नीट सिलेबस २०१९ (neet 2019 syllabus in hindi) , 11th , 12 th chemistry , biologi , physics

11th , 12 th chemistry , biologi , physics  नीट सिलेबस २०१९ (neet 2019 syllabus in hindi) : अगर आप कक्षा 11 या 12 वीं के विज्ञान वर्ग के जीव विज्ञान के छात्र या छात्रा है तो जाहिर सी बात है आपका सपना डॉक्टर बनने का होगा , अगर आप डॉक्टर बनने के लिए सरकारी कॉलेज में दाखिला लेना चाहते है तो उसके लिए आपको neet (नीट) की प्रतियोगी परीक्षा देनी होती है और इस परीक्षा में आपको अच्छे नम्बर लेकर आने होते है।

प्रतिवर्ष लाखो विद्यार्थी इस प्रतियोगी परीक्षा में बैठते है और अच्छे नंबर लाने का भरपूर प्रयास करते है , और लाखो विद्यार्थी इस प्रतियोगी परीक्षा के लिए कोचिंग करते है।

अगर आप कोचिंग करने में समर्थ नहीं है और सिर्फ स्कूल में पढ़ रहे है तो कोई बात नहीं आपको बोर्ड परीक्षा के अतिरिक्त अलग से हाई स्टैण्डर्ड पढाई करनी पड़ेगी जिससे आप इस परीक्षा (neet २०१८ – २०१९ ) में अच्छे नंबर ला सके।

यहाँ हम आपको neet 2019 syllabus बताने जा रहे है , यह जानकारी हिन्दी में उपलब्ध है इस सिलेबस के अनुसार अपनी पढाई करे।

neet 2019 syllabus physics in hindi (नीट २०१८ भौतिक विज्ञान पाठ्यक्रम )

भौतिक विज्ञान के लिए हमने पूरे पाठ्यक्रम को 19 पाठो में वर्गीकृत किया है ये निम्न है –

  • सामान्य भौतिकी (general physics)
  • शुद्ध गतिकी (kinematics)
  • गति के नियम (laws of motion)
  • कार्य , सामर्थ्य और ऊर्जा (work , power and energy)
  • द्रव्यमान केन्द्र और संवेग (centre of mass and momentum)
  • घूर्णन गति (rotational motion)
  • गुरूत्वाकर्षण (gravitation)
  • सरल आवर्त गति (simple harmonic motion)
  • पदार्थ के गुण (properties of matter)
  • तरंगें (waves)
  • ऊष्मा और उष्मागतिकी (heat and thermodynamics)
  • प्रकाशिकी (optics)
  • धारा वैद्युतिकी (current electricity)
  • स्थिर वैधुतिकी (electrostatics)
  • चुम्बकत्व (magnetics)
  • विद्युत चुम्बकीय प्रेरण और प्रत्यावर्ती धारा (electromagnetic induction and alternating current)
  • आधुनिक भौतिकी (modern physics)
  • प्रयोगात्मक भौतिकी (practical physics)
  • विविध प्रश्न (miscellaneous questions )

neet २०१८ – २०१९ जीव विज्ञान पाठ्यक्रम (NEET 2018 – 2019 syllabus biology in hindi )

  • सजीव जगत (the living world)
  • जीवन की विविधता (diversity of life)
  • मोनेरा (monera)
  • प्रॉटिस्टा (protista)
  • कवक (fungi)
  • पादप जगत (kingdom plantae)
  • जन्तु जगत (kingdom animalia)
  • जीवन की इकाई (unity of life)
  • कोशिकाओं का संरचनात्मक संगठन , कार्य और प्रजनन
  • कोशिकीय एंजाइम
  • पादपों और जन्तुओं की आकारिकी
  • पुष्पीय पादपों की आकारिकी
  • आवृतबीजीय पादपों की आन्तरिक संरचना
  • जन्तुओं की आकारिकी
  • जन्तु उत्तक
  • पादपों की कार्यिकी
  • पादप पोषण क्या है
  • प्रकाश संश्लेषण की परिभाषा , उदाहरण
  • श्वसन
  • बहुकोशिकीयता – संरचना और कार्य अर्थात मानव और जन्तुओं की शारीरिक और कार्यिकी
  • जन्तु पोषण
  • जन्तुओं में श्वसन
  • जन्तुओं में परिसंचरण
  • जन्तुओ में उत्सर्जन और परासरण नियमन
  • जन्तुओं में गति और प्रचलन
  • जन्तुओं में तंत्रिका समन्वयन और समाकलन
  • संवेदी अंग को कैसे परिभाषित करते है
  • जन्तुओं में रासायनिक समन्वयन क्या है
  • प्रजनन , वृद्धि और परिवर्तन
  • पुष्पीय पादपों में प्रजनन
  • पादप वृद्धि और गतियाँ
  • जन्तुओं में प्रजनन और परिवर्धन
  • वृद्धि , पुनरुद्भवन और व्यता क्या है
  • आनुवंशिकी (genetics)
  • पारिस्थितिकी और पर्यावरण
  • जिव और वातावरण
  • पारिस्थितिकी पादप समूह और अनुत्क्रमण
  • परितंत्र की संरचना और कार्य लिखिए
  • जीवोम , जीव मण्डल और जैव भूरासायनिक चक्र
  • प्रदूषण
  • प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
  • जैव विविधता और वन्य जिव संरक्षण
  • जीव विज्ञान के अनुप्रयोग (application of biology)
  • पादपों का घरेलुकरण तथा फसल सुधार
  • आर्थिक वनस्पति विज्ञान
  • जन्तुओं का पालतुकरण और आर्थिक जन्तु विज्ञान
  • फसलीय पीडकनाशी
  • जैव उर्वरक एवं जैविक पीडक नियन्त्रण (biofertilizers and biological pest controls)
  • जीन संरक्षण और नई फसलें
  • मानव रोग का परिचय (human diseases)
  • सामान्य मानव रोग
  • धुम्रपान , मदिरापान , औषधि व्यसन , मानसिक और सामुदायिक स्वास्थ्य
  • चिकित्सीय अनुप्रयोगों के लिए तकनीकियाँ
  • जैवतकनीकी
  • जैव ऊर्जा
  • मानव जनसंख्या की वृद्धि

neet २०१८ – २०१९ रसायन विज्ञान पाठ्यक्रम (NEET 2018 – 2019 syllabus chemistry in hindi )

  • गैसीय अवस्था
  • मोल एवं तुल्यांक अवधारणा
  • परमाणु संरचना
  • रेडियोएक्टिवता
  • रासायनिक बन्ध एवं संकर लवण
  • ऑक्सीकरण अपचयन
  • विद्युत अपघटन एवं विद्युत अपघटनी सेल
  • रेडोक्स अनुमापन
  • अणुसंख्य गुण धर्म और विलयन क्या है
  • रासायनिक बल गतिकी
  • रासायनिक साम्य
  • आयनिक साम्य
  • विलयन की चालकता
  • उष्मागतिकी
  • ऊष्मा रसायन
  • क्रिस्टलोग्राफी

अजोस्पर्म पादप में अलैंगिक जनन Aesoperm Plant In Asexual Fertility in hindi

Aesoperm Plant In Asexual Fertility in hindi अजोस्पर्म पादप में अलैंगिक जनन : अजोस्पर्म पादपों का अलैंगिक जनन से सम्बंधित भाग पुष्प है। पुष्प एक रूपान्तरित प्ररोह है क्यूंकि उसमे पर्व तथा पर्व संधियाँ पाई जाती है।  पुष्पासन पर चार पर्व संधियाँ पाई जाती है जिनमे से प्रत्येक से एक पुष्प चक्र विकसित होता है।
चार प्रकार के पुष्प चक्र पाए जाते है
1. बाह्य दलपुंज
2. दलपुंज
3. पुमंग
4. जायांग

पुष्प में नर जननांग पुमंग होती है जिसके इकाई पुंकेसर होती है।
एक प्रारूपित पुंकेसर में बाह्य रूप के निम्न भाग होते है।
1. पुतंतु :
वृन्त नुमा भाग जो पुंकेसर को पुस्पासन से जोड़ता है।
यह परागकोष में संवहन आपूर्ति करता है।
2. परागकोश :
यह पुंकेसर का मध्य भाग है जो दो पलियो में विभक्त रहता है , प्रत्येक पाली में चार बीजाणु धानियाँ पाई जाती है , उसे पुंकेसर को द्विपालित थिका कहा जाता है , एन्जोस्पर्म के अधिकांश पौधों में यह व्यवस्था पाई जाती है।
अपवाद स्वरूप फैमलीमालवेसी में मैनोथिकस तथा पाईस्पोरेजेट प्रकार के पुंकेसर पाए जाते है।
योजी :
यह पुतंतु तथा दोनों पराग पालियों का संधि स्थल है इसमें संवहन उत्तक पाए जाते है।

थैलोफाइटा , ब्रायोफाइटा , टेरिडोफाइटा क्या है , परिभाषा Thallophyta, bryophyta, pteridophyta

  1. थैलोफाइटा : Thallophyta, bryophyta, pteridophyta in hindi

वर्तमान में थैलोफाइटा में सिर्फ शैवाल शामिल है

शैवालों में हरे शैवाल सबसे विकसित माने जाते है जो हरे पौधों के प्रत्यक्ष पूर्वज माने जाते है

हरे शैवालो में निम्न तीन लक्षण पौधों से समानता दर्शाते है

  1. फ्लोरोफिल b की उपस्थिति
  2. सैलुलोस की कोशिका भित्ति
  3. संचित भोजन स्टार्च का पाया जाता है

शैवालो में जीवन चक्र अगुणित प्रकार का होता है, पादप शरीर अविभेदित थैलस प्रकार का होता है जो युग्म्कोद्भिद पीढ़ी को दर्शाता है , जीवन चक्र में केवल एक कोशिका द्विगुणित होती है

  1. ब्रायोफाइटा

मुख्य पादप शरीर थैलस प्रकार का होता है जो की अगुणित पीढ़ी को दर्शाता है , युग्मकोद्भिद पीढ़ी युग्मको का निर्माण करता है

युग्मको के संलयन से युग्मक बनता है

ब्रायोफाइटा में युग्मनज समसूत्री विभाजन द्वारा भ्रूण निर्माण करता है , यह द्विगुणित बिजानुद्भिद पीढ़ी को दर्शाता है , इसमें बीजाणुधानी बनती है जिसमे बीजाणु मात्र कोशिकाओ का निर्माण होता है

ये समस्त संरचनाए द्विगुणित में होती है , बीजाणु मात्र कोशिका में अर्धसूत्री विभाजन होने से बीजाणु का निर्माण होता है जो युग्मकोद्भिद पीढ़ी का आरम्भ करती है

युग्मक युग्मकोद्भिद पीढ़ी की प्रारम्भ कोशिका है , बीजाणुद्भिद पीढ़ी युग्मनज से शुरू होती है तथा बीजाणुद्भिद की अंतिम कोशिका बीजाणु मात्र कोशिका होती है

ब्रायोफाइटा में बीजाणुद्भिद पीढ़ी युग्मकोद्भिद पादप आश्रित रहती है

  1. टेरिडोफाइटा

इनका मुख्य पादप शरीर द्विगुणित बीजाणुद्भिद होता है जो जड़ , तना , पत्ती में विभेदित होता है , पत्तियों पर बीजाणु धानिया लगी होती है , बीजाणु धानियों में बीजाणु मात्र कोशिकाएं पाई जाती है

बीजाणु मात्र कोशिकाएं अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा बीजाणु बनाती है , बीजाणु नयी युग्मकोद्भिद का प्रारम्भ करते है , बीजाणु अंकुरित होकर थैलस बनाते है तो एक अगुणित तथा अविभेदित पादप होता है , तो एक अगुणित तथा युग्मकोद्भिद पीढियां स्वतंत्र होती है तथा एक दूसरे पर आश्रित नहीं होती है इस प्रकार टेरिडोफाइटा में स्वतंत्र एकांतर लक्षण पाया जाता है

प्रोथैलस में युग्मक धानियाँ पाई जाती है जिनमे नर मादा युग्मको का निर्माण होता है जो संलयन द्वारा युग्मक बनाते है , युग्मनज बीजाणुद्भिद पादप का निर्माण करते है

जैव विविधता और संरक्षण (Biodiversity and its Conservation) notes in hindi

12th class biology Biodiversity and its Conservation notes in hindi जैव विविधता और संरक्षण

जैव विविधता क्या है परिभाषा व प्रकार Biodiversity Definition in hindi

 

जैव विविधता के प्रतिरूप , कारण , परितंत्र में महत्व Biodiversity patterns in hindi

 

रिवेट पोवर परिकल्पना Rivet popper hypothesis in hindi , जैव विविधता की क्षति

 

जैव विविधता की क्षति अथवा जाति विलोपन का कारण Biodiversity damage & causes

 

जैव विविधता का संरक्षण Conservation of Biodiversity in hindi

 

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जैव विविधता का संरक्षण Conservation of Biodiversity in hindi

Conservation of Biodiversity in hindi जैव विविधता का संरक्षण :

जैव विविधता को बचाने के लिए दो विधियां अपनाई जाती है

[1] स्वस्थानी संरक्षण (in situ conservation) :

इस तकनीक में जीव जंतुओं को उनके खुद के प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रखा जाता है |

जैव विविधता हॉट  विस्फोट (Biodiversity hot explosion) :

विचित्र जिले में बहुत सारी जातियां पाई जाती है और यह जातीय किसी अन्य स्थान पर नहीं मिलती सर्वप्रथम 25 हॉट विस्फोट थे परंतु अब विश्व में इनकी संख्या 34 है ,  भारत में 3 जैव विविधता है

i  पश्चिमी घाट

ii  श्रीलंका-  इंडो  बरगा

iii  हिमालय

हॉट विस्फोट की विशेष सुरक्षा  से जातियों के विलोपन को 30% कम किया जा सकता है |

भारत में जैव विविधता संपन्न क्षेत्रों के रूप में 14 जीव मंडल संरक्षित क्षेत्र 90 राष्ट्रीय उद्यान और 448 वन्यजीव अभयारण्य मौजूद है |

पवित्र उपवन :

मेघालय की खासी व जयतिया पहाड़ी,  राजस्थान की अरावली पहाड़ियां ,  मध्य प्रदेश की सरगुजा , चंदा व बस्तर क्षेत्र पवित्र उपवन है |  इन उपवनों के वृक्ष व वन्य जीव लोगों की धार्मिक मान्यताओं के कारण संरक्षित है इसलिए इन्हें पवित्र उपवन कहते हैं |

[2]  बाह्य स्थाने संरक्षण (Protecting External Places) :

संकटग्रस्त जातियों के  युग्मको को निम्न ताप परीक्षण ( क्रायोप्रिजर्वेशन) तकनीकों द्वारा लंबे समय तक परिरक्षित किया जा सकता है ,  परिरक्षित अंड युग्मको को नर युग्मको के साथ पात्रे निषेचन करवाया जा सकता है,  इसी तरह पौधों के बीजों को बीज बैंक में रखा जा सकता है इस प्रकार के संरक्षण को बाह्य स्थाने संरक्षण कहते हैं |

वर्ष 1992 में जैव विविधता संरक्षण के लिए रियोडीजेनेरियो हमें हुई जैव विविधता पर पृथ्वी सम्मेलन और 2002 में दक्षिण अफ्रीका के दोहान्स वर्ग में हुए विश्व शिखर सम्मेलन में 190 देशों ने हिस्सा लिया जिसमें सन 2010 तक जैव विविधता की क्षति को कम करने की रापत ली गई |

प्रश्न 1 :  जैव विविधता को हमें क्यों संरक्षित करना चाहिए ?

उत्तर : 1.  संकीर्ण रूप में उपयोगी –  दवाएं ,  रंग,  कीटनाशी

  1.  व्यापक रूप से –  ऑक्सीजन ,  परागण,  पर्यटन
  2.  नैतिक रुप से

जैव विविधता की क्षति अथवा जाति विलोपन का कारण Biodiversity damage & causes

Biodiversity damage or the cause of caste extinction जैव विविधता की क्षति अथवा जाति विलोपन का कारण :

  1. आवासीय क्षति तथा विखंडन (Residential Damage and Fission) :

उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों की  क्षति आवासीय शक्ति का सबसे अच्छा उदाहरण हैएक समय वर्षा वन पृथ्वी के  14% क्षेत्र में फैले थे लेकिन अब 6% से अधिक क्षेत्र में भी नहीं है |

विशाल अगेजन  वर्षा  वन को सोयाबीन की खेती व जानवरों के चारागाहों के लिए काटकर साफ कर दिया गया है यह वन पृथ्वी के वायुमंडल को 20% से भी ज्यादा ऑक्सीजन प्रदान करते हैं |

(2) अतिदोहन (Overdose):

मानव द्वारा प्राकृतिक संपदा का अत्यधिक दोहन होने से पिछले 500 वर्षों में स्टेलर समुद्री गाय ,  पैसेंजर कबूतर आदि विलुप्त हो चुके हैं |

(3)  विदेशी जातियों आक्रमण :

नील नदी की मछली नाइल पर्चको पूर्वी अफ्रीका की विक्टोरिया झील में डाला गया तो उस झील की सिकलिन मछलियां कि 200 से भी अधिक जातियां विलुप्त हो गई |

इसी तरह मछली पालन के उद्देश्य से लाई गई अफ्रीकन कैट फिश ,  कलैरियश , गैरिपाईनस मछलियां भारत की नदियों की कैटफ़िश मछलियों के लिए खतरा पैदा कर रही है |

(4)  महाविलुप्तता (Extinction) :

जब एक मुख्य प्रजाति विलुप्त होती है तब उस पर आधारित या उस पर निर्भर जाती भी विलुप्त होने लगती है इसे  सह विलोपन कहते हैं, जैसे एक परपोषी मछली के विलुप्त होने से उसके परजीवी भी विलुप्त हो जाते हैं |

सह विकसित परागणकारी सहोपकारिता :

एक पादप के विलोपन से परागकण कारी कीट का विलोपन  सह विकसित परागणकारी सहोपकारिताका अच्छा उदाहरण है |

रिवेट पोवर परिकल्पना Rivet popper hypothesis in hindi , जैव विविधता की क्षति

Rivet popper hypothesis in hindi रिवेट पोवर परिकल्पना : स्टैनफोर्ड के  पारिस्थितिकविद पॉल एहरलिक ने यह परिकल्पना दी जिसमें उन्होंने वायुयान को परितंत्र कहा और वायुयान में लगे कीलक ( रिवेट )  की तुलना जातियों से की उनके अनुसार अगर वायुयान में लगे रिवेटो को उसमें बैठे यात्री घर ले जाएं तो वायुयान उड़ने योग्य नहीं रह पाएगा इस परिकल्पना में रिवेट ले जाने को पारितंत्र में जातियों के लुप्त होने के रूप में समझाया गया है |

यदि यात्री रिवेट ले जाते रहे ( जातियां लुप्त होती रहे) तो वायुयान ( परितंत्र) नहीं चल पाएगा ,  वायुयान के पंखों का रिवेट का महत्व मुख्य जातियों की तरह ही होता है तथा इनके बिना वायुयान पारितंत्र बिल्कुल भी नहीं चल पाता |

प्रश्न 1 :  यदि पृथ्वी पर 20000 चिट्ठी जातियों के स्थान पर केवल 15000 ही रहे तो हमारा जीवन किस प्रकार प्रभावित होगा ?

उत्तर :  उन पदार्थों की मात्रा ज्यादा हो जाएगी जिन्हें कुछ विशिष्ट चींटी जातियां ही खाती है इससे खाद्य श्रंखला में विघ्न उत्पन्न होगा और हमारा जीवन प्रभावित होगा |

प्रश्न 2 :  पृथ्वी पर चीटियों ,  बिटिल (भृंग ) ,  मत्स्य ,  और ऑर्किड की कितनी जातियां हैं ?

उत्तर :  20000 चीटियां की जातियां ,  300000 भृंग ,  28000 मत्स्य जातियां है |

जैव विविधता की क्षति (Biodiversity damage) :

IUCN (International Union for Conservation of Nature and Natural Resources) की लाल सूची ( विलुप्त प्राणियों की सूची) के 2004 के आंकड़ों के अनुसार पिछले 500 वर्षों में 784 जातियां ( 338 कशेरुकी ,  359 अकशेरुकी ,  व 87 पादप जातियां) विलुप्त हो चुकी है |

नई विलुप्त जातियों में मौरीसस की ढोढो , रूस की स्टेलर समुद्री गाय ,  अफ्रीका की कवेगा , ऑस्ट्रेलिया की थाइलेसिन , जावा व केस्वियन के  बाघ विलुप्ति के कगार पर है |

विश्व की 15500 से भी अधिक जातियां विलुप्ति के कगार पर है ,  इस समय 12% पक्षी ,  33% स्तनधारी ,  32 प्रतिशत उभयचर व 31 प्रतिशत आवृत्तबीजी पादप जातियां विलुप्त हो चुकी है |

जातियों का विलुप्त होना जातीय विलोपन कहलाता है पृथ्वी की उत्पत्ति से लेकर अब तक पांच बार जातियों का विलोपन हो चुका है मानव क्रियाकलापों के कारण 6 विलोपन 100 से 1000 गुना तेजी से हो रहा है |

 

जैव विविधता के प्रतिरूप , कारण , परितंत्र में महत्व Biodiversity patterns in hindi

Biodiversity patterns in hindi जैव विविधता के प्रतिरूप कारण , परितंत्र में महत्व :

[1]अक्षांशीय प्रवणता (Latitudinal gradient) :

भूमध्य रेखा के उत्तर व दक्षिण का 3.5 अक्षांश का क्षेत्र उष्णकटिबंधीय क्षेत्र कहलाता है यहां वर्षा अधिक होने से जैव विविधता ज्यादा होती है परंतु भूमध्य रेखा के दोनों ओर 66.5 डिग्री अक्षांश तक जाने पर शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र मिलता है  यहां उष्णकटिबंधीय क्षेत्र से थोड़ी कम जैव विविधता मिलती है इसी तरह 90 डिग्री अक्षांश तक दुर्गों की ओर जाने पर शीत कटिबंधीय क्षेत्र में सबसे कम विविधता मिलती है |

अक्षांशीय प्रवणता को हम निम्न उदाहरण द्वारा समझ सकते हैं :  दक्षिण अमेरिका के अमेजन उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों की जैव विविधता सबसे अधिक होती है यहां 40000 पादप जातियां ,  3000 मत्स्य ,  1300 पक्षी ,  427 स्तनधारी ,  427 उभयचर ,  378 सरीसृप तथा 125000 से अधिक अकशेरुकी जातियां पाई जाती हैं |

इसी तरह भूमध्य रेखीय देश कोलंबिया में 1400 पक्षी जातियां जबकि 40 डिग्री अक्षांश उत्तर में स्थित न्यूयॉर्क में 105 व 70 डिग्री अक्षांश उत्तर में स्थित ग्रीनलैंड में केवल 56 जातियां ही पाई जाती हैं |

भारत भी भूमध्य रेखा के समीप स्थित है इसलिए जहां 1200 पक्षी जातियां पाई जाती हैं |

उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में जैव विविधता के कारण (causes of biodiversity in the tropical region) :

[1] अधिक उत्पादकता : सौर ऊर्जा अधिक होने से पादप अधिक प्रकाश संश्लेषण करते हैं अतः उत्पादकता ज्यादा होने से जैवविविधता भी ज्यादा होती है

[2]  जातीय क्षेत्र संबंध : जर्मनी के प्रकृति विज्ञानी व भूगोल शास्त्री एलेग्जेंडर वॉन हगबॉल्ट ने बताया कि अन्वेषण क्षेत्र की सीमा बढ़ाने पर अनवेराण क्षेत्र की सीमा बढ़ाने पर जातियों की समृद्धि भी बढ़ती है |

जातीय समृद्धि वह क्षेत्र के बीच का संबंध निम्न समीकरण द्वारा दिखाते हैं

LogS = LogC + zLog A

जहां S =  जातीय समृद्धि

A =  क्षेत्र

Z = समात्रयन  रेखा की ढाल  (परिवर्तन गुणांक)

C = y- अंतः खंड

यदि बड़े क्षेत्र हो तो जातीय क्षेत्र संबंध की समात्रयनरेखा की ढलान एकदम तिरछी खड़ी हो जाती है और Z का मान 0.6-1.2 हो जाता है |  जैसे उष्णकटिबंधीय वनों के फल हारी पक्षी वह स्तनधारियों के लिए रेखा की ढलान 1.15 होती है |

इस संदर्भ में तिरछी खड़ी ढलान का यह अर्थ है कि जितना बड़ा क्षेत्र होगा वहां जातियों की विविधता या समृद्धि उतनी ही ज्यादा होती है |

सामान्यतया छोटे क्षेत्रों के लिए z का मान 0.1 – 0.2 के आस-पास होता है |

जातीय विविधता का परितंत्र में महत्व (Importance of ethnic diversity in ecology) :

टिलमैन  के अनुसार किसी क्षेत्र में जितनी ज्यादा जातीय विविधता होगी उस हिसाब से वहां उत्पादकता भी ज्यादा होगी और परितंत्र भी अधिक स्थाई होगा |

जैव विविधता क्या है परिभाषा व प्रकार Biodiversity Definition meaning in hindi

 What is Biodiversity Definition meaning in hindi types जैव विविधता क्या है  परिभाषा : पृथ्वी के विभिन्न आवासों में तरह-तरह के पादप व जंतु जातियों की उपस्थिति को जैव विविधता कहते हैं |

जैव विविधता को कई प्रकार से विभाजित किया जा सकता है जैसे

  • अनुवांशिक विविधता (Genetic diversity) : अनुवांशिक विविधता का तात्पर्य किसी एक ही जाति में अलग-अलग किस्मों में पाई जाने वाली विभिन्नता से है जैसे सर्पगंधा (राऊवोल्फिया सपेंटाईना )जाति की अलग-अलग किस्मों से अलग-अलग सांद्रता वाला रेसर पिन नामक रसायन प्राप्त होता है जो औषधीय महत्व का होता है इसी तरह भारत में धान की 50,000 से अधिक व आम की 1000 से अधिक किसमें पाई जाती है |
  • जातीय विविधता (ethnic diversity) : यह विविधता जातीय स्तर पर होती है जैसे पूर्वी घाट की तुलना में पश्चिमी घाट में तरह-तरह की उभयचर जातियां है |
  • पारिस्थितिकीय विविधता (Ecological diversity) : पारिस्थितिक स्तर पर पाई जाने वाली विविधता पारिस्थितिक विविधता कहलाती है जैसे भारत में रेगिस्तान, वर्षा वन, पतझड़ वन आदि की पारी तंत्र विविधता नार्वे से अधिक है |

 

पृथ्वी और भारत में कितनी जातियां है :

IUCN (International Union for Conservation of Nature and Natural Resources) के आंकड़ों के अनुसार अभी तक 1.5 मिलियन अर्थार्थ 1500000 जातियां खोजी जा चुकी है ( 2004 के आंकड़ों के अनुसार) |

रॉबर्ट मेय के अनुसार 7 मिलियन ( 70 लाख) जातियां का आकलन हुआ है और इनमें से अभी तक केवल 20% जातियों को खोजा जा सका है |

विश्व में कुछ जातियों का 70% भाग जंतु जातियों वह 22 प्रतिशत भाग पादप प्रजातियों तथा शेष 8:00 प्रतिशत वन्यजीवों से भरा पड़ा है |

भारत विश्व का केवल 2.4 प्रतिशत घेरता है परंतु भारत की पारिस्थितिक विविधता ज्यादा होने से यहां जैव विविधता 8.1 प्रतिशत है भारत में लगभग 45,000 पादप प्रजातियां व इन से दोगुना जंतु जातियां खोजी जा चुकी है परंतु रॉबर्ट मेय के अनुसार भारत में 100000 से अधिक पादप व तीन लाख से अधिक जंतु जातियां खोजी जानी बाकी है |

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पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) notes in hindi

Ecosystem notes in hindi 12th class biology chapter पारिस्थितिकी तंत्र जीव विज्ञान 12 नोट्स hindi में

परितंत्र संरचना एवं क्रियाशीलता , परिभाषा , Ecology and Functionality in hindi

 

जैव भू रासायनिक चक्र या पोषकों का चक्रण Bio-geological chemical cycle

 

खाद्य श्रृंखला परिभाषा क्या है food chain definition in hindi

 

पारिस्थितिक पिरामिड की परिभाषा क्या है तथा प्रकार Ecological pyramid in hindi

 

पारिस्थितिक अनुक्रमण की परिभाषा क्या है व प्रकार ecological succession in hindi

 

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