हाइड्राइड की परिभाषा क्या है , हाइड्राइड के प्रकार , जल किसे कहते है , जल (H2O) के भौतिक गुण

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(hydride in hindi) हाइड्राइड : डाई हाइड्रोजन उत्कृष्ट गैस के अतिरिक्त लगभग सभी तत्वों के साथ निश्चित परिस्थितियों में संयोग करके द्विअंगीय यौगिक बनाते है जिन्हें हाइड्राइड कहते है।

हाइड्राइडों का वर्गीकरण

ये तीन प्रकार के होते है –
(i) सहसंयोजी या आण्विक हाइड्राइड : अधिकांश ‘P ब्लॉक’ के तत्वों के साथ H2 परस्पर संयोग करके सहसंयोजी हाइड्राइड बनाते है।
इनके मध्य दुर्बल वांडरवाल बल पाए जाते है अत: ये वाष्पशील होते है।
लुईस संरचना में इलेक्ट्रॉन की संख्या तथा बन्धो की संख्या के आधार पर सहसंयोजी हाइड्राइड तीन प्रकार के होते है –
(a) इलेक्ट्रोन न्यून हाइड्राइड : 13 वें समूह के तत्व डाई हाइड्रोजन से क्रिया करके इलेक्ट्रॉन न्यून हाइड्राइड बनाते है।  इनमें लुईस संरचना में इलेक्ट्रॉन की संख्या अपर्याप्त होती है अत: ये इलेक्ट्रॉन युग्म ग्राही होते है एवं लुईस अम्ल की भाँती व्यवहार करते है।
(b) इलेक्ट्रोन परिशुद्ध हाइड्राइड : 14 वें समूह के तत्व डाई हाइड्रोजन के साथ संयोग कर इलेक्ट्रॉन परिशुद्ध हाइड्राइड बनाते है।  इन हाइड्राइडो में केन्द्रीय परमाणु में पर्याप्त मात्रा में इलेक्ट्रॉन होते है।
उदाहरण : CH4
, SiH
4 आदि।
(c) इलेक्ट्रान समूह हाइड्राइड : 15 वें से 17 वें समूह तक के तत्व डाई हाइड्रोजन के साथ संयोग कर इलेक्ट्रॉन समूह हाइड्राइड बनाते है।
इनमें लुईस संरचना में आवश्यक इलेक्ट्रॉन की संख्या आधिक्य के रूप में होती है अर्थात एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते है।
ये इलेक्ट्रोन युग्म दाता होते है तथा लुईस क्षार की भाँती व्यवहार करते है।
उदाहरण : NH3 , H2O आदि।
(ii) आयनिक या लवणीय हाइड्राइड : क्षार धातु तथा क्षारीय मृदा धातु डाई हाइड्रोजन के साथ संयोग कर रस समीकरणमिति यौगिक बनाते है इन्हें आयनिक हाइड्राइड कहते है।
आयनिक हाइड्राइड ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते है तथा गलित अवस्था में विद्युत के सुचालक होते है।
इनके गलनांकक्वथनांक के मान उच्च होते है।
(iii) धात्विक या अरससमीकरण मिति या अन्तराकाशी हाइड्राइड : d तथा f खण्ड के तत्व डाई हाइड्रोजन के साथ संयोग करके धात्विक हाइड्राइड बनाते है।
डाई हाइड्रोजन का आकार छोटा होने के कारण धातु परमाणुओं के मध्य रिक्त स्थानों में ये समा जाते है इसलिए इन्हें अन्तराकाशी हाइड्राइड कहते है।
उदाहरण : SeH2 , LaH3 आदि।

जल (H2O)

जल सभी प्राणियों के शरीर का मुख्य घटक है।  जल एक सार्वत्रिक विलायक है तथा सजीवो के जीवित रहने के लिए अतिआवश्यक यौगिक है।
जल के भौतिक गुण : कमरे के ताप पर यह रंगहीन , गंधहीन , स्वादहीन द्रव है।  यह लिटमस के प्रति उदासीन होता है तथा ‘H’ बंध की उपस्थिति के कारण इसका क्वथनांक उच्च होता है।
जल की संरचना : जल में ऑक्सीजन परमाणु का SP3 संकरण होता है।  इसमें ऑक्सीजन परमाणु पर 2 loan pair उपस्थित होते है। इसकी आकृति ‘V’ shape व बंध कोण 104 डिग्री 5 मिनट का होता है।
ऑक्सीजन और हाइड्रोजन की विद्युत ऋणता में अधिक अंतर होने के कारण जल ध्रुवीय होता है।  जल में हाइड्रोजन परमाणु पर आंशिक ऋणावेश के कारण जब जल के अणु पास पास आते है तो वे इस प्रकार से व्यवस्थित हो जाते है कि प्रत्येक अणु का धनावेशित हाइड्रोजन अन्य अणु के ऋणावेशित ऑक्सीजन की ओर आकर्षित होकर एक नए बंध का निर्माण करता है जिसे “H” बंध कहते है।
“H” बंध (हाइड्रोजन बन्ध) की उपस्थिति के कारण जल में आण्विक संघनन होता है , हाइड्रोजन बंध की उपस्थिति के कारण जल का उच्च हिमांक , उच्च क्वथनांक , उच्च वाष्पन ऊष्मा , उच्च संलयन ऊष्मा होती है।

बर्फ (ICE) : बर्फ जल का क्रिस्टलीय रूप है। X -ray अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि बर्फ के क्रिस्टल में प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु , चार अन्य हाइड्रोजन परमाणुओं से चतुष्फलकीय रूप में घिरा होता है।  इसमें से दो सहसंयोजक बंध तथा दो हाइड्रोजन बंध होते है।
बर्फ में हाइड्रोजन बंध के कारण खुले पिंजरेनुमा संरचना होती है , जिससे बर्फ का आयतन बढ़ जाता है।
बर्फ का घनत्व जल से अधिक होने के कारण यह जल में तैरती रहती है।
जल के रासायनिक गुण :
1. उभयधर्मी प्रकृति : जल की प्रकृति उभयधर्मी होती है क्योंकि यह अम्ल व क्षार दोनों से अभिक्रिया कर लेता है।

HCl + H2O → H3O+ + Cl

NH3 + H2O → NH4OH → NH4+ + OH
2. हाइड्राइड व कार्बाइड से क्रिया :

CaH2 + 2H2O → Ca(OH)2 + 2H2
CaC2 + 2H2O → Ca(OH)2 + C2H2

Al4C3 + 12H2O → 4Al(OH)2 + 3CH4
3. अधातुओं से क्रिया :

2F2 + 2H2O → 4HF + O2

2Cl2 + 2H2O → 4HCl + O2
4. धातु के साथ क्रिया :
2Na + 2H2O → 2NaOH + H2
5. जल अपघटन : जब किसी लवण को जल में घोला जाता है तो वह अपने संगत अम्ल व क्षार में विभक्त हो जाता है , इस प्रक्रिया को जल अपघटन कहते है।
उदाहरण : (a) Na2CO3 को जल में घोलने पर विलयन क्षारीय हो जाता है।
Na2CO3 + 2H2O →  H2CO3 + 2Na+ + 2OH
(b) CuSO4 का विलयन अम्लीय प्रकृति का होता है।
CuSO4 + 2H2O → Cu(OH)2 + 2H+ + 2SO42-
क्रिस्टल जल : जब किसी क्रिस्टलीय पदार्थ में जल के अणु निश्चित अनुपात  उपस्थित होते है तो जल के इस रूप को क्रिस्टलन जल कहते है।

CuSO4.5H2O (नीला थोथा)

MgSO4.7H2O

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