पर्यावरण की परिभाषा क्या है ? पर्यावरण किसे कहते है ? environment definition in hindi , meaning

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environment definition in hindi , meaning पर्यावरण की परिभाषा क्या है ? पर्यावरण किसे कहते है ? इसका क्या अर्थ या मतलब है और हमारे जीवन में क्या महत्व है? लाभ और मानव (मनुष्य) से सम्बन्ध पर प्रकाश डाले ?

पर्यावरण : प्रकृति के पांच तत्त्व जल, अग्नि, वायु, आकाश एवं पृथ्वी पर्यावरण के अभिन्न अंग हैं जिनका आपस में गहरा सम्बंध है। इन पांचों तत्वों में किसी एक का भी असंतुलन पर्यावरण के लिये अपूर्णनीय क्षतिकारक और बिनाशकारी है। पर्यावरण को दो प्रमुख घटकों में विभाजित किया जा सकता हैः

* पहला जैविक घटक अर्थात बायोटिक, जिसमें समस्त प्रकार के जीव-जन्तु व वनस्पतियां (एक कोशिकीय से लेकर जटिल कोशिकीय तक) एवं दूसरे प्रकार के घटक में नौतिक अर्थात अजैबिक जिसमें थलमंडल, जलमंडल व वायुमंडल सम्मिलित होते हैं। वस्तुतः आनुवंशिकी एवं पर्यावरण दो महत्वपूर्ण कारक हैं जो मानव जीवन को प्रभावित करते हैं।

* पर्यावरण की छतरी अर्थात ओजोन परत में छेद होना, कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा से उत्पन्न ग्लोबल वार्मिंग की समस्या, घातक बीमारियों का प्रादुर्भाव व स्वास्थ्य संकट- ये सब मानब के समक्ष एक विकराल दानव का रूप ले चुके हैं।

* जलः जैव मंडल में मौजूद संसाधनों में जल सर्वाधिक मूल्यवान है। प्रकृति में जल तीन रूपों में विद्यमान है ढोस, तरल एवं गैस । ठोस के रूप में बर्फ जल का शुद्ध रूप है। इसके बाद वर्षा का जल, पर्वतीय झीलें, नदियां एवं कुंए शुद्धता क्रम में आते हैं। धरातल पर प्रवाहित झीलों तथा तालाबों आदि के रूप में उपलब्ध स्वच्छ जल की मात्रा केवल 7 प्रतिशत होती है।

* मिट्टीः  भूमि या मिट्टी भी सर्वाधिक मूल्यवान संसाधन हैं क्योंकि विश्व के 71 प्रतिशत खाद्य पदार्थ मिट्टी से ही उत्पन्न होते हैं। लेकिन सम्पूर्ण विश्व के मात्र 2 प्रतिशत भाग में ही कृषि योग्य भूमि है जिस पर आधुनिकत्तम टेक्नोलॉजी के प्रयोग, नित नए रासायनिक उर्वरकों, रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग के कारण धरती की उर्वरता कन हो गई है।

वायुमंडल

पृथ्वी के चारों ओर स्थित बायुमंडल विभिन्न प्रकार की गैसों का मिश्रण है जिसमें लगभग 73 प्रतिशत नाइट्रोजन, 21 प्रतिशत ऑक्सीजन और .03 प्रतिशत कार्बन-ऑक्साइड है। ये सभी तत्व पर्यावरण संतुलन को बनाये रखने में सहायक हैं।

* वायुमंडल में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण के तापमान को नियंत्रित करती है।

* पर्यावरण प्रदूषण में मानव की विकास प्रक्रिया तथा आधुनिकता का महत्वपूर्ण योगदान है। इसके अलावा वे सामान्य गतिविधियां भी प्रदूषण कहलाती हैं, जिनसे नकारात्मक फल मिलते हैं। उदाहरण के लिए उद्योगों द्वारा उत्पादित नाइट्रोजन ऑक्साइड प्रदूषक है।

* प्रदूषण दो प्रकार का होता हैः स्थानीय तथा वैश्विक ।

* वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड के होने से भी प्रदूषण होता है यदि वह धरती के पर्यावरण में अनुचित अंतर पैदा करता है।

* ‘ग्रीन हाउस’ प्रभाव पैदा करने वाली गैसों में वृद्धि के कारण भू-मंडल का तापमान निरन्तर बढ़ रहा है। इससे हिमखंडों के पिघलने की दर में वृद्धि होगी तथा समुद्री जलस्तर बढ़ने से तटवर्टी क्षेत्र जलमग्न हो जायेंगे।

* परम्परागत रूप से प्रदूषण में वायु, जल, रेडियोधर्मिता आदि आते है।

* गंभीर प्रदूषण उत्पन्न करने वाले मुख्य स्त्रोत हैंः रासायनिक उद्योग, तेल रिफाइनरीज, आण्विक अपशिष्ट, कूड़ा घर, प्लास्टिक उद्योग, कार उद्योग, पशुगृह, दाहगृह आदि ।

* आण्विक संस्थान, तेल टैंक आदि दुर्घटना होने पर ये सभी बहुत गंभीर प्रदूषण पैदा करते हैं। कुछ प्रमुख प्रदूषक क्लोरीनेटेड, हाइड्रोकार्बन, भारी तत्व लैड, कैडमियम, क्रोमियम, जिंक, आर्सेनिक, बैनजीन आदि भी प्रमुख प्रदूषक तत्व हैं।

* प्रदूषक विभिन्न प्रकार की बीमारियों को भी जन्म देते हैं, जैसे कैंसर, एलर्जी, अस्थमा, प्रतिरोधक बीमारियां आदि। जहां तक कि कुछ बीमारियों को उन्हें पैदा करने वाले प्रदूषक का ही नाम दे दिया गया है। जैसे मरकरी यौगिक से उत्पन्न बीमारी को ‘मिनामटा’ कहा जाता है।

प्रदूषण

पर्यावरण के किसी भी तत्व में होने वाला अवांछनीय परिवर्तन, जिससे जीव जगत पर प्रतिकूल प्रभाव पघ्ता है, प्रदूषण कहलाता है। पर्यावरण प्रदूषण में मानव की विकास प्रक्रिया तथा आधुनिकता का महत्वपूर्ण योगदान है। यहां तक मानव की वे सामान्य गतिविधियां भी प्रदूषण कहलाती हैं, जिनसे नकारात्मक फल मिलते हैं। उदाहरण के लिए उद्योग द्वारा उत्पादित नाइट्रोजन ऑक्साइड प्रदूषक हैं। हालांकि उसके तत्व प्रदूषक नहीं है। यह सूर्य की रोशनी की ऊर्जा है जो कि उसे धुएं और कोहरे के मिश्रण में बदल देती है।

प्रदूषक प्रदूषक विभिन्न प्रकार की बीमारियों को जन्म देते हैं। जैसे कैंसर, इलर्जी, अस्थमा, प्रतिरोधक बीमारियां आदि। जहां तक कि कुछ बीमारियों को उन्हें पैदा करने वाले प्रदूषक का ही नाम दे दिया गया है। जैसे मरकरी यौगिक से उत्पन्न बीमारी को ‘मिनामटार’ कहा जाता है।

वायु प्रदूषण और उसके प्रभाव

वायु में हानिकारक पदार्थो को छोड़ने से वायु प्रदूषित हो जाती है। यह स्वास्थ्य समस्या पैदा करती है तथा पर्यावरण एवं सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाती है।

आधुनिकता तथा विकास ने, बीते वर्षों में वायु को प्रदूषित कर दिया है। उद्योग, वाहन, प्रदूषण में वृद्धि, शहरीकरण कुछ प्रमुख घटक हैं। जिनसे वायु प्रदूषण बढ़ता है। ताप विद्युत गृह,सीमेंट, लोहे के उद्योग, तेल शोधक उद्योग, खान, पेट्रोरासायनिक उद्योग, वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं।

वायु प्रदूषण के कुछ ऐसे प्रकृति जन्य कारण भी हैं जो मनुष्य के वष में नहीं है। प्रदूषण का स्रोत कोई भी देश हो सकता है पर उसका प्रभाव, सब जगह पड़ता है। अंटार्कटिका में पाये गये कीटाणुनाशक रसायन, जहां कि वो कभी भी प्रयोग में नहीं लाया गया, इसकी गम्भीरता को दर्शाता है कि वायु से होकर, प्रदूषण एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच सकता है।

वायु प्रदूषण रसायनों, सूक्ष्म पदार्थ, या जैविक पदार्थ के वातावरण ऋऋ में, मानव की वह भूमिका है, जो मानव को या अन्य जीव जंतुओं को या पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है।

प्रदूषकों को प्राथमिक या द्वितीयक के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता हैः

(प) प्राथमिक प्रदूषकः ये वे तत्व हैं जो सीधे एक प्रक्रिया से उत्सर्जित हुए हैं जैसे ज्वालामुखी विस्फोट से राख, मोटर गाड़ी से कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस, कारखानों से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड गैस ।

(पप) द्वितीयक प्रदूषक सीधे उत्सर्जित नहीं होते हैं. बल्कि जब प्राथमिक प्रदूषक आपस में क्रिया या प्रतिक्रिया करते हैं जब वे वायु में बनते हैं। द्वितीयक प्रदूषक का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जमीनी स्तर की ओजोन- बहुत से द्वितीयक प्रदूषकों में एक जो प्रकाश-रसायनिक धूम कोहरा बनाती है।

कुछ प्रदूषक प्राथमिक और द्वितीयक दोनों हो सकते है, यानी वे सीधे भी उत्सर्जित हो सकते हैं और अन्य प्राथमिक प्रदूषकों से बन सकते हैं।