संचार व दूर संचार में क्या अंतर है ? व्यापार किसे कहते है , अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का इतिहास trade in hindi

By   October 12, 2019

प्रश्न : संचार व दूर संचार में क्या अंतर है ? विस्तृत व्याख्या कीजिये ?

उत्तर : संचार : अपनी भाषा , शब्दों , विचारो , तथ्यों , भावो को एक स्थान से दुसरे स्था तक पहुँचाना ही संचार कहलाता है |

संचार के साधन :-

1. अक्तिक साधन

2. सार्वजनिक साधन

1. अक्तिक साधन : पत्रादि , दूरभाष (टेलीफोन) , मोबाइल , फैक्स , इ-मेल , इंटरनेट , फेसबुक , ट्विटर , व्हाट्सप्प आदि।

2. सार्वजनिक साधन : रेडियो , टीवी , सिनेमा , जीपीएस , जीआईएस , उपग्रह (सेटेलाइट ) , समाचार पत्र , पत्रिकाएं व पुस्तके , जनसभाएं , गोंटियाँ एवं सम्मलेन आदि।

आक्तेक 

1. मोबाइल या टेलीफोन : विश्व की कई कम्पनियों ने पहले टेलीफोन बनाया , फिर मोबाइल इन से हम कही भी बात कर सकते है पहले टेलीफोन को अपने साथ नहीं ले जा सकते थे फिर मोबाइल का आविष्कार हुआ।  आज भी विश्व में मोबाइल के बाद टेलीफोन का अधिक उपयोग होता है।

सार्वजनिक 

1. रेडिओ व टीवी : विश्व की कई बड़ी बड़ी कम्पनियों ने रेडियो व टीवी का आविष्कार किया है पहले रेडिओ था।  वह केवल सुनने के लिए होता था लेकिन आज के युग में टीवी का है इसे सुन व देख सकते है इसमें फ़िल्मी व समाचार देख सकते है सुन भी सकते है।

2. दूरसंचार : व्यक्ति द्वारा अपने भावो , विचारो , शब्दों , तथ्यों व संदेशो को एक स्थान से दुसरे स्थान पर प्रत्यक्ष रूप से या न भेजकर अप्रत्यक्ष रूप से भेजना , दूरसंचार कहलाता है।

दूर संचार के साधन :

रेडिओ – श्रव्य साधन

टीवी – श्रव्य + दृश्य साधन

इंटरनेट – श्रव्य + दृश्य साधन (शीघ्र गति से)

(i) रेडियो : प्राचीन काल में रेडिओ का कई कम्पनियों द्वारा आविष्कार हुआ और श्रव्य का साधन था इसमें सुना जाता था इसमें समाचार पत्र की खबरे भी आती थी लेकिन इसमें समय लगा।

(ii) टीवी : प्राचीनकाल से ही रेडियो आविष्कार के बाद टीवी का आविष्कार हुआ , विदेशी कम्पनिया इसमें लाभ कमाया।

यह श्रव्य व दर्शनीय या दृश्य का साधन है।

(iii) इन्टरनेट : इंटरनेट इन दोनों से भिन्न है , टीवी व रेडियो में काफी समय लगता है है। लेकिन इन्टरनेट में कुछ मिनटों या घंटो में हम पूरे विश्व की जानकारी सुन सकते है और देख भी सकते है।

अन्तराष्ट्रीय व्यापार

राष्ट्रीय – राष्ट्रीय
राज्य – राज्य
जिला – जिला
तहसील – तहसील
गाँव – गाँव
व्यापार (trade in hindi) : वस्तु या सेवा का आदान प्रदान करना ही व्यापार कहलाता है।
राज्य : एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यापार करना राष्ट्रीय या अन्तर्राष्ट्रीय और अंत: राष्ट्रीय कहलाता है।
देश : एक देश से दुसरे देश में वस्तु व सेवा का आदान प्रदान अन्तराष्ट्रीय व्यापार होता है।
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का इतिहास 
प्राचीन काल
मध्य काल
पुनर्जागरण काल
आधुनिक काल
वर्तमान काल
प्राचीन काल : प्राचीनकाल में वस्तुओ की अदला बदली होती थी , यह एक केवल पडोसी देशो को ही वस्तु देते थे।
मध्य काल : मध्यकाल में वस्तु का व सेवाओ का भी आदान प्रदान हुआ लेकिन इसमें क्षेत्र पडोसी देश ही थे।
पुनर्जागरण काल : पुनर्जागरण काल में समुद्र के मार्ग का विकास और नए नए क्षेत्र की खोज की।
आधुनिक काल : आधुनिक काल में वायुयान का विकास अधिक गति वाले जहाज आदि का विकास हुआ इससे देशो में सेवा व वस्तुओ का आदान प्रदान अधिक हुआ।
वर्तमान काल : वर्तमानकाल में बहुत ही तकनीक की खोज की है।
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार : अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का तीव्रतम विकास हुआ है जिसमे पूरा का पूरा विश्व वैश्विक गाँव में प्रयुक्त हो गया।  संचार व दूर संचार के कारण यह संभव हो पाया है।

अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के आधार (कारण)

  1. संसाधनों में विभिन्नता
  2. जनसंख्या के कारक
  3. आर्थिक विकास प्रावस्था
  4. विदेशी निवेश की सीमा
  5. परिवहन
प्रश्न : अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार किसे कहते है ? अन्तराष्ट्रीय व्यापार के आधार स्पष्ट कीजिये।
उत्तर : अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार : एक देश से दुसरे देश में वस्तु या सेवा का आदान प्रदान करना ही अन्तराष्ट्रीय व्यापार कहलाता है।
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के आधार –
  1. संसाधनों का अभाव
  2. जनसंख्या के कारक
  3. आर्थिक विकास प्रावस्था
  4. विदेशो की सीमा
  5. परिवहन
1. संसाधनों का अभाव या विभिन्नता : भौतिक संरचना जैसे कि भू-विज्ञान , उच्चावच , मृदा व जलवायु में विभिन्नता के कारण विश्व के राष्ट्रीय संसाधन असमान रूप से वितरित है।
भौगोलिक संरचना , खनिज संसाधन आधार को निर्धारित करती है , धरातलीय विभिन्नताएं फसलो व पशुओ की विविधता सुनिश्चित करती है।
खनिज साधन सम्पूर्ण विश्व में असमान रूप से वितरित है।  खनिज संसाधनों की उपलब्धता औद्योगिक विकास को आधार प्रदान करती है।
जलवायु किसी दिए हुए क्षेत्र में जीवित रह जाने वाले पादप व वन्य जिव के प्रकार को प्रभावित करती है।
2. जनसंख्या कारक : विभिन्न देशो में जनसंख्या के आकार , वितरण तथा उसकी विविधता व्यापार की गयी वस्तुओ के कर और मांग को प्रभावित करते है।
सांस्कृतिक कारक : विशिष्ट सांस्कृतियो में कला तथा हस्तशिल्प के विभिन्न रूप विकसित हुए है जिन्हें विश्व भर में सराहा है।
जनसंख्या का आकार : सघन बसाव वाले देशो में आंतरिक व्यापार अधिक है।  बाह्य व्यापार कम परिमाण वाला होता है क्योंकि कृषित और औधोगिक उत्पादों का अधिकाँश भाग स्थानीय बाजारों में ही खप जाता है।
3. आर्थिक विकास की प्रावस्था : देशो के आर्थिक विकास की विभिन्न अवस्थाओ में व्यापार की गयी वस्तुओ का स्वभाव (प्रकार) परिवर्तित हो जाता है।  कृषि की दृष्टि से महत्वपूर्ण देशो में विनिर्माण की वस्तुओ के लिए कृषि उत्पादों का विनिमय किया जाता है।
4. विदेशी की सीमा : विदेशी निवेश विकासशील देशो में व्यापार को बढ़ावा दे सकता है जिनके पास खनन तेल-खनन , भारी अभियांत्रिकी , काष्ट कवाड तथा बागवानी कृषि के विकास के लिए आवश्यकता पूंजी का अभाव है।  विकासशील देशो में ऐसे पूंजी प्रधान उद्योगों के विकास के लिए आवश्यक पूंजी का अभाव है।
5. परिवहन : पुराने समय में परिवहन के लिए पर्याप्त और समुचित साधनों का अभाव स्थानीय क्षेत्रो में व्यापार को प्रतिबाधित करता था।  केवल उच्च मूल्य वाली वस्तुओ जैसे रत्न , रेशम तथा मसाले का लम्बी दूरियों तक व्यापार किया जाता था।  रेल , समुद्री तथा वायु परिवहन के विस्तार और प्रशीतलन तथा परिरक्षण के बेहतर साधनों के साथ व्यापार में स्थानिक विस्तार का अनुभव किया है।