मेवाड़ का मैराथन किस युद्ध को कहा जाता है या राजस्थान का मेवाड़ का मैराथन किसे कहते हैं ? marathon of mewar in hindi

By   January 1, 2021
marathon of mewar in hindi ?
प्रश्न : मेवाड़ का मैराथन किस युद्ध को कहा जाता है या राजस्थान का मेवाड़ का मैराथन किसे कहते हैं ?
उत्तर : दिवेर के युद्ध को मेवाड़ का मैराथन कहा जाता है | इसे राजस्थान का मेवाड़ मैराथन भी कहते है | यह संज्ञा कर्नल टॉड ने महाराणा प्रताप की शानदार सफलता को देखते हुए दी थी |
प्रश्न : दिवेर युद्ध का इतिहास ?
उत्तर : अमरकाव्य के अनुसार 1582 ईस्वी में राणा प्रताप ने मुगलों के विरुद्ध दिवेर (कुम्भलगढ़) पर जबरदस्त आक्रमण किया। यहाँ का सूबेदार अकबर का काका सेरिमा सुल्तान खां था जो अप्रत्याशित हमले में मारा गया। इस युद्ध में मेवाड़ की शानदार सफलता के कारण शेष जगह से मुग़ल सेनाएँ भाग खड़ी हुई। दिवेर विजय की ख्याति चारों तरफ फ़ैल गयी। इसके बाद प्रताप ने पीछे मुड़कर नहीं देखा तथा मेवाड़ को मुगलों से मुक्त करा लिया। मेवाड़ को राजपूताना में अभूतपूर्व प्रतिष्ठा मिली। कर्नल टॉड ने इस युद्ध को “प्रताप के गौरव का प्रतिक” माना तथा “माराथन” की संज्ञा दी।

 प्रश्न : राजस्थान में लौह संस्कृति के प्रमुख स्थल के कौन कौन से है ?

उत्तर : राजस्थान में लौह युगीन संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ सलेटी चित्रित मृदभाण्ड संस्कृति , साधारण आवास , लौह का भली प्रकार उपयोग , कृषि और पशुपालन है। रैढ (टोंक) नोह (भरतपुर) , जोधपुर (जयपुर) , विराटनगर (जयपुर) और सुनारी (झुन्झुनू) इसके प्रमुख स्थल है।

प्रश्न : रैढ ?

उत्तर : टोंक जिले में स्थित लौह युगीन संस्कृति के सबसे महत्वपूर्ण स्थल रैढ का उत्खनन एन.के. पुरी के नेतृत्व में हुआ। ईसा की प्रारम्भिक सदी के समय की लौह सामग्री का विशाल भण्डार मिलने से यह “राजस्थान का टाटा नगर” के नाम से प्रसिद्ध है।

प्रश्न : नगरी ?

उत्तर : प्राचीन माध्यमिका (चित्तोडगढ) का वर्णन महाभारत और पतंजली के महाभाष्य में आया है , जहाँ यवन शासक मिनेंडर ने अपना अधिकार स्थापित किया था जिसकी पुष्टि उसके सिक्कों से हो जाती है।

प्रश्न : बाह्यवर्त ?

उत्तर : ऋग्वेद में सरस्वती और दृषद्वती नदियों के मध्य स्थित स्थान को मनु को ब्रह्मवर्त प्रदेश बताया जहाँ ऋग्वेद के कुछ सूक्तों की रचना हुई। साथ यहाँ से हड़प्पाकालीन सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए है।

प्रश्न : शिवि जनपद ?

उत्तर : यह प्राचीन काल का राजस्थान में एक गणतांत्रिक राज्य था। जो वर्तमान में उदयपुर , चित्तोडगढ क्षेत्र (मध्यकालीन मेवाड़ राज्य) में स्थित था इसकी राजधानी मध्यमिका (नगरी) थी। यह मेव जाति के अधिकार में रहा। अत: “मेदापाट ” तथा “प्राग्वाट” भी कहलाया।

प्रश्न : जांगला प्रदेश किसे कहते है ?

उत्तर : महाभारत काल के आने से पूर्व मानव बस्तियाँ सरस्वती और दृषद्वती क्षेत्र से हटकर पूर्व और दक्षिण की तरफ खिसक आयी थी। उस काल में कुरु जांगला: (बीकानेर) और मद्र जांगला: (मरुकान्तर , मारवाड़) के नाम से पुकारे जाने वाले क्षेत्र आज बीकानेर और जोधपुर के नाम से जाने जाते है।

प्रश्न : राजस्थान के प्राचीन जनपद का इतिहास बताइए ?

उत्तर : राजस्थान के प्राचीन जनपद मत्स्य जनपद , शिवि जनपद , मालव जनपद , जांगल देश , शूरसेन प्रदेश , मरूप्रदेश , शाल्व जनपद , यौधेय आदि थे।

प्रश्न : मांडव्यपुर के बारे में जानकारी ?

उत्तर : यह मंडौर (जोधपुर) का प्राचीन नाम था जहाँ गुर्जर प्रतिहारों ने अपने प्रारंभिक शासन की स्थापना की। किवदंतियों के अनुसार रावण की पत्नी मंदोदरी माण्डव्यपुर की राजकुमारी थी।

प्रश्न : नागभट्ट प्रथम के बारे में इतिहास क्या है ?

उत्तर : यह 8 वीं सदी में उज्जैन में गुर्जर प्रतिहार वंश का एक प्रतापी शासक था जिसका दरबार ‘नागावलोक का दरबार’ कहलाता था। जिसमें तत्कालीन समय के सभी राजपूत वंश जैसे गुहिल , चौहान , परमार , राठौड़ , चालुक्य आदि उसके सामन्त की हैसियत से रहते थे।

प्रश्न : मेवाड़ का इतिहास ?

उत्तर : राजस्थान के दक्षिणांचल में स्थित प्राचीन शिवि जनपद मेदपाट , मेवाड़ नाम से प्रसिद्ध हुआ। यहाँ बापा रावल द्वारा छठी सदी में स्थापित राजवंश विश्व के प्राचीनतम राजवंशों में से एक है। यहाँ की बोली मेवाड़ी है और चित्रकला मेवाड़ शैली की है।

प्रश्न : गुहिल वंश की जानकारी दीजिये ?

उत्तर : बल्लभी के शासक शिलादित्य और रानी पुष्पावती के पुत्र गुहदत्त (गौह) ने 566 ईस्वी ने जिस राजवंश की स्थापना की वह गुहिल वंश कहलाया। इसकी 24 शाखाएँ निकली जिनमें मेदपाट (मेवाड़) के गुहिल बड़े प्रसिद्ध हुए।

प्रश्न : बापा रावल किसे कहते है ?

उत्तर : हारित ऋषि की अनुकम्पा से गुहिल वंशीय बापा रावल ने मेवाड़ में रावल वंश की स्थापना कर चितौड़ को राजधानी बनाया। बापा ने अपने कुल के इष्टदेव एकलिंगजी की स्थापना की।

प्रश्न : रावल रतनसिंह की जानकारी लिखिए। 

उत्तर : मेवाड़ के रावल रतन सिंह की परम सुन्दरी पत्नी पद्मिनी को प्राप्त करने के लिए दिल्ली के सुल्तान अल्लाउद्दीन खिलजी ने 1303 ईस्वी में चित्तोड़ अभियान किया। जिसमें राजपूतों ने केसरिया धारण किया और पद्मिनी ने जौहर कर इतिहास प्रसिद्ध शाका किया।

प्रश्न : गौरा बादल कौन थे ?

उत्तर : रानी पद्मिनी के चाचा तथा भाई जिन्होंने दिल्ली सुल्तान अल्लाउद्दीन खिलजी के 1303 ईस्वी में मेवाड़ आक्रमण के समय अतुल्य साहस और शौर्य का परिचय दिया तथा शहीद हुए।

प्रश्न : चाम्पानेर समझौता से आप क्या समझते है ?

उत्तर : महाराणा कुम्भा के विरुद्ध मालवा और गुजरात के सुल्तानों का 1456 ईस्वी में चांपानेर एक संयुक्त समझौता था। समझौते के अनुसार दोनों की संयुक्त सेना मेवाड़ विजय कर मेवाड़ को आपस में बाँट लेंगे परन्तु कुम्भा ने उन्हें विफल कर दिया।

प्रश्न : कर्मावती कौन थी ?

उत्तर : राणा सांगा की विधवा हाड़ी रानी और अपने अल्पवयस्क पुत्र विक्रमादित्य की संरक्षिका ने गुजरात के सुल्तान बहादुरशाह के चित्तोड़ आक्रमण के समय राखी भेज कर हुमायूँ से सहायता मांगी। अपेक्षित सहायता न मिलने पर रानी ने जौहर व्रत किया।

प्रश्न : पन्नाधाय के बारे में बताइए ?

उत्तर : त्याग , बलिदान और स्वामीभक्ति की अद्वितीय मूर्ति पन्नाधाय ने बनवीर के हाथों अपने पुत्र चन्दन का बलिदान कर अपने स्वामी उदयसिंह की रक्षा की। वर्तमान में देश की स्वामीभक्ति और त्याग के लिए पन्नाधाय पुरस्कार दिया जाता है।