RAM और ROM में क्या अंतर है , full form , difference between ram and rom in hindi  रेम तथा रोम

RAM और ROM में क्या अंतर है (difference between ram and rom in hindi ) : जब हम कंप्यूटर या आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस मशीन का अध्ययन करते है तो अक्सर हम इन RAM और ROM का नाम सुनते है।

RAM क्या है ?

RAM की full form है random access memory (रैंडम एक्सेस मेमोरी ) , इसका उपयोग डाटा स्टोर करने के लिए किया जाता है।  इसमें सुरक्षित डाटा को मशीन द्वारा कभी भी रैंडमली (स्वेच्छा से आवश्यकता पड़ने पर ) काम में लिया जा सकता है।

इसमें डाटा किसी भी आर्डर में व्यवस्थित हो सकते है जिससे मशीने द्वारा डाटा को आसानी से एक्सेस किया जा सके।

RAM का उपयोग मशीन या कंप्यूटर को डाटा उपयोग में लाने की सीधी अनुमति देता है जिससे कंप्यूटर में उपस्थित प्रोग्राम या apps आसानी से तथा शीघ्रता से कार्य करती है यही कारण है की किसी मोबाइल या कंप्यूटर में जितनी ज़्यादा रैम होती है वह उतना ही तेज कार्य करता है।

RAM में हम पढ़ना और लिखना (reading and writing ) ऑपरेशन कर सकते है।

रैम एक वोलेटाइल मेमोरी की तरह कार्य करता अर्थात जब कंप्यूटर को बंद किया जाता है तो RAM का डाटा ख़त्म हो जाता है अर्थात इसमें कुछ भी सेव नहीं होता।

RAM दो प्रकार की होती है

static RAM (स्थिर रैम )

Dynamic RAM (गतिशील रैम)

RAM का उपयोग ऑपरेटिंग सिस्टम , प्रोसेस और प्रोग्राम के लिए किया जाता है।

ROM क्या है ?

ROM की full form है read only memory (रीड ओनली मेमोरी) , रोम का उपयोग भी data को store करने में किया जाता है।  इसमें जो डाटा स्टोर रहता है वह मशीन या कंप्यूटर द्वारा सिर्फ पढ़ा जा सकता है लेकिन change नहीं किया जा सकता इसलिए इसे read only memory कहते है।

ROM में सिर्फ पढ़ना (reading) operation ही हो सकता है।

ROM में प्राय: instruction (संकेत) वाला डाटा स्टोर होता है जैसे जब किसी कंप्यूटर को शुरू किया जाता है तो उसमे booting शुरू हो जाती है इससे सम्बन्धित जानकारी या instructions कंप्यूटर की ROM में सुरक्षित रहती है और ये कंपनी द्वारा ROM में पहले ही store कर दी जाती है जिसको बाद में बदला नहीं जा सकता केवल कंप्यूटर द्वारा पढ़ा जा सकता है।

रोम नॉन वोलेटाइल मेमोरी होती है अर्थात जब कम्प्यूटर सिस्टम को बंद किया जाता है तो भी डाटा इसमें सेव रहता है अर्थात बंद करने पर डाटा डिलीट नहीं होता।

रोम का उपयोग बूटिंग के लिए किया जाता है क्यूंकि इसमें बूटिंग संबंधी प्रोग्राम save रहता है।

ये निम्न प्रकार के हो सकते है PROM, EPROM and EEPROM ।

RAM और ROM में अन्तर क्या है

रेम तथा रोम में निम्न अंतर है

 RAM  ROM
 पूरा नाम रैंडम एक्सेस मेमोरी  पूरा नाम रीड ओनली मेमोरी
 ऑपरेशन – पढ़ना और लिखना  ऑपरेशन – सिर्फ पढ़ना
 डाटा बदला जा सकता है। डाटा बदला नहीं जा सकता
 प्रोग्राम , ऑपरेटिंग सिस्टम को run करने में इसका डाटा काम में लिया जाता है।  सिस्टम को शुरू करने अर्थात बूटिंग में इसमें save डाटा का उपयोग किया जाता है।
 सिस्टम बंद करने पर डाटा डिलीट हो जाता है।  सिस्टम को बंद करने पर भी डाटा save रहता है।
 इसकी size कम होती है।  साइज बहुत अधिक तक हो सकती है।
 प्रकार – static , dynamic  प्रकार – PROM, EPROM and EEPROM

disadvantages of computer in hindi कंप्यूटर के दुरुपयोग या नुकसान क्या है

कंप्यूटर के दुरुपयोग या नुकसान disadvantages of computer in hindi – किसी चीज के जितने फायदे होते हैं उतने ही नुकसान भी होते हैं आज हम चर्चा करने जा रहे हैं कि कंप्यूटर के क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं यह कंप्यूटर के अधिक इस्तेमाल से हमारी दैनिक जीवन में क्या क्या फर्क पढ़ सकता है ,  अर्थार्थ किन-किन क्षेत्रों से कंप्यूटर का अत्यधिक इस्तेमाल प्रभावित होता है |

समय की व्यर्थता (Time wasted): हालांकि कंप्यूटर एक ऐसा माध्यम है जिसकी सहायता से उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है लेकिन दूसरी तरफ कंप्यूटर का इस्तेमाल से समय भी काफी अर्थ होता है ,  अर्थार्थ कई बार आपको पढ़ाई से संबंधित कुछ पढ़ना होता है लेकिन किसी अन्य नोटिफिकेशन से आप किसी दूसरी पोस्ट को पढ़ने लग जाते हैं उसके बाद तीसरी और इसी प्रकार आप अंत में यह महसूस करते हैं कि आपको जो पढ़ना था वह आपने नहीं पढ़ा अर्थात आपने इतनी देर अपना समय व्यर्थ किया है , इसी प्रकार लोग बिना किसी काम के प्रतिदिन चार-पांच घंटे सोशियल वेबसाइट पर व्यर्थ करते हैं |

पर्यावरण  का नुकसान (Environmental damage): कंप्यूटर के अधिक उपयोग से हम सभी इस की तकनीकी तथा इससे संबंधित अन्य उपकरणों पर निर्भर रहने लगे हैं जो पर्यावरण के लिए घातक हो सकते हैं अर्थार्थ वह अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकते हैं लेकिन हम अपने जीवन को सुखद बनाने के लिए इन सभी तकनीकी का उपयोग करते हैं |

बेरोजगारी को बढ़ावा (Promote unemployment) : हम सभी जानते हैं कि कंप्यूटर काफी शीघ्रता से कार्य करने में सक्षम है और कई लोगों को कार्य एक कंप्यूटर आसानी से कर सकता है इससे बेरोजगारी में काफी बढ़ावा आया है क्योंकि जो काम पहले पांच आदमी 1 दिन में करते थे वह काम अकेला कंप्यूटर आधे दिन में कर देता है जिससे वह पांच आदमी बेरोजगार हो गए हैं अर्थार्थ बेरोजगारी में बढ़ावा आया है |

गलत चीजों में बढ़ावा (Promotion in the wrong things): कंप्यूटर की सहायता से आज हर कोई इंटरनेट से जुड़ा हुआ है और सोशल वेबसाइट पर एक्टिव रहता है लेकिन दिन-प्रतिदिन सोशल वेबसाइट पर एक दूसरे का मजाक बनाने वह गाली देने के मामले बढ़ते जा रहे हैं जिससे हम कह सकते हैं कि कंप्यूटर के आने से गलत चीजों को बढ़ावा मिल रहा है  अर्थार्थ भी मिल जुलकर ना रहने के बजाय एक दूसरे का मजाक बनाकर और गाली निकाल  रहे हैं |

आप समाज विरोधी या उदास हो सकते हैं (You can be anti-society or sad) : कंप्यूटर के अधिक उपयोग से आजकल बच्चे बाहर किसी अन्य के साथ खेलने के बजाए अपने कंप्यूटर के साथ गेम खेलने में अधिक रुचि रखते हैं जिससे उन में मिलजुल कर रहने की भावनाओं पर रोक लग सकती है अर्थार्थ वे समाज विरोधी बन सकते हैं इसलिए बच्चों को अधिक कंप्यूटर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और समाज और समाज के लोगों के साथ मिलजुल कर रहना चाहिए कभी कभी सोशल वेबसाइट पर अन्य लोगों को देखकर लोग खुद से तुलना करते हैं और उदास हो सकते हैं |

आंखों का कमजोर होना (Weak eyes): कंप्यूटर के बहुत अधिक इस्तेमाल से आंखों पर काफी प्रभाव पड़ता है कभी-कभी कंप्यूटर का अधिक इस्तेमाल आंखों की ज्योति को कम करने के लिए काफी होता है |

स्वास्थ्य समस्या (health problem): कंप्यूटर के सामने बहुत अधिक काम करने अर्थार्थ अत्यधिक समय के लिए कंप्यूटर के सामने बैठने से पेट संबंधी कई बीमारियां उत्पन्न हो सकती है इसलिए लगातार कंप्यूटर के सामने बैठकर कार्य नहीं करना चाहिए बीच बीच में ब्रेक लेकर और नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए |

एकाग्रता मे कमजोरी (Weakness in concentration): रिसर्च से यह पता चला है कि कंप्यूटर  के अत्यधिक इस्तेमाल से एकाग्रता में कमी आती है तथा सीखने और याद रखने की क्षमता कम हो सकती है |

अत्यधिक निर्भरता (Over dependence): कंप्यूटर और इंटरनेट का इस्तेमाल करके व्यक्ति पूरी तरह से उसी चीज पर निर्भर हो जाता है आजकल छात्रों को कुछ भी जाना हो तो सीधे वे कंप्यूटर और इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं वह कुछ खुद से सीखने का या रिसर्च करने का विचार भी मन में नहीं लाते हैं |

प्राइवेसी का खतरा (Danger of privacy): आज का सभी डिपार्टमेंट सभी इंफॉर्मेशन कंप्यूटर में सुरक्षित रखते हैं और उनको एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं , लेकिन इस तकनीकी दौर में हम यह भूल जाते हैं कि बीच में हमारे जरूरी इंफॉर्मेशन अगर गलत हाथ में पड़ जाए तो इससे हमारी प्राइवेसी को बहुत बड़ा खतरा हो सकता है |

uses or advantages of computer in hindi कंप्यूटर के लाभ , फायदे , बेनिफिट्स

कंप्यूटर के लाभ advantages or uses of computer in hindi  – कंप्यूटर दिन-प्रतिदिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण बनता जा रहा है आज कंप्यूटर हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है हम इस बारे में चर्चा करेंगे और सभी क्षेत्रों में कंप्यूटर का योगदान और उसके महत्व के बारे में जानेंगे |

शिक्षा के क्षेत्र में (In the feild of education): इंफॉर्मेशन कहीं से भी प्राप्त की जा सकती है लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि सही इंफॉर्मेशन कैसे और कहां से प्राप्त की जाए एक रिसर्च से पता चला है कि कॉलेज छात्र 1 सप्ताह में लगभग 5 से 6 घंटे इंटरनेट पर गुजारते हैं ,  छात्रों को लगता है कि इंटरनेट और कंप्यूटर द्वारा दी गई इंफॉर्मेशन उनके रिसर्च में काफी मददगार होगी और उनके रिसर्च को और अधिक महत्वपूर्ण बनाएगी  , आजकल कंप्यूटर की मदद से हम इंटरनेट पर उपलब्ध वीडियो ट्यूटोरियल के माध्यम से पढ़ सकते हैं |

स्वास्थ्य क्षेत्र में (In the health sector) : कंप्यूटर टेक्नोलॉजी आने के बाद स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी अच्छा सुधार हुआ है अब स्वास्थ्य क्षेत्र में हर इंफॉर्मेशन डिजिटल हो गई है , आज कंप्यूटर और विभिन्न सॉफ्टवेयर के माध्यम से बीमारी का शीघ्रता से पता लगाया जा सकता है और उसका निवारण भी किया जा सकता है ,एक व्यक्ति को एक दुर्घटना के कारण लकवा आ गया था लेकिन आधुनिक तकनीकी की मदद से उसके दिमाग को कंप्यूटर के साथ इन प्लांट किया गया और रिजल्ट यह रहा कि वह व्यक्ति ब्रेन पावर से कंप्यूटर के cursor कंट्रोल कर सकता था ,  इसी प्रकार की गई अद्भुत तकनीकी से स्वास्थ्य क्षेत्र में काफी अच्छा सुधार आया है और यह सब कंप्यूटर की मदद से हो पाया है |

विज्ञान के क्षेत्र में (in science) : वैज्ञानिक काफी लंबे समय से कंप्यूटर का इस्तेमाल कर रहे हैं जब कंप्यूटर आम आदमी के लिए सिर्फ एक कल्पना थी उस समय भी कंप्यूटर का इस्तेमाल वैज्ञानिक की के क्षेत्र में किया जा रहा था , क्योंकि कंप्यूटर के माध्यम से सभी वैज्ञानिक आपस में जुड़े रहते थे और एक दूसरे की रिसर्च की मदद से अपनी रिसर्च को और अच्छा बनाने में समर्थ हो सकते थे ,  कंप्यूटर ही उनको आपस में जोड़े रखता था और सूचनाओं का आदान प्रदान करने में अपना योगदान देता था जिससे विज्ञान ने काफी प्रगति की है |

बिजनेस क्षेत्र में (In business field) : कंप्यूटर की सहायता से बिजनेस क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने तथा क्षेत्र में कॉन्पिटिशन वह मांग जैसी चीजों का एनालिसिस कंप्यूटर की सहायता से आसानी से किया जा सकता है ,  कंप्यूटर की सहायता से कंपनी की सेल्स ,  मार्केटिंग ,  रिटेलिंग ,  स्टॉक ट्रेडिंग इत्यादि का रिकॉर्ड रख सकते हैं , वर्तमान समय में उपभोक्ता तथा बिजनेस दोनों के बीच अच्छा संबंध बनाए रखने के लिए काफी योगदान साबित रहा है |

मनोरंजन क्षेत्र में (In the entertainment area) : हमारे फ्री टाइम में कंप्यूटर काफी मनोरंजनात्मक साधन माना जाता है क्योंकि वर्तमान समय में कंप्यूटर के माध्यम से फिल्म ,  गाने ,  गेम , इत्यादि का लुफ्त उठाया जा सकता है , कंप्यूटर की सहायता से किसी भी अन्य देश में हो रहे थे अथवा अन्य प्रतियोगिताओं का सीधा प्रसारण देख सकते हैं ,  वर्तमान समय में खाने से लेकर पहनने तक सभी चीजें कंप्यूटर की सहायता से घर बैठे मंगवा सकते हैं जिसे हमारे खाली समय का भी सदुपयोग हो जाता है और उसे हम कहीं और काम में ले सकते हैं |

गवर्नमेंट क्षेत्र में (In the government sector) : विभिन्न सरकारी दफ्तरों तथा क्षेत्रों में जैसे ट्रैफिक ,  टूरिज्म , कंट्रोल ,  शिक्षा इत्यादि की प्लानिंग से लेकर पूरा करने तक कंप्यूटर की सहायता ली जाती है ,  आज हर सरकारी दफ्तर में कंप्यूटर देखने को मिलता है तथा सभी काम और सभी रिकॉर्ड कंप्यूटर पर सुरक्षित रखे जाते हैं और समय या जरूरत पड़ने पर कंप्यूटर से उनको देखा जा सकता है और काम में लिया जा सकता है |

डिफेंस में (In defense) : डिफेंस में कंप्यूटर की सहायता से GPS से किसी मिसाइल को टारगेट किया जाता है  , आने वाले टारगेट को भी कंप्यूटर की सहायता से ट्रैक किया जाता है अगर ऐसा ना किया जाए तो आने वाला टारगेट सब कुछ नष्ट कर सकता है ,  कंप्यूटर टेक्नोलॉजी के कारण डिफरेंस हर मूवमेंट से भली भांति परिचित रहता है जिससे उनको सेना को व्यवस्थित करने इत्यादि में सहायता मिलती है |

खेल क्षेत्र में (In sports field) : कंप्यूटर की सहायता से खेल जगत की सभी प्रतिक्रियाएं क्या हम घर बैठे लुफ्त उठा सकते हैं ,  अर्थार्थ विश्व के किसी भी कोने में कोई भी खेल खेला जा रहा है उसका लाइव टेलीकास्ट हम अपने कंप्यूटर की सहायता से देख सकते हैं |

सूचना संग्रहित करने में (Collecting information): हर किसी को सोचना की आवश्यकता होती है चाहे वह किसी भी प्रकार की हो एक छात्र को पढ़ने के लिए विभिन्न प्रकार की सूचनाओं की आवश्यकता होती है ,  और वह सूचना वह कंप्यूटर में इंटरनेट की सहायता से ले सकता है यह सभी सूचनाएं कंप्यूटर पर संग्रहित रहती हैं जो इंटरनेट से जुड़ी हुई होती है इंटरनेट के माध्यम से एक कंप्यूटर पर संग्रहित सूचना को किसी अन्य कंप्यूटर द्वारा एक्सेस किया जा सकता है ,  तथा आजकल सभी सरकारी दफ्तरों , बैंकों , ऑफिस जगह पर सभी प्रकार की सूचनाएं उनके कंप्यूटर पर संग्रहित रहती हैं जिनको भी जरूरत पड़ने पर काम में ले सकते हैं |

generation of computer in hindi कंप्यूटर की पीढ़ियां कौन कौनसी है , बताये

कंप्यूटर की पीढ़ियां (generation of computer in hindi) बदलती गई और इन पीढ़ियों का विकास उस टेक्नोलॉजी के आधार पर हुआ जो टेक्नोलॉजी हम कंप्यूटर में उपयोग करते थे प्रारंभ में हार्डवेयर टेक्नोलॉजी में परिवर्तन के आधार पर इस जनरेशन का नाम रखा जाता था या बदला जाता था लेकिन वर्तमान में अगर कंप्यूटर की पीढ़ी की बात करें तो वह सॉफ्टवेयर तथा हार्डवेयर दोनों को मिलाकर एक कंप्यूटर सिस्टम और उसकी पीढ़ी का निर्धारण करते हैं |

अभी तक कंप्यूटर की पांच जनरेशन ज्ञात है आगे इस पोस्ट में हम उन पांच पीढ़ियों के बारे में संक्षिप्त में चर्चा करेंगे और इन पीढ़ियों में क्या क्या परिवर्तन हुए और इनकी क्या क्या विशेषता थी यह सब चीजें विस्तार से पढ़ेंगे |

कंप्यूटर में 1940 से लेकर अभी तक बहुत डेवलपमेंट हुआ और इसी डेवलपमेंट के कारण आज कंप्यूटर बहुत ही छोटा ,  सत्ता और शक्तिशाली डिवाइस के रूप में हमारे सामने उपलब्ध है |  अगर हम पीढ़ियों की बात कर रहे हैं तो यह स्वभाविक है कि हम प्रारंभ से लेकर अभी तक कंप्यूटर में डेवलपमेंट के बारे में ही इतिहास से अब तक का सफर तय कर रहे हैं और बात कर रहे हैं कि कंप्यूटर मे डेवलपमेंट किस प्रकार और क्या-क्या हुआ |

 

  • प्रथम पीढ़ी (First generation) (1940 से 1956) : पहले कंप्यूटर में वैक्यूम ट्यूब का इस्तेमाल किया गया तथा मेमोरी के लिए मैग्नेटिक drums इस्तेमाल की गई , यह कंप्यूटर आकार में बहुत बड़े लगभग कमरे के आकार के होते थे , इन को चलाने के लिए बिजली की अत्यधिक मात्रा की आवश्यकता होती थी तथा यह बहुत ही महंगे होते थे ,  इस प्रकार के कंप्यूटर बहुत अधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न करते थे , और इसी ऊष्मा की वजह से इन कंप्यूटरों में जल्दी ही खराबी का डर बना रहता था ,प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटरों में मशीन भाषा का उपयोग किया गया था जो कि प्रोग्रामिंग भाषा की सबसे छोटी भाषा मानी जाती है जिसे कंप्यूटर आसानी से समझ सकता है और उनको दिए गए टास्क को पूरा कर सकता है इनकी स्पीड बहुत ही कम थी यह किसी जटिल समस्या को सॉल्व करने में कई दिन या हफ्ते लगा सकते थे | इनपुट के लिए punched cards (पंच कार्ड) और paper tape ( पेपर टेप) तथा आउटपुट प्रिंटआउट के रूप में लिया जाता था |

 

उदाहरण : UNIVAC तथा ENIAC  , इनमें से UNIVAC पहला कंप्यूटर था जो कमर्शियल काम के लिए एक बिजनेस ग्राहक को U.S census bureau को 1951 में दिया गया था |

  1. द्वितीय पीढ़ी (Second generation) (1956 से 1963) : कंप्यूटर की द्वितीय पीढ़ी में वैक्यूम ट्यूब के स्थान पर ट्रांजिस्टर का उपयोग किया गया ,  ट्रांजिस्टर का आविष्कार बैल लैब में 1947 में हुआ था लेकिन 1950 तक ट्रांजिस्टर का उपयोग कंप्यूटर में नहीं किया गया था  , वैक्यूम ट्यूब के मुकाबले में ट्रांजिस्टर बहुत ही शक्तिशाली साबित हुआ और ट्रांजिस्टर उपयोग करने के बाद कंप्यूटर आकार में बहुत छोटा ,  फास्ट ,  सस्ता  और प्रथम पीढ़ी की तुलना में ऊर्जा का भी कम इस्तेमाल करता था | हालांकि ट्रांजिस्टर भी अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न करता है जिससे कंप्यूटर का खराब होने का खतरा बना रहता था ,कंप्यूटर की द्वितीय पीढ़ी में भी इनपुट के लिए पंच कार्ड का उपयोग किया जाता था तथा प्रिंटआउट के रूप में आउटपुट लिया जाता था |

कंप्यूटर की द्वितीय पीढ़ी criptic बायनरी मशीन लैंग्वेज से symbolicअथवा assembly भाषा का उपयोग जाने लगा जिससे प्रोग्रामर शब्दों के रूप में कंप्यूटर को दिशा निर्देश दे सकते थे , इसी समय में COBOL  तथा FORTRAN जैसी हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज developed की गई , यह वह कंप्यूटर थे जो दिशा निर्देशों को अपनी मेमोरी में संग्रहित करते थे और इन कंप्यूटरों में मैग्नेटिक ड्रम के स्थान पर मैग्नेटिक core टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मेमोरी के लिए किया गया |

  1. तृतीय पीढ़ी (Third generation) ( 1964 से 1971) : एकीकृत परिपथ ( integrated circuit) के डेवलपमेंट से कंप्यूटर की तृतीय पीढ़ी उत्पन्न हुई जिसमें ट्रांजिस्टर  (Transistor)एक सिलिकॉन chip पर लगने लगे थे जिन्हें सेमीकंडक्टर कहा गया एकीकृत परिपथ इस्तेमाल करने के बाद कंप्यूटर की स्पीड और कार्य करने की क्षमता में बहुत अत्यधिक बढ़ावा देखने को मिला ,  पंच कार्ड के स्थान पर कीबोर्ड इस्तेमाल किया जाने लगा तथा प्रिंटआउट के स्थान पर मॉनिटर (Monitor) का इस्तेमाल होने लगा  , प्रति पीढ़ी के कंप्यूटर एक ही समय में कई एप्लीकेशन Run करने की क्षमता रखते थे और इनका आकार भी काफी छोटा होने के कारण इनको आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता था पहले दो पीढ़ी के कंप्यूटरों की तुलना में यह काफी सस्ते थे |
  2.  चतुर्थ पीढ़ी (Fourth generation) ( 1971 से 1985) : माइक्रोप्रोसेसर में कंप्यूटर की चौथी पीढ़ी में अपना योगदान दिया , जब हजारों एकीकृत परिपथ एक सिलिकॉन चिप (silicon chip) के रूप में समाहित हो गए तब कंप्यूटर का बहुत ही छोटा रूप देखने को मिला जो कंप्यूटर पहले कमरे के आकार के होते थे वह कंप्यूटर अब इतने छोटे हो गए थे कि कोई भी उंहें अपने हाथ में लेकर इस्तेमाल कर सकता था तथा एक स्थान से लेकर दूसरे स्थान पर अपनी जेब में लेकर घूम सकता था ,  1971 में इंटेल 4004 चिप डेवलप की गई और उसे कंप्यूटर में लगाया गया CPU से लेकर इनपुट आउटपुट सभी एक चिप के रूप में दिखने लगे , इन कंप्यूटरों में VLSI ( वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेटेड सर्किट) तथा माइक्रोप्रोसेसर चिप का उपयोग किया गया था जिससे CPU महल एक chip के आकार का बन गया था |
  3.  पंचम पीढ़ी (Fifth generation) ( 1985 से अब तक) : आज हम जो कंप्यूटर पीढ़ी इस्तेमाल कर रहे हैं वह कंप्यूटर की पांचवी पीढ़ी है आजकल की कंप्यूटरों में कृत्रिम बुद्धिमता (Artificial intelligence) देखने को मिल रही है अर्थार्थ कंप्यूटर भी मानव की तरह सोचने और समझने की क्षमता रखें यह प्रयास किया जा रहा है ,  कंप्यूटर की पांचवी पीढ़ी में ULSI (अल्ट्रा लार्ज स्केल इंटीग्रेटेड सर्किट) का इस्तेमाल किया जा रहा है , अर्थार्थ एक सिंगल सिलिकॉन चिप  पर लाखों इंटीग्रेटेड सर्किट या ट्रांजिस्टर लगाए जा सकते हैं जिससे उसका आकार और भी छोटा हो गया है |

limitations of computer or drawbacks in hindi कंप्यूटर की सीमाएं

कंप्यूटर की सीमाएं या कमियां : limitations of computer or drawbacks in hindi  – वैसे तो हम सभी जानते हैं कि कंप्यूटर बहुत ही उपयोगी है वर्तमान समय में हर क्षेत्र में कंप्यूटर का योगदान अमूल्य है लेकिन जैसे ब्रह्मांड में कोई भी चीज परिपूर्ण नहीं है ठीक उसी प्रकार से कंप्यूटर में भी कुछ कमियां या सीमाएं है इनके बारे में आगे संक्षिप्त में वर्णन किया गया है |इन सीमाओं या कमियों से तात्पर्य है कि कंप्यूटर की कार्य क्षमता किसी सीमा तक आकर खत्म हो जाती है जैसे कंप्यूटर खुद से कुछ सोच नहीं सकता वैसे ही और भी कमियां या सीमाएं हैं जहां पर आकर इस की कार्य क्षमता खत्म हो जाती है |

  1. कंप्यूटर सोच नहीं सकता (Computer can not think) :  कंप्यूटर तब तक कोई काम नहीं करता जब तक कि हम उस में प्रोग्राम या उसको इनपुट ना दे अर्थार्थ कंप्यूटर के खुद के सोचने समझने की क्षमता नहीं है वह उसमें प्रोग्राम किए गए एल्गोरिदम के आधार पर उस को दिए गए इनपुट का आउटपुट देता है लेकिन वह इंसान की तरह सोच समझकर कोई भी आउटपुट खुद से नहीं दे सकता अर्थार्थ उसके द्वारा दिया गया आउटपुट इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी एल्गोरिदम में क्या लिखा हुआ है |
  2. कंप्यूटर निर्णय नहीं ले सकता (Computer can not make decisions) : कंप्यूटर कोई भी निर्णय लेने में असमर्थ होता है अर्थार्थ कंप्यूटर के पास खुद का कोई ज्ञान ,  सूचना ,  और बुद्धिमता नहीं होती जिसके आधार पर वह कोई भी निर्णय लेने में समर्थ हो वह जो भी आउटपुट देता है उस में लिखे हुए प्रोग्राम के आधार पर होता है वह किसी भी चीज का खुद से कोई निर्णय नहीं ले सकता अर्थार्थ वह गलत सही ,  झूठ सच इत्यादि जैसी चीजों का पता नहीं लगा सकता |
  3. कंप्यूटर खुद के विचारों को प्रकट करने में असमर्थ (Unable to reveal the ideas of the computer itself): कंप्यूटर जब भी कोई आउटपुट देता है तो उसमें उसके खुद के कोई विचार नहीं होते हैं अगर कंप्यूटर को उससे उसके विचार पूछे जाएं तो वह इस काम में असमर्थ है क्योंकि उसके पास विचार प्रकट करने के लिए कोई समर्थता नहीं है |
  4. खुद से लागू करने में असमर्थ (Unable to apply by itself) :  कंप्यूटर कुछ भी चीज खुद से लागू नहीं कर सकता अर्थार्थ मान लीजिए कि किसी कंप्यूटर में कुछ डाटा स्टोर किया हुआ है लेकिन हम चाहते हैं कि यह डाटा गलत आदमी तक नहीं पहुंचना चाहिए अब कंप्यूटर खुद से यह पॉलिसी लागू नहीं कर सकता कि वह डाटा कौन यूज कर सकता है और कौन नहीं जब तक कि हम सामने से कंप्यूटर को यह बता ना दे |
  5. सीखने में असमर्थ (Unable to learn) :  1 दिन में कंप्यूटर से एक ही प्रोग्राम को भले ही बार-बार किया जाए लेकिन कंप्यूटर इस बात से कुछ भी सीखने में असमर्थ है अर्थार्थ अगर दूसरे दिन भी उससे वही प्रोग्राम Run करवाया जाए तो वह उसको उसी प्रकार से Run करेगा जैसे वह पहली बार उसे रन कर रहा है अर्थार्थ वह पिछले दिन रन हुए प्रोग्राम से कुछ सीख कर उसका आउटपुट डायरेक्ट नहीं दे सकता  |
  6. कंप्यूटर गलत इनपुट को सही इनपुट नहीं कर सकता अर्थार्थ जब हम कंप्यूटर instructions देते हैं और अगर उसमें कुछ गलती है तो कंप्यूटर उसके आधार पर हमें गलत आउटपुट दे देगा लेकिन इनपुट में कुछ भी बदलाव नहीं कर सकता |

features or characteristics of computer system in hindi कंप्यूटर की विशेषताएं

कंप्यूटर की विशेषताएं characteristics or features of computer system in hindi – हमने देखा कि कंप्यूटर अलग-अलग प्रकार के हो सकते हैं ,  उनका आकार अलग हो सकता है तथा उनकी कार्य क्षमता के आधार पर भी वह विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं लेकिन उन सभी कंप्यूटर्स में विशेषताएं समान होती है ,  वे सभी कंप्यूटर जटिल समस्याओं के निवारण में लगातार बिना रुके कार्यरत रहते हैं ,  आगे हम इस पोस्ट में आपको बता रहे हैं कि कंप्यूटर में क्या-क्या विशेषताएं पाई जाती है या क्या-क्या खूबियां होती है |

  1. गति (speed) :  जैसा की हम सभी जानते हैं कि कंप्यूटर बहुत ही तेजी से कार्य करता है जिन गणनाओं को करने में इंसान को घंटो अथवा दिन लग जाते हैं उसी गणना को कंप्यूटर कुछ ही क्षणों में पूरी कर सकता है , कंप्यूटर को दिए गए अनुदेश जिनके आधार पर कंप्यूटर गणना या कोई ऑपरेशन करता है वह एक सेकंड में 1000000 अनुदेशों पर कार्य करने की क्षमता रखता है | इसीलिए हम जब कंप्यूटर की गति की बात करते हैं तो उस को मापने के लिए हम माइक्रो सेकंड या मिनी सेकंड का उपयोग करते हैं क्योंकि यह हमारी कल्पना से बाहर है कि कंप्यूटर की वास्तविक गति क्या है |
  2. डाटा सटीकता या शुद्धता (Data accuracy or accuracy) : कंप्यूटर की सेटिंग बहुत ही अधिक होती है क्योंकि कंप्यूटर के द्वारा आउटपुट में दिया गया डाटा लगभग शुद्ध माना जाता है क्योंकि इसमें कोई भी मानव त्रुटि की संभावना नहीं होती ,  जैसे कोई भी इंसान अगर किसी गणना को स्वयं से करता है तो उसमें संभावना होती है कि वह मानव त्रुटि कर सकता है लेकिन कंप्यूटर हमें इस प्रकार की त्रुटियों की कोई संभावना नहीं होती इसलिए कंप्यूटर के द्वारा प्राप्त डाटा सटीक माना जाता है |
  3. कार्य के प्रति लगन  (Passion for work):  कंप्यूटर थकता नहीं अर्थार्थ कंप्यूटर से कितनी भी गणनाएं कराई जाए वह बिना थके उनको लगातार संपन्न करने की क्षमता रखता है कंप्यूटर में यह काबिलियत होती है कि वह बिना रुके और बिना थके घंटो भर लगातार कार्य कर सकता है और सटीक डाटा आउटपुट में दे सकता है अगर लाखों गणनाएं भी कंप्यूटर को करने के लिए दी जाए तो वह प्रत्येक घटना को शुद्धता के साथ perform करता है और सटीक डाटा देने की कार्य क्षमता रखता है |
  4. चंचलता से भरपूर (Versatile): यहां चंचलता से अभिप्राय है कि कंप्यूटर में यह क्षमता होती है कि वह विभिन्न प्रकार के कार्य करने की क्षमता रखता है अर्थार्थ कंप्यूटर किसी एक विशेष कार्य के लिए नहीं बना है यह विभिन्न प्रकार के कार्य करने की क्षमता रखता है जैसे कंप्यूटर को आप पढ़ने के माध्यम से काम में ले सकते हैं या अपनी दुकान या ऑफिस में किसी अन्य काम से भी रख सकते हैं अब इन दोनों कामों में काम आने वाला कंप्यूटर समान है लेकिन उनके कार्यक्षेत्र अलग-अलग हैं अतः हम कह सकते हैं कि कंप्यूटर में चंचलता भरपूर रूप से पाई जाती है |
  5. याद रखने की क्षमता या मेमोरी (Memory) : कंप्यूटर में इंफॉर्मेशन या डाटा संग्रहण करने की या याद रखने की दक्षता होती है कंप्यूटर में हम कोई भी सूचना या डाटा को जितने लंबे समय तक चाहे संग्रहित रख सकते हैं और जब जरूरत हो उसे कंप्यूटर की मेमोरी से काम में ले सकते हैं  कंप्यूटर में संग्रहित सूचना या डाटा सालों तक सुरक्षित रहता है यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम उसमें कितना डाटा संग्रहित रखना चाहते हैं और कब कंप्यूटर से उस डाटा को निकालना है और उसकी मेमोरी को मुक्त करना है |
  6. विश्वसनीयता (Reliability) :  हालांकि कंप्यूटर बहुत ही शीघ्रता से कार्य करता है लेकिन कंप्यूटर के द्वारा दिए गए आउटपुट पर कभी भी संदेह नही नहीं किया जाता वर्तमान में ऐसे कंप्यूटर उपलब्ध हैं जो करोड़ों टास्क कुछ क्षणों में संपन्न करने की क्षमता रखते हैं और उनके द्वारा दिए गए आउटपुट में कोई त्रुटि नहीं होगी बशर्ते उनको दिया गया इनपुट सही होना चाहिए  , अगर आपको आउटपुट में ऐसा कुछ आउटपुट मिलता है जो सही ना हो उसे कंप्यूटर की भाषा में गार्बेज इन ,  गार्बेज आउट कहा जाता है
  7. स्वचालन की क्षमता (Capacity of automation) :  कंप्यूटर में स्वचालन की क्षमता भी पाई जाती है अर्थार्थ जब कंप्यूटर को एक से अधिक प्रोग्राम रन करने के लिए दिए जाते हैं तो उनमें शेड्यूल के हिसाब से कंप्यूटर एक के बाद एक उनको run करने की क्षमता रखता है ,  अर्थार्थ कंप्यूटर को हर प्रोग्राम के लिए अलग से कमांड देने की आवश्यकता नहीं है वह एक के बाद एक सभी प्रोग्राम को स्वेत रन कर देता है |
  8. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (artifical Intelligence) :  कंप्यूटर की पांचवी जनरेशन ऐसी आई है जिसमें वह आवाज को पहचान सकता है और उसको इनपुट के रुप में इस्तेमाल कर सकता है समय जैसे जैसे बीतता जा रहा है वैसे-वैसे कंप्यूटर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अधिक देखने को मिल रही है आने वाले समय में कंप्यूटर में केवल आवाज परवल की यूजर के मूड को भी समझने और उसके हिसाब से कार्य करने की क्षमता रखेगा |
  9. संसाधनों  की शेयरिंग (Sharing Resources) :  कंप्यूटर के प्रारंभिक दौर में कंप्यूटर से किसी बाहरी संसाधन को जोड़ना संभव नहीं था लेकिन वर्तमान में जो कंप्यूटर उपलब्ध है उनमें बाहरी अन्य कंप्यूटरों को तथा अन्य संसाधनों को जोड़ने की क्षमता होती है जैसे एक कंप्यूटर से प्रिंटर स्केनर इत्यादि को जोड़ कर कंप्यूटर को और अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है अर्थार्थ प्रिंटिंग का काम कंप्यूटर नहीं कर सकता लेकिन प्रिंटर को कंप्यूटर से जोड़ कर प्रिंटिंग को आसान बनाया जा सकता है |
  10. ग्रहण करने की क्षमता (Eclipse ability) :  वर्तमान समय में जो कंप्यूटर उपलब्ध है वह टेक्स्ट ,  इमेज ,  वॉइस इत्यादि के रूप में इनपुट ले सकते हैं हालांकि कंप्यूटर जो भी ऑपरेशन करता है वह 0 तथा 1 एक के रूप में करता है लेकिन उसके इनपुट ग्रहण करने की क्षमता बहुत एडवांस हो चुकी है वह विभिन्न प्रकार की भाषाओं में आवाज को पहचान कर उसके हिसाब से आउटपुट देने की क्षमता रखता है |

 

supercomputer in hindi सुपर कंप्यूटर की परिभाषा क्या है तथा उपयोग

सुपर कंप्यूटर (supercomputer in hindi) एक प्रकार का  कंप्यूटर है जिसकी ऑपरेशन रेट सभी कंप्यूटरों की तुलना में सबसे अधिक होती है , सामान्यतया सुपर कंप्यूटरों का उपयोग वैज्ञानिक तथा इंजीनियरिंग एप्लीकेशन जैसे कामों के लिए किया जाता है जहां बहुत अधिक डेटाबेस या गणना पर या दोनों पर कार्य करने की आवश्यकता होती है हालांकि आजकल ऐसे पावरफुल मशीन आ चुके हैं जिनका उपयोग पर्सनल काम में किया जाता है जैसे डेस्कटॉप सुपर कंप्यूटर तथा GPU सुपर कंप्यूटर इस प्रकार के कंप्यूटरों में मल्टी कोर प्रोसेसर अथवा GPGPU (General-purpose computing on graphics processing units) आदि उपलब्ध होते हैं  जो मशीन को इतना पावरफुल बनाते हैं कि वह सुपर कंप्यूटर की भांति काम करें |

सुपर कंप्यूटर(super computer) की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि इन की स्पीड अन्य कंप्यूटरों की तुलना में बहुत अधिक होती है , सबसे बड़े तथा पावरफुल सुपर कंप्यूटर में एक से अधिक कंप्यूटर समांतर में प्रोसेस करते हैं अर्थार्थ इस प्रकार के कंप्यूटर में एक से अधिक कंप्यूटर काम करते हैं  |

जून 2016 में दुनिया का सबसे फास्ट सुपर कंप्यूटर the sunway taihulight था यह है  चीन के wixu शहर में था इस कंप्यूटर की खासियत निम्न प्रकार है

4096064 bit

RISC processors

260 cores इत्यादि

 यह सुपर कंप्यूटर (super computer) linux based sunway raised ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित था

सुपर कंप्यूटर अन्य कंप्यूटरों की तुलना में बहुत महंगे होते हैं इनको किसी खास एप्लीकेशन के लिए ही काम में लाया जाता है जहां पर एक बहुत बड़ी गणना या गणितीय जटिल समस्याओं पर कार्य करना होता है जैसे मौसम फोरकास्टिंग के लिए सुपर कंप्यूटर की आवश्यकता होती है इसके अलावा न्यूक्लियर एनर्जी रिसर्च ,  फ्लूड डायनामिक गणना इत्यादि में भी सुपर कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है |

सुपर कंप्यूटर और मेनफ्रेम कंप्यूटर में यह फर्क होता है कि सुपर कंप्यूटर अपनी पूरी क्षमता एक प्रोग्राम को शीघ्रातिशीघ्र exicute करने में लगाता है जबकि मेनफ्रेम कंप्यूटर अपनी पूरी क्षमता सभी प्रोग्राम को एक साथ execute करने में लगाता है अर्थार्थ मेनफ्रेम कंप्यूटर की स्पीड कम होती है या दूसरे शब्दों में कहें तो मेनफ्रेम कंप्यूटर स्पीड के लिए काम में नहीं लिया जाता मेनफ्रेम कंप्यूटर एक से अधिक प्रोग्राम को एक साथ execute  कराने के उद्देश्य से काम में लिया जाता है |

सुपर कंप्यूटर का आकार इस बात पर निर्भर करता है कि वह सुपर कंप्यूटर कितने कंप्यूटरों से मिलकर बना है एक सुपर कंप्यूटर 10 , 100 , या 1000 या इससे भी अधिक कंप्यूटरों से मिलकर बना हो सकता है और यह सभी कंप्यूटर एक साथ काम करते हैं |

वर्तमान में कई ऐसे डेस्कटॉप कंप्यूटर है जो प्रारंभिक सुपर कंप्यूटर की तुलना में फास्ट है जैसे Cray-1 1970 के मध्य मेंCray रिसर्च मे डेवलप की गई जिसमें वेक्टर प्रोसेसिंग का उपयोग किया गया था और यह 167  मेगाflops पर compute कर सकता था बाद मेंcontemporary वेक्टर प्रोसेसिंग सुपर कंप्यूटर cray-1 सुपर कंप्यूटर से अधिक फास्ट हाय उसके बाद 1980 में बैरल प्रोसेसिंग वाले सुपर कंप्यूटर का निजात हुआ जिनकी स्पीड बहुत ही अधिक थी |

सुपर कंप्यूटर के उपयोग (applications of super computers)

रिसर्च में किसी घटना को अध्ययन करने के लिए किया जाता है चाहे यह बहुत छोटी, बहुत बड़ी , या बहुत फास्ट हो या बहुत धीमी हो लेकिन प्रयोगशालाओं में ऐसी घटनाओं का उपयोग सुपर कंप्यूटर की सहायता से किया जाता है |

खगोलिकी द्वारा सुपर कंप्यूटर का उपयोग टाइम मशीन के रुप में किया जाता है जिसकी सहायता से  ब्रह्मांड के भूतकाल तथा भविष्य का पता लगाने की कोशिश की जाती है , सुपर कंप्यूटर का उपयोग अणु की गतिशीलता को अध्ययन करने के लिए भी काम में लिया जाता है इसकी सहायता से अनु के मध्य इंटरेक्शन तथा उनके आकार का अध्ययन भी किया जाता है इसके साथ ही उनके व्यवहार का पता लगाया जाता है |

सुपर कंप्यूटर का उपयोग जैविक तंत्र को समझने के लिए भी किया जा सकता है

mainframe computer in hindi मेनफ्रेम कंप्यूटर की परिभाषा क्या है

mainframe computer in hindi मेनफ्रेम कंप्यूटर प्राय अपनी स्टोरेज ,  बड़ा आकार ,  अधिक प्रोसेसिंग क्षमता और विश्वसनीयता के लिए जाने जाते हैं ,  प्रारंभ में इस प्रकार के कंप्यूटर बहुत बड़े संगठनों द्वारा ही उपयोग में लाया गया था जहां पर एक बहुत बड़े पैमाने पर डाटा प्रोसेसिंग की आवश्यकता होती थी |

मेनफ्रेम कंप्यूटर (mainframe computer) में मल्टीपल अर्थार्थ एक से अधिक ऑपरेटिंग सिस्टम को रन या होस्ट करने की क्षमता होती है , मेनफ्रेम उन कार्यों के लिए डिज़ाइन किया गया जहां पर एक बहुत बड़े पैमाने में इनपुट तथा आउटपुट पर  कार्य करना होता था , और अपनी इसी क्षमता के कारण एक मेनफ्रेम कंप्यूटर दर्जनों और सैकड़ों छोटे सर्वरो के स्थान पर अकेला काम कर सकता है |

पहला मेनफ्रेम 1940 में बनाया गया और यह IBM द्वारा बनाया गया था |

आजकल मेनफ्रेम कंप्यूटर (mainframe computer) दुनिया की बेहतर कंपनीयो  मैं एक सेंटर अर्थार्थ केंद्रक की तरह कार्य करता है ,और अपनी इस क्षमता की वजह से मेनफ्रेम इ बिजनेस (e-business) मैं एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है |

बैंकिंग ,  हेल्थ ,  सरकारी दफ्तर ,  फाइनेंस और सभी सरकारी और प्राइवेट ऑफिस  में मेनफ्रेम कंप्यूटर लगातार अपनी भागीदारी निभा रहा है और अपना एक अमूल्य योगदान दे रहा है |

मेनफ्रेम कंप्यूटर अपनी हाई परफोर्मेंस , बड़े पैमाने पर डाटा प्रोसेसिंग ,  तथा अधिक सिक्योरिटी सिस्टम के लिए दिन प्रतिदिन अधिक काम में लिया जाता है तथा इन वजह से इनको अन्य सिस्टम जैसे माइक्रो अथवा मिनी कंप्यूटर द्वारा replace नहीं किया जा सकता आज हम किसी न किसी रूप से मेनफ्रेम कंप्यूटर पर आधारित है हो सकता है हम मेनफ्रेम कंप्यूटर को डायरेक्ट यूज नहीं कर सकते लेकिन अप्रत्यक्ष रुप से हम मेनफ्रेम कंप्यूटर का उपयोग हर रोज करते हैं |

मेनफ्रेम में जो ऑपरेटिंग सिस्टम काम में लिया जाता है वह अधिकतर Unix  या Linux पर आधारित होता है , पहले यह कमरे की साइज़ के होते थे लेकिन वर्तमान में काफी कम साइज के उपलब्ध हैं क्योंकि इनकी आवश्यकता बहुत ही बड़े कामों में होती है जैसे फाइनेंसियल ट्रांजैक्शन,  अथवा कोई बड़ा डेटा प्रोसेस करना होता है तब इसलिए यह बहुत ही महंगे होते हैं |

मेनफ्रेम अधिक डेटा पर अवश्य काम कर सकता है लेकिन यह फास्ट नहीं होते हैं अर्थात दिन में ऐसा कोई काम नहीं कर सकते जिनमें स्पीड की आवश्यकता होती है जैसे इनमें काउंटर स्ट्राइक गेम नहीं खेल सकते हैं |

किस प्रकार के कंप्यूटर दिखने में भी PC जैसे अच्छे नहीं होते हैं यहां तक कि इनकी डेस्कटॉप पर आप वॉलपेपर भी नहीं लगा सकते जैसे आप अपने कंप्यूटर में कर सकते हैं |

मेनफ्रेम कंप्यूटर सुपर कंप्यूटर से कम होते हैं लेकिन कई कामों में यह सुपर कंप्यूटर से भी अधिक उपयोगी हो सकते हैं जैसे इन कंप्यूटर में एक साथ कई प्रोग्राम सपोर्ट कर सकते हैं लेकिन सुपरकंप्यूटर एक बार में एक ही प्रोग्राम को exicute  कर सकता है लेकिन वह एक प्रोग्राम को बहुत ही फास्ट चलाता है इसलिए सुपर कंप्यूटर भी अपनी जगह बहुत उपयोगी है |

mini computer in hindi मिनी कंप्यूटर की परिभाषा क्या है

“ मिनी कंप्यूटर (mini computer in hindi) वे कंप्यूटर होते हैं जिनमें बड़े साइज वाले कंप्यूटर के सभी फीचर्स और क्षमता उपलब्ध हो लेकिन जिनका आकार छोटा हो “

minicomputer का आकार माइक्रो कंप्यूटर तथा मेनफ्रेम कंप्यूटर के मध्य में होता है अर्थार्थ मिनी कंप्यूटर माइक्रो कंप्यूटर से बड़े तथा मेनफ्रेम कंप्यूटर से आकार में छोटे होते हैं |

इनका उपयोग छोटे अथवा मध्य range वाले बिजनेस  इत्यादि में काम में लिया जाता है , आजकल मिनी कंप्यूटर शब्द को लगभग हटा दिया गया है और इसको server शब्द के साथ merge कर दिया गया है ||

पहला मिनी कंप्यूटर (mini computer) 1960 के दशक में बनाया गया और यह डेवलपमेंट IBM  कॉरपोरेशन द्वारा किया गया ,  प्रारंभ में यह कंप्यूटर बिजनेस एप्लीकेशन और सर्विस को मध्य नजर रखते हुए बनाया गया क्योंकि इनकी परफॉर्मेंस और कार्य क्षमता मेनफ्रेम कंप्यूटर के समान ही थी  |

मिनी कंप्यूटर में एक या एक से अधिक प्रोसेसर हो सकते हैं तथा यह multi process & tasks सपोर्ट करता है ,  क्योंकि यह कंप्यूटर साइज में मेनफ्रेम तथा सुपर कंप्यूटर से कम होता है और इनकी प्रोसेसिंग क्षमता भी अच्छी होती है इसीलिए इस प्रकार के कंप्यूटर को अधिक पावरफुल माना जाता है और अधिक काम में लिया जाता है |

मिनी कंप्यूटर , मेनफ्रेम तथा सुपर कंप्यूटर की तुलना में आकार में छोटे ,  सस्ते , कम पावर फुल होते हैं लेकिन माइक्रो कंप्यूटर से महंगी , पावरफुल तथा अधिक उपयोगी होते हैं |

मिनी कंप्यूटर का अधिक उपयोग डेटाबेस मैनेजमेंट ,  फाइल हैंडलिंग ,  बिजनेस ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग इत्यादि में किया जाता है | मिनी कंप्यूटर को मिड रेंज सरवर भी कहते हैं यह नेटवर्क का एक part माना जाता है

उदाहरण – IBM AS/400e

यह टाइम शेयरिंग सपोर्ट करता है अर्थार्थ एक बार में एक से अधिक टास्क होने पर यह टाइम शेयरिंग का उपयोग करता है और उन्हें परफॉर्म करता है |

प्राय: मिनी कंप्यूटर मल्टी प्रोसेसिंग सिस्टम होता है जो एक बार में 4 से 200 यूजर सपोर्ट करने की क्षमता रखता है

micro computer in hindi माइक्रो कंप्यूटर परिभाषा क्या है

What is micro computer definition in hindi माइक्रो कंप्यूटर परिभाषा क्या है ,  हर व्यक्ति के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल इस उद्देश्य से माइक्रो कंप्यूटर का निर्माण किया गया ,  1970 के दशक में बड़े मिनी कंप्यूटर का आकार छोटा करके डेस्कटॉप कंप्यूटर से परिचय कराया गया | 1960-1970 के समय में कंप्यूटर का आकार आज की तुलना में बहुत अधिक था और उस समय कंप्यूटर को रखने के लिए बहुत अधिक जगह की आवश्यकता होती थी इसलिए कंप्यूटर का आकार छोटा करके माइक्रो कंप्यूटर डिजाइन किया गया ,  पहला माइक्रो कंप्यूटर 1970 में उपलब्ध कराया गया जिसे बिजनेस में काम में लिया जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे वैसे माइक्रो कंप्यूटर सस्ता हो गया और हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध कराया जाए |

“माइक्रो कंप्यूटर एक छोटे आकार और पर्सनल कंप्यूटर अर्थार्थ PC  का ही पर्याय है “  माइक्रो कंप्यूटर में एक माइक्रोप्रोसेसर अर्थार्थ एक माइक्रोचिप पर सीपीयू (CPU) होता है , इसमें रीड ओनली मेमोरी (Read only memory)  तथा रैंडम एक्सेस मेमोरी (random access memory) होती है , इसके अलावा इनपुट आउटपुट ports और अन्य सभी सिस्टम आपस में wires के द्वारा जुड़े हुए होते हैं जिसे संक्षिप्त में मदरबोर्ड (mother board) कहते हैं |

माइक्रो कंप्यूटर (micro computer) एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिस में CPU के रूप में माइक्रोप्रोसेसर इस्तेमाल किया जाता है “

अर्थार्थ इसमें CPU एक सिंगल इंटीग्रेटेड सेमीकंडक्टर चिप के रूप में होता है ,  यह सेमीकंडक्टर chip ही महत्वपूर्ण सभी लॉजिक तथा अंकगणित ऑपरेशन करने में सक्षम होती है , मेमोरी के लिए भी इसमें सेमीकंडक्टर चिप का ही कॉन्बिनेशन लगा होता है तथा प्रोग्राम के द्वारा मेमोरी के लिए लगी सेमीकंडक्टर चिप में डाटा स्टोर करवाया जाता है |

पहले जो कंप्यूटर साइज में बहुत बड़े होते थे उनमें ट्रांजिस्टर इत्यादि का उपयोग किया जाता था इन बड़े साइज वाले ट्रांजिस्टर  आदि को छोटी सेमीकंडक्टर chip द्वारा replace  कर दिया गया जिससे कंप्यूटर का आकार छोटा हो गया समय के साथ इतना प्रोग्रेस हुआ कि माइक्रो कंप्यूटर  की प्रोसेस क्षमता सिर्फ एक सिंगल chip के द्वारा कर दी गई |

1980 में माइक्रो कंप्यूटर बहुत अधिक काम में आने लगे  , अच्छी परफॉर्मेंस वाले माइक्रो कंप्यूटर भी बिजनेस ,  इंजीनियरिंग ,  स्मार्ट तथा इंटेलिजेंट मशीन के रुप में ऑफिस तथा मिलिट्री इत्यादि में बहुतायत से उपयोग में आने लगे |

हम और आप जो पर्सनल कंप्यूटर इस्तेमाल करते हैं उसको ही माइक्रो कंप्यूटर (micro computer) कहते हैं |