Monthly Archives: May 2018

कॉर्डेटा / रज्जुकी क्या है , रज्जुकी और अरज्जुकी में अंतर chordate and non chordate difference

(chordate and non chordate in hindi) कॉर्डेटा / रज्जुकी : Chordata = chord (रस्सी) + ata (धारक ) = पृष्ठ रज्जु धारी प्राणी बॉल्फर ने 1880 में Chordate शब्द का प्रयोग किया था। इस संघ में लगभग 55 हजार जातियाँ शामिल है। कशेरुकीयो के तीन मूलभूत लक्षण :- 1. पृष्ठ रज्जू (natochord) नोटोकॉर्ड : पृष्ठ वंशी… Continue reading »

संघ – मौलस्का (mollusca) , एकाइनोडर्मेटा  (echinodermata) , हेमीकार्डेटा (Hemichordate) लक्षण , उदाहरण

संघ – मौलस्का (mollusca in hindi) : सामान्य लक्षण : 1. यह जंतु जगत का दूसरा सबसे बड़ा संघ है। 2. इसकी लगभग 80 हजार प्रजातियाँ ज्ञात है। 3. इस संघ की स्थापना जोनसटन ने की। 4. ये जलीय या स्थलीय होते है। 5. इनका शरीर कोमल व खण्डहिन होता है। 6. शरीर सिर ,… Continue reading »

संघ – एस्केलमिन्थीज , संघ – ऐनेलिडा (annelida ) , संघ – आर्थोपोडा arthropoda in hindi , लक्षण

संघ – एस्केलमिन्थीज :- सामान्य लक्षण 1. इस संघ की स्थापना तोपन ने की थी। 2. इस संघ की 12000 जातियाँ पायी जाती है। 3. इन्हें सामान्यत: गोलकृमि कहते है। 4. ये जलीय , स्थलीय स्वतंत्र या परजीवी होते है। 5. ये द्विपाशर्व सममित , त्रिकोरिक , कुटगुहिया तथा अंग तंत्र स्तर का शारीरिक संगठन… Continue reading »

संघ सिलेन्ट्रेटा (Coelenterata) / नाइडेरिया , टीनोफोरा (Ctenophora) , प्लेटीहोल्मिन्थिम (Platyhelminthes)

संघ सिलेन्ट्रेटा (Coelenterata) / नाइडेरिया : ल्यूकर्ट ने 1847 में सीलेन्ट्रेटा संघ की स्थापना की।  हेरचेक ने 1878 में इस संघ का नाम नाइडेरिया रखा।  इस संघ में लगभग 10000 जातियां ज्ञात है। सामान्य लक्षण : 1. इस संघ के सदस्य समुद्री होते है। 2. ये जंतु एकल , निवही , स्थानबद्ध या स्वतंत्र होते… Continue reading »

प्रगुहा / सीलोम (coelom) , खंडीभवन (segmentation) , संघ पोरीफेरा (Porifera) क्या है in hindi

प्रगुहा / सीलोम (coelom in hindi) :- 1. प्रगुही या सीलोमेट : ऐसे जन्तु जिनमे देहगुहा मिसोडर्म से आश्रित होती है तो ऐसे प्राणियों को प्रगुहि या सिलोमेट जंतु कहते है। 2. कुटगुहीक / स्यूडोसीलोमेट : वे जन्तु जिनमे देहगुहा मिसोडर्म से आश्रित नहीं होती है , ऐसे जन्तुओं को कूटगुहिक प्राणी कहते है ,… Continue reading »

प्राणी जगत की परिभाषा क्या है , प्रकार , वर्गीकरण animal kingdom in hindi

animal kingdom in hindi  प्राणी जगत : वर्गीकरण के आधार : जन्तुओ को उनमे पाये जाने वाले लक्षणों के आधार पर अलग अलग समूहों में वर्गीकृत किया गया है। वर्गीकरण के आधार निम्न है – 1. शारीरिक संगठन : (a) कोशिकीय स्तर का संगठन : कुछ जीवो में सभी उपापचय क्रियाएं एक या अनेक कोशिकाओ… Continue reading »

विज्ञानिक नाम क्या है , फोबेसी / पैपिलिओनोइडी , लक्षण , आर्थिक महत्व , सोलेनेसी (धतूरा कुल) , लिलिएसी

scientific name in hindi  फोबेसी / पैपिलिओनोइडी : कायिक लक्षण : स्वभाव – वृक्ष (शीशम) झाड़ी (अरहर) , शाक , वल्लरी (सेम) जड़ – शाखित , मूसलादार जड़े ग्रंथिल तना – सर्पिल उधर्व ठोस , शाखित , बेलनाकार पत्तियाँ – संयुक्त , (पिच्छाकार) सरल एकान्तर , पर्णाधार तल्प , अनुपर्णी , जालिकावत शिराविन्यास पुष्पीय लक्षण… Continue reading »

फल की परिभाषा क्या है , प्रकार , उदाहरण , बीज , एकबीजपत्री बीज की संरचना , पुष्प सूत्र लिखने के नियम 

fruit in biology in hindi फल : पुष्पीय पादपों में निषेचन के बाद अण्डाशय से फल विकसित होता है। जब अण्डाशय से फल विकसित होता है तो इसे सत्यफल कहते है  , उदाहरण – आम , मटर आदि। जब फल फल का विकास अंडाशय के अलावा पुष्प के अन्य भाग से होता है तो इसे असत्यफल… Continue reading »

पुमंग (Androcelum) क्या है , परिभाषा , बीजांडन्यास (Placentation in hindi)  प्रकार , उदाहरण

पुमंग (Androcelum) : यह पुष्प का तृतीय चक्र होता है , पुमंग पुष्प का नर जनन अंग है , पुमंग की प्रत्येक इकाई पुंकेसर कहलाती है।  पुंकेसर के तीन भाग होते है। परागकोष , पुतन्तु व योजी। परतयेक परागकोष में चार पालियां होती है , प्रत्येक पाली में परागकण भरे होते है। जब पुंकेसर आपस… Continue reading »

पुष्पक्रम व पुष्प क्या है , परिभाषा , पुष्प के अंग , पुष्प के भाग  , पुष्पदल विन्यास Inflorescence in hindi

Inflorescence in hindi पुष्पक्रम : पुष्पी अक्ष पर फूलों के लगने के क्रम को पुष्प क्रम कहते है , यह दो प्रकार का होता है – 1. असीमाक्षी पुष्पक्रम (Racemose Inflorescence ) : इसमें मुख्य अक्ष अनिश्चित रूप से बढ़ता है तथा पुष्प पाशर्व में अग्राभिसारी क्रम में लगे रहते है। उदाहरण : मूली ,… Continue reading »