उर्ध्वपातन (sublimation in hindi)

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(sublimation in hindi) उर्ध्वपातन : कुछ पदार्थो को जब गर्म किया जाता है तो वे बिना द्रव में बदले सीधे ही वाष्प में बदल जाती है और जब इस वाष्प को ठंडा किया जाता है तो वे बिना द्रव में बदले सीधे ठोस में बदल जाती है। जो पदार्थ यह गुण दर्शाते है उन पदार्थो को उर्ध्वपातन पदार्थ कहते है और इस प्रक्रिया को उर्ध्वपातन कहते है।
अत: उर्ध्वपातन एक अवस्था परिवर्तन की प्रक्रिया होती है जिसमें ठोस पदार्थ सीधे गैस अवस्था में परिवर्तित हो जाती है अर्थात ठोस पदार्थ द्रव अवस्था में परिवर्तित नहीं होती है।
इसी प्रकार गैस अवस्था से पदार्थ सीधे ठोस अवस्था में बदल जाता है , इस प्रकार ठोस अवस्था से सीधे गैस (वाष्प) अवस्था में परिवर्तन को और गैस (वाष्प) अवस्था से सीधे ठोस अवस्था में बदलने की प्रक्रिया को ही उर्ध्वपातन कहते है।
उदाहरण : नौसादर , कपूर , आयोडीन आदि पदार्थ उर्ध्वपातन का गुण दर्शाते है।

चित्रानुसार जब नौसादर या कपूर आदि उर्ध्वपातन पदार्थो को जब एक पात्र में गर्म करते है तो ये पदार्थ वाष्प में बदलने लगते है अर्थात गर्म करने पर ये बिना द्रव अवस्था में बदले सीधे गैस अवस्था में बदल जाते है।
और जब इस वाष्प को किसी अन्य पात्र में ठंडा किया जाता है तो यह वाष्प ठोस अवस्था में बदल जाती है अर्थात यह पदार्थ गैस अवस्ता से सीधे ठोस अवस्था में बदल जाता है , अर्थात उर्ध्वपातन में द्रव अवस्था प्राप्त नहीं होती है इसी सम्पूर्ण प्रक्रिया को उर्ध्वपातन कहते है और ऐसे पदार्थो को उर्ध्वपातन पदार्थ कहा जाता है।
जब किसी पदार्थ में उर्ध्वपातन जैसे पदार्थो की अशुद्धियाँ उपस्थित होती है या इन पदार्थो में अन्य किसी प्रकार की अशुद्धियाँ उपस्थित रहती है तो पदार्थो के इस गुण के कारण इनका शुद्धिकरण आसानी से कर लिया जाता है।
हमने अक्सर सुना होगा कि ऐसा कहा जाता है कि कपूर को खुला नहीं छोड़ना चाहिए नहीं तो यह उड़ जायेगा , इसका तात्पर्य है कि जब कपूर को ताप मिलता है तो यह गैस अवस्था में बदल जाता है अर्थात इसमें मध्यस्थ द्रव अवस्था नहीं प्राप्त होती है।
इन पदार्थो के अलावा अगर हम सामान्य पदार्थो में देखे तो हम पाते है कि पदार्थो को जब ठोस अवस्था में गर्म किया जाता है वे द्रव अवस्था में बदलती है और वाष्प को ठंडा करने पर भी द्रव अवस्था में बदल जाते है जैसे जब किसी बर्फ को थोडा गर्म किया जाता है तो यह पिघलकर द्रव में बदल जाती है और जब पानी की वाष्प को ठंडा करते है तो यह ठंडी होकर जल में परिवर्तित हो जाती है लेकिन उर्ध्वपातन पदार्थो में द्रव अवस्था प्राप्त ही नहीं होती है उनको ठोस अवस्था में गर्म करते है तो वे वाष्प (गैस) में परिवर्तित हो जाती है और ठंडा करने पर पुन: ठोस अवस्था में बदल जाती है अर्थात उर्ध्वपातन पदार्थो में मध्यस्थ द्रव अवस्था प्राप्त नही होती है।

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