प्रभाजी आसवन (fractional distillation in hindi)

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(fractional distillation in hindi) प्रभाजी आसवन : जब कोई मिश्रण ऐसे पदार्थो से मिलकर बना होता है जिनके क्वथनांको में अधिक अंतर होता है तो ऐसे पदार्थो को पृथक करने के लिए साधारण आसवन विधि को काम में लिया जाता है।

लेकिन मान लीजिये कि कोई अन्य मिश्रण ऐसे पदार्थो से मिलकर बना हुआ है जिनके पदार्थो के क्वथनांक में अधिक अंतर नहीं पाया जाता है ऐसी स्थिति में पदार्थो को साधारण आसवन विधि द्वारा पृथक नहीं किया जा सकता है , ऐसे पदार्थो को अलग अलग करने के लिए प्रभाजी आसवन विधि को काम में लिया जाता है।
अत: वह प्रक्रिया जिसमें किसी मिश्रण में उपस्थित पदार्थो को उनके क्वथनांक के आधार पर अलग अलग करने को प्रभाजी आसवन कहते है।
यह भी ठीक साधारण आसवन जैसे हि संपन्न होता है अर्थात इसमें मिश्रण को गर्म किया जाता है और एक निश्चित क्वथनांक पर किसी पदार्थ की वाष्प बनने लगती है तो नली द्वारा दुसरे पात्र में जाने लगती है , मार्ग में ही इस वाष्प को ठंडा कर दिया जाता है जिससे दुसरे पात्र में हमें यह पदार्थ द्रव अवस्था में प्राप्त हो या उसी अवस्था में प्राप्त हो जिस अवस्था में हमें चाहिए , इसमें अलग यह होता है कि इस विधि में थर्मामीटर लगा होता है जिससे हम यह देख लेते है कि इस ताप पर प्राप्त पदार्थ यह होना चाहिए , क्यूंकि मिश्रण में उपस्थित पदार्थो का क्वथनांक हमें ज्ञात होता है और उनके पृथक होने के ताप के आधार पर उस पदार्थ का पता चल जाता है।
प्रभाजी आसवन चित्रानुसार संपन्न होती है जैसा यहाँ प्रदर्शित है –
प्रभाजी आसवन के उदाहरण : इस विधि द्वारा ही पेट्रोलियम से अलग अलग पदार्थ जैसे पेट्रोल , डीजल , केरोसिन आदि को प्राप्त किया जाता है।
अगर आपको यह विधि अभी भी समझ नहीं आई है तो आप इसे निम्न अनऔपचारिक उदाहरण द्वारा समझ सकते है –
मान लीजिये किसी कमरे में तीन लोग है , आपको गेट कर खड़ा कर दिया जाए और कहा जाए कि जो लाल शैर्ट में होगा वह लालू है , जो पीले शर्ट में होगा वह पिलु है और जो गुलाबी शर्ट में होगा वह गिलू है।
अब जब वे एक एक करके बाहर आएंगे तो स्वभाविक है कि आप उनके शर्ट का रंग देखकर पहचान सकते है कि किस व्यक्ति का क्या नाम है अर्थात अब आप अपनी मर्ज़ी अनुसार उनको अलग अलग कर सकते है।
प्रभाजी आसवन में भी अलग अलग ताप पर पदार्थ वाष्पित होते है और हमें पता होता है कि इस ताप पर कौनसा पदार्थ वाष्पित होता है उसके अनुसार हम उनके अलग अलग आसानी से कर लेते है।
अर्थात जिस पदार्थ का क्वथनांक कम होगा वह पदार्थ सबसे पहले प्राप्त होगा और जिसका क्वथनांक सबसे अधिक होगा वह पदार्थ सबसे अंत में प्राप्त होगा , इस प्रकार हम प्रभाजी आसवन विधि द्वारा अलग अलग द्रवों या पदार्थो को पृथक कर लेते है।