स्पेक्ट्रमी रासायनिक श्रेणी spectral chemical series in hindi

spectral chemical series in hindi स्पेक्ट्रमी रासायनिक श्रेणी : लिगेंड को क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा अर्थार्थ ▲0 के बढ़ते क्रम में रखने पर जो श्रेणी प्राप्त होती है उसे स्पेक्ट्रमी रासायनिक  श्रेणी कहते हैं |

I < Br < SCN < Cl < S2- < F < OH < C2O42- < H2O < NCS  < EDTA4- < NH3 <en < NO3 < CN <CO

नोट :  वे लिगेंड जिनके लिए ▲0 का मान अधिक होता है उन्हें प्रबल क्षेत्र लिगेंड कहते हैं जैसे CO , Ca , NO2

नोट : वह लिगेंड जिनके लिए CFSE  का मान कम होता है उन्हें दुर्बल क्षेत्र लिगेंड कहते हैं |

प्रबल क्षेत्र संकुल व दुर्बल क्षेत्र संकुल का बनना (Building of Strong Area Packages and Weaker Areas Packages):

इन संकुल का बन्ना बनना दो कारको पर निर्भर करता है

  1. क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा अर्थार्थ ▲0
  2. युग्मन ऊर्जा –  इलेक्ट्रॉन को युग्मित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा को युग्मन ऊर्जा कहते हैं इसे p से व्यक्त करते हैं

नोट :  यदि CFSE का मान युग्मन ऊर्जा से अधिक है अर्थार्थ ▲0 > p है तो स्ट्रांग फील्ड कांपलेक्स बनता है इसे निम्न चक्रण संकुल भी कहते हैं

नोट :  यदि ▲0 < p है तो व्हिटफिल्ड कांपलेक्स बनता है इसे उच्चारण संकुल भी कहते हैं

चतुष्फलकीय संकुल यौगिकों में d  कक्षको का विपाटन (Lamination of cell chamber in quaternary package compounds):

  1. चतुष्फलकीय संकुल योगीको मैं d कक्षको का विपाटन अष्टफलकीय संकुल योगिको की तुलना में विपरीत होता है अर्थार्थ eg कक्षको की उर्जा कम व t2g कक्षको कि उर्जा अधिक होती है |
  2. eg व t2g कक्षको के मध्य ऊर्जा को क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा कहते हैं इसे  से व्यक्त करते हैं
  3. चतुष्फलकीय संकुल यौगिकों के लिए ▲t का मान कम होता है
  4. चतुष्फलकीय संकुल यौगिक सदैव उच्च चक्रण संकुल निर्माण करते हैं क्योंकि ▲t का मान युग्मन ऊर्जा से कम होता है |

क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धांत की कमियां The drawbacks of crystal field theory (CFT) :

  1. धातू व लिगेंड के मध्य सहसंयोजक बंध होता है इस तथ्य को नहीं बताया गया
  2. इस सिद्धांत में लिगेंड को बिंदु आवेश माना गया है अतः ऋण आवेशित लिगेंड के द्वारा d कक्षको में विपाटन अधिक होना चाहिए परंतु F , Cl , Br, I आदि दुर्बल क्षेत्र लिगेंड है

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