क्रोमोजोन , किट प्रतिकृषि या विकर्षक (insect repellent) , फिरोमोन (pheromones) या लैंगिक आकर्षी 

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प्रश्न : क्रोमोजोन किसे कहते है ?

उत्तर : क्रोमोफोर युक्त कार्बनिक यौगिक क्रोमोजोन कहलाते है , यह यौगिक को रंगीन बना देते है।

किट प्रतिकृषि या विकर्षक (insect repellent) : वे रासायनिक पदार्थ जिनका उपयोग कीटो को अपनी इच्छित स्थान से भगाने , हटाने या मारने के लिए प्रयुक्त किये जाते है कीट प्रतिकृषि कहलाते है।

यह कीटो के श्वसन तंत्र को प्रभावित करते है।

यह निम्न प्रकार के होते है –

a. ठोस प्रतिकृषि

b. द्रव प्रतिकृषि

c. गैस प्रतिकृषि

a. ठोस प्रतिकृषि : यह प्रतिकृषि ठोस अवस्था में पाए जाते है।

उदाहरण : DDT , gammexane आदि।

b. द्रव प्रतिकृषि : यह प्रतिकृषि द्रव अवस्था में पाए जाते है।

उदाहरण : फिनिट , बेगान , एंडोफिनाल , फिनाइल , फेनोकोल आदि।

c. गैस प्रतिकृषि : इन्हें धुएँ के रूप में या गैस अवस्था में प्रयुक्त किया जाता है।

उदाहरण : नीम की पत्तियों को जलाकर , तम्बाकू की पत्तियों को जलाकर , सल्फर को जलाकर।

कुछ प्राकृतिक हर्बल का उपयोग भी किट प्रतिकृषि में किया जाता है।

उदाहरण : नेफ़थलीन बॉल्स , ओडोनिल , ओडोमास।

नोट : सब्जियों की फसलो में कीटो से बचाने के लिए भी इन रसायन का उपयोग कर बन्ध्यता के रूप में कर कीटो को पकड़ा जाता है।

फिरोमोन (pheromones) या लैंगिक आकर्षी

वे रासायनिक पदार्थ जो एक जन्तु द्वारा स्त्रावित होते है व दुसरे विपरीत लिंगी जन्तुओ के व्यवहार को परिवर्तित करते है , फिरोमोन या लैंगिक आकर्षी कहलाते है।

यह फेरोमोन मुख्यतः मादाओ द्वारा स्त्रावित होते है , नर को आकर्षित करने के लिए।

यह फिरोमोन मादाओ द्वारा प्रजनन काल में स्त्रावित किये जाते है।

फिरोमोन या फेरोमोन का वर्गीकरण (classification of pheromones)

इन्हें निम्न भागो में बांटा गया है –

  • लैंगिक फिरोमोन
  • अनुगामी फिरोमोन
  • संकेतक फिरोमोन
  • सुरक्षा फिरोमोन

उदाहरण : नर हिरण के नाभिक से मास्कोन फिरोमोन का स्त्रावण होता है जो मादा हिरण को अपनी ओर आकर्षित करता है।

उदाहरण 2 : मादा चीते और मादा बिल्लियों द्वारा स्त्रावित फिरोमोन सिवेटोन होता है जो नर को अपनी ओर ओर आकर्षित करता है।

उदाहरण 3 : चीटियों द्वारा स्त्रावित अनोगामी फिरोमोन होता है।

उदाहरण 4 : क्रीमोमेंलिड श्रृंग लाखा का सुरक्षा हार्मोन।

नोट : विपरीत लिंगी कीटो को बंध्याकरण द्वारा फसलो की सुरक्षा की की जाती है।

रॉकेट प्रणोदक (rocket propellant)

वे रासायनिक पदार्थ जो राकेट को ऊर्जा व शक्ति प्रदान करते है , रॉकेट प्रणोदक कहलाते है।

यह राकेट के नोजल को अग्र दिशा में गतिमान करते है।

रॉकेट प्रणोदक के गुण

  1. राकेट प्रणोदक ठोस या द्रव अवस्था में पाए जाते है।
  2. राकेट प्रणोदक ईंधन व ऑक्सीकारक का मिश्रण प्रयुक्त किया जाता है।
  3. राकेट प्रणोदक में ईंधन व ऑक्सीकारक तीव्र गति के साथ मिश्रणीय होते है।
  4. राकेट प्रणोदक तीव्र गति के साथ क्रिया करता है।
  5. राकेट प्रणोदक में अशुद्धियाँ या राख कम मात्रा में प्राप्त होने चाहिए।

राकेट प्रणोदक के प्रकार या वर्गीकरण

अ. ठोस रॉकेट प्रणोदक

ब. द्रव रॉकेट प्रणोदक

स. मिश्रित रॉकेट प्रणोदक

अ. ठोस रॉकेट प्रणोदक : इसमें इंधन व ऑक्सीकारक दोनों ठोस अवस्था में पाए जाते है।

इन्हें निम्न भागो में बांटा गया है –

  • संयुक्त प्रणोदक
  • द्वि-क्षारीय प्रणोदक

संयुक्त प्रणोदक : इंधन – polybutadiene (PB) या polyurethane (PU)\

ओक्सिकारक – ammonium perchlorate

द्वि-क्षारीय प्रणोदक : ईंधन – नाइट्रो ग्लिसरीन

ऑक्सीकारक – नाइट्रो सेल्यूलोस

ब. द्रव रॉकेट प्रणोदक : इसमें ईंधन या ऑक्सीकारक दोनों द्रव अवस्था में पाए जाते है।

इन्हें निम्न भागो में बांटा गया है –

  • एकल प्रणोदक
  • द्वि प्रणोदक

एकल प्रणोदक : इसमें इंधन व ऑक्सीकारक दोनों का कार्य एक ही पदार्थ करते है इसलिए इसे एकल प्रणोदक कहते है।

उदाहरण : हाइड्रोजिन , नाइट्रो मेथेन , हाइड्रोजन पेरोक्साइड

द्वि प्रणोदक : ईंधन – केरोसिन , एल्कोहल

ऑक्सीकारक – O2 , N2O4 , HNO3

स. मिश्रित रॉकेट प्रणोदक : इसमें ईंधन ठोस अवस्था में पाया जाता है .

इसमें ऑक्सीकारक द्रव अवस्था में पाया जाता है .

उदाहरण : इंधन – ऐक्रेलिक रब्बर (ठोस) , N2O4 (द्रव)

प्रणोदक के उपयोग

  1. अमेरिका के सेटर्न राकेट में निम्न प्रणोदक को प्रयुक्त किया गया – केरोसिन + ऑक्सीजन
  2. रूस के प्रोटोन राकेट में निम्न प्रणोदक प्रयुक्त किया गया – केरोसिन + ऑक्सीजन
  3. भारत के SLV व ASLV में निम्न प्रणोदक प्रयुक्त किया गया – ठोस प्रणोदक
  4. भारत के PSLV में निम्न प्रणोदक काम में लिए गए – hydroxyl terminated polybutadiene , N2O4 , mono methyl hydrazine

अग्रगत पदार्थ या उन्नत पदार्थ

i. कार्बन तन्तु : कार्बन युक्त वलय संरचनाओ के बने लम्बी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला के यौगिक कार्बन तंतु कहलाते है।
यह स्टील से अधिक मजबूत होते है।
यह टाइटेनिय से अधिक शख्त होते है।
यह एल्युमिनियम से अधिक हल्के होते है।
यह कम घनत्व वाले होते है।
इनका यांत्रिक सामर्थ्य अधिक होता है।
इन्हें निम्न भागो में बांटा गया है –
  1. Carbon fiber reinforced polymer (CFRP)
  2. Carbon fibre reinforced carbon (CFRC)
कार्बन तंतुओ के उपयोग 
  • टेनिस के रैकेट बनाने में।
  • बैडमिंटन के रैकेट बनाने में।
  • रेसिंग साइकिल की फ्रेम बनाने में।
  • रेसिंग कार मोटर की बॉडी बनाने में।
  • अन्तरिक्ष यान के उपकरण बनाने में।
  • अग्नि मिशाइल का सिर भाग बनाने में।