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सल्फर के ऑक्सो अम्ल (oxoacids of sulphur in hindi) , सल्फ्यूरिक अम्ल (Sulphuric Acid) , सल्फ्यूरस अम्ल

(oxoacids of sulphur in hindi) सल्फर के ऑक्सो अम्ल : वे अम्ल जिनमें ऑक्सीजन उपस्थित रहती है उन अम्लों को ओक्सो अम्ल कहते है।
ऑक्सीजन परिवार के सदस्यों के मध्य सल्फर कई प्रकार के ऑक्सो अम्ल बनाता है और जब ऑक्सीजन के साथ सल्फर भी उपस्थित होगा तो ऐसे अम्लो को सल्फर के ऑक्सो अम्ल कहे जा सकते है।
सल्फर कई ओक्सो अम्ल बनाता है जैसेH2SO4, H2SO3आदि।
सामान्यतया सल्फर के ओक्सो अम्लो में कम से कम एक S=O बंध और कम से कम बन्ध पाया जाता है।
सल्फर की ऑक्सीकरण अवस्था के आधार पर सल्फर के ऑक्सो अम्ल को निम्न भागों में बांटा गया है –
1. सल्फ्यूरस अम्ल (Sulphurous Acid)
2. सल्फ्यूरिक अम्ल (Sulphuric Acid)
3. थायो सल्फ्यूरिक अम्ल (thiosulphuric acid)
4. पायरो सल्फ्यूरिक अम्ल (Pyrosulphuric Acid)
5. परऑक्सो डाइसल्फ्यूरिक अम्ल (Peroxodisulphuric Acid)
6. डाइ थायोनिक अम्ल (dithionic acid)
7. परसल्फ्यूरिक अम्ल (persulphuric acid)
अब हम इन सभी सल्फर के ऑक्सो अम्ल के बारे में विस्तार से अध्ययन करते है।

1. सल्फ्यूरस अम्ल (Sulphurous Acid)

यह अम्ल द्विप्रोटी अम्ल होता है और इसलिए ही यह दो प्रोटोन त्याग कर सकता है , सल्फ्यूरस अम्ल में सल्फर के एक परमाणु दो डायरहाइड्रोक्सिल समूहों के साथ जुड़ा रहता है और ऑक्सीजन का एक परमाणु सल्फर के परमाणु के साथ पाई बन्ध द्वारा जुड़ा हुआ रहता है।
इसकी संरचना निम्न है –
जब सल्फर डाइऑक्साइड को जल में घोला जाता है तो इससे सल्फ्यूरस अम्ल बनता है।
सल्फ्यूरस अम्ल का रासायनिक सूत्रH2SO3होता है। इसमें सल्फर की ऑक्सीकरण अवस्था +4 होती है , चूँकि इसमें दो -OH समूह उपस्थित होते है इसलिए यह द्विक्षारकीय अम्ल होता है।

2. सल्फ्यूरिक अम्ल (Sulphuric Acid)

यह सबसे महत्वपूर्ण ओक्सो अम्ल माना जा सकता है क्यूंकि यह सामान्यतया बहुत अधिक काम में लिया जाने वाला अम्ल है और इसलिए ही इसे ” रसायनों का राजा ” भी कहते है।
यह भी द्विप्रोटि अम्ल होता है , यह दो प्रोटोन त्याग करता है , सल्फ्यूरिक अम्ल में सल्फर के एक परमाणु दो हाइड्रॉक्सिल समूह के साथ बन्ध द्वारा जुड़ा हुआ रहता है और बचे हुए दो ऑक्सीजन परमाणु सल्फर के परमाणुओं के साथ पाई बन्ध द्वारा जुड़े हुए रहते है।
इसकी संरचना निम्न प्रकार होती है –
सल्फ्यूरिक अम्ल का रासायनिक सूत्रH2SO4होता है। इसमें S-OH बन्ध लम्बाई की तुलना में S=O बंध लम्बाई का मान छोटा होता है तथा इसमें OH समूह को ऑक्सीजन परमाणु द्वारा प्रतिकर्षित किया जाता है इसलिए O=S=O बन्ध कोण का मान बड़ा होता है और तुलनात्मक रूप से HO-S-OH के बंध कोण का मान कम होता है।
सल्फ्यूरिक अम्ल में सल्फर परमाणु (S) का ऑक्सीकरण अंक +6 होता है तथा इस अम्ल में दो OH समूह उपस्थित होते है इसलिए यह द्विक्षारकीय अम्ल होता है।

3. थायो सल्फ्यूरिक अम्ल (thiosulphuric acid)

इसमें उपस्थित एक सल्फर परमाणु (S) का ऑक्सीकरण अवस्था +4 होती है और दुसरे सल्फर परमाणु (s) की ऑक्सीकरण अवस्था शून्य होता है अर्थात इसमें दो सल्फर परमाणु पाए जाते है जिनकी ऑक्सीकरण अवस्था क्रमशः 0 और +4 होती है।
इसकी संरचना निम्न होती है –
थायो सल्फ्यूरिक अम्ल में दो OH समूह उपस्थित रहते है इसलिए इसे द्विक्षारकीय अम्ल कहते है तथा इस अम्ल का रासायनिक सूत्रH2S2O3होता है।

4. पायरो सल्फ्यूरिक अम्ल (Pyrosulphuric Acid)

इसे ओलियम भी कहा जाता है , पायरो सल्फ्यूरिक अम्ल का मोलर द्रव्यमान 178.13 ग्राम/मोल होता है।
यह एक रंगहीन और क्रिस्टलीय ठोस के रूप में पाया जाता है यह सल्फ्यूरिक अम्ल का एक एनहाइड्राइड होता है और पायरो सल्फ्यूरिक अम्ल का गलनांक बिंदु लगभग 36°C होता है।
इस अम्ल का रासायनिक सूत्रH2S2O7होता है। इस अम्ल में उपस्थित सल्फर परमाणु (S) का ऑक्सीकरण अंक 6 होता है।
जब सल्फ्यूरिक एसिड की क्रिया सल्फर ट्राईऑक्साइड के अधिक्य में की जाती है तो क्रिया के फलस्वरूप पायरो सल्फ्यूरिक अम्ल प्राप्त होता है , यह अभिक्रिया निम्न प्रकार संपन्न होती है –
H2SO4 + SO3 → H2S2O7
इस अम्ल में दो OH समूह पाए जाते है इसलिए इसको द्विक्षारकीय कम कहा जता है। जब इसकी क्रिया क्षार से की जाती है तो यह लवण बनाते है जिन्हें पायरोसल्फेट कहा जाता है।
इस अम्ल का उपयोग पेट्रोलिएम के शोधन के रूप में किया जाता है।

5. परऑक्सो डाइसल्फ्यूरिक अम्ल (Peroxodisulphuric Acid)

इस अम्ल में सल्फर परमाणु (S) की ऑक्सीकरण की अवस्था +6 होती है और यही कारण है कि यह एक अच्छे ऑक्सीकरण कारक की तरह कार्य करता है , यह बहुत ही अधिक विस्फोटक प्रकृति का होता है।
इस अम्ल को सामान्य नाम ‘मार्शल अम्ल’ से जाना जाता है , इसमें एक पेरोक्साइड समूह पाया जाता है जो दो सल्फर परमाणुओं के मध्य सेतु का कार्य करता है।
दो सल्फर परमाणुओं में से एक सल्फर परमाणु से हाइड्रॉकसिल समूह (OH) जुड़ा हुआ रहता है और दुसरे सल्फर परमाणु से ऑक्सीजन परमाणु जुड़ा हुआ रहता है।
जब हाइड्रोजन पेरोक्साइड के साथ क्लोरोसल्फ्यूरिक अम्ल की क्रिया करवाई जाती है तो क्रिया के फलस्वरूप हमें पायरो सल्फ्यूरिक अम्ल प्राप्त होता है , यह किया निम्न प्रकार होती है –
2ClSO3H + H2O2 → H2S2O8 + 2HCl
इसका रासायनिक सूत्रH2S2O8होता है।

6. डाइ थायोनिक अम्ल (dithionic acid)

इसका रासायनिक सूत्रH2O6S2होता है , डाइ थायोनिक अम्ल की संरचना निम्न होती है –
इस अम्ल में उपस्थित सल्फर परमाणु (S) की ऑक्सीकरण अवस्था +5 होती है।

7. परसल्फ्यूरिक अम्ल (persulphuric acid)

इस अम्ल का रासायनिक सूत्रH2SO5होता है , इसमें सल्फर परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था +6 होती है , इस अम्ल में दो OH समूह पाए जाते है इसलिए यह एक द्विक्षारकीय अम्ल होता है |