हेनरी का नियम क्या है सूत्र तथा अनुप्रयोग What is the Henry law and applications in hindi

हेनरी नियम (Henry law) किसी गैस का वाष्प अवस्था में आंशिक दाब (P) , विलयन में उपस्थित उस गैस के मोल अंश (C ) के समानुपाती होता है।

अर्थात

हेनरी नियतांक का मान ताप तथा गैस की प्रकृति पर निर्भर करता है।

नोट : अक्रिय गैसों के लिए हेनरी नियतांक का मान अधिक होता है अतः अक्रिय गैस कम घुलती है।

नोट : ताप बढ़ाने से हेनरी नियतांक बढ़ता है , k का मान बढ़ने से गैसों की द्रव में विलेयता कम हो जाती है।  अतः जलीय जन्तु गर्म जल की तुलना में ठन्डे जल में अधिक सुविधा जनक स्थिति में रहते है , क्यूँकि ठन्डे जल में ऑक्सीजन अधिक घुलती है।

हेनरी नियम के अनुप्रयोग : Henry’s law’s applications

1सोडा वाटर या शीतल पेय पदार्थो में कार्बन डाई ऑक्साइड की विलेयता को बढ़ाने के लिए उच्च ताप पर कार्बन डाई ऑक्साइड गैस प्रवाहित करते है।

2. जब समुद्री गोताखोर गहरे समुद्र में जाते है तो उन्हें उच्च दाब का सामना करना पड़ता है जिससे वायु में उपस्थित ऑक्सीजन और नाइट्रोजन की रक्त में विलेयता बढ़ जाती है जब गोताखोर समुद्र की सतह पर आते है तो दाब धीरे धीरे कम होने लगता है , दाब कम होने पर रक्त में घुली ऑक्सीजन और नाइट्रोजन गैस बुलबुलों के रूप में रुधिर कोशिकाओं में एकत्रित होने लगती है जिससे रक्त के प्रवाह में रुकावट आती है यह स्थिति घातक होती है इसे बेंटस कहते है , इससे बचने के लिए वायु में काम घुलनशील गैसे जैसे हीलियम और निऑन मिलायी जाती है।

3. उच्च पहाड़ी स्थानों पर वायु में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है जिससे वायु दाब भी कम होता है जिससे  रक्त में ऑक्सीजन गैस कम मात्रा में विलेय होती है , शरीर कमज़ोर होने लगता है , स्पष्ट सोचने की क्षमता कम होने लगती है इस लक्षण को एनोक्सिया कहते है।

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