कायका की अवधारणा क्या है | कायका किसे कहते है परिभाषा बताइए kayka in hindi meaning definition

By   February 1, 2021

kayka in hindi meaning definition कायका की अवधारणा क्या है | कायका किसे कहते है परिभाषा बताइए ?

कायका
वीरशैववाद सभी व्यवसायों को समान एवं महत्वपूर्ण मानता था। कर्तव्य तथा समर्पण भाव से कष्ट सहना व्यक्ति तथा समुदाय के कल्याण तथा जीविकोपार्जन के लिए अनिवार्य माना गया। लिंगायतमत ने व्यवसायों के बीच किसी तरह का श्रेणीबद्ध भेदभाव नहीं किया। कष्ट सहने से जुड़ी इस विचारधारा के सामाजिक निहितार्थ समाज में श्रम तथा मजदूरी की समस्या के प्रति एक सकारात्मक रुख तथा रचनात्मक समझ को बढ़ावा देना था। ब्राह्मणवादी हिन्दू धर्म द्वारा प्रोत्साहित रुख की तुलना में इसने काम के प्रति एक सांसारिक तार्किक एवं उदार रुख की दीक्षा दी। ब्राह्मणवादी हिन्दूवाद सांसारिक, गतिविधियों के लिए किए जाने वाले प्रयासों को बढ़ावा नहीं देता था। वीरशैववाद ने तर्क दिया कि व्यक्ति अपने काम में स्वर्ग का आनंद प्राप्त करते हुए तथा काम के प्रति समर्पित रहकर अमरत्व की प्राप्ति कर सकता है। किसी भी व्यवसाय को नीची निगाह से नहीं देखा जाता था तथा व्यक्ति जब चाहे अपना व्यवसाय बदल सकता था। कठिन परिश्रम करके वह दौलत कमा सकता था, अपने जीवन स्तर को सुधार सकता था तथा साथ ही उसे अपनी आय में से कुछ का योगदान समुदाय की सेवा में करना पड़ता था। आज लिंगायतों द्वारा लिंगायतों और गैरलिंगायतों, दोनों के कल्याण के लिए शुरू किए गए अनेक शैक्षिक संस्थान तथा परोपकारवादी ट्रस्ट मौजूद हैं।

कायका का सिद्धांत, बसवा के समय से ही अमल में लाया जाने लगा था। बसवा द्वारा में निर्मित अनुभव मंतप में उच्च पदों पर आसीन लोगों तथा निम्न आय-वर्ग के लोगों के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाता था। कायका में दो तरह से योगदान दिया जाता था। (प) यदि कोई व्यक्ति पहले से ही अच्छे रोजगार में लगा हुआ है। तो उसे यह सलाह दी जाती थी कि वह जरूरतमंद लोगों के खाने व रहने की व्यवस्था जैसी सामुदायिक सेवाओं में सहायता करने के लिए शारीरिक एवं सामाजिक सहयता भेजे । (पप) यदि कोई व्यक्ति बेरोजगार है तो उसे कोई रोजगार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था।

इस तरह हम देख सकते हैं कि वीरशैववाद ने धार्मिक तथा सामाजिक समानता के सिद्धांत पर व्यक्ति के जीवन के निजी व सामाजिक पहलुओं को स्वीकृत करने का प्रयास किया। विभिन्न जातियों तथा व्यवसायों के लोग इस आन्दोलन के प्रति आकर्षित हुए। वे विश्वास तथा प्रचलन जिन पर यह खड़ा हुआ था, दैनिक जीवन के मार्ग दर्शन बन गये। महिलाओं के लिए, वीरशैववाद ने पुरुष के साथ मुक्ति एवं समानता को प्रस्तावित किया। वीरशैववाद विधवाओं के पुनर्विवाह की वकालत करता था, बाल-विवाह को निरुत्साहित करता था तथा विश्वास से जुड़ी प्रोत्साहन गतिविधियों में महिलाओं के सक्रिय भागीदारी को प्रेरित करता था। चूंकि, पुरुष व स्त्रियों, दोनों के ही लिए एक निजी लिंगम को धारण करना तथा प्रतिदिन उसकी पूजा करना जरूरी था, अतः धार्मिक जगत में लिंगों की समानता की एक भावना पैदा की गई।

अब हम वीरशैववाद के एक अन्य पहलू पर आते हैं और वह है सांगठनिक तानाबाना, जिसे इसने अपनी विचारधारा का प्रचार करने, आगे बढ़ाने तथा कायम रखने की दृष्टि से विकसित किया था।

प्रश्न : 5) कायका की अवधारणा का 8 पंक्तियों में वर्णन कीजिये।

उत्तर : 5) कायका के मायने थे, वीरशेववाद में कठिन परिश्रम करना व कष्ट उठाना । कोई व्यक्ति जो कि अच्छे लाभकारी रोजगार में लगा होता था उससे अपने श्रम के फलों से अन्य लोगों की सेवा करने की आशा की जाती थी। वीरशैववादी खाली बैठे रहने को बढ़ावा नहीं देता था। इसमें काम के प्रति समर्पण भाव पर बल दिया गया।