भंगुर पदार्थ , तन्य पदार्थ व प्रत्यास्थ बहुलक पदार्थ (brittle , ductile and elastomers material in hindi)

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(brittle , ductile and elastomers material in hindi) भंगुर पदार्थ , तन्य पदार्थ व प्रत्यास्थ बहुलक पदार्थ : यहाँ हम इन तीनों प्रकार के पदार्थो के बारे में अध्ययन करते है की इनकी परिभाषा क्या है , इनके उदाहरण , ग्राफ वक्र इत्यादि कैसे बनते है आदि।

भंगुर पदार्थ (Brittle material) : इस प्रकार के पदार्थों को थोडा सा मोड़ने पर भी वे टूट जाते है क्यूंकि इनको खीचने से ये किसी प्रकार की कोई ऊर्जा ग्रहण नहीं करते है या बहुत कम उर्जा ग्रहण करते है।
इन पदार्थो के लिए प्लास्टिक क्षेत्र बहुत कम होता है , इस प्रकार के पदार्थ प्रत्यास्थता सीमा को पार करते ही टूट जाते है।
ये पदार्थ हल्के से मोड़ का भी विरोध करते है यदि पदार्थ को मोड़ा जाता है तो ये आसानी से टूट जाते है जब इन पदार्थो पर बल आरोपित किया जाता है तो ये कम बल होने पर पदार्थ परिवर्तित होकर , बल हटाने पर पुनः अपनी मूल अवस्था में लौट आता है लेकिन यदि वस्तु पर बल अधिक लगाया जाता है तो वस्तु अपनी मूल अवस्था में लौट नही पाती है टूट भी सकती है क्यूंकि अधिक बल लगाने से वस्तु प्रत्यास्थता क्षेत्र को छोड़कर प्लास्टिक क्षेत्र में प्रवेश कर जाती है जिससे टूट जाती है।
प्रत्येक पदार्थ के लिए इस बल का मान निश्चित होता है जिस पर वस्तु टूट जाती है।
उदाहरण : कांच और आयनिक क्रिस्टल , ढलवा लोहा आदि।
तन्य पदार्थ (Ductile material) : ये वे पदार्थ होते है जिनमे प्लास्टिक क्षेत्र अधिक होता है और इन पदार्थो को मोड़ने पर भी ये नहीं टूटते है। ये पदार्थ बल के कारण उत्पन्न विकृति को सहन करने की क्षमता रखते है।  जब इन पदार्थो को पकड़कर खीचा जाता है तो ये तार की आकृति में परिवर्तित हो जाती है और जब दबाया जाता है तो शीट के रूप भी सिकुड़ जाती है।
ये पदार्थ आसानी से एक रूप से दूसरा रूप ग्रहण कर लेते है और जब इनको अधिक खिंचा जाता है तो ये पतले तार में परिवर्तित हो जाते है।
उदाहरण : तांबे, एल्यूमीनियम, और स्टील
प्रत्यास्थ बहुलक पदार्थ (elastomers material) : वे पदार्थ जो पॉलिमर से मिलकर बने होते है तथा जिनमे रासायनिक बन्ध पाए जाते है।  इनमे आरोपित प्रतिबल की तुलना में उत्पन्न विकृति बहुत अधिक होती है अर्थात कम प्रतिबल लगाने पर भी अधिक विकृति उत्पन्न हो जाती है।  इन पदार्थो में प्लास्टिक क्षेत्र शून्य होता है तथा प्रत्यास्थता सीमा के पास भंजन बिंदु पाया जाता है।
इन पदार्थों को बहुत अधिक खींचने के बाद भी ये आसानी से अपनी मूल अवस्था में आ जाते है और चूँकि ये बहुलकों से मिलकर बने होते है यही कारण है कि इनको प्रत्यास्थ बहुलक पदार्थ कहा जाता है।
उदाहरण : रबर