मलेशिया के बारे में जानकारी इन हिंदी | malaysia in hindi information मलेशिया का इतिहास हिस्ट्री

By   September 15, 2020

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मलेशिया
इकाई की रूपरेखा
उद्देश्य
प्रस्तावना
देश
जनता
धर्म
अर्थव्यवस्था
नई आर्थिक नीति
प्रशासनिक एवं सामाजिक स्थितियां
प्रशासनिक संरचना
न्याय प्रणाली
सैन्य बल
शिक्षा प्रणाली एवं स्वास्थ्य सेवाएं
सांस्कृतिक जीवन
मलेशियाई राजनैतिक संस्कृति
संविधान का विकास
योरोपीय आक्रमण
ब्रिटिश प्रशासन
युद्धोत्तर मलाया
स्वाधीनता
मलेशिया का निर्माण
कोबोल्ड आयोग
संविधान की प्रमुख विशेषताएं
संघीय कार्यपालिका
यांग डी-परटुआन आगौंग
चुनाव
शासकों का सम्मेलन
प्रधानमंत्री
कैबिनेट एवं मंत्रीगण
यांग डी-परट्आन आगौंग की संवैधानिक स्थिति
संधीय संसद
दीवान नेगारा
दीवान राकयत
सत्र
समिति प्रणाली
विधानमंडलीय प्रक्रिया
संसद के कार्य
संधीय न्यायपालिका एवं नागरिकों के अधिकार
न्यायिक प्राधिकारी
प्रभावक्षेत्र
न्यायपालिका की स्वतंत्रता
नागरिकों के अधिकार
पार्टी प्रणाली
आम चुनाव, संक्षेप में
एलाइन्स पार्टी
अन्य पार्टियां
पार्टी व्यवस्था की प्रकृति
मलेशिया अंतर्राष्ट्रीय मामलों में
भावी परिणाम
विदेश संबंध
सारांश
शब्दावली
कुछ उपयोगी पुस्तकें
बोध प्रश्नों के उत्तर

उद्देश्य
इस इकाई के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:
ऽ मलेशिया की सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था का वर्णन करना
ऽ उस पृष्ठभूमि का वर्णन करना जिसके जवाब में मौजूदा संविधान की उत्पत्ति हुई और
ऽ यह किस तरह काम करता है, तथा
ऽ इसकी सरकार तथा राजनीति का वर्णन करना।

प्रस्तावना
मलेशियाई संघ, जोकि एक संवैधानिक सम्राट द्वारा शासित संसदीय जनतंत्र है, तथा राष्ट्रकुल देशों का एक सदस्य है, 1963 में बना था। इसकी एक पुरानी लम्बी राजनैतिक परंपरा तथा विशिष्ट सामाजिक एवं राजनैतिक ढांचा रहा है। मलेशिया एक बहुल समाज है। इसकी बहल प्रकृति के चलते ही मलेशिया ने शनैः शनैः एक बहुदलीय प्रणाली की उत्पत्ति का अनुभव किया है।

देश
मलेशियाई संघ दक्षिण पूर्व एशिया का हृदय-स्थल है। यह भूमध्य रेखा के नजदीक स्थित एक अर्धचन्द्राकार देश है। इसके तहत दो पृथक क्षेत्र शामिल हैं-क्रा इस्थमस से जोहोर के जलसंयोगी क्षेत्रों तक फैला मलेशियाई प्रायद्वीप, तथा बर्नियो द्वीप के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित सबाह एवं सरवाक।

इन क्षेत्रों को लगभग, 750 कि.मी. लम्बे दक्षिण चीनी समुद्र ने पृथक करके रखा हुआ है। मलेशिया प्रायद्वीप की सीमाएं उत्तर में थाइलैण्ड से लगी हैं। दक्षिण में एक सेत् मार्ग द्वारा यह सिंगापुर संघ से जुड़ा हुआ है। पश्चिम में मैलम्का के जलसंयोगी क्षेत्रों के पार सुमात्रा का इंडोनेशियाई द्वीप स्थित है।

जनता
मलेशिया में विविध जातीय समूह मौजूद हैं। किन्तु वहां अनेकता में एकता का लक्षण मौजूद है। मलेशियाई लोग, मालेओ अन्य देसी लोगों, समुद्री दायकों (इबानो), मैदानी दायको (बिदायओ), कडाजनो, कनायाओ, मेलानाऊओ तथा मारूतों (जिन्हें ‘‘भमिपत्रों’’ के नाम से जाना जाता है), तथा साथ ही साथ चीनीयों, भारतीयों, यूरेशियनों तथा अन्य अनेक तरह के लोगों से मिलकर बने हैं। वे सभी एक साथ रहते और काम करते हैं। 1990 में 14.6 मिलियन की कुल जनसंख्या में से 57.3 प्रतिशत माले व अन्य देसी लोग थे, 32.1 प्रतिशत चीनी, 10 प्रतिशत भारतीय तथा 0.6 प्रतिशत अन्य लोग थे।

धर्म
संविधान के अन्तर्गत मलेशिया का सरकारी धर्म इस्लाम है। किन्तु वहां पूजा के अधिकार की स्वतंत्रता है। माले, जो कि प्रायः मुसलमान है और बहासा मलेशियाई (राष्ट्र भाषा) बोलते हैं, मलेशिया कि आबादी का आधा हिस्सा हैं। कुछ भारतीय व चीनी लोग भी हैं। जोकि मुसलमान हैं, चीनी लोग मुख्यतः बौद्ध अथवा ताओवादी हैं। अधिकांश भारतीय लोग हिन्दू हैं किन्तु वहां सिख अल्पसंख्यक भी मौजूद हैं। शासक मैलम्का में पलाऊ पिनांग को छोड़कर, जहां धार्मिक प्रमुख, यांग डी-परटुआन आगौंग, यानि सर्वोच्च राज्य प्रमुख होता है, शेष सभी राज्यों में इस्लाम का धर्म प्रमुख है। प्रत्येक राज्य में राज्य को सलाह देने के लिये एक धार्मिक परिषद है। देश पर लागू होने वाले सभी इस्लामी प्रचलन अथवा समारोहों का निर्णय कुल मिलाकर इस्लामी मामलों की राष्ट्रीय परिषद द्वारा किया जाता है।

बोध प्रश्न 1
टिप्पणी: क) अपने उत्तर के लिये नीचे दिये रिक्त स्थान का प्रयोग कीजिये।
ख) अपने उत्तरों की जांच इकाई के अन्त में दिये गये उत्तरों से कीजिये।
1) मलेशियाई समाज का जातीय गठन क्या है?

अर्थव्यवस्था
1960 से मलेशिया की अर्थव्यवस्था का विकास प्रभावशाली रहा है और आज यह एशिया की अत्यंत समृद्ध एवं तेजी से विकासमान अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। मलेशिया प्रमुख रूप से एक बाजार अर्थव्यवस्था है जोकि पेट्रोलियम, रबर, टिन, तथा ताड़-तेल के उत्पादन एवं नियात पर अत्यधिक निर्भर है, जोकि विकासशील अर्थव्यवस्था का चारित्रिक लक्षण है। मलेशिया के सामने चार प्रमुख आर्थिक समस्याएं हैं। पहली, तेजी से बढ़ती जनसंख्या बढ़ती श्रम शक्ति को रोजगार प्रदान करने तथा उनके जीवन स्तर में सुधार नहीं तो कम से कम उसे बरकरार रखने के मामले में समस्याएं पैदा कर रही है। दूसरी, गैर-ईंधन कच्चे मालों के निर्यात पर मलेशिया की भारी निर्भरता ने इसकी अर्थव्यवस्था को काफी सुमेध्य बना दिया है। इसके अलावा, प्राकृतिक रबर का बाजार सिकुड़ता जा रहा है तथा टिन के खनन में होने वाली मुनाफे की अवस्था 1970 के अंत में गिरावट का शिकार शुरू हो गई है क्योंकि आसानी से पहंुच के भीतर आने वाले भंडार समाप्त होने लगे हैं। तीसरी, प्रायद्वीपों मलेशिया तथा सरवाक एवं सबाह के बीच तथा जातीय समूहों के बीच आय का अत्यधिक असमान वितरण है। अंततः दक्ष श्रम-शक्ति का गंभीर अभाव मौजूद है।

देश की आर्थिक योजनाओं में दो तरीकों से अपने आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास किया है। कृषि के विविधीकरण का प्रयास करने के उद्देश्यों से किसानों को इस बात पर सहमत कराया गया है कि वह केवल रबड़-उत्पादन पर ही निर्भर न रहें, अपितु ताड़-तेल और अनन्नास जैसी फसलें भी पैदा करें। दूसरे यह कि औद्योगीकरण पर काफी बल दिया जाए।

नई आर्थिक नीति
नई आर्थिक नीति जिसकी शुरूआत 1970 में समद्ध अल्पसंख्यक (प्रायः चीनी अथवा भारतीय व्यापारियों) समदायों के खिलाफ जातीय दंगों के बाद की गई थी गरीबी का उन्मूलन करके ‘‘राष्ट्रीय एकता’’ को बढ़ावा देने की दृष्टि से तैयार की गई थी। यह काम सभी मलेशियाईयों की आय के स्तरों में वृद्धि करने व रोजगार के बढ़े हुए अवसर प्रदान करके किया जाना था। साथ ही आर्थिक असंतुलनों को दूर करके मलेशियाई समाज के पुनर्गठन की प्रक्रिया को तेज करके भी ऐसा किया जाना था।

नई आर्थिक योजना (एन.ई.पी.), जिसका 1971-75 की दूसरी मलेशियाई योजना में समायोजन किया गया था, ने एक 30 प्रतिशत शासन की व्यवस्था रखी, जिसका अर्थ यह था कि 20 वर्षों के भीतर, अर्थात् 1990 तक, माले तथा अन्य देसी लोग कुल वाणिज्यिक एवं औद्योगिक गतिविधियों के कम से कम 30 प्रतिशत का स्वामित्व एवं प्रबंधन अपने हाथों में ले लेंगे। सरकार ने विभिन्न स्तरों पर जनता के बीच के जातीय गठन में असंतुलनों को दूर करने के लिये तुरन्त कदम भी उठाये।

जहां तक कृषि क्षेत्र का संबंध है, यह सकल घरेलू उत्पाद का लगभग एक चैथाई हिस्सा है तथा लगभग आधी श्रम शक्ति को रोजगार प्रदान करता है। फैडरल लैण्ड डवलपमेण्ट ओथारिटी देश में ताड़-तेल का सबसे बड़ा उत्पादक है। विदेशी मुद्रा का प्रमुख स्रोत जापान, सिंगापुर तथा यूरोपीय आर्थिक समुदाय के सदस्यों को किया जाने वाला गोल लकड़ी का निर्यात है।

मलेशिया ने प्रायः व्यापारिक माल के निर्यात में, व्यापारिक माल के आयात में इसके द्वारा किये गये खर्च की तुलना में अधिक धन कमाया है। 1980 में इन निर्यातों से 12.9 बिलियन यू.एस. डॉलर की आमदनी हुई थी जबकि आयातों पर कुल खर्च 10.6 बिलियन यू.एस. डॉलर का रहा। मलेशिया के वाणिज्य का लगभग चैथाई भाग जापान के साथ होता है। संयुक्त राज्य अमरीका तथा सिंगापुर भी प्रमुख व्यापार सहयोगी हैं। मलेशिया को मुख्यतः प्रत्यक्ष निवेषों के रूप में विदेशी मुद्रा के प्रसार से भी लाभ होता है।

बोध प्रश्न 2
टिप्पणी: क) अपने उत्तर के लिये नीचे दिये रिक्त स्थान का प्रयोग कीजिये।
ख) अपने उत्तरों की जांच इकाई के अन्त में दिये गये उत्तरों से कीजिये।
1) नई मलेशियाई आर्थिक नीति के प्रमुख उद्देश्यों की चर्चा कीजिये।
2) मलेशियाई अर्थव्यवस्था द्वारा जिन प्रमुख आर्थिक समस्याओं का सामना किया गया, वे क्या थी?

प्रशासनिक एवं सामाजिक स्थितियां
 प्रशासनिक संरचना
मलेशिया एक संघीय संवैधानिक राजतंत्र है, जिस में एक अराजनैतिक राज्य प्रमुख अथवा यांग डी-परटुआन आगौंग विद्यमान है जिसे नौ राज्य के वंशानुगत शासकों के लिये चुना जाता था। विधानमंडल दीवान नेगरा, अथवा सीनेट से मिलकर बना है जिसकी सदस्यता 69 है, जिनमें 26 निर्वाचित तथा 43 मनोनीत सदस्य होते हैं, तथा दीवान राकयत अथवा हाउस ऑफ रिप्रेजेण्टेटिव, जो कि ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स से मिलते जुलते तरीके से काम करता है और 180 सदस्यों से मिलकर बना है, सार्वजनिक वयस्क मताधिकार द्वारा 5 वर्ष की अवधि के लिये निर्वाचित किया जाता है। संसद में सबसे अधिक सीटों वाली पार्टी का नेता प्रधानमंत्री के रूप में काम करता है और केबीनेट के लिये नामों को प्रस्तुत करता है, जिसके सदस्यों की नियुक्ति प्रमुख शासक द्वारा की जाती है। नेशनल फ्रंट प्रभुत्वशाली राजनैतिक संगठन है, जो कि देश के तीन प्रमुख जातीय समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टियों का गठबंधन है।

संविधान में यह प्रावधान किया गया है कि संसदीय चुनाव तथा राज्य विधानमंडलों के चुनाव कम से कम 5 वर्ष में एक बार अवश्य कराये जायें।

न्याय प्रणाली
मलेशिया का संविधान, जो कि देश का सर्वोच्च कानून है, यह प्रावधान करता है कि संध की न्यायिक शक्तियां पश्चिम मलेशिया के उच्च न्यायालय तथा पूर्वी मलेशिया के उच्च न्यायालय के साथ-साथ निचली अदालतों में भी निहित रहेगी। उच्च न्यायालय के ऊपर संघीय न्यायालय है, जिसका कार्यक्षेत्र उच्च न्यायालय के किसी भी निर्णय पर की गई अपील की सुनवाई तथा उसका निर्धारण करना है। न्यायपालिका का सर्वोच्च प्रमुख संघीय न्यायालयं का लॉर्ड प्रेसीडैण्ट है।

सैन्य बल
मलेशियाई सैन्य बल ने, जोकि थल सेना, जल सेना व वायुसेना से मिलकर बना है, 1963 में मलेशिया की स्थापना के बाद से अपनी शक्ति एवं सामर्थ में बढ़ोत्तरी कर ली है। 1971 के अंत में ब्रिटिश सेना की मलेशिया व सिंगापुर से वापसी हो जाने के बाद, बाहरी आक्रमण से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये मलेशिया, सिंगापुर, न्यूजीलैण्ड, आस्ट्रेलिया तथा ग्रेट ब्रिटेन के बीच पांच शक्तियों का समझौता हुआ था। दक्षिण एशियाई राष्ट्रों की एसोशिएशन (आसियान) भी अतिरिक्त क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदान करती है।

मलेशिया के राज्यों ने अपने सांझे औपनिवेषिक अतीत से ब्रिटिश नमूने पर आधारित आन्तरिक सुरक्षा की विरासत प्राप्त की है। पुलिस बल अच्छी प्रकार से प्रशिक्षित हैं और वे न सिर्फ अपराधों पर अंकुश रखते हैं बल्कि सशस्त्र कम्युनिस्ट विद्रोह समेत विघटनकारी गतिविधियों पर भी काबू पा लेते हैं।

शिक्षा प्रणाली एवं स्वास्थ सेवाएं
शिक्षा 6 से 15 वर्ष की आय के बच्चों के लिये मुफ्त एवं अनिवार्य है। अनुमान है कि प्राथमिक स्कूल में जाने वाली उम्र के सभी बच्चों का 90 प्रतिशत से भी अधिक भाग प्राथमिक स्कूलों में भाग लेता है।

मलेशिया की समाज-कल्याण व्यवस्था रोजगार शुदा लोगों को काम के दौरान चोट लग जाने, वृद्धावस्था तथा वांछित लाभ उपलब्ध कराती है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से देश में स्वास्थ्य के आम स्तर में काफी सुधार हुआ है। स्वास्थ्य सेवाओं का देश भर में प्रसार हुआ है तथा सेवाओं को बेहतर बनाने के लिये आवश्यक कदम उठाए गए हैं। डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात में निरंतर कमी आई है। 1980 में जनसंख्या के मुकाबले डॉक्टरों का अनुपात 3600 व्यक्तियों पर एक डॉक्टर का था, यह अनुपात 1988 में घटकर 2700 रह गया है। आमतौर पर देश में औसत आयु दर पुरुषों के लिये 68 वर्ष तथा स्त्रियों के लिये 63 वर्ष है।

सांस्कृतिक जीवन
मलेशिया, लोगों व संस्कृतियों के अपने जटिल परिवार के साथ माले आर्चीपेलेगों के साथ साथ चीन, भारत तथा पश्चिम से पैदा हुई परंपराओं का संगम है। माले तथा बौर्नी संस्कृतियां क्षेत्र की स्वदेशी संस्कृतियां हैं। सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक कृति सेजराह मेलायु (‘‘माले एनल्स’’) को माना जाता है जोकि करीब 1535 में लिखी गई थी और जिसमें मलम्का के मध्ययुगीन नगर-राज्य के बारे में विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है।

बोध प्रश्न 3
टिप्पणी: क) अपने उत्तर के लिये नीचे दिये रिक्त स्थान का प्रयोग कीजिये।
ख) अपने उत्तरों की जांच इकाई के अन्त में दिये गये उत्तरों से कीजिये।
1) मलेशिया के संघीय ढांचे का वर्णन कीजिये।
2) द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के काल में स्वास्थ्य सेवाओं के सामान्य स्तर की संक्षिप्त व्याख्या प्रस्तुत कीजिये।

 मलेशियाई राजनैतिक संस्कृति
यदि हम प्रकृति पर गौर करें तो, मलेशियाई राजनैतिक व्यवस्था को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। यह व्यवस्था प्रकृति के तहत काम करती है। मलेशियाई जनता की जनतांत्रिक संस्थाओं, सभी मनुष्यों की बराबरी तथा अलग न किये जा सकने वाले अधिकारों की प्राप्ति में गहन आस्था है। किन्तु उग्र जातीय, आर्थिक एवं राजनैतिक अवयवों के एक संघ के तौर पर, मलेशिया को 1963 में अपनी स्थापना के समय से ही कठिनाइयों व समस्याओं का सामना करना पड़ा है। इन समस्याओं में से सबसे प्रबल समस्या, यानि पश्चिम मलेशिया व सिंगापुर के बीच तनावपूर्ण संबंधों, का समाधान एक राजनैतिक विभाजन करके कर लिया गया था। किन्तु इतनी ही अधिक गंभीर समस्याएं बरकरार रहीं। मालेओ व चीनीयों के बीच मई 1969 में हुए जातीय दंगे, जिनके चलते संसदीय शासन को स्थगित करके आपातकाल की घोषणा की गई थी जो कि फरवरी 1971 तक जारी रही-जातीय असंतुलन से पैदा होने आन्तरिक तनाव का एक संकेत ही थे। ये तनाव 1980 तथा आरंभिक 1990 तक जारी रहे, जबकि मलेशिया के छः सबसे गरीब राज्यों में से पांच में मालेओ की संख्या जनसंख्या का बहुमत बनी रही। माले, जिनमें से लगभग सभी मुसलमान हैं, लगातार इस्लाम के उग्र स्वरूप के प्रति आकर्षित होते गए, और इस तरह जातीय तनावों में और भी वृद्धि हो गई।

बोध प्रश्न 4
टिप्पणी: क) अपने उत्तर के लिये नीचे दिये गये रिक्त स्थान का प्रयोग कीजिये।
ख) अपने उत्तरों की जांच इकाई के अन्त में दिये गये उत्तरों से कीजिये।
1) मलेशिया की राजनैतिक संस्कृति पर संक्षिप्त चर्चा कीजिये।

संविधान का विकास
मलेशिया के आरंभिक इतिहास को लेकर अनेक व्याख्याएं पेश की गई हैं। यह माना जाता है कि सबसे पहले संगठित राजनैतिक राज्यों की उत्पत्ति माले प्रायद्वीप के उत्तर में हुई। नवीं व 14वीं शताब्दी के बीच के काल में आधुनिक मलेशिया का क्षेत्र बौद्ध श्री विजयन साम्राज्य का हिस्सा रहा था। यह एक ऐसा साम्राज्य था जिस का आगे चलकर एक जावेनी हिन्दु साम्राज्य द्वारा तख्ता पलट दिया गया था। उत्तरवत्ती काल में इस्लाम का प्रवेश हुआ तथा 1511 में पर्तगाल द्वारा विजय प्राप्त करने से पर्व एक अच्छी खासी सल्तनत का निर्माण हो गया था। उसके बाद यह क्षेत्र एक एक करके क्रमशः डच (1641-1795), ब्रिटिश (1795-1817), डच (पुनः 1818-1824) तथा अन्त में फिर एक बार ब्रिटिश (1824-1963) नियंत्रण में आता रहा।

योरोपीय आक्रमण
1511 में मलक्का पर पूर्तगालियों ने कब्जा कर लिया। इससे मलक्का पर योरोपीय आक्रमण की शुरुआत हुई। 1641 में मलक्का डचों के नियंत्रण में आ गया। किसी भी विजय ने माले समाज में किसी महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव लाने में योगदान नहीं दिया। 18वीं शताब्दी के आखिर में, ब्रिटिश वाणिज्यिक हितों का प्रसार भारत से पलाऊ पिनांग तक हो गया, जिसे अग्रेजों ने 1786 में केडा के सुल्तान से छीना था। 1819 में, अग्रेजों ने जोहर के सल्तान से सिंगापुर को हथिया लिया। 1824 में ब्रिटेन ने डचों से सुमात्रा में बेनकलेन के बदले में मलक्का प्राप्त कर लिया। दो साल बाद, प्लाऊ पिनांग, मलक्का तथा सिंगापुर को संयुक्त रूप से स्ट्रेट-सैटिलमैण्टों के नाम से जाना जाने लगा।

ब्रिटिश प्रशासन
स्ट्रेट सैटिलमैण्टों में एक धनी वाणिज्यिक वर्ग के विकसित हो जाने के फलस्वरूप प्रायद्वीप में निवेषों की बढ़ोतरी का सूत्रपात हुआ, और धीरे-धीरे ब्रिटिश आधिपत्य स्थापित हो गया। 19वीं शताब्दी के मध्य तक, प्रायद्वीप पर आर्थिक आक्रमण शुरू हो गया। पूंजी आने लगी और बड़ी संख्या में टीन का खनन करने वाले चीनी मजदूरों ने प्रवेश किया। 1867 में, स्ट्रेट सैटिलमैण्टों का प्रशासन भारतीय कार्यालय से औपनिवेषिक कार्यालय को हस्तांतरित कर दिया गया। 1874 के पांगको समझौते ने माले राज्यों में उग्र-राजनैतिक एक प्रशासनिक बदलाव का मार्ग प्रशस्त किया। अंग्रेजों ने उन दायित्वों को अपने हाथ में ले । लिया जिन्हें किसी जमाने में राजकुमारों तथा राजसी लोगों द्वारा ही निभाया जाता था। इस तरह के परिवर्तनों की समूची प्रक्रिया अनेक वर्षों तक जारी रही।

रैजीडैन्शियल प्रणाली शुरू की गई जिसके तहत माले के रीति-रिवाजों व धर्म से जुड़े: मामलों को छोड़कर अन्य सभी मामलों पर सुल्तानों को सलाह देने के लिये रेजीडैण्ट कहलाने वाले ब्रिटिश अधिकारियों की नियुक्ति की गई। 1895 में पैरंक, सेलण्गर, नेगिरी, सैम्बिलन तथा पहंग को मिलाकर एक संघ बनाया गया जिसे फैडरेटेड माले स्टेटस (एफ.एम.एस.) कहा जाने लगा। 1877 तथा 1878 में, ब्रिटिश व्यापारिक हित बुनेई तथा सल के सुल्तानों से उत्तरी एवं पूर्वी बोर्नियो को अलग कर देने में सफल हो गये। जब 1882 में ब्रिटिश नार्थ बोर्नियो कम्पनी की स्थापना हुई, तो इसने सभी परिसंपत्तियों पर अधिकार कर लिया। 1888 में, सारवाक, बुनेई तथा उत्तरी बोर्नियो (अब साबा) ब्रिटिश संरक्षण में आ गये।

1909 में, सियामियों ने केडा, पर्लिस, केलण्टान तथा टेरेण्गानु पर से अधिपत्य के अपने अधिकारों का अंग्रेजों को हस्तांतरण कर दिया। उसके बाद इन चारों राज्यों में से प्रत्येक के लिए एक ब्रिटिश सलाहकार नियंक्त किया गया। 1914 में जोहर भी इस समूह में शामिल हो गया और असंघीय माले राज्यों की स्थापना हो गई। इन पांच राज्यों ने अंग्रेजों के सामने अपनी सत्ता के समाप्त हो जाने पर कभी भी संघ में प्रवेश नहीं किया।

युद्धोत्तर मलाया
युद्ध के बाद ब्रिटिश फौजी प्रशासन कायम किया गया। स्ट्रेट सैटिल्मैण्टस् को समाप्त कर दिया गया तथा सिंगापर एक साम्राज्यी उपनिवेष बन गया। अंग्रेजों ने अप्रैल 1946 में मलाया संघ का निर्माण किया जिसके अंतर्गत मलक्का, पलाऊ पिनांग तथा माले राज्य शामिल थे। 1948 में माले राष्ट्रवादियों के जबर्दस्त विरोध के चलते मलाया संघ भंग कर दिया गया। मलाया शासकों से ब्रिटिश सम्राट को सत्ता हस्तांतरित किये जाने के कारण असंतोष पैदा हुआ था। इसके स्थान पर 1948 के मलाया समझौते का संघ उभर कर आया जिसने एक उच्चायुक्त तथा 75 सदस्यों वाली विधान परिषद का प्रावधान किया, जिसके 50 सदस्य गैर-सरकारी सदस्य होते थे। राज्य तथा सैटिलमैण्ट सरकार को काफी अधिकार दिये गये खासतौर से भूमि के प्रशासन के मामले में और यह वायदा किया गया कि यथाशीघ्र चुनाव कराये जायेंगे। उच्चायुक्त से यह अपेक्षा की गई कि वह ‘‘माले की विशेष हैसियत’’ तथा ‘‘अन्य समुदायों के वांछित हितों’’ की रक्षा भी करेगा।

स्वाधीनता
1955 में, सरकार की अधिकांश जिम्मेदारियों का हस्तांतरण जनता के चने हए प्रतिनिधियों को करते हुए एक नये संविधान की रचना की गई। नई संघीय विधान परिषद 52 सदस्यों वाली होनी थी, उसमें तीन (एक्स औफिशियो) सदस्य, 11 राज्य तथा सैटिलमैण्ट प्रतिनिधि, 22 अनुसूचित हितों के प्रतिनिधि, 3 जातीय अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधि तथा 7 उच्चायुत द्वारा नामजद किये जाने वाले आरक्षित सदस्य रखे जाते थे, निर्वाचित सदस्यों के बीच बहुमत प्राप्त पार्टी के नेता की सलाह से दो स्थान अधिकारियों द्वारा तथा 5 गैर-अधिकारियों द्वारा भरे जाने थे। 1 जुलाई 1955 में हुए चुनावों में यूनाइटेड मालेस नेशनल ऑर्गेनाइजेशन (यू.एम.एन.ओ.) तथा मलायन इण्डियन कांग्रेस (एम.आई.सी.) के एक गठबंधन, एलाइन्स पार्टी ने 52 में से 51 सीटें जीत लीं। यू.एम.एन.ओ. के अध्यक्ष, टुंकू अब्दुल रहमान, जो कि गठबंधन के मुखिया भी थे, मुख्यमंत्री बने।

1956 के आरंभ में स्वाधीनता के प्रश्न पर चर्चा करने के लिये लंदन में एक सम्मेलन हआ। अन्य बातों के अलावा इस बात पर सहमति हुई कि संविधान का मसविदा तैयार करने के लिये यथाशीघ्र एक आयोग की नियुक्ति की जाय जिसके तहत यदि संभव हो तो अगस्त 1957 तक राष्ट्रमंडल के भीतर रहते हुए पूर्ण स्व-सरकार बनाये जाने का प्रावधान किया जाये। उसी वर्ष मार्च आते आते लार्ड रीड की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र संवैधानिक आयोग नियुक्त किया गया। विधान परिषद ने संसदीय जनतंत्र पर आधारित एक संघीय संविधान के बारे में, फरवरी 1957 में आयोग द्वारा प्रस्तुत संवैधानिक प्रस्तावों को स्वीकार कर लिया तथा अगस्त 1957 में फैडरेशन ऑफ मलाया समझौता हो गया। महिने के अंत तक स्वतंत्रता प्राप्त कर ली गई जिसके बाद टंको अब्दुल रहमान प्रथम प्रधानमंत्री बने।

 मलेशिया का निर्माण
1959 तक, हालांकि एलान्इस पार्टी का मलाया में दृढ़ नियंत्रण कायम हो चुका था, किन्तु सिंगापुर में चिंताजनक स्थिति बन गई। वामपंथी तत्वों ने अपनी स्थिति मजबूत बना ली थी। कुछ ही समय बाद ब्रिटिश सरकार ने 1963 के मध्य तक सिंगापुर द्वारा अपनी स्वतंत्रता हासिल कर लेने संबन्धी योजनाएं बना लीं। मलाया की सरकार सबाह एवं सारवाक की स्थिति से भी चिंतित थी जहां ब्रिटिश सरकार ने देसी लोगों के हितों की सुरक्षा के लिये कुछ खास काम नहीं किया था। इन बातों को ध्यान में रखते हुए, मलाया के प्रधानमंत्री, टंक अब्दुल रहमान ने 27 मई 1961 को सार्वजनिक तौर पर मलाया के सिंगापुर, सबाह, बुनी तथा सारवाक के साथ घनिष्ट रूप से मिलकर कार्य करने का इरादा जाहिर किया। इस इरादे ने ही आगे चलकर मलेशिया के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया।

कोबोल्ड आयोग
1962 की फरवरी से अप्रैल के मध्य तक, लार्ड कोबोल्ड, जोकि बैंक ऑफ इंग्लैण्ड का एक भूतपूर्व गवर्नर था, उसने उत्तरी बोर्नियो तथा सारवाक की जनता की मलेशियाई संघ पर राय जानने के लिये एक पांच सदस्यीय जांच-आयोग का नेतृत्व किया। ब्रिटिश तथा मलाया सरकार ने आयोग की सर्वसम्मत सिफारिशों को करीब करीब ज्यों का त्यों स्वीकार कर लिया और सिद्धांत रूप में यह फैसला कर लिया कि मलेशिया का प्रस्तावित संघ 31 अगस्त 1963 तक अस्तित्व अस्तित्व में आ जाना चाहिये। इससे सिंगापर सारवाक एवं उत्तरी बोर्नियो के ऊपर सार्वभौमिकता का हस्तांतरण तथा उत्तरी बोर्नियो तथा सारवाक के लिये उनके विशेष हितों की रक्षा समेत, दोनों क्षेत्रों के विधानमंडलों से सलाह करके विस्तृत संवैधानिक व्यवस्थाएं की जा सकेगी। इस तरह 16 सितम्बर 1963 को मलेशिया अस्तित्व में आया और उसके तहत मलाया का संघ, सिंगापुर राज्य (जोकि 1965 में अलग हो गया) तथा उत्तरी बोर्नियो के उपनिवेष (जिन्हें सबाह एवं सारवाक का ही नाम दिया गया) शामिल थे।

बोध प्रश्न 5
टिप्पणी: क) अपने उत्तर के लिये नीचे दिये रिक्त स्थान का प्रयोग कीजिये।
ख) अपने उत्तरों की जांच इकाई के अन्त में दिये गये उत्तरों से कीजिये।
1) मलाया में यूरोपीय आक्रमण का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिये।
2) 1948 के फैडरेशन ऑफ मलाया समझौते के मुख्य प्रावधान क्या हैं?

संविधान की प्रमुख विशेषताएं
मलेशियाई संविधान की प्रमुख विशेषताएं निम्न प्रकार से हैं:
लिखित एवं जटिल
संविधान लिखित व जटिल दोनों ही हैं। इसके तहत 161 धाराएं हैं तथा इसमें इतनी आसानी से संशोधन नहीं किये जा सकते जितनी आसानी से कानून बनाये जाते हैं।
देश का सर्वोच्च कानून
संविधान की धारा 4 स्पष्ट तौर पर प्रावधान करती है: यह संविधान देश का सर्वोच्च कानून है तथा मरडेका (स्वतंत्रता दिवस के बाद पारित किया गया कोई भी कानून जोकि संविधान के अनुरूप नहीं है, जहां तक उसकी अनुरूपता न होने का प्रश्न है, रद्द माना जायेगा। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि संविधान संघीय है, इस तरह का प्रावधान किया जाना आवश्यक है। इसकी सर्वोच्चता को मलेशिया में संघीय न्यायालय स्थापित रखता है।
इसकी रचना किये जाने के साथ-साथ ही इसकी उत्पत्ति भी हुई है
मूल दस्तावेज 1948 में तैयार किया गया था। मलेशिया का निर्माण होने पर कोई नया संविधान स्वीकार नहीं किया गया था। यहां तक कि 1957 का संविधान भी 1948 के संविधान का एक संशोधित रूप ही था। वह संविधान भी नये सिरे से नहीं लिखा गया था यह निवर्तमान सरकार के नमूने का एक संशोधित रूप में तैयार किया गया संविधान ही। था। इन कारणों से यह कहा जा सकता है कि इसकी रचना किये जाने के साथ-साथ इसकी उत्पत्ति भी हुई।
संघीय संविधान
संघ में राज्य प्रमुख यांग डीपरटआंग आगींग है जोकि 5 वर्ष की अवधि के लिये शासकों के सम्मेलन द्वारा निर्वाचित सर्वोच्य शासक है। वहां सर्वोच्च शासक के एक सहायक का भी प्रावधान है। संवैधानिक सम्राट को एक कैबीनेट द्वारा सलाह दी जाती है, जोकि संसद के प्रति उत्तरदायी है। 1957 के संविधान में संघीय कार्यपालिका के बारे में जो स्थिति थी, वही 1963 के संविधान में भी जारी रखी गई है। संघ में 13 राज्य हैं।
संघीय न्यायपालिका
वहां एक शीर्षस्थ संघीय न्यायालय है तथा मलाया एवं बोर्नियो क्षेत्रों के लिये उच्च न्यायालय नौजूद है। संघीय न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों को संविधान की व्याख्या करने तथा न्यायिक समीक्षा करने की शक्तियां प्राप्त हैं। न्यायपालिका गैर-राजनैतिक तथा स्वतंत्र है।
मौलिक अधिकार
संविधान में नागरिकों के अधिकारों व स्वतंत्रताओं को सम्मिलित किया गया है जिन्हें मौलिक कहा जा सकता है क्योंकि उन्हें न्यायालयों द्वारा लागू कराया जा सकता है तथा संविधान उनकी सुरक्षा प्रदान करता है।
धर्म की स्थिति
धारा 3 के अनुसार, संघ का धर्म इस्लाम बताया गया है। किन्तु संघ के किसी भी भाग में अन्य धर्मों का पालन भी शान्ति एवं सद्भाव के साथ किया जा सकता है। हालांकि यह सबाह एवं सरवाक राज्यों का धर्म नहीं है।

बोध प्रश्न 6
टिप्पणी: क) अपने उत्तर के लिये नीचे दिये रिक्त स्थान का प्रयोग कीजिये।
ख) अपने उत्तरों की जांच इकाई के अन्त में दिये गये उत्तरों से कीजिये।
1) क्या मलेशियाई संविधान लिखित, जटिल अथवा दोनों ही है?
2) संविधान में धर्म की स्थिति क्या है?

बोध प्रश्न 6
1) मलेशिया का संविधान लिखित एवं जटिल दोनों ही है।
2) मलेशियाई संघ का सरकारी धर्म इस्लाम है, किन्तु अन्य धर्मों का पालन भी किया जा सकता है।

संघीय कार्यपालिका
मलेशिया एक संवैधानिक राजतंत्र है जोकि 13 राज्यों से मिलकर बना है जिनमें से 9 पहले ब्रिटिश संरक्षण के अधीन सल्तनतें थीं तथा 4 (मलम्का, पुलाउ पिनांग, सरवाक तथा सबाह) पूर्व में नियुक्त किए जाने वाले गवर्नरों द्वारा शासित ब्रिटिश सैटिलमैण्ट थे। 31 अगस्त 1957 को लागू किया गया संविधान, जिसमें आगे चलकर संशोधन हुए, राज्य प्रमुख, यांग डी-परटुआंग अगौंग, जोकि सर्वोच्च शासक है, का शासकों के सम्मेलन द्वारा 5 वर्ष की अवधि के लिये निर्वाचन करने का प्रावधान करता है।

कार्यपालक शक्तियां प्रधानमंत्री द्वारा, जोकि बहुमत प्राप्त पार्टी का नेता होता है, चयनित केबिनेट को सौंपी गई हैं।

 यांग डी-परटुआंग आगौंग (yang di pertuan agong)
महामहिम यांग डी-परटआंग आगौंग मलेशिया का सर्वोच्च प्रमुख है। सरकार का प्रत्येक कार्य उसकी सत्ता के अधीन है, हालांकि वह संसद एवं केबीनेट की सलाह पर कार्य करता है। प्रधानमंत्री की नियुक्ति करना दरअसल उसी का न्याय निर्णय है। वह प्रधानमंत्री की सलाह के विरुद्ध जाकर भी संसद को भंग करने से इन्कार कर सकता है। न्याय के स्रोत के रूप में, वह संघीय संविधान के प्रावधानों के अनुरूप, प्रधानमंत्री की सलाह पर सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है। सम्मान के स्रोत के रूप में, वह शूरवीरता के लिये आदेश जारी कर सकता है अथवा सम्मान अथवा मान्यता प्रदान कर सकता है। इसके अतिरिक्त यांग-डी परटुआंग अगौंग को क्षमा देने अथवा राहत प्रदान करने की शक्ति भी प्राप्त है।

चुनाव
यांग डी-परटुआंग अगौंग का चुनाव शासकों के सम्मेलन द्वारा किया जाता है। चुनाव का पात्र होने के लिये उसे नौ में से एक शासक का होना आवश्यक है। वह अपने त्यागपत्र अथवा मृत्यु होने की स्थिति को छोड़ कर पांच वर्ष की अवधि तक अपने पद पर रहता है। जब पद खाली हो जाता है, तो शासकों का सम्मेलन उत्तराधिकारी का चुनाव करने के लिये अपनी बैठक करता है। निर्वाचित हो जाने पर यांग डी-परटंआंग आगोंग अपने राज्य के शासक के रूप में अपने कार्यकाल की अवधि तक, अपने सभी कार्यों का त्याग कर देता है और एक रीजैण्ट की नियुक्ति कर सकता है। यद्यपि वह अपने राज्य में धार्मिक प्रमुख (मुस्लिम धर्म) बना रहता है। उसके बाद रीजैन्सी के रिक्त हो जाने की स्थिति में, वह अपने राज्य के संविधान के अनुरूप एक नये रीजैण्ट की नियुक्ति कर सकता है। वह अपने राज्य के संविधान में किसी संशोधन को भी मान्यता प्रदान कर सकता है।

शासकों का सम्मेलन
शासकों के सम्मेलन को संविधान में स्थापित किया गया है तथा इसमें शासक एवं यांग में परटुआं-मांग डी-परटुआ नेगैरी शामिल है। इसका प्रमुख कर्तव्य यांग डी-परटुआंग आगौंग का चुनाव करना है। न्यायाधीशों, अटोर्नी जनरल, चनाव आयोग तथा लोक सेवा. आयोग की नियुक्तियां करते समय उससे सलाह ली जानी आवश्यक है। इसी तरह सम्मेलन से राज्य की सीमाओं में परिवर्तन संघ के आमतौर पर प्रसार किए जाने, मुस्लिम धार्मिक कृत्यों व ममारोहों तथा संविधान संशोधन के विधेयकों पर सलाह ली जानी भी जरूरी है। प्रधानमंत्री मैण्टरी बेसर तथा मुख्यमंत्री यांग डी-परटंआंग आगौंग अथवा टिवलन यांग डी-परटुआंग अगौंग की नियुक्ति के लिये होने वाली बैठक को छोड़कर शासकों के सम्मेलन की सभी बैठकों में भाग लेते हैं।

प्रधानमंत्री
यांग डी-परटुआंग अगौंग देश की कार्यपालक सत्ता का प्रमुख है। संघीय सरकार का प्रत्येक कार्यपालक कृत्य प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से राजसी सत्ता के अंतर्गत ही किया जाता है। किन्तु जनतांत्रिक शासन प्रणाली के सिद्धांत के अनुरूप प्रमख कार्यपालक प्रधानमंत्री ही है। सरकार के प्रमुख के रूप में, प्रधानमंत्री सभी सरकारी मामलों में यांग डी-परटुआंग आगौंग के प्रति उत्तरदायी है। प्रधानमंत्री की नियुक्ति दीवान राकयत में बहुमत प्राप्त पार्टी के नेताओं में से की जाती है तथा वह राजसी समर्थन प्राप्त रहने तक पद पर बना रहता है। वह मंत्रिपरिषद का भी प्रमुख है, जहां वह बराबर के लोगों में प्रथम होता है।

कैबीनेट एवं मंत्रीगण
यांग डी-परटुआन अगौंग एक कैबीनेट की नियुक्ति करता है-एक मंत्रिपरिषद जोकि उसके कार्यों के संपादन में उसे सलाह देती है। इसके अन्तर्गत प्रधानमंत्री तथा अनिश्चित संख्या में मंत्रीगण रहते हैं, जिन सभी को संसह का मदम्य होना चाहिये। मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है। कैबीनेट नियमित रूप से अपनी बैठक करती है, प्रायः सप्ताह में एक बार, प्रधानमंत्री इसकी अध्यक्षता करता है और सरकार की नीति निर्धारित की जाती है। मंत्रीगण विभिन्न जिम्मेदारियां संभालते हैं और कैबीनेट द्वारा लिये गये सभी निर्णयों के लिये सामूहिक रूप से उत्तरदायी होते हैं, जोकि देश का सर्वोच्च नीति-निर्धारक निकाय है।

 यांग डी-परटुआन आगौंग की संवैधानिक स्थिति
यद्यपि यांग डी-परटुआन अगौंग हर समय कैबीनेट की सलाह पर काम करने के लिये संवैधानिक रूप से बाध्य संवैधानिक सम्राट है। फिर भी उसे कैबीनेट अथवा स्वयं मलेशियाई संसद द्वारा भी हटाया नहीं जा सकता। इस संदर्भ में, उसकी स्थिति भारत के राष्ट्रपति से अधिक मजबूत है, जिसे हटाया नहीं जा सकता। किन्तु वह अंग्रेज सम्राट जितना मजबूत नहीं है, जिसे किसी भी स्थिति में हटाया नहीं जा सकता, जबकि यांग डी-परटुआंग अगौंग को शासकों के सम्मेलन द्वारा पद से हटाया जा सकता है। इसके लिये यह आवश्यक है कि यांग डी-परटुआंग अगौंग को हटाने के लिये शासकों के सम्मेलन के प्रस्ताव को 9 में से कम से कम 5 शासकों का समर्थन प्राप्त हो।

हालांकि, यांग डी-परटुआंग आगौंग का एक संवैधानिक अस्तित्व है और वह संसद का एक हिस्सा है, फिर भी कुछ ऐसे कार्य है जिन्हें वह समची संसद तथा सदन के मामले में अलग से निष्पादित करता है। वह संसद को बला सकता है, उसकी बैठक को आगे बढ़ा सकता है और उसे भंग भी कर सकता है। वह किसी भी सदन में अथवा दोनों सदनों को संयुक्त रूप से संबोधित कर सकता है। वह 32 सीनेटरों की नियक्ति भी करता है- जोकि व्यवसायों वाणिज्य, उद्योग, इत्यादि के विशिष्ट लोग होते हैं।

प्रधानमंत्री की सलाह पर, तथा शासकों के सम्मेलन से मशवरा करने के बाद, यांग डी-परटुआंग अगौंग निम्न लोगों की नियुक्ति करता है:

(1) संघीय न्यायालय के लार्ड प्रेसीडैण्ट (2) उच्च न्यायालयों के चीफ जस्टिस तथा (3) इन न्यायालयों के अन्य न्यायाधीश। वह संघीय न्यायालय के किसी न्यायाधीश के कार्यकाल । को भी 65 वर्ष की आय से अधिक बढ़ा सकता है, किन्त उस कार्य से 6 माह की अवधि से अधिक नहीं। अंततः उसे यह निर्धारित करने का अधिकार है कि बोर्नियो राज्यों में किस स्थान पर उच्च न्यायालय अपना प्रमुख रजिस्ट्री रखेगा और बोर्नियो में उच्च न्यायालय के कामकाज को निपटाने के लिये उसे एक न्यायिक आयुक्त की नियुक्ति करने का अधिकार भी प्राप्त है। संविधान की धारा 53(1) में कहा गया है कि मालेओ व अन्य समुदायों के वांछित हितों की रक्षा, उक्त धारा के प्रावधानों के अनुरूप करने की जिम्मेदारी यांग डी-परटुआंग अगौंग पर है।

बोध प्रश्न 7
टिप्पणी: क) अपने उत्तर के लिये नीचे दिये रिक्त स्थान का प्रयोग कीजिये।
ख) अपने उत्तरों की जांच इकाई के अन्त में दिये गये उत्तरों से कीजिये।
1) यांग डी-परटुआंग आगौंग के निर्वाचन की प्रक्रिया का संक्षिप्त उल्लेख कीजिये।

उत्तर :

1) उपधारा 15.8.2 देखें
2) इसके मायने हैं कि मंत्रिपरिषद तथा कैबीनेट के सभी सदस्य अपने द्वारा लिये जाने वाले सभी निर्णयों के लिये, संसद के प्रति संयुक्त रूप से उत्तरदायी हैं और यदि मंत्रिपरिषद अथवा कैबीनेट के किसी सदस्य द्वारा पेश किया गया कोई विधेयक सदन के पटल पर खारिज हो जाये, तो संपूर्ण मंत्रीमंडल धराशायी हो जाता है। इसीलिये यह कहा जाता है कि वे एक साथ ही तैरते व डूबते हैं।

संघीय संसद
वैधानिक सत्ता मूल रूप से कानून बनाने तथा कर लगाने की शक्ति तथा विभिन्न खर्चों की स्वीकृति प्रदान करने पर केन्द्रित है।

संघीय स्तर पर, वैधानिक सत्ता यांग डी-परटुआंग आगौंग के नेतृत्व में द्विसदनीय विधान मंडल को सौंपी गई है जो कि दीवान नेगारा (सीनेट) तथा दीवान राकयत (हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव) से मिलकर बना है। प्रत्येक राज्य में एक-सदन वाला विधानमंडल है जिसके चुनाव प्रत्येक पांच वर्ष में एक बार होते हैं।

संघीय एवं राज्य सरकार के बीच वैधानिक शक्ति का बंटवारा संघीय संविधान की नवीं अनसची के तहत किया गया है और इसने एक संघ सूची, राज्य सूची व एक समवर्ती सूची निर्धारित की हुई है।

यदि संघीय तथा किसी राज्य कानून के बीच कोई असंबद्धता पैदा हो जाये तो संघीय कानून को मान्यता दी जाती है।

दीवान नेगारा
दीवान नेगाग में 69 सदस्य हैं जिनमें से 40 यांग डी-परटुआंग आगौंग द्वारा मनोनीत किये जाते हैं जिन्होंने उसकी दृष्टि में विशिष्ट लोक सेवा अथवा व्यावसायिक विशिष्टता प्राप्त करने का काम किया हो। कआलालंपुर के संघीय प्रक्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले दो सदस्यों तथा लाव आन के संघीय प्रदेश से एक सदस्य की नियुक्ति भी यांग डी-परटुआंग आगौंग द्वारा की जाती है। शेष 26 सदस्यों का चुनाव मलेशिया के 13 राज्यों की विधान सभाओं द्वारा किया जाता है, प्रत्येक राज्य से दो सीनेटर चने जाते हैं। राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति, दोनों का चुनाव दीवान नेगारा द्वारा अपने सदस्यों के बीच से किया जाता है। एक सीनेटर तीन वर्षों तक अपने पद पर रहता है। सीनेट को भंग नहीं किया जा सकता।

दीवान राकयत
यह एक जनतांत्रिक कोष्ठ है जिसे जनता द्वारा मताधिकार के आधार पर प्रत्यक्षरूप से चित किया जाता है। इसका आकार जनसंख्या पर आधारित है। 6.6 मिलियन आबादी के साथ 1959 की पहली संसद में 104 सदस्य थे। 1969 में सदस्यता बढ़कर 144 हो गई तथा 1990 में 180 तक पहुंच गई। स्पीकर तथा डिप्टी स्पीकर का चुनाव दीवान राकयत द्वारा किया जाता है। किन्तु संविधान में दीवान राकयत की सदस्यता से बाहर के किसी व्यक्ति को निर्वाचित 180 सदस्यों के अतिरिक्त दीवान का एक सदस्य माना जाता है। दीवान राकयत की सदस्यता 21 वर्ष या अधिक की आय के नागरिकों के लिये सीमित है तथा उन लोगों के लिये जो कि सीनेट के सदस्य हों। निचले सदन का कार्यकाल 5 वर्ष है। हालांकि, यांग डी-परटआंग आगौंग यदि चाहे तो संसद को उससे पहले भी भंग कर सकता है, यदि प्रधानमंत्री ऐसी सलाह दे।

सत्र
यांग डी-परट आंग आगौंग समय-समय पर संसद का अधिवेशन बलाता है और उससे यह अपेक्षा की जाती है कि वह किसी एक सत्र की पिछली बैठक तथा अगले सत्र की पहली बैठक के लिये निश्चित की गई तारीख के बीच 6 माह से अधिक का अन्तर न रखे। संसद प्रायः एक वार में एक सप्ताह के लिये मिलती है, केवल बजट पर विचार करने के लिये जरूरी लम्बी बैठक को छोड़कर, और फिर बर्खास्त हो जाती है।

समिति प्रणाली
प्रस्तुत किए जाने के बाद किसी विधेयक पर, उसे किसी समिति को प्रेषित करने से पर्व, समचे सदन द्वारा विचार किया जाता है। किन्तु आमतौर पर सलैक्ट समितियां मलेशिया की संसद में मौजूद नहीं हैं। हाऊस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव का सामान्य प्रचलन विधेयकों की समिति अवस्था के दौरान समूचे सदन की समिति को उपयोग में लाना है। दूसरे पठन के बाद, सदन स्वयं ही विस्तारों पर गौर करता है और जब बिल को समिति के बाहर रिपोर्ट कर दिया गया हो तो एक संक्षिप्त तृतीय पठन की व्यवस्था की जाती है।

विधानमंडलीय प्रक्रिया
संविधान तथा स्थायी आदेशों द्वारा जिस विधानमंडलीय प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है, ब्रिटिश तथा भारतीय संसदों की प्रक्रिया से काफी मिलती जलती है। विधेयकों को साधारण विधेयकों एवं धन विधेयकों में विभाजित किया गया है। इसके अलावा निजी सदस्य विधेयक भी होते हैं, जिन्हें निजी सदस्यों द्वारा पेश किया जाता है।

धारा 67 के अनुरूप, धन विधेयक के अतिरिक्त अन्य कोई विधेयक किसी भी सदन में पहले प्रस्तुत किया जा सकता है। जब किसी विधेयक को उस सदन द्वारा पारित कर दिया जाता है जहां से उसकी शुरुआत हुई थी, तो इसे अन्य सदन में भेज दिया जाता है, और इसे यांग डी-परट आंग आगौंग के पास उसकी स्वीकृति के लिये भेजा जाता है। यांग डी-परट आंग आगौंग की स्वीकृति के बाद कोई विधेयक कानून का रूप ले लेता है किन्त कोई भी कानून तब तक लागू नहीं किया जा सकता जब तक कि उसे बिना किसी पूर्वाग्रह के प्रकाशित न कर दिया गया हो, हालांकि संसद को यह अधिकार है कि वह किसी कानून के क्रियान्वयन को स्थगित कर सकती है अथवा उसे किसी भूतकालीन दिनांक से प्रभावी बना सकती है।

कोई विधेयक धन विधेयक तब माना जाता है यदि स्पीकर की राय में उसके अंतर्गत धारा 67(1) में उल्लेखित सभी अथवा उनमें से कोई भी प्रावधान शामिल हो, अथवा किसी कर का विनिमयन तथा उससे जुड़े मामले शामिल हों। जब हाउस ऑफ रिप्रेजैण्टेटिव द्वारा कोई धन विधेयक पारित किया जाता है तथा सत्र की समाप्ति से कम से कम एक माह पूर्व उसे मीनेट के पास भेज दिया गया हो, तो उसे यांग-डी परटुआंग आगौंग के पास उसकी म्वीकृति के लिये भेजा जाना चाहिये, बशर्ते यदि हाउस ऑफ रिप्रेजैण्टेटिव इसके विपरीत निर्देश न करें।

संसद के कार्य
संसद अपने स्वयं के क्षेत्रों की सीमाओं के तहत, अर्थात् संघीय एवं समवर्ती सूची तथा कभी कभी राज्य मची के तहत, कानून बना सकती है। कानून बनाने की संसद के प्राधिकार की संघीय न्यायालयों द्वारा न्यायिक समीक्षा की जा सकती है। यांग डी-परटुआंग आगौंग को आपातकाल के दौरान, अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है, जिसे धारा 150 के अनमार कानन की शक्ति प्राप्त होती है।

कियी भी कर अथवा दर को आगेपित करने, किसी भी मौजदा कर को बढ़ाने अथवा घटाने, राज्यों को अनुदान देने, सांसदों व उच्च अधिकारियों को दिये जाने वाले वेतन के बारे में कानन बनाने की शक्ति केवल संसद को प्राप्त है। सार्वजनिक कोष का संरक्षक हान के फलस्वरूप, संसद कार्यपालिका पर नियंत्रण रखने के लिये व्यापक कदम उठाने में सक्षम है, अधिकतर बजट-बहस के दौरान चर्चाओं के माध्यम से।

संविधान में स्पष्ट तौर पर निर्धारित किया गया है कि कैबीनेट अपनी नीतियों तथा कार्यक्रमों के लिये माहिक तौर पर हाउस ऑफ रिप्रेजैण्टेटिव के प्रति उत्तरदायी है। जब भी यह सदन में बहमत का विश्वास अथवा समर्थन खो देती है, तो इसे त्यागपत्र देना। पड़ता है। यदि बहमत का समर्थन प्राप्त कोई वैकल्पिक कैबीनेट न बनाई जा सके तो सदन को भंग कर दिया जाता है और 90 दिन के भीतर आम चुनाव कराये जाते हैं।

कार्यपालिका संविधान में संशोधनों का प्रस्ताव करती है तथा संसद उन्हें स्वीकार, रद्द अथवा संशोधित करती है जिसमें अब तक 20 बार संशोधन किया जा चुका है। किन्तु धारा 10(4)14-31, 38, 63(3), 70, 71(1), 72(4), 152, 153 तथा 159(5) में संशोधन किये जाने संबन्धी कुछ सीमाएं हैं, और वे यह कि नमें शासकों के सम्मेलन की स्वीकृति के बिना संशोधन नहीं किया जा सकता।

संसद के दोनों सदनों तथा उनके सदस्यों को कुछ सविधाएं प्रदान की गई हैं। उनके अपराधों, यदि कोई हों, पर संबद्ध सदन द्वारा दंड दिया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति जोकि सदन की अवमानना करने का दोषी हो, उसे भी सदन द्वारा दण्ड दिया जा सकता है, जोकि ऐसी स्थिति में न्यायालय की तरह काम करता है।

बोध प्रश्न 8
टिप्पणी: क) अपने उत्तर के लिये नीचे दिये रिक्त स्थान का प्रयोग कीजिये।
ख) अपने उत्तरों की जांच इकाई के अन्त में दिये गये उत्तरों से कीजिये।
1) दीवान नेगारा………… सदस्यों से मिलकर बनी है जिनमें से………..को………….द्वारा नामजद किया जाता है।
2) उस तरीके का वर्णन कीजिये जिसके द्वारा मलेशियाई संसद कार्यपालिका पर नियंत्रण रखती है।

बोध प्रश्न 8 उत्तर
1) 69, 40, यांग डी-परटुआंग आगौंग

संघीय न्यायपालिका एवं नागरिकों के अधिकार
मलेशिया में न्यायालयों की मौजूदा प्रणाली ने मलेशिया में ब्रिटिश प्रभाव के विस्तार का ही अनुसरण किया है। 1957 के संविधान ने यह प्रावधान करते हुए कि, एक सर्वोच्च न्यायालय होना चाहिये तथा ऐसे सहायक न्यायालय होने चाहिये जिनका निश्चय संघीय कानून द्वारा किया जा सकता है, वर्तमान न्याय प्रणाली को जारी रखा था।

1963 में, मलेशिया के निर्माण के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय विलुप्त हो गया। ऐसा तब हुआ जबकि धारा 121 में संशोधन करके यह प्रावधान किया गया कि संघ की न्यायिक शक्तियां संभावित प्रभाव क्षेत्र व प्रतिष्ठा वाले तीन उच्च न्यायालयों तथा कानून द्वारा यथा उपबंधित ऐसे अधीनस्थ न्यायालयों को सौंपी जायेगी। तीन उच्च न्यायालय मलाया, सिंगापुर तथा बोर्नियो के थे। 1965 में सिंगापुर के अलग हो जाने के बाद से अब केवल दो ही रह गये हैं: इनमें से प्रत्येक का प्रमुख उनका अपना चीफ जस्टिस है। 16 सितम्बर 1963 के मलेशिया दिवस से, सर्वोच्च न्यायालय के उन्मूलन किये जाने के साथ ही अपील न्यायालय भी समाप्त हो गया और उसका स्थान संघीय न्यायालय ने ले लिया।

न्यायिक प्राधिकारी
मलाया में उच्च न्यायालय मलाया के राज्यों के लिये है तथा कुआलालम्पर में इसकी प्रमुख रजिस्ट्री है। बोर्नियो में स्थित उच्च न्यायालय सबाह व सरवाक राज्यों के लिये है, तथा रगती प्रमाव रजिस्टी यांग डी-परटुआंग आगौंग द्वारा निश्चित किये जाने वाले स्थान पर होती है। प्रत्येक उच्च न्यायालय के तहत एक चीफ जस्टिस तथा कम से कम चार अन्य न्यायाधीश होते हैं, किन्तु अन्य न्यायाधीशों की संख्या में तब तक वृद्धि नहीं की जाती जब तक कि संसद इस तरह का कोई निर्णय न करे, यह संख्या माले के उच्च न्यायालय में 12 तथा बोर्नियो के उच्च न्यायालय में 8 की है।

संघीय न्यायालय का लार्ड प्रेजीडैण्ट, उच्च न्यायालयों के चीफ जस्टिस तथा अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति यांग डी-परटुआंग आगौंग द्वारा की जाती है, जोकि शासकों के सम्मेलन से सलाह-मशविरा करने के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है।

संघीय न्यायालय का कोई न्यायाधीश किसी भी समय त्यागपत्र दे सकता है किन्तु कुछ प्रावधानों के अलावा उसे पद से हटाया नहीं जा सकता। इस तरह, यदि प्रधानमंत्री अथवा प्रधानमंत्री से सलाह करने के बाद लार्ड प्रेसीडैण्ट यांग डी-परटुआंग आगोंग को ज्ञापन देकर यह मांग करें कि संघीय न्यायालय के किसी न्यायाधीश को दुर्व्यवहार अथवा स्वास्थ्य की खराबी अथवा मानसिक विकति के फलस्वरूप अपने पद के दायित्वों को निभाने में अक्षम होने की वजह से पद से हटा दिया जाना चाहिये, तो यांग डी-परटुआंग आगौंग एक ट्रिब्यूनल नियुक्त करेगा तथा इस ज्ञापन को उसके पास भेज देगा। ट्रिब्यूनल की सिफारिश पर न्यायाधीश को पद से हटा भी सकता है। अधीनस्थ अथवा निम्नतर न्यायालयों के तहत, जिन्हें कानून द्वारा स्थापित किया गया है, सैशन कोर्ट, मजिस्ट्रेट कोर्ट तथा पैन्गुलम कोर्ट शामिल है, जिनकी सीमित एवं स्थानीय प्रभाव क्षेत्र रहता है। उन्हें राज्य विधानमंडलों द्वारा स्थापित किया गया है तथा वे अदालतों की पृथक प्रणाली का निर्माण करते हैं। किन्तु सामान्य कार्यों के साथ कोई राज्य न्याय प्रणाली मौजूद नहीं है।

प्रभावक्षेत्र
संघीय न्यायालय को उच्च न्यायालयों अथवा उनके किसी न्यायाधीश द्वारा सुनाए गए फैसलों के विरुद्ध अपील का निर्णय करने का विशेष अधिकार प्राप्त है। यह ऐसा मूल प्रभाव क्षेत्र है जिसकी व्याख्या धारा 130 में की गई है। अपने मूल प्रभाव क्षेत्र के तहत, संघीय न्यायालय को संविधान की व्याख्या करने तथा राज्यों के बीच तथा किसी राज्य तथा संघीय सरकार के बीच के विवादों का निपटारा करने की शक्ति प्राप्त है। धारा 128 (1) इसे इस बात का निधारण करने के लिए अधिकृत करते हुए, कि संसद अथवा किसी राज्य के विधानमंडल द्वारा बनाया गया कोई कानून, यदि संविधान के प्रावधानों के अनुरूप न हो, तो क्या उसे रद्द किया जाना चाहिये, इसे न्यायिक समीक्षा की शान्ति प्रदान करती है। धारा 128(2) के तहत इसे प्रेषण प्रभावक्षेत्र भी प्राप्त है जो कि यह कहती है कि जब कोई मामला किसी अन्य न्यायालय के अधीन विचाराधीन हो तथा संविधान के किसी प्रावधान के प्रभावों से जुड़ा कोई प्रश्न पैदा हो जाये तो संघीय न्यायालय को उस प्रश्न का निर्धारण करने तथा अन्य न्यायालय में केस का निपटारा (उस निर्धारण के अनुरूपं) कर देने का अधिकार है। अन्ततः धारा 130 के तहत इसका सलाहकार के रूप में भी प्रभावक्षेत्र हैं जो कि यांग डी-परटुआंग आगौंग को किसी भी मामले में संघीय न्यायालय से सलाह प्राप्त करने की शक्ति प्रदान करता है।

प्रत्येक उच्च न्यायालय का मूल तथा अपील संबंधी प्रभावक्षेत्र है तथा संविधान की व्याख्या करने की शक्ति प्राप्त है।

 न्यायपालिका की स्वतंत्रता
पृथक् राज्य मंत्रालय का 1970 में इस आधार पर उन्मूलन कर दिया गया था कि इसकी मौजूदगी न्यायपालिका की स्वतंत्रता के विपरीत है। अब न्याय मंत्री की अनुपस्थिति में, लार्ड प्रेसीडैण्ट तथा दो चीफ जस्टिस, न्यायालयों में बैठने व फैसले लिखने के अलावा, उनके अधीनस्थ न्यायालयों की भी देखरेख करते हैं। संविधान की व्याख्या करते हए तथा निजी अधिकारों के संरक्षक के रूप में काम करते हुए यह जरूरी है, न्यायाधीश स्वतंत्र रहते हुए कार्य करें। इसके परिणामस्वरूप न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से, राज्य सरकारों अथवा संघीय एवं राज्य सरकारों के बीच विवादों का निपटारा करने वाली संस्था के रूप में काम करती है।

नागरिकों के अधिकार
किसी भी अन्य संविधान की तरह ही, मलेशिया का संविधान भी नौ विभिन्न मौलिक अधिकारों अथवा स्वतंत्रताओं को स्वीकार करता है तथा उनका पालन सुनिश्चित करता है। वे निम्न प्रकार हैं:

बोध प्रश्न 9
टिप्पणी: क) अपने उत्तर के लिये नीचे दिये रिक्त स्थान का प्रयोग कीजिये।
ख) अपने उत्तरों की जांच इकाई के अन्त में दिये गये उत्तरों से कीजिये।
1) मलेशिया में न्यायिक समीक्षा के प्रचलन का वर्णन कीजिये।
2) मलेशिया में नारक को दिये गये विभिन्न अधिकार क्या हैं?

बोध प्रश्न 9 उत्तर
1) न्यायिक समीक्षा मलेशिया में सर्वोच्च न्यायालय की संसद द्वारा बनाये गये कानूनों की समीक्षा करने तथा असंवैधानिक पाये जाने पर उन्हें खारिज घोषित कर देने की शक्ति है।

 पार्टी प्रणाली
मलेशिया में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष ढंग से प्रत्येक पांच वर्षों में कम से कम एक बार चुनाव कराये जाते हैं तथा एक बहुदलीय प्रणाली के आधार पर हाउस ऑफ रिप्रेजैण्टेटिव तथा राज्य विधान सभाओं के सदस्यों का चुनाव किया जाता है, अर्थात् जिस प्रत्याशी को किसी चुनाव क्षेत्र में अधिकांश मत प्राप्त होने हैं उसे ही निर्वाचित घोषित किया जाता है।

आम चुनाव, संक्षेप में
1957 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद से आठ आम चुनाव कराये जा चुके हैं 1959, 1964, 1969, 1974, 1978, 1982, 1986, 1990, 1964 तथा 1969 दोनों के चुनावों में संघीय स्तर पर एलाइन्स पार्टी ही, 1955 से शामक दल होने के अपने अटूट कीर्तीमान को कायम रखते हुए सत्ता में वापस आई थी।

1969 के चुनावों के बाद, कुछ समय तक अंतर-जातीय दंगों का दौर चला जिसे आगे चलकर ‘‘मई 18 की घटना’’ के नाम से जाना जाता है, जिसने सरकार को आयात स्थिति की घोषणा करने पर मजबूर कर दिया तथा देश का प्रशासन चलाने के लिये एक नेशनल ऑपरेशन काउन्सिल की स्थापना की गई।

1970 में, टुन अब्दुल रजाक बिन हाजी हुसैन मलेशिया के दूसरे प्रधानमंत्री बने, जबकि टुंक अब्दुल रहमान के पुत्र, अल-हज उनके समर्थन में अपने पद से अलग हो गए।

1971 में, दोबारा संसद बलाई गई तथा जातीय सद्भाव के ऊपर बरा असर डालने वाली सार्वजनिक चर्चा पर रोक लगाने के लिये संविधान में संशोधन किये गये। साथ ही इस आशय के उपाय किये गये ताकि देसी जनता की देश के आर्थिक जीवन में पूर्ण भागीदारी के लिये अवसर सुनिश्चित किये जा सके। इसे आगे बढ़ाते हुए, एलाइन्स पार्टी ने सफलता के साथ एक राष्ट्रीय मोर्चा बनाने के लिये पहल की, जिसके अंतर्गत अनेक विरोधी दल शामिल हो गये। 24 अगस्त 1974, मलेशियाई में चैथे आम चुनाव हुए और राष्ट्रीय मोर्चे को जबर्दस्त विजय हासिल हुई। उसने 154 संसदीय सीटों में से 135 पर विजय प्राप्त कर ली। 15 जनवरी 1976 को, द्वितीय प्रधानमंत्री, टुन अब्दुल रजाक की मृत्यु हो गई। हुसैन आनैं मलेशिया के तीसरे प्रधानमंत्री बने।

1978 में पांचवां आम चुनाव हुआ। इसमें भी राष्ट्रीय मोर्चे ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और 10 राज्य विधानसभाओं में अपने नियंत्रण को बरकरार रखा। इसके बाद पेन इस्लामिक पार्टी मोर्चे से अलग हो गई। लेकिन मोर्चे के प्रभाव में गिरावट आई, इसे 1974 में 60.7 प्रतिशत के मुकाबले 1978 में 55.14 प्रतिशत मत मिले। सीटों की दृष्टि से, मोर्चे को दो-तिहाई बहुमत प्राप्त हो गया।

16 जुलाई 1981 को, दातो सेती महाथिर मौहम्मद मलेशिया के प्रधानमंत्री बने। ऐसा टुन हुसैन ऑन के अवकाश ग्रहण कर लेने पर हुआ। 1982 तथा 1986 के आम चुनावों में, शासक राष्ट्रीय मोर्चे ने दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करके विजय हासिल की। 1982 में, राष्ट्रीय मोर्चे ने 154 सीटों में से 132 सीटें जीत कर जबर्दस्त विजय प्राप्त की। आठवां आम चुनाव अक्टूबर 1990 में हुआ और राष्ट्रीय मोर्चे ने 180 सदस्यों वाली दीवान राकयत में 128 सीटें जीत लीं।

एलाइन्स पार्टी
दूसरे विश्व युद्ध से पहले, मलाया में सीमित राजनैतिक गतिविधि होती थी किन्तु जापानी आधिपत्य तथा उसके बाद से एक नई राजनैतिक जागरुकता पैदा हुई। युद्धोत्तर राजनैतिक दलों ने स्वतंत्रता की मांग की और यद्यपि मलेशिया को भारी आबादी वाले अल्पसंख्यकों के प्रभुत्व हो जाने का भय था, खासतौर पर आर्थिक रूप से शक्तिशाली चीनीयों से, फिर भी माले की नेतृत्वकारी पार्टी, यूनाइटेड मालेस नेशनल ऑगेनाइजेशन (यू.एम.एन.ओ.) तथा मलेशियन चाइनीज एसोशीएशन (एम.सी.ए.) ने 1952 में एलाइन्स पार्टी का निर्माण किया। आगे चलकर इस पार्टी में मलेशियन इण्डियन कांग्रेस भी शामिल हो गई और यह राष्ट्र की प्रभुत्वशाली राजनैतिक पार्टी बन गई।

संघ की एक प्रमुख राजनैतिक पार्टी के रूप में, यू.एम.एन.ओ. ने मूलतः 1946 में देश की आजादी के लिए संघर्ष करने तथा स्वदेशी लोगों के हितों की सुरक्षा, राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहन तथा एक ‘‘निरपेक्ष नीति’’ पर अमल करना, लक्ष्य रखा है।

1987-88 में यू.एम.एन.ओ. के भीतर मतभेद पैदा हुए, जिनका पटाक्षेप फरवरी 1988 में उच्च न्यायालय के एक आदेश के रूप में हुआ, जिसने अप्रैल 1987 के पार्टी के आंतरिक चुनावों में धांधलियों के फलस्वरूप, यू.एम.एन.ओ. को एक गैर-कानूनी निकाय घोषित किया। अतः उसे भंग किया जाना जरूरी हो गया और तुरन्त ही डॉ. महाथिर द्वारा एक नई यू.एम.एन.ओ. (यू.एम.एन.ओ. बारू) का गठन कर लिया गया। भूतपूर्व प्रधानमंत्री टुंक अब्दुल रहमान के नेतृत्व में, यू.एम.एन.ओ. के असंतुष्ट सदस्यों तथा भूतपूर्व व्यापार एवं उद्योग मंत्री टंक तन श्री रजालेग हामजा को बाहर रहने पर विवश कर दिया गया और मई 1989 में उन्होंने एक वैकल्पिक पार्टी, सेमंगत ‘46‘ (1946 की भावना) बना ली।

वर्तमान में 12 अन्य पार्टियां भी शासक राष्ट्रीय मोर्चा गठबंधन की सदस्य हैं, उनमें से अधिकांश सांप्रदायिक अथवा क्षेत्रीय आधार पर हैं। सबसे अधिक महत्वपूर्ण चीनी उन्मख, एम.सी.ए. हैं, जो कि 1949 में बना एक रूढ़िवादी गठबंधन हैं, जिसने हाल ही में 5,00,000 सदस्यता होने का दावा किया है। डाक्टर लिंग लिआंग सिक उसके नेता हैं।

अन्य पार्टियां
देश की राजनीति में अन्य सभी पार्टियों की भूमिका अत्यंत सीमित रही है। इसके अलावा उनका वर्गीकरण कर पाना भी आसान नहीं है। कुछ गैर-माले हैं, कुछ सांप्रदायिक हैं, जबकि कुछ सांप्रदायिक झुकावों से मुक्त हैं। पीयुन्स प्रोग्रेसिवं पार्टी (पी.पी.पी.) का गठन सीलौन के दो वकीलों द्वारा पेरक में, जनवरी 1953 में किया गया था। 14 अक्टूबर 1953 की संघीय चुनाव समिति को प्रेषित अपने ज्ञापन में, इसने अपने गैर-सांप्रदायिक रुझान पर बल दिया और यह सिफारिश की कि चुनाव गैर-सांप्रदायिक आधारों पर कराये जाने चाहिये। 1953-55 के संक्षिप्त काल के दौरान पार्टी ने गठबंधन के साथ सहयोग किया था। पार्टी की खास अपील गैर-मालों के बीच है, खासतौर पर भाषाई तथा धार्मिक मुद्दों पर।

युनाइटेड डैमोक्रेटिक पार्टी (यू.डी.पी.) का गठन एम.सी.ए. के कुछ भूतपूर्व नेताओं द्वारा अप्रैल 1962 में किया गया था, जिसमें गठबंधन में एक संकट उभर आने के बाद संगठन को छोड़ दिया था। यह एक गैर-सांप्रदायिक पार्टी होने का दावा करती है। डॉक्टर लुग चांग ऊ, जो कि एम.सी.ए. के भूतपूर्व अध्यक्ष हैं, इसकी प्रमुख शक्ति रहे हैं। पी.पी.पी. तथा य.डी.पी., दोनों ही गैर-माले पार्टियां हैं। उन्हें विपक्षी दलों के रूप में ही अपना अस्तित्व बनाये रखने की आज्ञा दी गई है, जो कि संसदीय जनतंत्र में एक आवश्यक जरूरत होती है, और इस तरह गैर-माले असंतोष को एक कानूनी तौर पर गठित एवं । नियंत्रित प्रवाह प्रदान किया गया है।

संघ के भीतर प्रमुख विपक्षी पार्टी, लिंओग किट सियांग के नेतृत्व वाली 12000 सदस्यों की डैमोक्रेटिक एक्शन पार्टी (डी.ए.पी.) है, जिसमें चीनीयों का ही प्रायः प्रभुत्व है। 1966 में गठित डी.ए.पी. जनतांत्रिक समाजवाद पर आधारित एक बहु-जातीय समाज की स्थापना करने की पैरवी करती है। इस्लामिक-रेडीकल, 250000 सदस्यों वाली पान-मलेशियन इस्लामिक पार्टी (पी.ए.एस.) भी महत्वपूर्ण है, जिसका गठन 1951 में हुआ था और जो पूर्ण रूप से इस्लामिक समाज की स्थापना की वकालत करती है।

अन्य पार्टियों में कडाजम-समर्थित सबाह यूनाइटेड पार्टी (पी.बी.एस.) शामिल है जोकि 1985 से अस्तित्व में आई है और उसके नेता एक रोमन कैथोलिक डाटुक जोजफ पेरिन किटांगन है। हिजबुल मुस्लिम की स्थापना पी.बी.एस. से अलग हुए एक गुट के रूप में 1986 में हुई थी। पार्टी बंसा दायक सरवाक (पी.बी.डी.एफ.) का गठन 1983, मलेशियन इस्लामिक काउंसिल फ्रंट (एफ.एम.आई.सी.) का 1977 में तथा सरवाक नेशनल पार्टी – (एस.एन.पी.) का 1961 में हुआ था।

पार्टी व्यवस्था की प्रकृति
पार्टी व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं पर निम्नलिखित तरीके से संक्षिप्त चर्चा की जा सकती है:
राजनैतिक पार्टियों की वैधानिक स्थिति
मलेशिया का संविधान, अन्य अधिकांश संविधानों की भांति ही, इस विषय पर मौन है। मलेशिया में 20 से भी अधिक राजनैतिक पार्टियां हैं। राजनैतिक पार्टी का निर्माण सोसाइटीज एक्ट 1966 के तहत, समय समय पर संशोधित किये जाते रहे नियमों, के अनुरूप किया जाता है। अधिनियम की धारा 7(1) रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज को किसी राजनैतिक पार्टी के पंजीकरण से इंकार कर देने के लिये भी अधिकृत करती है, यदि मंत्री की राय में उससे संघ अथवा उसके किसी हिस्से के हितों अथवा सुरक्षा पर, सार्वजनिक. सुरक्षा अथवा नैतिकता पर असर पड़ सकता हो, तथा जो ऐसी राजनैतिक प्रकृति वाला संगठन अथवा समूह हो अथवा जिसकी संबद्धता अथवा संपर्क संघ के बाहर भी हो। औपनिवेषिक काल में ही मलेशिया की कम्युनिस्ट पार्टी पर प्रतिबन्ध लगा हुआ था, उसने पंजीकरण के लिये कभी भी आवेदन नहीं किया।

बहुदलीय व्यवस्था
हालांकि ब्रिटेन व भारत की भांति मलेशिया ने भी साधारण बहुमत की प्रणाली को अपनाया है, फिर भी यह इस मामले में बिटेन से भिन्न है कि यहां 20 से भी अधिक राजनैतिक दल हैं। दूसरी तरफ, इस मामले में वह भारत की भांति नहीं है। इस बहुलता का मुख्य कारण (क) बिखरे हुए अनेक समूह तथा (ख) स्थानीय प्रतिबद्धताएं हैं।

पार्टीयों का साम्प्रदायिक/जातीय चरित्र
यह एक बहुल उल्लेखनीय लक्षण है, जोकि इस तथ्य के फलस्वरूप पैदा हुआ है कि मलेशिया एक बहु-जातीय समाज है। तीन महत्वपूर्ण जातीय समदायों के अलावा माले, चीनी व भारतीय-देश के विभिन्न भागों में अनेक अन्य समुदाय भी बसे हुए हैं। मलेशिया की राजनैतिक पार्टियां सांप्रदायिक हैं, और वे जातीय भिन्नताओं पर आधारित हैं, न कि भारत की तरह धार्मिक भिन्नताओं पर।

एक पार्टी का वर्चस्व
मलेशिया में पार्टी-व्यवस्था, भारत की भांति ही, एक पार्टी के वर्चस्व से चरितार्थ होती है। एलाइन्स पार्टी, जोकि यू.एम.एन.ओ., एम.सी.ए. तथा एम.आई.सी. नामक तीन पार्टियों का गठबंधन है, 1955 से 1971 तक राष्ट्रीय राजनैतिक परिदृश्य पर वर्चस्व बनाये रही है। आगे चलकर, राष्ट्रीय मोर्चा अपने मुख्य घटक य.एम.एन.ओ. के साथ सत्ता में आया। यहां यह भी कहा जा सकता है कि कोई भी एक पार्टी गठबंधन कारी नहीं रही है। एलाइंस पार्टी की सफलता को ध्यान में रखते हुए एक अन्य गठबंधननुमा मोर्चा सोशलिस्ट फ्रंट-1957 से 1965 तक कायम रहा था।

हित समूह
मलेशिया में हित समूह हाल ही में उभरे हैं तथा उनकी संख्या भी अधिक नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण हित समूह ट्रेड-यूनियनें हैं, जोकि सांप्रदायिकता के प्रभावों से मुक्त नहीं हैं। शहरी मजदूर-चीनी एवं भारतीय-ट्रेड यूनियनों में संगठित हैं। भारतीयों की ट्रेड यूनियनें व ट्रेड यूनियन नेता बड़ी संख्या में हैं। 1962 तक वहां 300 ट्रेड यूनियनें बन गई थीं, जिन्हें आगे चलकर मान्यता प्राप्त हो गई। सबसे बड़ी यूनियन नेशनल यूनियन ऑफ प्लाण्टेशन वर्कर्स है तथा यूनियनों का सबसे बड़ा समूह मलेशियन ट्रेड यूनियन कांग्रेस है। विभिन्न चैम्बर ऑफ कॉमर्स महत्वपूर्ण दवाब-गुटों के रूप से काम कर रहे हैं।

बोध प्रश्न 10
टिप्पणी: क) अपने उत्तर के लिये नीचे दिये रिक्त स्थान का प्रयोग कीजिये।
ख) अपने उत्तरों की जांच इकाई के अन्त में दिये गये उत्तरों से कीजिये।
1) पान-मलेशियन इस्लामिक पार्टी की विचारधारा की चर्चा कीजिये।
2) यदि राजनैतिक प्रकृति वाला कोई संगठन संघ के बाहर के संपर्कों के साथ स्थापित
होता है, तो क्या होता है।

बोध प्रश्न 10 उत्तर
2) इस पर पाबंदी लगा दी जायेगी।

मलेशिया अंतर्राष्ट्रीय मामलों में
मलेशिया की स्थापना तेजी से बढ़ते तनाव के वातावरण में हुई थी। लंदन समझौता जिसने संघ को अंतिम स्वरूप प्रदान किया था, उसका पड़ोसियों ने विरोध किया था। फिलीपीन्स द्वारा अभिव्यक्त किया गया विरोध मुख्यतः उत्तरी बोर्नियो के कुछ हिस्से पर आधिपत्या के उसके दावे से संबंधित अनसुलझे मुद्दे से ही पैदा हुआ था। दूसरी तरफ इंडोनेशिया की शत्रता, विचारधारात्मक, आर्थिक एवं राजनैतिक कारकों की एक जटिल गत्थी थी। फिलीपीन्स सरकार ने मलेशिया से अपने राजनयिक संबन्ध तोड़ लिये थे। आगामी वर्ष के दौरान मलेशिया एवं इंडोनेशिया के रिश्ते इस कदर तनावपूर्ण हो गये कि सभी व्यापार, यात्रा एवं संचार संबन्ध समाप्त कर दिये गये हैं।

भावी परिणाम
जनवरी 1966 में, मलेशिया के विरुद्ध इंडोनेशिया का टकराव कुछ सीमा तक कम हो गया क्योंकि इंडोनेशिया के नेता एक नई सरकार के निर्माण में संलग्न थे।

1 जून 1966 को, मलेशिया के उप प्रधानमंत्री टुन अब्दुल रजाक तथा इंडोनेशिया के विदेशमंत्री आदम मालिक के बीच बैंकाक में, इंडोनेशिया के मलेशिया के विरुद्ध तीन वर्ष पुराने टकराव को समाप्त करने की दृष्टि से, एक शान्ति-समझौते पर सहमति हुई।

इंडोनेशिया व मलेशिया के बीच शन्ति-समझौता हो जाने के उपरान्त, फिलीपीन्स ने भी मलेशिया को मान्यता प्रदान करने के लिये ठोस कदम उठाये, तथा 3 जून को, मलेशिया व फिलीपीन्स के बीच तीन वर्षों के अंतराल के बाद पूर्ण राजनयिक संबंध कायम हो गये।

11 अगस्त 1966 को, टन अब्दल रजाक तथा इंडोनेशिया के विदेश मंत्री आदम मालिक के बीच जकार्ता में एक शान्ति-समझौते पर हस्ताक्षर किये गये, और तीन वर्ष पुराने टकराव का अंत किये जाने का संकेत दिया गया। अगस्त 1967 तक, मलेशिया एवं इंडोनेशिया के बीच पूर्ण राजनयिक संबन्ध कायम हो गये।

विदेश संबन्ध
मलेशिया की विदेश नीति का मूल तत्व शान्ति है। दक्षिण-पूर्व एशिया में क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने व कायम रखने में, मलेशिया ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है: इस्लामी एक-जुटता को प्रोत्साहन, गुट-निरपेक्षता को मजबूत बनाने, अधिक से अधिक संभव देशों के साथ मैत्री पूर्ण संबन्ध की इच्छा, तथा उन देशों के साथ संपर्कों को सदढ़ बनाने की नीति, जिनके साथ मलेशिया के हित एक समान हैं।

क्षेत्रीयता को बढ़ावा देने के लिये, मलेशिया आसियान (एसोशीएशन ऑफ ईस्ट एशियन नेशन्स) में सक्रिय रूप से शामिल हैं, जिसके सदस्य देश हैं ब्रुनेई, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपीन्स, सिंगापुर तथा थाईलैण्ड। यह दक्षिण-पूर्व एशिया में एक शान्ति, स्वतंत्रता एवं निरपेक्षता का क्षेत्र कायम करने की दिशा में काम कर रहा है जो कि क्षेत्र में शान्ति तथा स्थिरता का आधार प्रदान करेगा।

आसियान के एक सदस्य के रूप में, मलेशिया ने अपने कम्युनिस्ट पड़ोसियों के साथ मजबूत राजनैतिक संबन्ध स्थापित करने का प्रयास किया है। 1978 तथा 1989 के बीच मलेशिया ने करीब 230000 वियतनामी शरणार्थियों को राजनैतिक शरण प्रदान की थी, जब तक कि पश्चिम में उनका पुनर्वास नहीं हो गया। मार्च 1989 में, शरणार्थियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो जाने तथा उनका पुनर्वास करने के प्रति पश्चिमी देशों की बढ़ती हठधर्मी के चलते आसियान ने घोषणा की कि इंडो-चीन के शरणार्थियों की जांच करके यह देखा जायेगा कि उनमें कितने ‘‘वास्तविक’’ शरणार्थी हैं और कितने आर्थिक प्रवासी हैं, और उन्हें अलग किया जायेगा। इस नीति को दक्षिण-पूर्व एशियाई शरणार्थियों से संबन्धित संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में दोहराया गया।

मलेशिया इस्लामिक देशों के बीच एकजुटता तथा एकता का प्रबल समर्थक है। मलेशिया न केवल धार्मिक बल्कि आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, वैज्ञानिक व तकनीकी क्षेत्रों में भी, इन देशों के साथ सहयोग को बढ़ावा दे रहा है, खासतौर पर इस्लामी सम्मेलन (ओ.आई.सी.) का संगठन करने के माध्यम से।

गुट निरपेक्षता के आर्दशों को सदृढ़ एवं मजबूत बनाने में सहायता करने के लिये, मलेशिया गुट-निरपेक्ष आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाता है तथा उसने सितम्बर 1973 के अल्जीयर्स सम्मेलन, अगस्त 1976 के कोलम्बो सम्मेलन, सितम्बर 1979 के हवाना सम्मेलन, 1983 के नई दिल्ली सम्मेलन व सितम्बर 1986 के हरारे सम्मेलन समेत, इसकी अनेक बैठकों में भाग लिया है।

न्याय एवं समानता पर आधारित एक नई विश्व आर्थिक व्यवस्था की स्थापना के लिये, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग व तालमेल को बढ़ावा देने में मलेशिया के प्रयास भी, संयुक्त राष्ट्र संघ व इसकी तमाम एजेन्सियों तथा राष्ट्रमंडल तथा कोलम्बो योजना, तथा एशियन डवलपमैंट बैंक जैसे सहयोग के क्षेत्रीय संगठनों, आदि जैसे विश्व निकायों की गतिविधियों में इसके सीधे तौर पर शामिल रहने में स्पष्ट दिखाई देते हैं। मलेशिया के 53 देशों में 63 राजनयिक मिशन मौजूद हैं। 18 देशों में ऑनरेरी कन्सलेट भी स्थापित किये गये हैं। मलेशिया में 82 देशों के राजनयिक मिशन तथा पड़ोसी देशों से मलेशिया में 24 प्रत्यायन मौजूद हैं।

बोध प्रश्न 11
टिप्पणी: क) अपने उत्तरों के लिये नीचे दिये रिक्त स्थान का प्रयोग कीजिये।
ख) अपने उत्तरों की जांच इकाई के अंत में दिये गये उत्तरें से कीजिये।
1) निम्नलिखित शब्दों के अर्थ क्या हैं।
क) आसियान (ए.एस.ई.ए.एन.)
ख) जोपफान (जैड.ओ.प.एफ.ए.एन.)
ग) नियो (एन.आई.ई.ओ.)
घ) नाम (एन.ए.एम.)

बोध प्रश्न 11 के उत्तर 
1) क) एसोशीएशन ऑफ ईस्ट एशियन नेशन्स
ख) जोन आफ पीस, फ्रेण्डशिप एण्ड न्युट्रैलिटी
ग) न्यू इण्टरनेशनल एकोनोमिक आर्डर
घ) नॉन एलाइन मूवमैण्ट

 सारांश
मलेशिया ने भारत से 10 वर्ष बाद स्वतंत्रता प्राप्त की थी तथा यह सितम्बर 1963 में सबाह व सरवाक के उपनिवेषों को शामिल करते हुए मलेशियाई संघ बना था। अगस्त 1965 में सिंगापुर मलेशियाई संघ से अलग हो गया। मलेशिया की कुछ उल्लेखनीय विशेषताएं, खासतौर से भारतीय विद्यार्थियों के लिये, निम्न प्रकार से हैं: इसकी जनसंख्या भारत की तरह ही सम्मिलित एवं भिन्नतापूर्ण है। इस तरह इसका समाज बहुल है तथा इसकी राजनीति आमतौर पर जातीय टकरावों से चरितार्थ होती है। तीसरा यह कि मलेशिया का संविधान भी भारत की तरह ही संसदीय एवं संघीय, दोनों, है। दोनों ही मामलों में मूल लक्षण एक जैसे ही हैं फिर भी दोनों देशों के संवैधानिक प्रावधानों तथा प्रचलनों के बीच अनेक अन्तर भी मौजूद हैं।

शब्दावली
संघ: किसी एक लीग में एकबद्ध होने का समझौता जिसमें प्रत्येक घटक अपनी सत्ता को केंद्रीय सत्ता के अधीनस्थ रखता है।
संसदीय प्रणाली: यदि विधानमंडल तथा कार्यपालिका निकट सहयोग के साथ काम करते हैं और कार्यपालिका विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी होती है, तो इस व्यवस्था को संसदीय प्रणाली कहा जाता है।
राजनैतिक संस्कृति: मुद्दों एवं मूल्यों का आम परिवेश जिसके तहत किसी देश की जनता राजनीति के बारे में सीखती है और जिसके तहत उनकी सरकार काम करती है।
प्राइमस इण्टर पायर्स: बराबर वालों में प्रथम
न्यायिक समीक्षा: संसद द्वारा बनाये गये कानूनों की समीक्षा करने की सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति तथा उन्हें संविधान के प्रावधानों के प्रतिकूल पाये जाने पर रद्द घोषित करने की शक्ति।
आसियान: ऐसोशिएशन ऑफ ईस्ट एशियन नेशन्स
जोपफान: जोन ऑफ पीस, फ्रेण्डशिप एण्ड न्यूट्रेलिटि।
गुट निरपेक्षता: शान्ति-युद्ध की प्रतिक्रिया में उभरी एक नीति, जिसे राष्ट्रों के एक समूह ने आगे बढ़ाया, जिसने अन्ततः गुट-निरपेक्ष आन्दोलन को जन्म दिया।
नीयो (एन.आई.ई.ओ.): नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था।
संरक्षणकर्ता: किसी शक्तिशाली राज्य का किसी कमजोर राज्य से संबन्ध जोकि इसके नियंत्रण व संरक्षण में हो अथवा कोई राज्य अथवा क्षेत्र जिस पर इस तरह नियंत्रण व संरक्षण दिया जा रहा हो।

 कुछ उपयोगी पुस्तकें
क्राउच हैराल्ड, ली काम हिंग, तथा औग माइकल (संपा) मलेशियन पॉलिटिक्स एण्ड द 1978 इलैक्शनस, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 1980.
इस्मैन, मिल्टन जे., एडमिनिस्ट्रेशन एण्ड डवलपमेंट इन मलेशिया, इथाका, न्यूयार्क, कोर्नोल यूनिवर्सिटी प्रेस, 1972.
झा, गंगानाथ, साऊथ ईस्ट एशिया एण्ड इडिया: ए पोलिटिकल परस्पैक्टिव, नेशनल बुक ऑर्गेनाइजेशन, नई दिल्ली, 1986 मलेशिया ऑफीशीयल ईयर बुक, 1991.
मलेशियन ईयर बुक, 1991.
मीन्स, गोर्डन पी., मलेशियन पॉलीटिक्स, दूसरा संस्करण, लंदन, हॉडर एण्ड स्टाउटन, 1976.
मिल्ने, आर.एस. एण्ड के.जे. रत्नम, मलेशिया-नयू स्टेटस इन ए न्यू नेशन, लंदन रू सेस, 1974
मिल्ने, आर.एस., मौजी डाइने के, पॉलिटिक्स एण्ड गवर्नमैण्ट इन मलेशिया, सिंगापुर: फैउरल पब्लिकेशनस, 1978
नागी, आर, बि पॉवरर्स एण्ड माउथ ईस्ट एशियन सिक्योरिटी, मैंसर्स बुक्स, नई दिल्ली, 1986.
सूफियन, टुन मोहम्मद, एच.पीलर, एण्ड एफ.ए. ट्रिन्डाडे, द कांस्टीट्यूशन आफ मलेशहया: इटस डवलपमैण्ट 1957-77.
ऑक्सफोर्ड: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 19781,