स्लामेतान क्या है | Slametan in hindi mening definition स्लामेतान किसे कहते है परिभाषा जावाई धर्म

By   February 4, 2021

स्लामेतान किसे कहते है परिभाषा जावाई धर्म स्लामेतान क्या है | Slametan in hindi mening definition ?

‘स्लामेतान‘-जावाई धर्म का एक मुख्य अनुष्ठान
(Slametan-ACore Ritual in Javanese Religion)
स्लामेतान या सामुदायिक-भोज संपूर्ण जावाई धर्म व्यवस्था का एक प्रमुख अंग है। जैसा कि ग्यट्र्स ने संकेत दिया है कि सामुदायिक-भोज विश्व भर के धर्मों में एक आम अनुष्ठान है। ग्यट्र्स के शब्दों में स्लामेतान ‘‘इसमें भाग लेने वालों के लिये आध्यात्मिक और सामाजिक एकता का प्रतीक है। दोस्त, पड़ोसी, सहकर्मी, संबंधी, संबद्ध प्रेतात्माएं, दिवंगत पूर्वज, प्राचीन देवी देवताएं अर्थात सभी इस सहभोज के भागीदार हो कर एक विशेष सामाजिक वर्ग में बंधकर एक दूसरे के सहायक और सहयोगी बनते हैं।‘‘ (पृ. 11)।

एबंगन परम्परा में यद्यपि स्लामेतान के प्रति झुकाव तो है किन्तु शहरी लोगों के बीच इसकी क्षमता या प्रभाव कम हो जाता है। कई अवसरों पर स्लामेतान (सामुदायिक-भोज) का आयोजन किया जाता है, चाहे वो जन्मोत्सव हो या खतना करना या शादी ब्याह या चाहे बीमारी हो या जादू-टोना, चाहे आवास बदलने का अवसर हो या व्यवसाय का शुभारम्भ। स्वाभाविक रूप से हर अवसर का महत्व अलग-अलग होता है। अब हम स्लामेतान की सामान्य पद्धति के विवरण पर विचार करेंगे।

 ‘स्लामेतान‘ की पद्धति (The Slametan Pattern)
स्लामेतान हमेशा शाम को सूर्यास्त के पश्चात संध्यावंदना के बाद आयोजित किए जाते हैं। इसके लिये कोई शुभ दिन चुन लिया जाता है। दिन के समय घर की औरतें खाना बनाती है, कभी-कभी रिश्तेदार औरतों से भी मदद ली जाती है। आयोजन में केवल पुरुष ही भाग लेते हैं, औरतें रसोई में ही रहती हैं। आमंत्रित पुरुष नजदीक के पड़ोसी होते हैं। मेजबान का संदेशवाहक (अक्सर उसका पुत्र) आयोजन से 5-10 मिनट पहले उन्हें (पड़ोसियों को) बुलाने जाता है। वे कुछ भी कर रहे हों, उसे छोड़कर मेजबान के घर जाते हैं। हाँ, अक्सर लोगों को यह मालूम होता है कि स्लामेतान का आयोजन होने वाला है और वे न्योते के लिए तैयार रहते हैं। मेजबान के घर मेहमान पहले से सुसज्जित भोजन के चारों ओर वृत्ताकार (घेरा बना कर) जमीन पर बैठते हैं।

मेजबान एक अत्यंत औपचारिक भाषण के साथ आयोजन का शुभारंभ करता है। वह पड़ोसियों की उपस्थिति के लिये कृतज्ञता प्रकट करता है और कामना करता है कि अनुष्ठान का लाभ सभी को प्राप्त हो। फिर वह अनुष्ठान का कारण बताता है (जैसे बेटी की शादी, पत्नी का गर्भ धारण करना आदि)। फिर वह अनुष्ठान के सामान्य कारण बताता है कि उसे उसके परिवार और उपस्थित मेहमानों को ‘‘स्लामेतान से मिले सुख‘‘ की अवस्था प्राप्त हो। इसका अर्थ शारीरिक और मानसिक शाति और संतलन की अवस्था प्राप्त करना है। इस अवस्था को प्राप्त करने के लिए गांव की आत्माओं की गुहार लगाना है। अंत में वह भाषण की खामियों और भोजन की त्रुटियों के लिये क्षमा याचना करता है। इस औपचारिक भाषण को ‘‘उदजुब‘‘ (Udjub) कहा जाता है।

भाषण के अंत में मेजबान किसी एक मेहमान से अरबी में प्रार्थना करने का अनुरोध करता है। किसी विशेष अनुष्ठान में ‘‘मोदिन‘‘ (डवकपद) या धर्माचार्य (धर्म गुरू) को इस कार्य के लिये बुलाया जाता है। प्रार्थना समाप्त होने पर खाना परोसा जाता है। प्रत्येक मेहमान को एक कप चाय और एक बड़ा केले का पत्ता दिया जाता है जिस पर विभिन्न प्रकार के भोजन परोसे जाते हैं। इस मौके पर मेजबान खाना नहीं खाता । हर प्रकार का खाना किसी न किसी विशेष बात का प्रतीक होता है, यह हम इकाई में आगे पढ़ेंगे। मेजबान, मेहमानों से खाने का अनुरोध करता है। वे शांति और तेजी से खाते हैं (खाते समय बोलना दुर्भाग्य का सूचक होता है)। कुछ कौर खाने के पश्चात वे मेजबान से घर जाने की आज्ञा मांगते हैं, फिर घर जाकर वे अपने परिवार जनों के साथ एकान्त में खाते हैं। ऐसे सामुदायिक भोज और अनुष्ठान, भारतीय ग्रामीण परंपराओं के अहम हिस्से हैं। समाजशास्त्रियों ने पाया है कि ऐसे भोज संदर्भ विशिष्ट होते हैं जिनमें हरेक भोज का संबंध स्वाभाविक रूप से किसी विशिष्ट स्थिति से होता है। इस प्रकार स्लामेतान समाप्त होता है। इस अनुष्ठान का सामाजिक महत्व क्या है ? आइए देखें कि जावाई लोगों के विचारों के आधार पर स्लामेतान के अर्थ के मद्देनजर ग्यट्र्स का विश्लेषण क्या कहता है।

‘स्लामेतान‘ का अर्थ (The Meaning of ‘Slametan’)
जावाई लोग स्लामेतान क्यों मानते हैं? एक राजगीरी ने ग्यट्र्स को बताया कि ‘‘स्लामेतान में कोई भी व्यक्ति दूसरे से भिन्न नहीं होता, इसलिए वे अलग होना नहीं चाहते और स्लामेतान आत्माओं (प्रेतात्मा या बुरी आत्माओं) से लोगों की रक्षा करता है (पृष्ठ-11)। पूर्व उल्लिखित ‘स्लामेत‘ अवस्था की इच्छा को जावाई लोग ‘‘गाक आना अपा अपाश् कहते हैं जिस का अर्थ है किसी का कुछ (बुरा) नहीं होगा। स्लामेतान के भोजन की खुशबू, आत्माओं का भोजन माना जाता है जिससे ये आत्माएं शान्त रहें और किसी को परेशान न करें। यह ध्यान देने की बात है कि आत्माओं को व्यक्ति और समाज की गतिविधियों में बाधक और परेशान करने वाला माना गया है। ग्यर्ट्स के शब्दों में स्लामेतान ….. सामान्य सांस्कृतिक व्यवस्था को पुनःस्थापित और सुदृढ़ बनाने और अव्यवस्था को दूर रखने का प्रतीक है । (पृष्ठ 11)। स्लामेतान, पारंपरिक जावाई कृषक संस्कृति के मूल्यों को उभार कर सामने लाता है। व्यक्तिगत इच्छाओं का परस्पर सामंजस्य कैसे होता है यह इस बात से स्पष्ट होता है कि न्योता मिलते ही लोग हाथ का काम छोड़ कर पड़ोसी के ‘‘स्लामेतान‘‘ में चले जाते हैं। आत्म संयम और बाह्य आचारों पर नियंत्रण के उदाहरण मेहमान और मेजबान के बीच औपचारिक संबंध के रूप में देखे जा सकते है और जैसा कि ग्यी मानते हैं कि जावाई लोगों के आम जीवन में स्लामेतान तभी आयोजित किया जाता है जब उपर्युक्त मूल्यों की सबसे अधिक आवश्यकता महसूस की जाती है। अगले खंड में हम स्लामेतान के दो उदाहरण प्रस्तुत करेंगे, दोनों ही जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों के अनुष्ठान हैं। इन विवरणों से आप न केवल उपर्युक्त प्रसंग समझ पाएंगे बल्कि जावाई कृषकों के समृद्ध धर्म समन्वय को भी समझ पाएंगे।

बोध प्रश्न 2
प) जावाइयों के अनुसार स्लामेतान आयोजित करने के दो मुख्य कारण क्या हैं । अपना उत्तर लगवग पाँच पंक्तियों में दीजिए।
पप) ‘‘सलामेत” का क्या अर्थ है ? जावाई इस का वर्णन कैसे करते हैं ? अपना उत्तर लगभग पाँच पंक्तियों में दीजिए ।

बोध प्रश्न 2 उत्तर
प) जावाइयों के अनुसार “स्लामेतान‘‘ का आयोजन (क) लोगों की समानता और अविच्छिन्नता (ख) बुरी आत्माओं से बचाव के लिये किया जाता है।
पप) ‘‘स्लामत‘‘ का संबंध शारीरिक और मानसिक संतुलन से है। जावाई मानते हैं कि इससे किसी का कुछ नहीं बिगड़ेगा।

 ‘‘स्लामेतान‘‘ के दो उदाहरण (‘SLAMETAN’k~ & Two Examples)
जैसा कि कहा जा चुका है कि “स्लामेतान‘‘ किसी भी महत्वपूर्ण अवसर पर मनाया जाता है। ग्यर्ट्स चार प्रकार के स्लामेतान का उल्लेख करता हैः
प) वे (स्लामेतान) जो जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों (जैसे जन्म, खतना करना, विवाह, मृत्यु आदि) से जुड़े हैं।
पप) दूसरे वे जो इस्लामी धर्म (कैलेंडर) के महत्वपूर्ण दिनों (हजरत मोहम्मद साहब के जन्म दिन, बकरीद, रमजान (रोजे का आखिरी दिन आदि) से संबंद्ध हैं।
पपप) तीसरे ‘‘बरिश दे‘‘ स यानि जो सामाजिक एकता के लिये गांवों से बुरी आत्माओं को भगाने के दिन से संबद्ध हैं।
पअ) कभी-कभी मनाये जाने वाले स्लामेतान जैसे किसी लंबी (महत्वपूर्ण) यात्रा पर जाने से पूर्व, घर बदलते समय (गृह प्रवेश) बीमारी या जादू टोने आदि से संबद्ध हैं।

(अति व्याप्ति) अधिक विस्तार के कारण सभी प्रकार के स्लामेतान के उदाहरण देखना हमारे लिये संभव नहीं होगा। इनमें से मात्र दो का उदाहरण हम देंगे। दोनों ही जीवन के महत्वपूर्ण अंग अर्थात एक गर्भावस्था और दूसरा विवाह से संबद्ध स्लामेतान है। आप देखेंगे कि सलामेतान एक खाके का निर्माण करता है जिसके आधार पर अनुष्ठान विशेष का आयोजन होता है। ग्यर्ट्स के शब्दों में जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों के अनुष्ठान है ‘‘जीवन के सभी पहलुओं की निरंतरता और आतंरिक अस्तित्व पर बल देना और ऐसे विशिष्ट बदलावों और अवस्थाओं पर भी बल देना जिससे होकर जीवन गुजरता है‘‘ (पृष्ठ-38)। आइए अब पहले अनुष्ठान पर ध्यान केन्द्रित करें।