Monthly Archives: October 2018

सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (universal gravitational constant in hindi)

(universal gravitational constant in hindi) सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक : यह एक समानुपाती नियतांक होता है जो न्यूटन के नियम में प्रयोग होता है।  हमने न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम हमने पढ़ा वह हमने देखा की  समानुपाती का चिन्ह हटाने के लिए न्यूटन ने एक नियतांक का प्रयोग किया था उस नियतांक को ही सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण… Continue reading »

न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम (newton’s law of gravitation in hindi) , गुरुत्वाकर्षण बल का सदिश निरूपण 

(newton’s law of gravitation in hindi) न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम : इसे न्यूटन का सार्वत्रिक (सार्वभौमिक) गुरुत्व आकर्षण बल भी कहा जाता है। इस नियम के अनुसार “ब्रम्हांड में उपस्थित सभी दो वस्तुएँ आपस में एक दुसरे को आकर्षित करती है , दो पिण्डो के मध्य लगने वाले इस आकर्षण बल को गुरुत्वाकर्षण कहते… Continue reading »

केन्टीलीवर (cantilever beam in hindi) , नमन दृढ़ता (FLEXURAL RIGIDITY IN HINDI)

(cantilever beam in hindi) केन्टीलीवर : ऐसा बीम या दण्ड जिसका एक सिरा स्थिर रहता है तथा इसका दूसरा सिरा भारित रहता है ऐसे दण्ड को केन्टीलीवर कहते है। केन्टीलीवर की सहायता से ही हम बिना किसी बाह्य ब्रेसिंग के ओवर हैंगिंग संचरना बना सकते है। जब इस पर वजन रखा जाता है तो केन्टीलीवर… Continue reading »

दण्ड का बंकन या मोड़ या झुकाव मोड़न (bending of beam in hindi) , उदासीन परत , बंकन तल , आघूर्ण

(bending of beam in hindi) दण्ड का बंकन या मोड़ या झुकाव मोड़न : जब किसी दंड (बीम) को मोड़ा जाता है तो इसका आकार बदल जाता है और साथ ही इसके अन्दर आंतरिक बल उत्पन्न हो जाते है। यहाँ हम एक दंड लेते है और फिर इसके द्वारा इससे सम्बंधित विभिन्न प्रकार की परिभाषाओं… Continue reading »

प्रत्यास्थता शैथिल्य (elastic hysteresis in hindi) , शैथिल्य लूप (HYSTERESIS LOOP in hindi)

(elastic hysteresis in hindi) प्रत्यास्थता शैथिल्य : जब किसी वस्तु पर विरुपक बल आरोपित किया जाता है तो इस बल के कारण उत्पन्न विकृति व प्रतिबल में परिवर्तन एक साथ नहीं होता है बल्कि उत्पन्न विकृति प्रतिबल के पश्चगामी होती है। विकृति का प्रतिबल से पश्चगमन को ही प्रत्यास्थता शैथिल्य कहते है। कुछ प्रत्यास्थ वस्तुओं… Continue reading »

अपने ही भार के कारण टूटने के लिए आवश्यक तार की न्यूनतम लम्बाई (minimum length of wire for breaking)

(minimum length of wire for breaking due to its own weight) अपने ही भार के कारण टूटने के लिए आवश्यक तार की न्यूनतम लम्बाई : इस प्रकार के प्रश्न अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में पूंछे जाते है जैसे IIT-JEE या NEET इत्यादि। एक वैज्ञानिक एक बहुत बड़ा तार लेता है और इस तार को खड़ा लटका… Continue reading »

भंगुर पदार्थ , तन्य पदार्थ व प्रत्यास्थ बहुलक पदार्थ (brittle , ductile and elastomers material in hindi)

(brittle , ductile and elastomers material in hindi) भंगुर पदार्थ , तन्य पदार्थ व प्रत्यास्थ बहुलक पदार्थ : यहाँ हम इन तीनों प्रकार के पदार्थो के बारे में अध्ययन करते है की इनकी परिभाषा क्या है , इनके उदाहरण , ग्राफ वक्र इत्यादि कैसे बनते है आदि। भंगुर पदार्थ (Brittle material) : इस प्रकार के पदार्थों… Continue reading »

भंजक प्रतिबल और भंजक बल क्या है , परिभाषा , उदाहरण , अंतर (breaking stress and force in hindi)

(breaking stress and force in hindi) भंजक प्रतिबल और भंजक बल क्या है , परिभाषा , उदाहरण , अंतर : जब किसी वस्तु या तार पर प्रत्यास्थता सीमा से बाहर भार लटकाया जाता है तो तार में विकृति बहुत ही तेजी से उत्पन्न होती है। तार पर कार्यरत प्रतिबल का वह अधिकतम मान जिस पर… Continue reading »

भार बढाने पर तार का व्यवहार (प्रतिबल विकृति वक्र) (behavior of wire under increasing load)

(behavior of wire under increasing load) भार बढाने पर तार का व्यवहार (प्रतिबल विकृति वक्र) : जब किसी स्टील या धातु के तार के एक सिरे को दृढ़ सिरे से बाँध कर दुसरे सिरे को मुक्त रख कर , मुक्त सिरे के कुछ भार लटकाते है और जब धीरे धीरे इस भार का मान बढ़ाते… Continue reading »

पॉयसन अनुपात अथवा पाइंसा निष्पत्ति (poisson’s ratio in hindi)

(poisson’s ratio in hindi) पॉयसन अनुपात अथवा पाइंसा निष्पत्ति : जब किसी तार पर बल आरोपित किया जाता है तो इस बाह्य बल के कारण इसकी लम्बाई में तो परिवर्तन आता ही है साथ ही लम्बाई में परिवर्तन के कारण इसकी व्यास भी परिवर्तित हो जाती है , अर्थात इस बाह्य बल के कारण तार… Continue reading »