेणी तथा पार्श्वक्रम में संयोजन , series and parallel combination of resistance in hindi

मान लिया कि प्रतिरोधक R1, R2 तथा R3 को पार्श्वक्रम में संयोजित किया जाता है। मान लिया कि परिपथ का कुल तुल्य प्रतिरोध =R है। प्रतिरोधकों के पार्श्वक्रम में संयोजन के नियमानुसार 1/R = 1/R1+1/R2+1/R3 प्रतिरोधकों के पार्श्वक्रम में संयोजन माना कि विधुत परिपथ का कुल विभवांतर =V विधुत परिपथ के दोनों सिरों के बीच… Continue reading »

जूल का तापन नियम , joule’s law of heating class 10 in hindi , विद्युत बल्ब , विद्युत इस्तरी , विद्युत हीटर 

किसी भी विधुत उर्जा का उपयोग किसी उपकरण में सीधे तौर पर नहीं किया जा सकता है, बल्कि विधुत उर्जा को यांत्रिकी उर्जा या प्रकाश उर्जा या उष्मा उर्जा में परिवर्तित किया जाता है उसके बाद ही विधुत उर्जा का उपयोग किया जाता है। विधुत उर्जा का उष्मा उर्जा में परिवर्तन ही विधुत का तापीय… Continue reading »

शक्ति , शक्ति की SI मात्रक , विद्युत शक्ति , विद्युत शक्ति के ब्यंजक का विभिन्न प्रकार , Electric power in hindi

शक्ति कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं। उसी प्रकार उर्जा के उपयोग में होने की दर को भी शक्ति कहते हैं। शक्ति = किया गया कार्य / समय माना कि t समय में होने वाला कार्य W है। अत: P= W/t शक्ति की SI मात्रक  शक्ति का SI मात्रक वाट है। वाट को… Continue reading »