विद्युत क्षेत्र की परिभाषा क्या है , विधुत क्षेत्र electric field in hindi

electric field in hindi विद्युत क्षेत्र की परिभाषा क्या है , विधुत क्षेत्र :  जब दो बिंदु आवेशों को आपस में पास लाया जाता है तो वे एक दूसरे पर विद्युत बल आरोपित करते है , यह बल प्रतिकर्षण या आकर्षण का हो सकता है इसे कूलॉम के नियम द्वारा ज्ञात किया जा सकता है।

ठीक इसी प्रकार यदि आवेशों का निकाय उपस्थित है और हमें बहुत सारे आवेशों के कारण किसी स्थित बिंदु आवेश पर परिणामी बल ज्ञात करना चाहते है तो इसके लिए हम कूलॉम का अध्यारोपण का सिद्धान्त काम में लेते है।
अगर आपने ध्यान दिया हो तो दोनों ही स्थितियों में आवेश एक दूसरे को स्पर्श नहीं कर रहे है जिससे यह प्रश्न उजागर होता है की बिना स्पर्श किये आवेशों को एक दूसरे की उपस्थिति या अनुपस्थिति का कैसे पता चलता है।
इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए विद्युत क्षेत्र अवधारणा दी गई।
इस विद्युत क्षेत्र अवधारणा में यह कल्पना की जाती है की प्रत्येक आवेश अपने चारों ओर एक क्षेत्र उत्पन्न करता है , जब आवेश के द्वारा उत्पन्न क्षेत्र में कोई अन्य आवेश रखा जाता है तो प्रथम आवेश दूसरे आवेश पर एक क्रिया करता है जिससे दूसरा आवेश प्रथम आवेश की उपस्थिति को अनुभव करता है।
परिभाषा :
अतः हम सीधे शब्दों में यह कह सकते है की विद्युत आवेश या आवेशों के निकाय के चारो ओर का वह क्षेत्र जिसमे कोई दूसरा आवेशित कण आकर्षण या प्रतिकर्षण बल महसूस करता है उस क्षेत्र को विद्युत क्षेत्र कहते है।
जब भी आवेश या कण किसी भी विद्युत क्षेत्र में तब कहा जाता है जब वह विद्युत बल का अनुभव करता है।
अर्थात वैधुत क्षेत्र किसी भी आवेश या आवेशों के निकाय द्वारा उत्पन्न वह क्षेत्र है जहाँ तक वह अन्य आवेश पर वैधुत बल लगा सकता है।
विद्युत क्षेत्र की अभिधारणा सबसे पहले फैराडे ने दी थी , यह एक सदिश राशि है तथा गणितीय रूप में इसे विद्युत क्षेत्र की तीव्रता के रूप में समझाया जाता है।

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