the mongoose and the snake | milkmaid and her pet mongoose | moral of the story friendly

By   May 4, 2020

moral of the story the friendly mongoose , wise milkmaid and her pet mongoose | the mongoose and the snake in hindi and english (नेवला और साँप वाली कहानी हिंदी में , पालतू नेवले की कहानी , सीख , मोरल , नैतिक) :-

Once upon a time , there was a milkmaid . she had a pet mongoose. One day she went out to bring water from a well. Her child was sleeping in the room . A snake came there in the room . The mongoose saw the snake which is going towards the sleeping child. The mongoose attack on the snake and killed it.

After some time the milkmaid returned. she saw blood on the mouth of mongoose . She thought that the mongoose had killed her child that is why the blood can be seen on the mouth of mongoose .

The milkmaid was much angry , she dropped the pail of water on the mongoose. The mongoose died . She went into the room and found that her child was safe and sleeping. She saw a dead snake with blood near the child. She understand all the matter . She came to mongoose but till that the mongoose had died . she repented very much on her mistake.

Moral of the story : haste makes waste.

पालतू नेवला और साँप की कहानी (दूध वाली और उसका पालतू नेवला)

एक बार एक दूध वाली थी | उसके पास एक पालतू नेवला था जो उस घर में एक सदस्य की तरह पाला जाता था | वह औरत उसका काफी ख्याल रखती थी | उस महिला के एक छोटा सा बच्चा भी था | एक दिन वह महिला अपने छोटे से बच्चे को कमरे में सुलाकर कुँए से पानी भरने के लिए घर से बाहर चली गयी |

उसके जाने के बाद एक सांप वहाँ कमरे में आ जाता है | नेवले ने उस सांप को देखा और सोचा कि यह सांप उस बच्चे की तरफ बढ़ रहा है | यह सोचकर नेवले ने उस सांप पर आक्रमण किया और उसे मार दिया |

इस लड़ाई में नेवले का मुंह खून से लथपथ हो गया और वह घायल हो गया | वह घर से बाहर आकर अपनी मालकिन का इंतज़ार करने लगा | कुछ देर बाद उसकी मालकिन वहां आई और उसने नेवले का खून में सना हुआ मुंह देखा तो उसने सोचा कि इस नेवले ने उसके बच्चे को मारकर खा लिया है इसलिए उसका मुंह खून में हो रखा है |

यह सोचकर वह महिला और अधिक गुस्से में हो जाती है और गुस्से में आकर वह पानी से भरे मटके को उस नेवले पर डाल देती है और दौड़कर उस कमरे की तरफ भागती है जिसमे उसका बच्चा सो रहा था |

वहां जाकर वह देखती है कि उसका बच्चा आराम से सो रहा है और पास में एक मरा हुआ सांप पड़ा है | यह दृश्य देखकर वह सब कुछ समझ गयी कि उस नेवले ने उसके बच्चे की जान बचायी है |

वह रोती हुई उस नेवले की तरफ भागी लेकिन जब उसने देखा तो वह नेवला मरा हुआ पड़ा था | वह अपनी करनी पर बहुत अधिक पछताती है |

कहानी का नैतिक या सीख : जल्दी का काम शैतान का या जल्दीबाजी में किया गया कार्य गलत ही होता है |

यदि वह महिला जल्दीबाजी में अपना फैसला नहीं लेती और अन्दर जाकर देखती और पूरा घटना देखने के बाद अपना फैसला लेती और सोच समझकर फैसला लेती तो वह ऐसी गलती नहीं करती जो उसने की थी | लेकिन उसने ऐसा नहीं किया और जल्दी में अपना फैसला लिया जिसके फलस्वरूप उसने गलती कर दी क्योंकि जल्दी का काम शैतान का होता है | बुद्धिमान व्यक्ति अपना निर्णय सोचकर लेते है और इसलिए वे हमेशा सही फैसला लेते है |

जल्दीबाजी में किया गया कार्य सदैव गलत ही होता है और गलत होने के बाद व्यक्ति के पास पछताने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता है |