स्थानान्तरीय गति (translational motion in hindi) , स्थानान्तरण गति किसे कहते है , परिभाषा क्या है ?

स्थानान्तरीय गति (translational motion in hindi) , स्थानान्तरण गति किसे कहते है , परिभाषा क्या है ?

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(translational motion in hindi) स्थानान्तरीय गति , स्थानान्तरण गति किसे कहते है , परिभाषा क्या है ? शुद्ध स्थानांतरीय गति

परिभाषा : जब किसी वस्तु के सभी कण एक समान समय अंतराल में समान विस्थापित होते है तो वस्तु की इस प्रकार की गति को स्थानान्तरीय गति कहते है।

या

जब कोई एक वस्तु एक बिंदु से दुसरे बिंदु तक समय के साथ अपनी स्थिति में गति करती है लेकिन बिना घूर्णन किये , वस्तु की इस प्रकार की गति को स्थानान्तरीय गति कहा जाता है।

या

किसी वस्तु की ऐसी गति जिसमे वह अपनी दिशा परिवर्तित नहीं करती है और समय के साथ इसकी स्थिति परिवर्तित होती रहती है तो ऐसी गति स्थानान्तरीय गति कहलाती है।

उदाहरण : जब किसी बंदूक से गोली दागी जाती है तो गोली जो मार्ग अनुसरण करती है उसे स्थानान्तरीय गति कहते है।

परिभाषा : “किसी पिण्ड या पिण्डों के निकाय की ऐसी गति जिसमे पिण्ड के सभी कण एक निश्चित समय अंतराल में समान विस्थापित होते है और समान दिशा में विस्थापित होते है अर्थात इनकी दिशा समान होती है तो पिण्ड की ऐसी गति को स्थानान्तरीय गति कहते है। ”

यह गति निर्देश फ्रेम के सापेक्ष किसी भी अक्ष पर हो सकती है अर्थात इसमें वस्तु x , y या z किसी भी अक्ष पर गति कर सकते है।

अत: इस गति के स्थानान्तरीय स्वतंत्रता की कोटि 3 होती है।

अन्य उदाहरण : व्यक्ति का चलना , फिसलना , आदि।

दृढ पिंड की व्यापक गतियाँ

किसी दृढ पिण्ड की गति सामान्यतया दो प्रकार की होती है –

  1. स्थानान्तरीय गति
  2. घूर्णन गति

1. स्थानान्तरीय गति (Translational motion) : यदि कोई पिण्ड या निकाय इस प्रकार गति करता है कि उसके प्रत्येक कण का एक निश्चित समयान्तराल में समान विस्थापन हो अर्थात समान दिशा में चली गयी दूरियाँ समान हो तो उसकी गति को स्थानान्तरीय गति कहते है।

किसी कार्तीय निर्देश फ्रेम के सापेक्ष किसी क्षण पर पिंड की स्थिति व्यक्त करने के लिए 3 चरों x , y , z की आवश्यकता होती है। इन तीनों चरों को स्थानान्तरीय स्वतंत्रता की कोटियाँ कहते है।

उदाहरण : किसी पिण्ड का किसी तल पर फिसलना , व्यक्ति का किसी तल पर चलना आदि।

शुद्ध स्थानांतरीय गति

एक पिण्ड की गति शुद्ध स्थानांतरीय गति होती है , यदि प्रत्येक कण का विस्थापन समान समय अंतराल में समान हो। ऐसी गति में किसी भी क्षण पर प्रत्येक कण का विस्थापन (s) , वेग (v) और त्वरण (a) समान होते है।

माना कि m1 , m2 , m2 . . . . mn द्रव्यमान के n कणों का एक निकाय शुद्ध स्थानांतरीय गति कर रहा है तब स्थानांतरीय गति की परिभाषा के अनुसार –

a1 = a2 = a3 = . . . . an = a (मान लो)

और v1 = v2 = v3 = . . . . vn = v  (मान लो)

किसी निकाय के लिए न्यूटन के नियम से –

Fext = m1a1 + m2a2 + m3a3 + . . . . .. .

Fext = Ma

जहाँ M = पिण्ड का कुल द्रव्यमान

P = m1v1 + m2v2 + m3v3 + . . . .. .

P = Mv

पिण्ड की कुल गतिज ऊर्जा = m1v12/2 + m2v22/2 + . . . . . = Mv2/2