अम्ल एवं क्षारक  की परिभाषा और गुण , what is acid and base in hindi and properties

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what is acid and base in hindi and properties , अम्ल एवं क्षारक  की परिभाषा और गुण :-
इससे पहले के article मे , रासायनिक अभिकिया को डिस्कस किया था अब इस आर्टिकल मे अम्ल एवं क्षारक  की परिभाषा और गुणों को discuss करेगे |  इस्ससे पहले अम्ल एवं क्षारक  के उदाहरनो को discuss करेगे ताकि आप अम्ल एवं क्षारक  के concept को दैनिक जीवन से connect कर सकते है और आप इसे अपने जीवन से अम्ल एवं क्षारक  को अच्छी तरह से जोड़ सके |इस अध्याय में हम अम्ल एवं क्षारक की अभिक्रियाओं के बारे में discuss करेंगे।उदाहरन 1 मे , भोजन का खट्टा एवं कड़वा स्वाद भोजन में विद्यमान क्रमशः अम्ल एवं क्षारक के कारण होता है।
उदाहरन 2 मे ,किसिस परसों के पेट मे अम्ल एवं क्षारक  की मात्रा अधिक होना और इसके इलाज के लिए अम्ल एवं क्षारक  को use किया जाट है इसके लिए बेकिग पावडर को use किया जाता हुई |
किसी वस्तु मे अम्ल एवं क्षारक  की उपस्थिति को check करने के लिए निन्म प्रयोग किया जासकता है |
अम्लों का स्वाद से अम्ल की  उपस्थिति को check किया जा सकता है | अम्ल का स्वाद खट्टा होता है तथा यह नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं।
जबकि  क्षारकों का स्वाद से क्षारकों की  उपस्थिति को भी  check किया जा सकता है |  क्षारकों का स्वाद कड़वा होता है एवं यह लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं।
लिटमस एक प्राकृतिक सूचक होता है। इसका use  अम्ल एवं क्षारक  की उपस्थिति को check करने के लिए  किया जाता है | इसी प्रकार हल्दी भी एक ऐसा ही सूचक है। हल्दी को सूचक की तरह use करना का प्रयोग निन्म है  | श्वेत कपड़े पर लगे सब्जी के दाग पर जब  साबुन (क्षारकीय प्रकृति)  रगड़ते हैं तब उस धब्बे का रंग भूरा-लाल हो जाता है? लेकिन कपड़े को अत्यधिक जल से धोने के पश्चात् वह फिर से पीले रंग का हो जाता है।इसलिए सज्बी की दाग पर निब्बू की रस को मिला कर घिसा जाता है   अम्ल एवं क्षारक की जांच के लिए संश्लेषित सूचक जैसे मेथिल ऑरेंज एवं फीनॉल्फथेलिन का भी use कर सकते हैं।लिटमस विलयन सूचक :
लिटमस विलयन बैंगनी रंग का रंजक (colorant) होता है जो लिचेन पौधे से निकाला जाता है। इसलिए इसे लिटमस सूचक कहते है |  प्रायः इसे सूचक की तरह उपयोग किया जाता है। इसका अम्ल एवं क्षारक के साथ निन्म प्रकति होती है |  लिटमस विलयन जब न तो अम्लीय होता है न ही क्षारकीय, तब यह बैंगनी रंग का होता है। लेकिन इस विलयन को अम्लीय होने पर इसका रंग लाल हो जाता है | अगर विलयन को क्षारकीय होने पर इसका रंग नीला  हो जाता है |
इसके अलावा   प्राकृतिक पदार्थ जैसे-लाल पत्ता गोभी, हल्दी, हायड्रेंजिया, पेटूनिया एवं जेरानियम जैसे कई फ़ूलों की रंगीन पंखुडि़याँ किसी विलयन में अम्ल एवं क्षारक की उपस्थिति को सूचित करते हैं। इन्हें अम्ल-क्षारक सूचक या कभी-कभी केवल सूचक कहते हैं।

अम्ल एवं क्षारक के रासायनिक गुणधर्म

अम्ल एवं क्षारक के रासायनिक गुणधर्म को समजने के लिए निन्म प्रयोग को consider करेगे |  जिससे अम्ल एवं क्षारक के रासायनिक गुणधर्म को differentaite किया जाता है |
प्रयोग 1 :
1.विज्ञान की प्रयोगशाला से हाइड्रोक्लोरिक अम्ल HCL, सल्फ्ऱ यूरिक अम्ल H2SO,नाइट्रिक अम्ल HNO3, ऐसीटिक अम्ल Ch3COOH, सोडियम हाइड्रॉक्साइड NaOH, कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड , पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड ,मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड , एवं अमोनियम हाइड्रॉक्साइड  के विलयनों को अलग अलग फ्लास्क मे कलेक्ट  कर लेते है ।
2.ऊपर दिए गए chemicals के विलयन की एक बँदू वाच ग्लास पर बारी-बारी से रखिए एवं सारणी 2-1 के अनुसार निम्नलिखित सूचकों से उसकी check कीजिए।
3.लाल लिटमस, नीले लिटमस, फेनॉलप्थेलियन एवं मेथिल ऑरेंज विलयन के साथ लिए गए विलयन के रंग मेंनिन्म परिवतन होते है |
4.इस प्रयोग मे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल HCL, सल्फ्ऱ यूरिक अम्ल H2SO,नाइट्रिक अम्ल HNO3, ऐसीटिक अम्ल Ch3COOH के साथ नील लिटमस को लाल कर देते है | और सोडियम हाइड्रॉक्साइड NaOH, कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड , पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड ,मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड , एवं अमोनियम हाइड्रॉक्साइ नील लिटमस पर कोई भी effect नहीं डालता है |
इस प्रयाग से निन्म निष्कर्ष निकलता है :
अम्ल नीले लिटमस को लाल कर देता है |
क्षार नील लिटमस पर कोई भी effect नहीं पड़ता है बल्कि क्षार लाल लिटमस को नीला कर देता है |
प्रयोग 2 :
विलयन का लाल लिटमस नीला लिटमस फीनॉल्फथेलिन मेथिल ऑरेंज के विलयन रंग में परिवर्तन के द्वाराअम्ल एवं क्षारक की उपस्थिति को check किया जाता है ।
कुछ ऐसे सूचक  होते हैं जिनकी गंध अम्लीय या क्षारकीय माध्यम में अलग अलग हो जाती है। इन्हें गंधीय सूचक कहते हैं।  इसके लिए निन्म उदाहरन है :-
1.बारीक कटी हुई प्याज तथा स्वच्छ कपड़े के टुकड़े को एक प्लास्टिक के थैले में लीजिए। थैले को कस कर बाँध दीजिए तथा पूरी रात फ्रिज में रहने दीजिए। अब इस कपड़े के टुकड़े का उपयोग अम्ल एवं क्षारक की की उपस्थिति को check करने  के लिए किया जाता है।
जब कपडे का गंध मे कोई effect नहीं पड़ता है तब इसका मतलब है की प्याज़ मे अम्ल है और अगर कपडे का गंध मे अगर तिवता से बढ़ जाती है तब इसका मतलब है की प्याज़ मे क्षार मे |

अम्ल एवं क्षारक धातु के साथ अभिक्रिया
जब धातु को अम्ल के साथ अभिकिया करायी जाती है तब धातु, अम्लों से हाइड्रोजन परमाणुओं का हाइड्रोजन गैस के रूप में विस्थापन करती है और एक यौगिक बनाता है जिसे लवण कहते हैं। अम्ल के साथ धातु की अभिक्रिया को पूरा  कर सकते हैंः
अम्ल + धातु ————> लवण + हाइड्रोजन गैस
इसके लिक्ये निन्म उदाहरन को discuss करगे :-
प्रयोग 2
एक परखनली में तनु सल्फ्ऱयूरिक अम्ल लीजिए एवं इसमें दानेदार जिक के टुकड़े डालिए।
इस परखनली मे निकली गैस को जब check करते है तब इसका प्रकार H2 होता है |

1.अगर HCL को धातु Na को reaction करने पर निन्म reaction होती है :-
2 HCL + 2 Na  ————-> 2 Nacl    + H2

1.अगर H2SO4 को धातु Na को reaction करने पर निन्म reaction होती है :-
H2SO4 + Na  ————-> NaSo4    + H2

1.अगर HNO3 को धातु Na को reaction करने पर निन्म reaction होती है :-
2 HNO3 + 2 Na  ————-> 2 NaNo3    + H2

1.अगर Ch3COOH को धातु Na को reaction करने पर निन्म reaction होती है :-
2 Ch3COOH + 2Na  ————-> 2 Ch3COONa    + H2

इस article मे , अम्ल एवं क्षारक के कुछ गुणों को ही discuss किया है अब आगे के article मे , अम्ल एवं क्षारक लके कुछ और गुणों को discuss करगे |