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(force among many charges and superposition principal in hindi ) बहुल आवेशों के मध्य बल एवं अध्यारोपण का सिद्धान्त कूलाम नियम के लिए अध्यारोपण का सिद्धांत (superposition principle of coulomb’s law in hindi) :

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force between multiple charges in hindi ?
हमने अब तक की चर्चा में चाहे वह कूलॉम का नियम हो या अन्य जैसे कूलॉम के नियम का सदिश निरूपण ,  इत्यादि में हमने केवल दो आवेशों पर बात की अर्थात हमने सिर्फ दो आवेशों q1 & q2 को ध्यान में रखकर अध्ययन किया।  लेकिन हमने आवेश के गुणों में यह पढ़ा था की दो आवेशों के मध्य लगने वाला बल चाहें वह आकर्षण का हो या प्रतिकर्षण का , अन्य आवेशों की उपस्थिति से अप्रभावित रहता है।
मान लीजिये किसी स्थिर बिंदु आवेश के आस पास बहुत सारे आवेश उपस्थित है , प्रत्येक आवेश के कारण स्थिर बिंदु आवेश कुछ न कुछ बल महसूस करेगा।
अगर स्थिर बिंदु आवेश पर परिणामी बल ज्ञात करने के लिए अध्यारोपण के सिद्धान्त का उपयोग किया जाता है। अध्यारोपण का सिद्धान्त यह कहता है की किसी स्थिर बिंदु आवेश पर अन्य आवेशों (स्थिर ) के कारण लगने वाला परिणामी बल उस आवेश पर लगने वाले सभी बलों के सदिश योग के बराबर होता है।
माना n आवेश q1 , q2 , q3 , q4 …………qn उपस्थित है , कूलॉम के नियमानुसार प्रत्येक आवेश एक दूसरे पर बल आरोपित करेगा।
माना q1 पर q2 , q3 , q4 …………qद्वारा आरोपित बल है। F12 , F13 , F14 ……..F1n है।
अतः अध्यारोपण के सिद्धान्त के अनुसार q पर आरोपित परिणामी बल सभी आवेशों द्वारा आरोपित बल के सदिश योग के बराबर होगा।

अतः

अध्यारोपण का सिद्धान्त (principle of superposition in hindi) : स्थिर वैद्युत बल दो वस्तुओं के बीच अन्योन्य बल है अर्थात दो बिन्दुवत आवेशों के मध्य लगने वाला बल अन्य आवेशों की उपस्थिति या अनुपस्थिति पर निर्भर नहीं करता है। इसलिए अध्यारोपण का सिद्धांत लागू होता है अर्थात निकाय के कारण किसी एक आवेश पर बल व्यक्तिगत आवेशों के कारण लगे बलों का परिणामी होता है अर्थात अनेकों आवेशों के कारण एक बिंदुवत परिक्षण आवेश पर बल F = F1 + F2 + F3 + F4 + . . . . . द्वारा दिया जाता है।

कूलाम नियम के लिए अध्यारोपण का सिद्धांत (superposition principle of coulomb’s law in hindi)

इस सिद्धान्त को बहुल आवेशों के मध्य बल के नाम से भी जाना जाता है।
दो बिन्दु आवेशो के मध्य पारस्परिक विद्युत बल कुलाम के नियम द्वारा प्राप्त होता है। जब आवेशो का एक समूह किसी आवेश पर बल लगाता है तो अध्यारोपण का सिद्धांत उस आवेश पर लगने वाले बल को प्रदान करता है।
अध्यारोपण के सिद्धांत के अनुसार जब कई आवेश किसी आवेश विशेष पर बल लगाते है तो उस आवेश पर लगने वाला परिणामी बल उन सभी बलों का सदिश योग होता है जो वे सभी आवेश अलग अलग उस आवेश पर बल लगाते है। किसी एक आवेश द्वारा लगाया गया विशिष्ट बल अन्य आवेशो की उपस्थिति के कारण प्रभावित नहीं होता।
किन्ही दो आवेशों के मध्य लगने वाला बल अन्य आवेशों की उपस्थिति से प्रभावित नहीं होता है।
माना n बिंदु आवेशों का समूह क्रमशः q1 , q2 , q3 , q. . . . . . qn आकाश में वितरित है। सभी आवेश एक दुसरे पर बल लगाते है। माना q2 , q3 , q. . . . . . qn आवेशों द्वारा आवेश q1 पर आरोपित बल क्रमशः F12 , F13 , F14 , . . . . . F1n है तो अध्यारोपण के सिद्धांत के अनुसार आवेश q1 पर लगने वाला परिणामी बल निम्न समीकरण से प्राप्त होगा –
 F1 = F12 + F13 + F14 + . . . . .+  F1n