Monthly Archives: May 2018

पत्ती / पर्ण (Leaf) क्या है , परिभाषा , पत्ती की संरचना , भाग , पत्ती के प्रकार , रूपान्तरण , कार्य Leaf in hindi

(Leaf in hindi)पत्ती / पर्ण (Leaf) : पर्ण स्तम्भ या शाखा की पाश्र्व अतिवृद्धि है , यह चपटी व फैली हुई पर्वसन्धि पर विकसित होती है।  ये अग्राभिसारी क्रम में व्यवस्थित होती है।  पत्ती के कक्ष में कली होती है जो शाखा बनाती है।  पत्तियाँ सामान्यतया हरी व प्रकाश संश्लेषण कर भोजन का निर्माण करती… Continue reading »

तना (stem) क्या है , परिभाषा , तने के लक्षण , तने के रूपान्तरण , तने के कार्य work of stem in hindi

stem in hindi तना : तना पादप का वायवीय भाग है , यह बीज के प्रांकुर से विकसित होता है। तने के लक्षण (properties of stem) : 1. तना ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती व धनात्मक प्रकाशनुवर्ती होता है। 2. सहश्व अवस्था में तना हरा होता है परन्तु बाद में कास्टीय व भूरा होता है। 3. तने पर… Continue reading »

मूल की परिभाषा क्या है , मूल की विशेषताएँ , मूल के प्रकार , रूपांतरण व कार्य root in hindi

पुष्पी पादपों की आकारिकी (root in hindi) मूल : मूल पादप का अन्तः भौमिक भाग है जो मूलांकुर से विकसित होता है। मूल की विशेषताएँ : 1. मूल धनात्मक गुरुत्वानवर्ती धनात्मक जलानुवर्ती व ऋणात्मक प्रकाशनुवर्ती होती है। 2. मूल में हरितलवक का अभाव होता है। 3. मूल पर पत्ती , कलिका एवं पर्ण व पर्णसंधियाँ… Continue reading »

पादप जगत (प्लांटी) , जन्तु जगत (एनिमेलिया किंगडम ) , विषाणु (वायरस) , विरोइड क्या है

Plant Taxonomy in hindi पादप जगत (प्लांटी) : 1. इस जगत में सभी बहुकोशिकीय युकेरियोरिक पादपों को रखा गया है। 2. इनमें पर्णहरित पाया जाता है। 3. कुछ सदस्य कीट पक्षी , परजीवी व विषमपोषी (अमरबेल) भी रखे गये है। 4. इनकी कोशिका भित्ति सेलुलोस की बनी होती है। 5. पादप का जीवन दो स्पष्ट… Continue reading »

अलैंगिक जनन , फाइकोमाइसिटीज  , एस्कोमाइसिटीज , बेसिडियोमाइसिटीज , ड्यूटिरोमाइसिटीज 

(phycomycetes and zygomycetes in hindi) अलैंगिक जनन : लैंगिक जनन समयुग्मी या विषम युग्मी प्रकार का होता है। लैंगिक जनन ऊस्पोर , ऐस्कस , बीजाणु तथा बेसिडियम बीजाणु द्वारा होता है।  बीजाणु सुस्पष्ट संरचनाओ के रूप में उत्पन्न होते हैं , जो फलनकाय बनाते है।  लैंगिक जनन निम्न तीन सोपान (चरण) में होता है। 1…. Continue reading »

कवक (Fungi )क्या है , उदाहरण , प्रकार , प्रोटोजोआ , अमीबीय , कशायी , पक्ष्मायी , स्पोरोजोआ

प्रोटोजोआ : प्रोटिस्टा में रखे गये ये जीव परपोषी होते है , गति करने के आधार पर ये चार प्रकार के होते है। 1. अमीबीय प्रोटोजोआ : ये स्वच्छ जल , समुद्री जल व नम मृदा में पाये जाते है।  कुटपाडो की सहायता से गमन व शिकार करते है , इनके कुछ सदस्य परजीवी होते… Continue reading »

माइकोप्लाज्मा क्या है , परिभाषा , प्रकार , प्रॉटिस्टा , क्राइसोफाइट , डाइनो प्लैजिलेट , युग्लिनॉइड

mycoplasma in hindi माइकोप्लाज्मा : ये ऐसे जीवधारी होते है जिनमे कोशिका भित्ति नहीं पायी जाती है , ये सबसे छोटे सजीव होते है।  ये ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में भी जीवित रह सकते है।  ये पादपों व जन्तुओं में अनेक रोग उत्पन्न करते है। प्रॉटिस्टा (protista) : सामान्य लक्षण 1.  इसमें एक कोशिकीय यूकेरियोटिक सजीवों को रखा… Continue reading »

मोनेरा (Monera in hindi ) , आध बैक्टीरिया (archaebacteria) ,यू बैक्टीरिया , रसायन संश्लेषी बैक्टीरिया

मोनेरा (Monera) : सभी जीवाणुओं को मोनेरा जगत में रखा गया है।  जीवाणु संख्या में अधिक तथा सभी प्रकार के आवासों में पाए जाते है।  जीवाणुओं को उनके आकार के आधार पर चार समूहों में बांटा गया है।  गोलाकार जीवाणुओं को कोकस , घडाकर जीवाणुओं को बेसिलस , सर्पिलाकार जीवाणुओं को स्पाररिलम व कीमाकार जीवाणुओं… Continue reading »

जीव जगत का वर्गीकरण , द्विजगत पद्धति ,तीन जगत पद्धति , पाँच जगत प्रणाली animal kingdom

(classification of animal kingdom) जीव जगत का वर्गीकरण : सरल आकारकी लक्षणों पर आधारित जन्तुओं व पादपों के वर्गीकरण को सर्वप्रथम अरस्तु ने प्रस्तावित किया। अरस्तू ने सभी जन्तुओं को इनैइमा तथा एनेइमा में तथा पादपों को शाक , झाड़ी तथा वृक्ष में विभाजित किया। द्विजगत पद्धति : यह वर्गीकरण की एक पद्धति है जिसमे संसार… Continue reading »

वर्गिकी सहायक साधन , हरबेरियम , वनस्पति उद्यान ,संग्रालय ,प्राणी उपवन ,कुँजी / चाबी Harbarium

Harbarium in hindi and वर्गिकी सहायक साधन : जीव वैज्ञानिको के पास सूचना , जैविक नमूने , प्रयोगशाला व संचय ग्रह होते है। जो जीव धारियों के वर्गीकरण में सहायक है।  वे वर्गिकी के सहायक साधन कहलाते है इनका उपयोग वर्गीकरण में किया जाता है। 1. हरबेरियम (Harbarium) : पौधों के नमूनों को सुखाकर ,… Continue reading »