औद्योगिक उत्पादन सूचकांक क्या है Index of industrial production in hindi किसके द्वारा प्रकाशित

By   December 22, 2020

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औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक
यह औद्योगिक उत्पादन के संबंध में आँकड़ों का महत्त्वपूर्ण सरकारी स्रोत है। यह केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित किया जाता है। औद्योगिक उत्पादन के सूचकांकों का आकलन विभिन्न औद्योगिक इकाइयों से प्राप्त आँकड़ों के आधार पर किया जाता है। विनिर्दिष्ट मदों के उत्पादक औद्योगिक इकाइयों को अपने मासिक उत्पादन के संबंध में एक प्रतिवेदन, केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन को प्रस्तुत करना पड़ता है। वर्ष 1980-81 को आधार मानते हुए इस सूचकांक में कुल 290 विनिर्माण मद शामिल है। यह औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आई आई पी) तीन कार्यकलापों, खनन और पत्थर तोड़ने, विनिर्माण और विद्युत में सम्मिलित विभिन्न मदों के उत्पादन की वास्तविक मात्रा पर आधारित है। जैसा कि आप जानते होंगे कि सूचकांक के लिए एक आधार वर्ष की आवश्यकता होती है। सूचकांक संख्या कतिपय परिवर्ती कारकों के परिमाण/महत्त्व में परिवर्तन का संक्षिप्त माप है। यहाँ हम पिछले वर्ष की तुलना में औद्योगिक वस्तुओं के उत्पादन में परिवर्तन के बारे में जानना चाहते हैं। तथापि, औद्योगिक वस्तुएँ सजातीय न होकर विभिन्न प्रकार की होती हैं। औद्योगिक उत्पादनों की सूचकांक संख्या तैयार कर हम पिछले वर्ष की तुलना में वस्तुओं के संग्रह की मात्रा में परिवर्तन का सार निकालते हैं। औद्योगिक उत्पादनों का सूचकांक औद्योगिक वस्तुओं के समूह के उत्पादन की औसत प्रवृत्ति को स्पष्ट करते हैं । वस्तुओं का समूह ऐसा होना चाहिए जिससे कि देश के कुल औद्योगिक उत्पादन का विस्तृत चित्र उभरे। जिसे औद्योगिक वस्तुओं के समूह में सम्मिलित मदों की संख्या को बढ़ाकर किया जा सकता है। उदाहरण के लिए विनिर्माण क्षेत्रक में 1951 में मात्र 85 मद सम्मिलित थे किंतु ये बढ़कर 1956 में 198, 1960 में 278 और 1980-81 में 290 हो गए। पुनः आई आई पी वस्तुओं के उस समूह में परिवर्तनों का भारित औसत है। यह भार सम्पूर्ण विनिर्माण में योजित मूल्य में प्रत्येक वस्तु का हिस्सा है। इसकी गणना आसानी से ए एस आई आँकड़ों (पिछले भाग में देखिए) का उपयोग करके हो जाती है। प्रत्येक औद्योगिक वस्तु के भार (या यों कहें कि कुल उत्पादन में उसका हिस्सा) में साल-दर साल परिवर्तन हो रहा है। औद्योगिक उत्पादन के सूचकांक के आधार वर्ष में समय बीतने के साथ परिवर्तन हुए हैं। निम्न तालिका 3.2 में हम अलग-अलग समूहों की वस्तुओं के भार की तुलना कर सकते हैं। हम यह देख सकते हैं कि वर्ष 1980 की तुलना में ‘‘पूँजीगत माल‘‘ क्षेत्र के भार का महत्त्व कम हुआ है।

तालिका 3.2: औद्योगिक उत्पाद सूचकांक में विभिन्न औद्योगिक समूहों के भार
उद्योग/वर्ष 1970 1980-81 1993-34
आधारभूत वस्तुएँ
पूँजीगत वस्तुएँ
अर्धनिर्मित वस्तुएँ
उपभोक्ता वस्तुएँ
टिकाऊ वस्तुएँ
गैर टिकाऊ वस्तुएँ
योग 32.28
15.25
20.95
31.52
3.41
28.11
100.00 39.42
16.43
20.5
23.65
2.55
21.10
100.00 35.51
9.68
26.44
28.36
5.11
23.25
100.00

स्रोत: भारतीय रिजर्व बैंक, समाचार दिसम्बर 1998 और संदेशसार 1992

प्रत्येक बजट से पहले भारत सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण औद्योगिक उत्पादन के सूचकांक पर आधारित औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर को प्रस्तुत करता है। नवीनतम आर्थिक सर्वेक्षण से एक नमूना नीचे तालिका 3.3 दिया गया है। इस आँकड़े से हम वर्ष 1993-94 की तुलना में 1994-95 में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर की गणना कर सकते हैं जो 9.1 प्रतिशत बैठता है।

तालिका 3.3: औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक (आधार वर्ष:1993-94 =100)
1994-95 1995-96 1997-98 1998-99
109.1 123.3 139.5 145.2

बोध प्रश्न 4
1) औद्योगिक उत्पादन के सूचकांक की परिभाषा कीजिए?
2) आप औद्योगिक उत्पाद सूचकांक द्वारा प्रदत्त सूचनाओं का उपयोग किस तरह से करेंगे?
3) आई. आई. पी. पर आधारित आँकड़े देने वाले प्रकाशन का नाम बताइए?

उपयोग आधारित और आदान आधारित वर्गीकरण
आपको उपर्युक्त तालिका 3.2 में दिए गए वर्गीकरणों की संरचना पर आश्चर्य हो रहा होगा। एक ही प्रकार के उद्योग समूह के लिए दो प्रकार के वर्गीकरण का उपयोग किया जा सकता है। उन्हें उपयोगिता आधारित और आदान-आधारित वर्गीकरण कहा जाता है।

उपयोग आधारित वर्गीकरण इस सिद्धान्त पर आधारित है कि उद्योगों का वर्गीकरण उत्पादन के अंतिम उपयोग के अनुसार किया जाता है। किसी भी कार्यकलाप के लिए लोहा और इस्पात बुनियादी वस्तुएँ हैं। उन्हें बुनियादी वस्तुएँ कहा जाता है । पूँजीगत वस्तुएँ वे उत्पाद हैं जो वास्तविक परिसम्पति के अंग हैं तथा उत्पादन कार्यकलाप के लिए महत्त्वपूर्ण हैं, उदाहरण के लिए ट्रैक्टर, बॉयलर, और अन्य विद्युतीय तथा गैर विद्युतीय मशीनें अर्द्धनिर्मित वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं जिनका उपयोग आदान के रूप में होता है अथवा जिनका और आगे प्रसंस्करण किया जाता है जैसे सूती वस्त्र तथा मानव निर्मित रेशे और बोल्ट, नट, स्टोरेज बैटरी जैसे उत्पाद जिनका अंतिम उपयोग, उपयोग हेतु वस्तु तैयार करने के लिए आदान के रूप में किया जाता है। उपभोक्ता वस्तुओं का पुनः टिकाऊ और गैर-टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं में विभाजन किया जाता है। उपभोक्ताओं द्वारा सीधे उपयोग में लाए जाने वाले उत्पाद और जो 3 या 4 वर्षों से अधिक टिकाऊ होते हैं, जैसे रेफ्रीजरेटर और कार को टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएँ कहते हैं। गैर-टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएँ वे उत्पाद हैं जिनका उपयोग उपभोक्ता करते हैं और जो 2 वर्ष से अधिक नहीं टिकता है। उदाहरण के लिए परिधान और जूते-चप्पल ।

एक नमूना सूची निम्नलिखित है।

क) मूल वस्तुएँ
कोयला
उर्वरक
हैवी ऑर्गेनिक केमिकल्स (भारी कार्बनिक रसायन)
हैवी इनऑर्गेनिक केमिकल्स (भारी अकार्बनिक रसायन)
सीमेंट
लोहा और इस्पात
एल्यूमिनियम

ख) पूँजीगत वस्तुएँ
हैंड टूल्स और स्मॉल टूल्स (हाथ के और छोटे औजार)
यांत्रिक औजार
ट्रैक्टर
हैवी इलैक्ट्रिकल इक्विपमेंट (भारी विद्युतीय उपकरण)
इलैक्ट्रिकल मोटर्स
डीजल इंजन

ग) अर्द्धनिर्मित वस्तुएँ
कॉटन स्पिनिंग
जूट के वस्त्र
मानव निर्मित रेशे
बोल्ट, नट, स्कू
ड्राइसेल और बैटरी
रंजक द्रव्य (डाइस्टफ)

घ) टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएँ
विद्युत चालित पंखे
मोटर साइकिल और स्कूटर
साइकिल
रेफ्रीजरेटर
एयरकंडीशनर
ड़द्ध गैर टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएँ
खाद्य और पेय पदार्थ (फूड और बीवरेज)
तम्बाकू उत्पाद
कागज और कागज के उत्पाद
जूते चप्पल
औषधियाँ और दवाइयाँ
साबुन और कॉस्मेटिक

दूसरे प्रकार का वर्गीकरण कच्चे माल के स्रोत पर आधारित हैं, उदाहरण के लिए क्या उत्पाद के विनिर्माण में कृषिगत कच्चेमालों अथवा धातुओं का उपयोग हुआ है।

एक नमूना सूची निम्नवत् है:

1) कृषि आधारित उद्योग
खाद्य और पेय पदार्थ (फूड और बीवरेज)
तम्बाकू
चर्म उत्पाद
वस्त्र
काष्ठ उत्पाद
रबड़ उत्पाद
खाद्य तेल
2) धातु आधारित उद्योग
धातु उत्पाद
विद्युत मशीनें
परिवहन संबंधी उपकरण
3) रसायन आधारित उद्योग
रसायन और रसायन उत्पाद
पेट्रोलियम तेलशोधन उत्पाद
स्टोरेज बैटरी और सेल

बोध प्रश्न 5
1) (क) मूल वस्तुओं (ख) पूँजीगत वस्तुओं (ग) अर्धनिर्मित वस्तुओं (घ) उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं और (ङ) उपभोक्ता गैर टिकाऊ वस्तुओं से संबंधित उद्योगों के दो उदाहरण दीजिए।
2) आदान-आधारित और उपयोग-आधारित औद्योगिक वर्गीकरण के बीच विभेद कीजिए?

सारांश
इस इकाई में औद्योगिक सांख्यिकी के महत्त्व और स्रोतों पर प्रकाश डाला गया है। अर्थव्यवस्था में उत्पादित औद्योगिक वस्तुओं और सेवाओं के संबंध में आँकड़ों को प्रणालीबद्ध तरीके से व्यवस्थित किया गया है। इससे हमें आँकड़ों को उपयोगी जानकारी का रूप देने में मदद मिलती है। राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण में समान विशेषताओं के आधार पर और एकीकरण के विभिन्न स्तरों पर आर्थिक इकाइयों का समूह बनाया गया है । औद्योगिक फैक्टरियों का वार्षिक सर्वेक्षण और औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक औद्योगिक सांख्यिकी का महत्त्वपूर्ण स्रोत है। कंपनी वित्त और अन्तरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित आँकड़ों के लिए आर. बी. आई. बुलेटिन तथा आर्थिक सर्वेक्षण दो महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं।

शब्दावली
औद्योगिक वर्गीकरण ः उद्योगों का समूहीकरण ।
उद्योगों का वार्षिक सर्वेक्षण ः ःकेन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन (सी एस ओ) द्वारा फैक्टरियों का प्रत्येक वर्ष किया गया सर्वेक्षण।
औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक ः एक वर्ष में उत्पादित औद्योगिक वस्तुओं का माप ।
प्रतिष्ठान (संस्थापना) ः एक ही स्थान पर आर्थिक इकाई

कुछ उपयोगी पुस्तकें एवं संदर्भ
आर्थिक सर्वेक्षण 2000-2001, भारत सरकार, वित्त मंत्रालय, नई दिल्ली
आई.जे. अहलूवालिया, (1985). इण्डस्ट्रियल ग्रोथ इन इंडिया: स्टैगनेशन सिन्स दि मिड सिक्सटीज, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, दिल्ली
हैण्डबुक ऑफ इंडियन इकनॉमिक स्टैटिस्टिक्स, (2000). रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, मुम्बई