डाल्टन का परमाणु सिद्धान्त , डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के दोष या कमियाँ या सीमाएँ 

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डाल्टन का परमाणु सिद्धान्त : किसी तत्व का वह छोटे से छोटा कण जिसको आगे विभाजित नहीं किया जा सकता है परमाणु कहलाता है।

इस सिद्धांत के मुख्य बिंदु निम्न है –
  1. प्रत्येक तत्व अत्यंत सूक्ष्म कणों से मिलकर बना होता है जिन्हें किसी भी भौतिक या रासायनिक विधि द्वारा विभाजित नहीं किया जा सकता है।
  2. इस सिद्धान्त के अनुसार किन्ही दो तत्वों के परमाणु परस्पर आकार , द्रव्यमान व अन्य गुणों में एक दुसरे से भिन्न होते है।
  3. इस सिद्धांत के अनुसार एक तरह के समस्त परमाणु आकार , द्रव्यमान और अन्य गुणों में समान होते है।
  4. परमाणु को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
  5. इस सिद्धांत के अनुसार कुछ परमाणु परस्पर संयोजित होकर यौगिक/अणु का निर्माण करते है।

डाल्टन के परमाणु सिद्धान्त के दोष या कमियाँ या सीमाएँ

  1. इस सिद्धांत के अनुसार परमाणु को विभाजित नहीं किया जा सकता है लेकिन आधुनिक प्रयोगों से स्पष्ट है कि परमाणु को आगे विभाजित किया जा सकता है तथा सामान्यतया परमाणु तीन कणों से मिलकर बना होता है – इलेक्ट्रॉन , प्रोटोन और न्यूट्रॉन
  2. इस सिद्धांत के अनुसार किन्ही दो तत्वों के द्रव्यमान आकार भिन्न भिन्न होते है लेकिन समभारिक की खोज के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि भिन्न भिन्न तत्वों के द्रव्यमान और आकार समान हो सकते है।
  3. इस सिद्धांत के अनुसार किसी तत्व के सभी परमाणु , आकार और द्रव्यमान में समान होते है लेकिन समस्थानिक की खोज के बाद इस नियम का भी खण्डन हुआ कि किसी एक तत्व के सभी परमाणु , आकार और द्रव्यमान में अलग अलग भी हो सकते है।
  4. इस सिद्धान्त के अनुसार परमाणु को नष्ट व उत्पन्न नहीं किया जा सकता है लेकिन आधुनिक नाभिकीय रसायन में बड़े परमाणुओं के नाभिक विखंडित होकर छोटे परमाणुओं के नाभिक में तथा छोटे परमाणुओं के नाभिक परस्पर संयुक्त होकर बड़े परमाणु बनाते है।
  5. यह सिद्धांत गै लुसैक के आयतन सम्बन्धी नियम को नहीं समझा सका।
  6. यह सिद्धान्त अणु में उपस्थित विभिन्न परमाणुओं के मध्य लगने वाले बल की प्रकृति को नहीं समझा सका।

परमाणु और अणु

परमाणु : किसी तत्व का वह छोटे से छोटा कण जो स्वतंत्र रूप से किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेता है , परमाणु कहलाता है।
अणु : किसी तत्व पदार्थ का वह छोटे से छोटा तत्व जिसका स्वतंत्र अस्तित्व होता है वह उस पदार्थ का अणु कहलाता है।
पदार्थ तत्व/यौगिक कुछ भी हो सकता है।