मिलर सूचकांक की परिभाषा क्या है miller indices in hindi

(miller indices in hindi) मिलर सूचकांक की परिभाषा क्या है : क्रिस्टल में क्रिस्टल तलों व अभिविन्यासो को व्यक्त करने के लिए एक process का इस्तेमाल किया जाता है जिसे हम miller indices (मिलर सूचकांक) कहते हैं।

– माना क्रिस्टल की अक्ष a , b , c है , ये cell primitive या non primitive दोनों हो सकते है।

a , b , c अक्षो पर प्लेन द्वारा काटे गए inter shapy को lattice constant की फॉर्म में ज्ञात करते है।

माना lattice constant = p , q , r

– अंतखंड गुणांक p , q , r को व्युत्क्रम लिखने पर प्राप्त भिन्न को dominator (हर) का LCM लेते है।

इस LCM से सभी reciprocal (व्युत्क्रम) को गुणा कर सभी भिन्नो को पूर्णांकों में बदल देते है।

इस प्रकार प्राप्त किये गए क्रिस्टल तल को मिलर सूचकांक (miller indices) कहते हैं।

यदि miller indices ऋणात्मक आता है तो उन्हें बार (-) द्वारा प्रदर्शित करते है।

miller indices को (h,k,l) द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

मिलर सूचकांक (miller indices)  के अभिलाक्षणिक गुण

1. समान दूरी पर स्थित समान्तर तलों का मिलर सूचकांक समान होता है अर्थात मिलर सूचकांक तलों के एक set को प्रदर्शित करता है।
2. निर्देशांक अक्षों के समान्तर क्रिस्टल तल उन्ही अक्षों को अन्नत पर काटती है।  यदि दो क्रिस्टल तलों के मिलर सूचकांक अनुपात में समान होते है तो वे तल एक दूसरे के समान्तर होते है।
3. यदि क्रिस्टल में (h,k,l) मिलर सूचकांक वाले समान्तर तलों द्वारा काटे गए अंतखंडो की दूरी a हो तो इस समान्तर तलों की दूरी d

4. यदि घनीय क्रिस्टल में (h,k,l) मिलर सूचकांक वाले तलों द्वारा तीनो अक्षों की दूरी क्रमशः a,b,c हो तो इनके तलों के बीच की दूरी d होगी।

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