कलम तोड़ना मुहावरे का अर्थ है या कलम तोड़ना मुहावरे का वाक्य kalam todna meaning in hindi

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kalam todna meaning in hindi कलम तोड़ना मुहावरे का अर्थ है या कलम तोड़ना मुहावरे का वाक्य क्या है बताइये ?

158. कलम तोडना (लिखने मे कमाल करना )- बिहारी ने इतने अच्छे दोहे लिखकर तो कमर ही तोड़ डाली।
159. जान पर खेलना (जोखिम उठाना)- भारत की स्वतंत्रता के लिए सुभाषचंद्र बोस और भगतसिंह जैसे वीर जान पर खेल गए।
160. आकाश-पाताल का अंतर (बहुत अधिक अंतर) कर्ण और दुर्योधन में आकाश पाताल का अंतर होने के बावजूद भी गहरी मित्रता थी।
161. आँखे फेरना (परवाह न करना )- काम निकलते ही उसने आँखे फेर ली।
162. झक मारना (व्यर्थ समय खोना)- घर में निठल्ले बैठकर झक मारने से कुछ न बनेगा, जाकर काम ढूँढो।
163. टस से मस न होना (तनिक भी प्रभावित न होना)- कूर व्यक्ति करुण से करुण परिस्थितियों में भी टस से मस नहीं होता।
164. लेने के देने पड़ना (लाभ के बदले हानि उठाना) नई-नई दुकान है, सोच-समझकर कदम उठाओ, कहीं ऐसा न हो कि लेने के देने पड़ जाएँ।
165. लोहे के चने चबाना (बहुत ही कठिन कार्य करना) संस्कृत पढ़ना कोई आसान काम नहीं है, लोहे के चने चबाना है।
166 .शौक फरमाना (उपयोग करना)- जो लोग खुले स्थानों पर सिगरे का शौक फरमाते हैं, अब उनकी खैर नहीं।
167. टेढ़ी-खीर (कठिन काम)- एम.ए. प्रथम श्रेणी से पासकरना आसान काम नहीं है कठिन काम है, बड़ी टेढ़ी खीर है।
168. हाथ पाँव फूलना( भयभीत होना, घबरा जाना)- घर में चोरों को घुसते देख उसके हाथ पाँव फूल गए।
169. हाथ धो बैठना (खो देना)- सोच समझकर काम करो, नहीं तो किसी दिन नौकरी से हाथ धो बेठोगे।
170. ठिकाने आना (ठीक स्थान पर आना)- जब तक उस पर एक दो बार जुर्माना नहीं किया जाएगा, उसका दिमाग ठिकाने नहीं आएगा।
171. काँटे बिछाना (बाधा डालना)- विरोधी लोग मार्ग में चाहें कितने ही काँटे बिछाएँ पर सच्चे कर्मवीर अपने लक्ष्य को नहीं भूलते।
172. कफन बाँधकर चलना (मौत से न घबराना)- आजादी के परवाने सिर पर कफन बाँधकर चलते हैं।
173. ठोकरें खाना (भूल के कारण काष्ट उठाना)- यदि मन लगाकर पढ़े होते तो यूँ ठाकरें नहीं खानी पड़ती।
174. डूब जाना (मारा जाना, फँस जाना)- सीता हरण के पश्चात् राम प्रायः उनकी स्मृति में डूब जाते थे।
175. पाँव जमीन पर न पड़ना (बहुत खुश होना)- अपने नाम लाटरी खुलने की खबर सुनकर खुशी के मारे उसके पाँव जमीन पर ही नहीं टिकते थे।
176. बीड़ा उठाना ( उत्तरदायित्व लेना)- अर्जुन के वहाँ उपस्थित न होने पर वीर अभिमन्यु ने ही चक्रव्यूह तोड़ने का बीड़ा उठाया था।
177. बाजी मारना (आगे निकल जाना)- अतुल ने तो इस वर्ष प्रथम आकर बाजी मार ली।
178. तूती बोलना (बहुत प्रभाव होना)- किसी समय जर्मनी में हिटलर की तूती बोलती थी।
179. भंडा फोड़ना ( भेद खोलना)- उसे अपने मन की बात मत बताओ, नहीं तो वह सब बातों का भंडा फोड़ कर किए कराए पर पानी फेर देगा।
180. खाक छानना (मारे-मारे फिरना)- यदि तुमने यह नौकरी छोड़ दी तो याद रखो फिर जीवन भर खाक छाननी पड़ेगी।
181. अंग-अंग ढीला होना (बहुत थक जाना)- कड़ी मेहनत करने से किसान का अंग-अंग ढीला हो जाता है।
182. भीगी बिल्ली बनना ( भयभीत होकर रहना)- विजय आगे-पीछे तो अपनी माँ को बहुत तंग करता है किंतु पिताजी के आते ही भीगी बिल्ली बन जाता है।
183. थूककर चाटना (वचन से फिर जाना)- रामदास ने कहा, ‘‘नवंबर तक मैं तुम्हारी एक-एक पाई चुका दूंगा। मैं थूककर चाटना नहीं जानता।’’
184. नमक-मिर्च लगाना (तनिक सी बात को बढ़ा-चढ़कार कहना)- पाकिस्तानी अखबार तो प्रत्येक खबर को नमक-मिर्च लगाकर छापते हैं।
185. खून का चूंट पीकर रह जाना (गुस्सा सहन कर लेना)- पुलिस के द्वारा अपमानित होने पर राघव खून का चूंट पीकर रह गया।
186. फूंक से पहाड़ उड़ाना (असंभव कार्य करने की चेष्ट करना)- इतना भार उठाना तुम्हारे बस की बात नहीं, फूंक से पहाड़ उड़ाने की चेष्टा मत करो।
187. कोल्हू का बैल (दिन-रात काम में जूटे रहना)- दिन भर कोल्हू के बैल की तरह मेहनत करता हूँ फिर भी भरपेट खाना नहीं मिलता।
188. कलेजा ठंडा होना (संतोष होना)- जिस दिन में उससे अपनी बेइज्जती का बदला ले लूँगा, उसी दिन मेरा कलेजा ठंडा होगा।
189. दर-दर भटकना (जगह-जगह फिरना)- खेद है कि आज बी.ए., एम.ए. नौकरी के लिए दर-दर भटकते हैं।
190. हथेली पर सरसों जमाना (थोडे समय में कठिन कार्य करने का प्रयास)- अरे, अभी तो तुमने व्यापार करना शुरू किया है और अभी से कार खरीदने के सपने देख रहे हो।