पादप जगत (प्लांटी) , जन्तु जगत (एनिमेलिया किंगडम ) , विषाणु (वायरस) , विरोइड क्या है

Plant Taxonomy in hindi पादप जगत (प्लांटी) :

1. इस जगत में सभी बहुकोशिकीय युकेरियोरिक पादपों को रखा गया है।

2. इनमें पर्णहरित पाया जाता है।

3. कुछ सदस्य कीट पक्षी , परजीवी व विषमपोषी (अमरबेल) भी रखे गये है।

4. इनकी कोशिका भित्ति सेलुलोस की बनी होती है।

5. पादप का जीवन दो स्पष्ट अवस्था द्विगुणित बीजाणुद्धगीटु व अगुणित युग्मकोट्टगिद में पूरा होता है , दो अवस्थाओं पीढ़ी एकान्तरण पाया जाता हैं।

6. पादप शरीर , जड़ , तना , पत्ती या थैलस के रूप में होता हैं।

7. इनमे प्रजनन , कायिक , जनन , अलैंगिक व लैंगिक विधियों द्वारा होता है।

जन्तु जगत (एनिमेलिया किंगडम )

1. इस जगत के जीव विषमपोषी , बहुकोशिकीय व यूकैरियोटिव प्रकार के होते है।
2. ये भोजन के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पौधों पर निर्भर रहते है।
3. इनमे भोजन का संचय ग्लाइकोजन या वसा के रूप में होता है।
4. इनमे वृद्धि जनन व मानसिक विकास होता है।
5. ये चलन में सक्षम होते है।
6. कुछ जन्तुओ में संवेदी व तंत्रिका तंत्र उपस्थित होता है।
7. इनमे लैंगिक जनन नर व मादा के संगम से होता है।

विषाणु (वायरस)

वायरस शब्द लेटिन भाषा का है जिसका अर्थ तरल विष होता है।  वायरस की खोज रुसी वैज्ञानिक डी. इवानोरुकी ने 1892 ईस्वी में तंबाकू के मौजेक रोग के कारण के रूप में की थी , सन 1835 में स्टेनली ने वायरस को क्रिस्टलीय रूप में प्राप्त किया।
1. वायरस प्रकृति में स्वतंत्र रूप से नहीं पाए जाते है , ये अविकल्पी अन्तः कोशिकीय परजीवी के रूप में मिलते है।
2. एक ही प्रकार का न्यूक्लिक अम्ल डीएनए या RNA पाया जाता है।
3. बाहरी आवरण प्रोटीन का बना होता है।
4. इनका संवर्धन कृत्रिम माध्यम से संभव नहीं हैं।
5. इनमे उपापचयी क्रियाओ से सम्बंधित एंजाइम व प्रोटीन निर्माण के लिए अपना कोई तंत्र नहीं होता है।
6. वायरस परपोषी में DNA व प्रोटीन का संश्लेषण एक नया वायरस बनाते है।
विरोइड : विरोइड की खोज सबसे पहले 1971 में डायनर ने की थी , ये अतिसूक्ष्म , एक रज्जुकी , RNA वाले परजीवी होते है , विरोइड का RNA कम आण्विक भार का होता है।

लाइकेन (Lichens) : शैवाल व कवक परस्पर मिलकर लाइकेन का निर्माण करते है अर्थात दोनों में परस्पर सहवास पाया जाता है।

लाइकेन सहजीवन का उत्तम उदाहरण है , लाइकेन के शैवाल घटक को शैवालांश व कवक के घटक को कवकांश कहते है।  शैवाल स्वपोषी व कवक परपोषी होता है।  शैवाल कवक को भोजन उपलब्ध कराता है जबकि कवक शैवाल को जल व खनिज लवण उपलब्ध कराता है।

लाइकेन प्रदूषण के बहुत अच्छे संकेतक होते है , ये प्रदुषण क्षेत्रों में नहीं उगते है।

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