पॉयसन अनुपात अथवा पाइंसा निष्पत्ति (poisson’s ratio in hindi)

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(poisson’s ratio in hindi) पॉयसन अनुपात अथवा पाइंसा निष्पत्ति : जब किसी तार पर बल आरोपित किया जाता है तो इस बाह्य बल के कारण इसकी लम्बाई में तो परिवर्तन आता ही है साथ ही लम्बाई में परिवर्तन के कारण इसकी व्यास भी परिवर्तित हो जाती है , अर्थात इस बाह्य बल के कारण तार में दो प्रकार का परिवर्तन आ जाता है पहला लम्बाई में तथा दूसरा व्यास में।
परिभाषा : किसी तार या वस्तु पर प्रत्यास्थता सीमा के अन्दर अनुप्रस्थ विकृति तथा अनुदैर्ध्य विकृति के अनुपात को उस वस्तु के पदार्थ का पॉयसन अनुपात अथवा पाइंसा निष्पत्ति कहलाता है।
जब किसी वस्तु या तार को खिंचा जाता है अर्थात इसकी लम्बाई को बढाया जाता है तो इसका व्यास कम हो जाता है तथा जब किसी वस्तु का तार को दबाकर इसकी लम्बाई को कम किया जाता है तो इसका व्यास बढ़ जाता है , लेकिन यदि आयतन को नियत रखा जाए तो वस्तु की अनुप्रस्थ विकृति तथा अनुदैर्ध्य विकृति में एक सम्बन्ध पाया जाता है इस सम्बन्ध या अनुपात को पॉयसन ने खोजा था इसलिए इसे पॉयसन अनुपात कहते है।

पॉयसन अनुपात की कोई विमा नहीं होती है अर्थात यह एक विमाहीन राशि है तथा इसे σ द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
माना किसी तार की लम्बाई L है तथा इस पर बल आरोपित किया जाता है जिससे इसकी लम्बाई में △L परिवर्तन हो जाता है , और जैसा हमने पढ़ा की इसकी त्रिज्या में भी परिवर्तन होगा , माना पहले तार की त्रिजा r थी जो तार की लम्बाई में परिवर्तन के कारण △r परिवर्तित हो गयी अत:
इसके लिए सूत्र निम्न प्रकार लिखा जाता है –
पॉयसन अनुपात = अनुप्रस्थ विकृति / अनुदैर्ध्य विकृति
σ = (△r/r) /△L/L
पॉयसन अनुपात का मान -1 से ०.5 तक कुछ भी हो सकता है लेकिन इसके वास्तविक मान की बात करे तो यह 0 से 0.5 तक होता है।