18-इलेक्ट्रॉन नियम , पेन्टा कार्बोनिल आयन , 18-electron rule in hindi हेक्सा कार्बोनिल क्रोमियम

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द्विनाभिकीय धातु कार्बोनिल यौगिक : उदाहरण – Mn2(CO)10 , Fe2(CO)9

नोट :  धातु -धातु (M-M) बंध के लिए प्रत्येक धातु का 1 electron माना जाता है।
धातु -लिगेंड (M-L) बंध के लिए प्रत्येक धातु को 1 electron दिया जाता है।  (सेतु लिगेंड के लिए )
जैसे : Mn2(CO)10
EAN = 25 x 2 + (10×2)/2 + 2  = 36
या EAN (प्रभावी परमाणु क्रमांक) = 25 + 10 + 1 = 36
Fe2(CO)9 के लिए EAN
EAN (प्रभावी परमाणु क्रमांक) = 26 + 2 x 3 + 1 + 1 + 1 + 1 = 36
बहु नाभिकीय कार्बोनिल यौगिक : example = Fe3(CO)12

18-इलेक्ट्रॉन नियम (18-electron rule in hindi)

इस नियम के अनुसार धातु कार्बोनिल यौगिक के बनते समय धातु परमाणु इतने कार्बोनिल समूहों से जुड़ता है की इसके संयोजकता कोष में कुल electrons की संख्या 18 हो जाए।
संक्रमण धातुओं में nS , np व (n-1)d कोशों को भी संयोजकता कोश मानते है।
वे मोनो नाभिकीय धातु कार्बोनिल यौगिक जिनमे जिनमें धातु परमाणु के संयोजकता कोश के electron सम संख्या में होते है ,  18-इलेक्ट्रॉन नियम का पालन करते है।
उदाहरण : Ni(CO)4
, Fe(CO)
5 आदि।
वे मोनों धातु कार्बोनिल यौगिक जिनमे धातु के संयोजकता कोश के electrons की संख्या विषम होती है 18-electron नियम का पालन नहीं करते है।
उदाहरण : V(CO)6
, Mn(CO)
5 आदि।

बनाने की विधियाँ

NiS + 4CO → Ni(CO)4 + S
NiI+ 4CO+ 2Cu →  Ni(CO)4 + Cu2I2
1. Ni(CO)में Ni का संकरण sp3 होता है।
Ni के 4sp3 संकरित कक्षकों में से दो रिक्त होते है एवं दो अर्द्ध पूरित होते है।
रिक्त sp3 कक्षकों के साथ दो कार्बोनिल लिगेंड electron युग्म देकर उपसहसंयोजक या sigma बंध बनाते है।  शेष दो कार्बोनिल लिगेंड अर्द्धपूरित sp3 संकरित कक्षकों के साथ अतिव्यापन से सिग्मा बंध एवं अर्द्धपूरित असंकरित 3d कक्षकों के साथ अतिव्यापन से पाई बंध बनाते है अत: इस संकुल की ज्यामिति चतुष्फलकीय होती है।
2. पेन्टा कार्बोनिल आयन :
Fe(CO)5 बनाने की विधि
Fe +5CO →   Fe(CO)5
Fe(CO)में Fe का संकरण dsp3 होता है।
जिससे 5dspसंकरित कक्षकों में से 2 कक्षक रिक्त व तीन कक्षक अर्द्धपूरित होते है।
दो रिक्त कक्षकों में दो co लिगेंड अपना electron युग्म देकर उपसहसंयोजक बंध बनाते है एवं तीन कार्बोनिल समूह 3 अर्द्धपूरित dsp3 संकरित कक्षकों के साथ सिग्मा बंध एवं अर्द्धपूरीत 3d कक्षकों के साथ पाई बन्ध बनाते है।  इसकी त्रिकोणीय द्विपिरामीडिय संरचना होती है।
3. हेक्सा कार्बोनिल क्रोमियम या क्रोमियम हैक्सा कार्बोनिल :
Cr(CO)2
बनाने की विधि

2CrCl3 + 3C6H5 MgBr + 12CO →   3Cr(CO)6 + 3C6H5Cl + 3MgBrCl
संरचना :
शून्य ऑक्सीकरण अवस्था में यहाँ Cr का d2sp3 संकरण होता है एवं अणु की ज्यामिति अष्टफलकीय होती है।
Cr का d2sp3 संकरण होता है।
6 संकरित कक्षकों में से तीन कक्षक रिक्त होते है एवं तीन अर्द्धपूरित होते है।  तीनो रिक्त संकरित कक्षकों के साथ तीन co समूह e युग्म द्वारा उपसहसंयोजक बंध बनाते है।  शेष तीन कार्बोनिल समूह तीन अर्द्ध पूरित संकरित कक्षकों के साथ सिग्मा बंध एवं अर्द्ध पूरित 3d कक्षकों के साथ पाइ बंध बनाते है।