आसवन (Distillation in hindi)

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(Distillation in hindi) आसवन : जब किसी द्रव में घुलनशील ठोस अशुद्धियाँ घुली हुई होती है तब यह प्रक्रिया काम में ली जाती है , पदार्थो के शुद्धिकरण में काम आने वाली यह विधि काफी प्रचलित है।

इस प्रक्रिया में वाष्पन और संघनन दोनों ही प्रक्रिया काम में ली जाती है। याद रखिये कि यह पदार्थो के शुद्धिकरण के लिए काम में ली जाने वाली भौतिक विधि है अर्थात इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की कोई रासायनिक अभिक्रिया भाग नहीं लेती है।
आसवन विधि : जब किसी द्रव में घुलनशील ठोस अशुद्धि उपस्थित होती है तो मिश्रण को गर्म किया जाता है जिससे द्रव वाष्पित हो जाता है और द्रव की इस वाष्प को आगे अन्य किसी पात्र में एकत्रित करके ठंडा (संघनन) किया जाता है जिससे यह द्रव शुद्ध अवस्था में प्राप्त हो जाता है और चूँकि ठोस पदार्थ वाष्पित नहीं हो सकता है इसलिए यह उसी पात्र में रह जाता है , इस प्रकार द्रव और ठोस अलग हो जाते है , इस प्रक्रिया को आसवन कहते है।
उदाहरण : जब जल में घुलनशील ठोस अशुद्धियाँ उपस्थित रहती है तो उसका शुद्धिकरण आसवन विधि द्वारा ही किया जाता है , अत: जल का आसवन एक उदाहरण है।
आसवन विधि की सम्पूर्ण प्रक्रिया को इस चित्र में दर्शाया गया है –
चित्रानुसार आसवन विधि में निम्न सेट उप होता है , एक पात्र में द्रव भरा हुआ है जिसे हमें शुद्ध करना है अर्थात इसमें द्रव और उसमें कुछ ठोस घुलनशील अशुद्धियाँ है , अब इस पात्र को गर्म करते है जिससे ताप पाकर द्रव उबलने लगता है और वाष्पित होने लगता है अर्थात द्रव की वाष्प बनने लगती है , यह वाष्प नली द्वारा आगे अन्य पात्र से जुडी हुई है , इस नलिका को ठंडा रखा जाता है जिससे जब इसमें वाष्प आती है तो यह नलिका उस वाष्प को ठण्डा कर देती है जिससे वाष्प पुन: द्रव में बदल जाता है और यह द्रव हमें दूसरी तरफ उपस्थित पात्र में प्राप्त हो जाता है , इस प्रकार शुद्ध द्रव और ठोस अशुद्धियाँ अलग अलग पृथक हो जाती है , इस प्रक्रिया को आसवन कहते है।
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