हाइड्रोजन (H2) के विभिन्न रूप , ऑर्थो व पैरा रूप में अन्तर , डाई हाइड्रोजन (dihydrogen) बनाने की विधियाँ 

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हाइड्रोजन (H2) के विभिन्न रूप :

(i) अधिशोषित हाइड्रोजन : कुछ धातुओं की सतह पर पर्याप्त मात्रा में H2 अधिशोषित हो जाती है इसे अधिशोषित या अभिधारण (H2) हाइड्रोजन कहते है।
(ii) परमाण्विक हाइड्रोजन : आण्विक हाइड्रोजन के उच्च ताप पर तापीय अपघटन से परमाण्विक हाइड्रोजन प्राप्त होती है।
H2 → 2H
यह अभिक्रिया ऊष्माशोषी है।
(iii) नवजात हाइड्रोजन : क्रियाकारकों के संयोग के समय उत्पन्न हाइड्रोजन को नवजात हाइड्रोजन कहते है।
नवजात हाइड्रोजन सामान्य हाइड्रोजन की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील तथा प्रबल अपचायक होती है।
(iv) ऑर्थो व पैरा हाइड्रोजन : हाइड्रोजन के एक अणु में दो हाइड्रोजन (H2) परमाणु होते है तथा प्रत्येक परमाणु का एक प्रोटोन व एक इलेक्ट्रॉन होता है।
इलेक्ट्रान व प्रोटॉन दोनों ही अपने अक्ष के सापेक्ष चक्रण का गुण रखते है।
जब दो हाइड्रोजन परमाणु आपस में संयोग कर एक अणु बनाते है तो इनका चक्रण या तो समान दिशा में होता है या विपरीत दिशा में हो सकता है।
प्रोटोन के चक्रण के आधार पर हाइड्रोजन दो प्रकार के होते है।
(a) ओर्थो हाइड्रोजन : जब प्रोटोन या नाभिक का चक्रण एक ही दिशा में होता है तो इस प्रकार के हाइड्रोजन का “ऑर्थो H” कहते है।
(b) पैरा हाइड्रोजन : जब प्रोटोन या नाभिक का चक्रण विपरीत दिशा में होता है तो इस प्रकार के हाइड्रोजन को “पैरा H2” कहते है।
नोट : कमरे के ताप पर हाइड्रोजन में 75% ऑर्थो व 25% पैरा रूप होता है।
ऑर्थो व पैरा रूप में अन्तर :
  • ओर्थो रूप पैरा रूप की तुलना में अधिक स्थायी होता है।
  • ओर्थो रूप की चालकता पैरा रूप से कम होती है।
  • ओर्थो रूप का चुम्बकीय आघूर्ण प्रोटोन की तुलना में दुगुना होता है जबकि पैरा रूप का शून्य होता है।

डाई हाइड्रोजन (dihydrogen) बनाने की विधियाँ

1. प्रयोगशाला विधि : प्रयोगशाला में डाई हाइड्रोजन गैस का निर्माण जिंक की तनु H2SO4 अम्ल से अभिक्रिया द्वारा किया जाता है।  इस विधि में जिंक को बोतल में लिया जाता है तथा H2SO4 को कीप द्वारा बूंद बूंद करके डालते है व उत्पन्न गैस को अलग पात्र में एकत्रित कर लेते है।
Zn +  H2SO4
ZnSO4
+ H2
2. धातु पर अम्ल की क्रिया द्वारा : धातु पर अम्ल की क्रिया करने पर डाई हाइड्रोजन (H2) गैस प्राप्त होती है।
उदाहरण : Fe + 2HCl → FeCl2 + H2
3. धातुओं पर क्षार की क्रिया द्वारा : धातुओं पर क्षार की क्रिया करने पर डाई हाइड्रोजन (H2) गैस प्राप्त होती है।
उदाहरण : Zn +
2NaOH → Na
2ZnO3 + H2
4. धातु हाइड्राइड पर जल में अभिक्रिया द्वारा : धातु हाइड्राइड पर जल में अभिक्रिया करने पर डाई हाइड्रोजन (H2) गैस प्राप्त होती है।
उदाहरण : CaH2 + 2H2O → Ca(OH)2 + 2H2
5. सक्रीय धातुओं पर जल की अभिक्रिया द्वारा : सक्रीय धातुओं पर जल की अभिक्रिया करने पर डाई हाइड्रोजन (H2) गैस प्राप्त होती है।
example : 2Na + 2H2O → 2NaOH + H2

Mg + 2H2O → Mg(OH)2 + H2

 डाई हाइड्रोजन (H2) निर्माण की औद्योगिक विधि :
1. उदासीन गैस से : प्राकृतिक गैस मुख्यतः मैथेन को जलवाष्प के साथ उत्प्रेरक की उपस्थिति में गर्म करने पर CO तथा H2 का निर्माण होता है।
CO + H2O → CO2 + H2

CH4 + H2O
→ CO + 3H2

डाई हाइड्रोजन (H2) के भौतिक गुण 

  • यह वायु से हल्की होती है।
  • यह रंगहीन , गंधहीन , स्वादहीन होती है।
  • यह जल में अल्पविलेय होती है।
  • यह ज्वलनशील तथा कम क्रियाशील गैस होती है।
  • इसका गलनांक और क्वथनांक कम होता है।
  • इसका क्रांतिक ताप अत्यन्त कम होता है।
  • द्रव H2 का उपयोग क्रायोजेनिक द्रव के रूप में किया जाता है।

डाई हाइड्रोजन (H2) के रासायनिक गुण 

1. अपचायक गुण : जब H2 को धात्विक ऑक्साइड पर प्रवाहित किया जाता है तो ये धातु में अपचयित हो जाते है।
CuO + H2 → Cu + H2O
2. धातुओं के साथ अभिक्रिया : डाई हाइड्रोजन (H2) धातुओं के साथ क्रिया करके धात्विक हाइड्राइड बनाती है।
2Na + H2 → 2NaH

Ca + H2 → CaH2

3. अधातुओं के साथ अभिक्रिया : डाई हाइड्रोजन (H2) अधातुओं से क्रिया करके हाइड्रोजन हैलाइड बनाती है।
H2 + X2 → 2HX

यहाँ X = -F , -Cl , -Al , -I

4. वनस्पति तेलों का हाइड्रोजनिकरण : निकैल (Ni) उत्प्रेरक की उपस्थिति में वनस्पति तेलों का हाइड्रोजनीकरण करने पर वनस्पति घी का निर्माण होता है।
वनस्पति तेल वनस्पति घी
5. डाई ऑक्सीजन के साथ क्रिया : डाई हाइड्रोजन कमरे के ताप पर वायु या डाई ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर जल का निर्माण करती है , यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी है।
2H2 + O2 → 2H2O
6. डाई नाइट्रोजन के साथ क्रिया : डाई हाइड्रोजन उत्प्रेरक व दाब की उपस्थिति में डाई नाइट्रोजन से अभिक्रिया करके NH3 बनाती है।
N2 + 3H2 → 2NH3

डाई हाइड्रोजन (H2) के उपयोग

  • इसका उपयोग अमोनिया मैथिल , एल्कोहल , HCl आदि के निर्माण में होता है।
  • इसका उपयोग अन्तरिक्ष अनुसंधान राकेट ईंधन के रूप में किया जाता है।
  • ऑक्सी हाइड्रोजन ज्वाला का उपयोग बेल्डिंग के लिए किया जाता है।
  • डाई हाइड्रोजन (H2) का उपयोग गुब्बारों में किया जाता है।
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