हाइड्रोजन (hydrogen in hindi) , आवर्त सारणी में हाइड्रोजन की स्थिति , क्षार धातु से भिन्नता , समस्थानिक

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(hydrogen in hindi) हाइड्रोजन : हेनरी केवेन्डिश ने 1766 में धातु पर अम्ल की अभिक्रिया से निकलने वाली गैस का नाम ज्वलनशील गैस रखा।
लेवोशिएर ने 1783 में इस गैस का नाम हाइड्रोजन रखा।  हाइड्रोजन एक ग्रीक शब्द है –
अर्थात हाइड्रा = जल
जन = उत्पन्न करने वाली
अर्थात जल उत्पन्न करने वाली गैस।
हाइड्रोजन को प्रोटियम भी कहते है जिसका अर्थ है प्रथम।  अर्थात हाइड्रोजन आवर्त सारणी का प्रथम तत्व है।

आवर्त सारणी में हाइड्रोजन की स्थिति

[I] हाइड्रोजन की क्षार धातु के साथ समानता :
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास : हाइड्रोजन तथा क्षार धातु दोनों के संयोजी कोश अर्थात बाह्यतम कोश में एक इलेक्ट्रॉन होता है।
(ii) विद्युत धनात्मक प्रकृति : क्षार धातुओं की भाँती हाइड्रोजन भी एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर एक संयोजी धनायन का निर्माण करती है।
H → H+ + e

Na → Na+ + e

(iii) ऑक्सीकरण अवस्था : क्षार धातु सभी यौगिको में +1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाती है तथा हाइड्रोजन का भी अधिकांश यौगिकों में +1 ऑक्सीकरण अंक होता है।
(iv) संयोजकता : क्षार धातुओं की भाँती हाइड्रोजन की संयोजकता भी एक होती है।
(v) अधातुओं के साथ अभिक्रिया : क्षार धातु तथा हाइड्रोजन दोनों ही अधातु या विद्युत ऋणी तत्वों के साथ आसानी से अभिक्रिया कर लेते है।
2Na + Cl2 → 2NaCl

H2 + Cl2 → 2HCl

(vi) अपचायक प्रकृति : क्षार धातुओं के समान हाइड्रोजन भी अपचायक प्रकृति प्रदर्शित करती है अर्थात ये दोनों यौगिको से ऑक्सीजन हटाते है।
[II] हाइड्रोजन की क्षार धातु से भिन्नता :
(i) हाइड्रोजन अधातु है जबकि क्षार धातुएं प्रारूपित धातु है।
(ii) हाइड्रोजन द्विपरमाणुक है , क्षार धातुएँ एक परमाणुक है।
(iii) हाइड्रोजन के यौगिक सामान्यत: सहसंयोजक होते है जबकि क्षार धातुओं के यौगिक सामान्यत: आयनिक होते है।
(iv) हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी क्षार धातुओं से अधिक होती है अत: इसका विद्युत धनी लक्षण या अभिक्रियाशीलता क्षार धातुओं की तुलना में बहुत कम होती है।
[III] हाइड्रोजन की हैलोजन के साथ समानता :
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास : हाइड्रोजन तथा हैलोजन दोनों के बाह्यतम कोश में उत्कृष्ट गैस विन्यास से एक इलेक्ट्रॉन कम होता है।
H + e → H (He के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास)

F + e → F(Ne के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास)

(ii) विद्युत ऋणात्मक प्रकृति : हाइड्रोजन व हैलोजन दोनों ही एक एक इलेक्ट्रान ग्रहण कर एक संयोजी ऋणायन बनाते है।
H + e → H
F + e → F 
(iii) ऑक्सीकरण अंक : हैलोजन का यौगिकों में ऑक्सीकरण अंक -1 होता है तथा हाइड्राइडो में हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण अंक -2 होता है।
(iv) संयोजकता : हैलोजन के समान हाइड्रोजन की संयोजकता भी 1 होती है।
(v) धातु व अधातु से क्रिया : हैलोजन के समान हाइड्रोजन भी विभिन्न धातु व अधातु से अभिक्रिया कर रस-समीकरणमिती यौगिक बनाता है।
(vi) अधात्विक लक्षण : हैलोजन के समान हाइड्रोजन भी एक अधातु है।
(vii) परमाणुकता : हैलोजन के समान हाइड्रोजन भी द्विपरमाणुक अणु है।
(viii) आयनन एन्थैल्पी : हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी भी हैलोजन के समान उच्च होती है।
(ix) एनोड पर मुक्त होना : जब हाइड्रोजन व हैलोजन के क्षार धातुओं से बने लवण का विद्युत अपघटन कराया जाता है तो दोनों ही एनोड पर मुक्त होती है।
[IV] हाइड्रोजन की हैलोजन के साथ असमानता या भिन्नता :
(i) हैलोजन आसानी से हैलाइड आयन बनाता है जबकि हाइड्रोजन केवल क्षार धातुओं व क्षार मृदा धातुओं के साथ बने यौगिकों में ही हाइड्राइड बनाता है।
(ii) हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था केवल +1 व -1 होती है जबकि हैलोजन की ऑक्सीकरण अवस्था (F के अतिरिक्त) -1 से +7 तक होती है।
(iii) आण्विक अवस्था में हाइड्रोजन पर कोई एकाकी इलेक्ट्रान युग्म नहीं होता है जबकि हैलोजन में तीन एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते है।
(iv) हैलोजन के ऑक्साइड सामान्यतया अम्लीय होते है जबकि हाइड्रोजन के ऑक्साइड उदासीन होते है।
(v) हाइड्रोजन के बाह्यतम कोश में एक इलेक्ट्रॉन होता है जबकि हैलोजन के बाह्यतम कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते है।
हाइड्रोजन का आवर्त सारणी में विशिष्ट स्थान : आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का स्थान विवादस्पद है क्योंकि हाइड्रोजन की क्षार धातु व हैलोजन से समानता व विभिन्नता के आधार पर आवर्त सारणी में इसे एक निश्चित स्थान देना बहुत कठिन है अत: इसे आवर्त सारणी में अलग से रखा गया है।
हाइड्रोजन के समस्थानिक : हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक है –
प्रोटियम , ड्यूटीरियम , ट्राइटियम।
इनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में समानता के कारण इनकी रासायनिक अभिक्रिया समान होती है लेकिन द्रव्यमानों में अंतर के कारण इनके भौतिक गुण व अभिक्रिया की दर अलग अलग होती है।
ड्यूटीरियम भारी H2 के रूप में जाना जाता है तथा ट्राइटियम रेडियो सक्रीय होते है।