जूल का तापन नियम , joule’s law of heating class 10 in hindi , विद्युत बल्ब , विद्युत इस्तरी , विद्युत हीटर 

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किसी भी विधुत उर्जा का उपयोग किसी उपकरण में सीधे तौर पर नहीं किया जा सकता है, बल्कि विधुत उर्जा को यांत्रिकी उर्जा या प्रकाश उर्जा या उष्मा उर्जा में परिवर्तित किया जाता है उसके बाद ही विधुत उर्जा का उपयोग किया जाता है।

विधुत उर्जा का उष्मा उर्जा में परिवर्तन ही विधुत का तापीय प्रभाव कहलाता है।

या

विद्युत उर्जा के किसी प्रतिरोध में प्रवाहित होने से उसका क्षय होता है इसी क्षय के कारण ताप उर्जा का उत्पन्न होना विधुत का तापीय प्रभाव कहलाता है।

जूल का तापन नियम 

माना कि विद्युत धारा I किसी प्रतिरोधक R से प्रवाहित कि जाती है।

माना कि प्रतिरोधक के दोनों सिरों के बीच विभवांतर = V

माना कि किसी समय t के लिए विद्युत आवेश Q प्रतिरोधक R से प्रवाहित होता है।

अत: विद्युत आवेश Q का विभवांतर V से प्रवाहित होने में किया जाने वाला कार्य =VQ

अत: श्रोत को t समय में VQ उर्जा की आपूर्ति करना आवश्यक है।

अत: श्रोत द्वारा परिपथ में निवेशित शक्ति P= W/t

P = VQ/t

P = VI ( I=Q/t)

श्रोत द्वारा t समय में उर्जा की आपूर्ति की जाती है।

`P*t = VI*t

किसी विद्युत धारा I द्वारा t समय में उत्पन्न उष्मा H की मात्रा = VIt

H = VIt —-(1)

ओम के नियम के अनुसार V=IR

अत: समीकरण (1) में V=IR रखने पर

H=IR×It

H = I2Rt —–(2)

जहाँ, H = उत्पन्न उष्मा

I =विद्युत धारा

R= प्रतिरोधक का प्रतिरोध

तथा t= समय

ब्यंजक (ii) को जूल का तापन नियम कहते हैं।

जूल के तापन नियम के अनुसार किसी प्रतिरोधक के प्रतिरोध में उत्पन्न होने वाली उष्मा 

1. प्रतिरोधक में प्रवाहित होने वाली विधुत धारा के वर्ग के समानुपाती

2. दी गयी विधुत धारा के प्रतिरोध के समानुपाती तथा

3. जितने समय के लिए दिए गए प्रतिरोध से विधुत धारा प्रवाहित होती है के समानुपाती होता है।

व्यहारिक परिस्थितियों में विद्युत धारा का तापीय प्रभाव 

जब किसी विधुत परिपथ में विधुत धारा का प्रवाह किया है तो विधुत धारा का कुछ भाग ताप को उत्पन्न करने में खर्च होता है। किसी चालक में उसके प्रतिरोध के कारण उसमे प्रवाहित विधुत धारा के कारण ताप उत्पन्न होता है। इस उत्पन्न होने वाले ताप का उपयोग बहुत सारे कार्यों में किया जाता है जो की कुछ इस प्रकार से है

विद्युत बल्ब 

बल्ब में एक विशेष परके का चालक लगा होता है जिसे तंतु कहते हैं । इसी तंतु से होकर विधुत धारा को गुजारा जाता है। बल्ब में लगे तंतु का प्रतिरोध बहुत अधिक होता है जिसके कारण वह विधुत धारा को उष्मा या ताप में परिवर्तित कर देता है। इस उष्मा के कारण ब्लबी में लगा तंतु गर्म होने लगता है। बल्ब में अक्रिय गैस प्राय: आर्गन या नाइट्रोजन को भरा जाता है जो कि तंतु को जलने से बचाता है। बहुत अधिक गर्म होने पर इसमें लगा फिलामेंट लाल गर्म हो जाने के बाद तंतु प्रकाश उत्पन्न करता है।

बल्ब का फिलामेंट धातु का बना होता है जिसका गलनांका काफी उच्च होता है। बल्ब के फिलामेंट को बनाने के लिए टंगस्टन का उपयोग किया जाता है जिसका गलनांक लगभग 33800 C के करीब होता है जो की बहुत अधिक है।

विद्युत इस्तरी 

विद्युत इस्तरी में धातु का एक रॉड या कॉयल लगा होता है जिसमे से विधुत धारा को गुजारा जाता है। विद्युत इस्तरी में लगा धातु का एक रॉड जिसका गलनांक काफी उच्च होता है तथा इसे एलीमेंट भी कहा जाता है। जब विधुत धारा को इस एलीमेंट से गुजारा जात्ता है तो यह गर्म होकर उष्मा उत्पन्न करता है जो की विद्युत इस्तरी में लगे धातु के प्लेट को गर्म कर देता है और इसका उपयोग कपड़ों से सिल्वट हटाने में आता है।

विद्युत हीटर 

विद्युत हीटर में धातु का एक रॉड या कॉयल लगा होता है जिसमे से विधुत धारा को गुजारा जाता है जो की विद्युत इस्तरी के समान ही होता है। विद्युत हीटर में लगा धातु का एक रॉड जिसका गलनांक काफी उच्च होता है तथा इसे एलीमेंट भी कहा जाता है। जब हीटर के कॉयल या फिलामेंट से विद्युत धारा को प्रवाहित किया जाता है तो यह गर्म होकर उष्मा देता है। विद्युत हीटर का उपयोग ठंडे मौसम में ठंढ़ से राहत पाने के लिये किया जाता है।

विद्युत इस्तरी, विद्युत हीटर, विद्युत वाटर हीटर आदि के एलीमेंट को बनाने में निक्रोम का उपयोग किया जाता है जो निकेल तथा क्रोमियम का एक मिश्रातु है।

विद्युत फ्यूज 

विद्युत फ्यूज एक उपकरण है जिसका उपयोग सुरक्षा में किया जाता है। हमारे घरो कभी कभी उच्च विद्युत धारा प्रवाहित होती है उस उच्च विद्युत धारा से उपकरण को बचाने के लिए विद्युत फ्यूज का उपयोग होता है।

फ्यूज किसी ऐसे धातु अथवा मिश्रातु के तार के टुकडे से बना होता है जिसका गलनांक उचित हो जैसे की ऐल्युमिनियम, कॉपर, आयरन, लेड आदि। विधुत फ्यूज को युक्ति के साथ हमेशा श्रेणीक्रम में संयोजित किया जाता है। यदि किसी परिपथ में एक निर्दिष्ट मान से अधिक विधुत धारा प्रवाहित होती है तो फ्यूज के तार के ताप में बृद्धि होती है तथा फ्यूज का तार पिघल जाता है और परिपथ टूट जाता है जिसके कारण परिपथ में संयोजित उपकरण जलने तथा खराब होने से सुरक्षित रहता है।

फ्यूज तार को प्राय: धातु के सिरे वाले पोर्सेलेन अथवा इसी प्रकार के विद्युतरोधी पदार्थ के कार्ट्रिज में रखा जाता है तथा फ्यूज को हमेशा युक्ति के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया जाता है। घरेलू परिपथ में उपयोग होने वाले फ्यूज की अधिक से अधिक विद्युत धारा की मात्रा 1 A, 2 A, 3 A, 5 A, और 10 A, आदि होती है इससे अधिक विधुत धारा होने पर फ्यूज कार्य करने लगता है।

उदाहरण: एक विद्युत इस्तरी जो की 1kW की विद्युत शक्ति उस समय उपयोग करती है, जब उसे 220V पर कार्य कराते हैं। इस विद्युत इस्तरी के परिपथ में 1000W/220V=4.54A की विद्युत धारा प्रवाहित होनी चाहिए। अत: इस स्थिति में 5A का फ्यूज उपयोग में लिया जा सकता है।