सशक्तिकरण किसे कहते हैं | सशक्तिकरण की परिभाषा क्या है अर्थ इन इंग्लिश Empowerment in hindi

By   December 8, 2020

Empowerment in hindi meaning definition सशक्तिकरण किसे कहते हैं | सशक्तिकरण की परिभाषा क्या है अर्थ इन इंग्लिश मतलब बताइये ?

अर्थ और परिभाषा
“सशक्तीकरण‘‘ का शाब्दिक अर्थ शक्ति या सत्ताधिकार संपन्न बनाना है। इस तरह सशक्तीकरण का सीधा सा मतलब किसी को सत्ताधिकार संपन्न बनाने का काम है। इसी प्रकार स्त्रियों को अधिकार संपन्न बनाना, उन्हें सत्ताधिकार देने का काम ही महिला सशक्तीकरण है। मगर यह सशक्तीकरण सिर्फ कार्यस्थल या घर पर ही नहीं होता। बल्कि इसका व्यापक अभिप्राय सभी संसाधनों पर महिलाओं के नियंत्रण से है।

गरीबों और विशेषकर महिलाओं के सशक्तीकरण के उद्देश्य से कोई भी कार्यक्रम बनाने से पहले सत्ताधिकार की कमी के कारणों को समझने, उन्हें जानने की जरूरत है। इसी के बाद हम इन समस्याओं को दूर करने के लिए आवश्यक विकास रणनीतियां बना सकते हैं। इसके पीछे स्पष्ट तर्क है और विकासात्मक हलकों में “सशक्तीकरण‘‘ शब्द का प्रयोग आम हो गया है। लेकिन इसकी अवधारणा अपेक्षतया नई है और इसकी व्याख्या पूरी तरह से नहीं हो पाई है। अब आगे हम सत्ताधिकारहीनता के कारणों और उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक रणनीतियों पर प्रकाश डालेंगे।

 प्रस्तावना
इस इकाई में हम महिला सशक्तीकरण पर चर्चा करेंगे। जिसकी शुरुआत में महिला सशक्तीकरण का अर्थ और उसकी परिभाषा से होती है। इसके बाद महिलाओं की शक्तिहीनता के विभिन्न कारणों पर चर्चा की गई है। इसका मुख्य कारण पितृसत्ता और उन्हें सिर्फ उनकी जननात्मक भूमिका तक सीमित रखना है। महिलाएं सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संस्थाओं के विभिन्न स्तरों पर शक्तिहीनता का अनुभव करती हैं। इसके बाद महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए तरह-तरह के उपायों पर चर्चा की गई है और अंत में सेवा और प्रशिखा जैसे महिलाए संगठनों द्वारा महिलाओं के सशक्तीकरण के उदाहरणों का ब्यौरा दिया गया है।

सारांश
इस इकाई में हमने सशक्तीकरण को परिभाषित करके यह बताया है कि महिला सशक्तीकरण का क्या अर्थ है। हमने महिलाओं की सत्ताधिकारहीनता के विभिन्न कारणों और महिलाओं की पराधीनता या उत्पीड़न को दूर करने के उपायों पर भी रोशनी डाली। आखिर में हमने प्रशिखा और सेवा जैसे महिला संगठनों के व्यक्तिपरक अध्ययन (केस स्टडीज) पर चर्चा है जिन्होंने महिलाओं के सशक्तीकरण में बड़ी प्रभावशाली भूमिका निभाई है।

शब्दावली
सशक्तीकरण: शक्ति या सत्ताधिकार देना
पितृसत्तात्मक समाज: वह समाज जिसमें परिवारिक सत्ता पूरी तरह से पति या पिता या फिर परिवार के अन्य पुरुष सदस्य के हाथ में रहती है।
सामाजिक गतिशीलता: व्यक्ति या समूह का एक सामाजिक वर्ग या सामाजिक स्तर से अन्य में गमन ।

 कुछ उपयोगी पुस्तकें
मैरीनियान कार, मार्था चेन, रेनाना झबराला (संपा) 1996 स्पीकिंग आउटः इकॉनामिक एम्पावरमेंट ऑव वीमेन ने साउथ एशिया, नई दिल्ली, सेज पब्लिकेशंस

वनों का बचाव
पैकपाड़ा में वनों का नाश एक गंभीर समस्या थी जो स्थानीय धनी लोगों के कारण उत्पन्न हुई जिन्होंने अपने मुनाफे के लिए पेड़ों को अंधाधुध काटा है। पैकपाड़ा में अधिकांश जमीन सरकारी आरक्षित वन है जिसे स्थानीय वन विभाग चलाता है। इसके कुछ भ्रष्ट अफसरों की सांठगांठ से ही लकड़ी के ठेकेदारों ने इस जंगल को वृक्षहीन बना दिया है।

अपने निजी अनुभवों और पर्यावरण के संरक्षण और पुनरोद्भवन के बारे में प्रशिखा से उन्हें जो प्रशिक्षण और ज्ञान मिला था उससे उन्हें एहसास हुआ कि जंगलों के खत्म होने से सिर्फ पर्यावरण को ही नहीं बल्कि उनकी रोजीरोटी को भी गंभीर खतरा हो गया है। उन्हें याद था कि उनके मां-बाप के दिनों में जंगल में किस्म-किस्म के फलदार पेड़, साग-सब्जियां और जंगली मुर्गिया पाई जाती थीं। मगर अब वन्यजीवन की वैसी बहुलता, वे सभी पेड़-पौधे गायब हो गए थे और जंगल में सिर्फ साल के ही पेड़ नजर आते थे। औरतें इनकी टूटी टहनियों, शाखाओं और पत्तियों को जलावन के काम लाती थीं। लेकिन उन्हें पेड़ों के अवैध कटान से उनके जंगल की यह थोड़ी सी उपयोगिता भी खतरे में नजर आने लगी। पर महिलाओं ने जैसे ही अपना समूह बनाया उन्होंने जंगल के विनाश से बचाने का बीड़ा उठा लिया।
इस अभियान के अंतर्गत 1990 में जमुना महिला समिति के सदस्यों ने बारी-बारी से जंगल की पहरेदारी की। हालांकि इस कार्य से उन्हें अपने समाज में अपमान सहना पड़ा जैसा कि अक्सर परदा प्रथा को चुनौती देनी वाली और सार्वजनिक रूप से गतिशील और दृश्यमान महिलाओं के साथ मुस्लिम समाज में किया जाता है। मुल्ला-मौलवियों, गांव के बुजुर्गों और स्थानीय सरकारी अधिकारियों ने जंगल में औरतों की मौजूदगी और परदे के तिरस्कार का कड़ा विरोध किया। उन्होंने महिलाओं को डराने-धमकाने के कई हथकंडे अपनाए ताकि वे अपना आंदोलन बंद कर दें। इस विरोध के मूल में एक बहाना था। लकड़ी के व्यापार से मालामाल हुए धनाढ्य वर्ग को लगने लगा कि वे अब मनमाने ढंग से पेड़ों को नहीं काट सकेंगे। उन्हें यह भी एहसास होने लगा कि सामूहिक क्रिया-कलापों के चलते धनी पड़ोसियों पर निर्धन महिलाओं की निर्भरता भी घट गई है। महिलाओं ने जब सामूहिक कार्य करना शुरू किया तो उन्हें धनी परिवारों में घरेलू नौकरानी बनकर काम करने की जरूरत भी कम से कम पड़ने लगी क्योंकि वे अन्य आर्थिक क्रिया-कलापों से कमाने लगी थीं। महिला मंडल की सदस्यों को अब धनी साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेने की जरूरत भी नहीं थी क्योकि प्रशिखा से ही उन्हें सस्ता ऋण मिलने लगा था।

मगर महिलाओं के जंगल बचाओ अभियान के पहले चरण में गांव के धनी वर्ग को भी उन पर जवाबी हमला करने का मौका मिला। उन्होंने उन पेड़ों को काट डाला जो इन महिलाओं की सुरक्षा में बड़े हो गए थे और जब औरतें उनसे उलझी तो उन्होंने कुछ की धुनाई कर डाली। इस घटना के बाद पैकपाड़ा के स्त्री पुरुष और आसपास के गांवों वालो ने एक हस्ताक्षर अभियान चलाया जिसके बाद 2000 लोगों ने वनों के विनाश के विरोध में रैली निकाली जिसमें पत्रकार भी शामिल हए। इस प्रदर्शन के जरिए उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जंगल की रक्षा छोड़ने के बजाए वे मौत को गले लगाना पसंद करेंगे।

धनाढ्यों ने स्थानीय वन अधिकारियों को फुसलाकर पैकपाड़ा की औरतों और मर्दो के खिलाफ फर्जी मुकदमे दायर कराए लेकिन आखिर में इन मुकदमों को वापस ले लिया गया। इस रैली से महिलाओं ने अपनी बात स्पष्ट कर दी थी। इसके बाद उन्हें धनी वर्ग और अन्य हित समूहों से समस्याओं का सामना ज्यादा नहीं करना पड़ा। तब से वे अपने जंगल की रक्षा और उसकी देख-भाल कर रही है।

प्रशिखा की सहायता से पैकपाड़ा की महिलाएं इस स्थिति में आ गई हैं कि वे सरकार से जंगल से होने वाले लाभ के बंटवारे पर बातचीत कर रही हैं। उन्होंने सरकार को एक ऐसी योजना का पारूप बनाकर भेजा है जिसके तहत उन्होंने जंगल की देखभाल के दौरान पेड़ों के कटान से होने वाली आमदनी का 40 प्रतिशत हिस्सा मांगा है। चूंकि महिला समूह वन की देखभाल में वन विभाग की मदद कर रहे हैं इसलिए इससे उन्हें जंगल की रक्षा करने का अतिरिक्त लाभ नजर आएगा। हालांकि यह एक बड़ी कठिन और लंबी प्रक्रिया है लेकिन प्रशिखा के कार्यकर्ताओं को विश्वास है कि सरकार और महिला समूहों के बीच इस तरह का समझौता एक न एक दिन हो जाएगा। इसके अलावा पैकपाड़ा की महिलाएं सरकार से खास भूमि (सरकारी जमीन) के लिए भी बातचीत कर रही हैं ताकि पैकपाड़ा के अनेक घरहीन लोग उस पर अपने लिए घर बना सकें।

इकाई 16 महिला सशक्तीकरणः कुछ उदहारण
इकाई की रूपरेखा
उद्देश्य
प्रस्तावना
अभिप्राय और परिभाषा
महिलाओं की अधिकारहीनता के कारण
महिलाओं का सशक्तीकरण
दक्षिण एशिया में महिला सशक्तीकरण पर श्रीलता बाटलीवाला का अध्ययनकार्य
ग्रामीण बांग्लादेश में महिला सशक्तीकरण पर सिडनी शुलर और सैयद हाशमी का अध्ययनकार्य
भारत में महिला आंदोलन पर लेजली कॉलमेन का अध्ययनकार्य
सशक्तीकरणः व्यक्तिपरक अध्ययन (केस स्टडीज)
व्यक्तिपरक अध्ययन प्ः महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के प्रति प्रशिखा का नजरिया
वनों का बचाव
व्यक्तिपरक अध्ययन प्प्ः सेवा द्वारा तंबाकू श्रमिकों की यूनियन में लामबंदी
सारांश
शब्दावली
कुछ उपयोगी पुस्तकें
बोध प्रश्नों के उत्तर

उद्देश्य
इस इकाई को पढ़ लेने के बाद आपः
ऽ महिला सशक्तीकरण का अर्थ और उसकी परिभाषा बता सकेंगे,
ऽ महिलाओं की अधिकारहीनता के कारणों पर रोशनी डाल सकेंगे,
ऽ महिला सशक्तीकरण के लिए अपनाए जाने वाले विभिन्न उपायों के बारे में बता सकेंगे, तथा
ऽ महिला सशक्तीकरण के उदहरण दे सकेंगे।