नेत्र गोलक किसे कहते हैं ? नेत्र गोलक की भित्ति क्या होती है ? what is eyeball in hindi definition

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what is eyeball in hindi definition नेत्र गोलक किसे कहते हैं ? नेत्र गोलक की भित्ति क्या होती है ?

आँख :

नेत्र गोलक की संरचना :

नेत्र गोलक की भित्ति : इसमें तीन संकेन्द्री आवरण अथवा ट्यूनिक , एक तंतुमय ट्यूनिक | एक संवहनीय ट्यूनिक और तंत्रिका संवेदी ट्यूनिक , बाहर से अन्दर की तरफ उपस्थित होते हैं | प्रथम दो उत्पत्ति में मीजोडर्मल और तृतीय एक एक्टोडर्मल होती है |

  • तंतुमय ट्यूनिक (तंतुमय आवरण) : यह नेत्र गोलक के चारों तरफ बाह्यतम , मोटी , कठोर , असंवहनीय आवरण है | नेत्र गोलक के उभरे हुए भाग पर यह पारदर्शी होती है ओर कोर्निया (= tunica cornea) बनाती है | नेत्र गोलक के शेष भाग पर यह धुंधली (opaque) होती है और sclerotic coat अथवा tunica sclera कहलाती है | कॉर्निया और स्कलेरा के मध्य जुड़ाव की रेखा sclerocorneal junction (= limbus) कहलाता है | नेत्र गोलक के इसके कक्ष के अन्दर गति और घूर्णन कराने वाली पेशी स्कलेरा से जुडी रहती है |

स्कलेरा में सभी दिशाओं में समान ताकत देने के लिए अंतरसम्बन्धित कोलेजन तन्तु व्यवस्थित होते हैं | यह प्रायोगिक रूप से अकोशिकीय और असंवहनीय और ‘the white of the eye’ भी कहलाता है | बाह्य कार्निया सतह पतली और पारदर्शी corneal epithelium कहलाती है |

  • संवहनीय आवरण (= uvea) : यह नेत्र गोलक की मध्य , पतली परत होती है और तीन भागों में कोरोइड , सिलियरी काय , आइरिस में विभेदित होता है | रक्तक पटल नेत्रगोलक के मुख्य भाग में दृढ़ पटल की भित्ति से चिपकी रहती है | यह अत्यधिक शाखित वर्णक कोशिकाओं , रक्त केशिकाओं के सघन जालि और कुछ तन्तु युक्त उच्च संवहनीय मृदु संयोजी ऊतक से बनी होती है | रक्तक पटल sclero-corneal संधि से थोड़ा पहले ही समाप्त हो जाता है |

नेत्र गोलक के अन्दर की तरफ कोर्निया की तरफ इसके चक्रीय किनारे पर रक्तक पटल मोटी सिलियरी काय के रूप में नियमित रहता है | सिलियरी काय रक्तक पटल की तरफ संवहनीय और वर्णक युक्त होती है परन्तु इसमें इसकी मोटाई के लिए अत्यधिक चक्रीय अरीय और तिर्यक सिलियरी पेशी तन्तु ही होते हैं | नेत्र गोलक की गुहा की तरफ इसके मुक्त बॉर्डर अस्थि वलयन द्वारा उभार बनाते है जो सिलियरी प्रवर्ध कहलाता है |

संवहनीय ट्यूनिक अन्दर की तरफ मुड़ कर डायफ्राम जैसा चक्रीय कंटक बनाती है जिसे iris (उपतारा) कहते है | आइरिस का बड़ा केन्द्रीय छिद्र pupil (तारा) कहलाता है | ऊतकीय रूप से आइरिस दो परतों का बना होता है , बाह्य मोटी संवहनीय ट्यूनिक और अंत: सरल घनाकार एपिथिलियम जो रेटिना से नियमित होती है | आइरिस की दोनों परत भूरी और काली आँखों वाले व्यक्ति में अत्यधिक वर्णक युक्त और नीली आँख वाले व्यक्ति में कम वर्णक युक्त होती है | वर्णक के अलावा आइरिस में चिकनी पेशी तन्तुओं के दो समूह होते है जो आइरिस तक विस्तारित होने वाली body sphincter muscles में एक्टोडर्मल उत्पत्ति वाली केवल पेशी है जो pupil को संकुचित करती है और dilator muscles जो आइरिस को संकुचित और pupil को फैलाती है |

  1. तंत्रिका संवेदी ट्यूनिक और रेटिना : यह गोलक की अंतरतम , सबसे पतली और सबसे मृदु ट्यूनिक है | यह तीन भागों में विभाजित होती है | सबसे बड़ा भाग आप्टिक (pars optical) रक्तक पटल से चिपका रहता है | सिलियरी भाग (pars ciliaris) सिलियरी प्रवर्ध तक विस्तारित रहता है और आइरिस भाग (pars iridica) आइरिस के अन्दर की तरफ विस्तारित रहता है और pupil के किनारे पर समाप्त होता है | एक विशिष्ट संरचना जो रेटिना के संवेदी भाग को neurosensory भाग से पृथक करती है , ora serrata कहलाती है |

रेटिना की दो मुख्य परतें होती है : बाह्यतम घनाकार सरल एपिथिलियम अत्यधिक वर्णक युक्त (मिलेनिन युक्त) कोशिका और अन्दर की परत | बाद में रेटिना के आइरिस और सिलियरी भाग में सरल घनाकार एपिथिलियम भी होती है परन्तु आप्टिक क्षेत्र में यह मोटी और अत्यधिक जटिल , प्रकाश संवेदी तत्व , तंत्रिका कोशिका और तंतुओं युक्त होती है | इसमें तीन संकेन्द्री परत बाह्यतम और परिधीय शंकु और श्लाका की परत , मध्य परत द्विध्रुवीय तंत्रिका कोशिका और अंत: मोटे गुच्छिका तंत्रिका कोशिकाओं की परत होती है | शंकु और श्लाका परत में अत्यधिक विशिष्टीकृत तंत्रिका संवेदी कोशिका होती है जो वास्तव में प्रकाश संवेदी होती है श्लाका और शंकु आकार वाली कोशिकाओं में क्रमशः rhodopsin और idopsin वर्णक होता है और वर्णक एपिथिलियम पर लम्बवत स्थित होता है | वर्णक एपिथिलियम शंकु और शलाका के लिए सहारा और पोषण प्रदान करती है और अवांछित वर्णक और अन्य कणों को फेगोसाइटोसिस द्वारा नष्ट करके neuro sensitive परत को साफ़ करती है |

श्लाका लम्बी , कठोर और बेलनाकार होती है | शंकु छोटे , मोटे और कभी कभी मुग्दराकार होते हैं | शलाकाओं की संख्या शंकु की तुलना में अधिक होती है | ये प्रकाश की तीव्रता और डिम प्रकाश स्थिति में अँधेरे की तीव्रता में परिवर्तनों को ग्रहण करते हैं | शंकु तेज प्रकाश में विभिन्न रंगों को पहचनाते हैं |

Area centralis of retina : प्रकाशीय अक्ष के ऊपर पाया जाने वाला छोटा भाग area centralis कहलाता है | यहाँ रेटिना बहुत पतला होता है और केवल पीले वर्णक से भरी हुयी शंकु कोशिकाएं होती है अत: इसे पीत बिंदु (yello spot) अथवा macula lutea कहते है | खरगोश और अन्य स्तनी में इस क्षेत्र में छोटी खांच पायी जाती है | जिसे fovea centralis कहते है | यह आँख का बहुत संवेदी भाग है अत: मुख्य acute vision का क्षेत्र है | आप्टिक तंत्रिका बाहर की तरफ घुमती है , नेत्र गोलक की भित्ति की पूरी मोटाई को भेदती है और optic foramen बनाती है और मस्तिष्क की तरफ गति करती है | सामान्यतया optic foramen क्षेत्र में संवेदी कोशिकाएं नहीं होती है अत: यह प्रकाश पहचान में भाग नहीं लेता है और ‘blind spot’ अंध बिंदु कहलाता है |

Ocular refractive media of an eyeball : तीन संरचनाएं aqueous humor , vitreous body और लेंस पारदर्शी संरचनाएं है जो नेत्र गोलक में प्रवेश करने वाले प्रकाश की किरणों को प्रत्यावर्तित करती है | लैंस की प्रत्यावर्तन क्षमता दूर अथवा पास के दृश्य के लिए समायोजित होती है |

लैंस बड़ा और मानव में यह लचीला , रंगहीन , पारदर्शी और क्रिस्टल युक्त तंतुमय संरचना और द्विउत्तलाकार चकती जैसा होता है | यह प्रत्यास्थ संयोजी ऊतक के संपुट समान पारदर्शी झिल्ली द्वारा घिरा रहता है | suspensory ligament लैंस को इसके स्थान पर बनाये रखता है |

Aqueous कक्ष एक स्वच्छ जलीय द्रव्य से भरा होता है , यह aqueous humor कहलाता है | इस लैंस की उत्तलता के कारण यह आइरिस द्वारा आंशिक रूप से दो भाग अग्र बड़ा और पश्च छोटा कक्ष में विभेदित होता है जो pupil द्वारा एक दुसरे से जुड़े रहते हैं | aqueous humor , ग्लूकोज , अमीनों अम्ल , श्वसन गैसें , उपापचयी अपशिष्ट और एस्कार्बिक अम्ल युक्त ऊतक द्रव्य होता है |

Vitreous कक्ष श्यान जैली जैसे म्यूकोइड ऊतक vitreous humor से भरा रहता है | Vitrous humar में 99% पानी , कुछ लवण , म्यूकोप्रोटीन और हायलुरोनिक अम्ल होता है | यह लैंस और रेटिना के मध्य का भाग है |

आँख से सम्बन्धित सहायक संरचनाएं

Eyelids (= palpebrae) और conjunctiva – नेत्र कक्ष के पृष्ठीय और आधारीय किनारे पर त्वचा मुड़कर पतले ऊपरी और निचले पेशीय eyelids बनाते है | वलयित त्वचा eyelids की अन्दर की सतह पर कोमल म्यूकस झिल्ली बन जाती है और केवल इस झिल्ली की एपिडडर्मिस कार्निया के ऊपर विस्तारित रहती है | यह एपिडर्मिस पारदर्शी होती है और कार्निया के साथ संयुक्त हो जाती है | यह conjunctiva कहलाती है |
Nictitating membrane मानव में अवशेषी और अन्य जीवों में हासित अथवा कार्यात्मक होती है | यह आँख के अंत: कोण पर छोटा वलन है | eyelids का प्राथमिक कार्य आँख की रक्षा करना है | प्रत्येक eyelid के मुक्त किनारे पर stiff रोम , की दो पंक्ति होती है | ये eyelashes कहलाते है | ये नेत्र गोलक को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करते है |

जाइस की ग्रंथि रूपांतरित सिबेसियस ग्रंथि है जो eye lashes से सम्बन्धित होती है ये eye lashes की पुटिका में खुलती है | Meibomian और tarsal glands भी सिबेसियस ग्रंथि (तेल ग्रंथि) का रुपान्तरण होती है जो eyelids के किनारे पर उपस्थित होती है , ये तेलीय स्त्रावण करते है जो कार्नियल सतह के लिए चिकनाहट का कार्य करती है और कार्निया के ऊपर आंसू की पतली परत बनाये रखती है | eyelids में glands of moll स्वेद ग्रंथि का रुपान्तरण होती है |

The lachrymal apparatus – प्रत्येक आँख के lachrymal apparatus में lacrymal gland और इसकी अनेक नलिका , superior and inferior canaliculi , लेक्राइमल कोष्ठ और एक nasolacrimal duct होती है | लेक्राइमल ग्रंथि नेत्रगोलक की पाशर्व उधर्व सतह पर नेत्रकोटर में स्थित होती है | लेक्राइमल ग्रंथि अश्रु स्त्रावित करती है जिसका संघटक जल , लवण और जिवाणवीय प्रोटीन Lysozyme होता है | आंसू उधर्ववर्ती और अधोवर्ती canaliculi में , लेक्राइमल कोष्ठ और नासिका लेक्राइमल नलिका द्वारा नासिका गुहा में प्रवाहित होते हैं | आंसू का कार्य आँख में उपस्थित मिट्टी , धूल और सूक्ष्मजीवों को धोकर दूर करना होता है | conjunctiva में उपस्थित ग्रंथि कोशिकाएं म्यूकस पदार्थ स्त्रावित करती है , यह भी आंसू का संघटक है |

वसीय ऊतक (वसा) : कक्ष में नेत्र गोलक के चारों तरफ वसीय ऊतक की एक परत होती है | यह मृदु और आघात अवशोषक की तरह कार्य करती है |

The extraocular muscles – प्रत्येक नेत्र गोलक के भू मध्य क्षेत्र के sclerotic आवरण के ऊपर टेंडन से छ: चपटी पेशियाँ जुडी होती है | ये वस्तु को विभिन्न दूरी और विभिन्न कोनो से देखने के लिए विभिन्न दिशाओं में नेत्र गोलक को घूर्णन कराती है | ये चार रेक्टस (superior , inferior , medial और lateral) और दो तिर्यक (superior और inferior) पेशियाँ होती है | superior rectus नेत्र गोलक के ऊपर मध्य पृष्ठीय और inferior rectus मध्य अधरीय अंतर्निविष्ट होती है | medial और lateral recti सापेक्ष नेत्र गोलक के अन्दर ऊपर (medial) और बाह्य (lateral) तरफ अंतर्निविष्ट होती है | तिर्यक पेशी इसके भूमध्यीय क्षेत्र के पीछे नेत्र गोलक के ऊपर अंतर्निविष्ट होती है | superior oblique का अंतर्निवेशन superior और lateral recti के मध्य और inferior oblique का अंतर्निवेशन inferior और lateral recti के मध्य होता है |