परावैद्युत पदार्थ व ध्रुवण , ध्रुवीय , अध्रुवीय पदार्थ dielectric substance electric polarization ध्रुवी और अध्रुवी

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dielectric substance and polarization in hindi परावैद्युत पदार्थ एवं ध्रुवण , electric polarisation , विद्युत ध्रुवण किसे कहते है , परिभाषा क्या है ? वैद्युत प्रवृत्ति (electric susceptibility in hindi) :-

परावैद्युत पदार्थ : वे पदार्थ जिनमे विद्युत धारा का प्रवाह नहीं होता लेकिन इन पदार्थों को विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है तो ये विद्युत प्रभाव दर्शाते है , इन पदार्थों को परावैद्युत पदार्थ कहते है।

परावैद्युत पदार्थो के उदाहरण निम्न है –
मोम , अभ्रक , कागज , तेल इत्यादि।
परावैद्युत पदार्थो में इलेक्ट्रॉन अपने परमाणुओं से बद्ध या बंधे हुए ही रहते है इनमे कोई भी मुक्त या स्वतंत्र इलेक्ट्रॉन नहीं पाए जाते है अतः इनको बाह्य विद्युत क्षेत्र में रखने पर भी कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है।
विद्युत क्षेत्र में रखने पर इनके परमाणु या अणु पुन: व्यवस्थित हो जाते है जिससे इनके व्यवहार में कुछ बदलाव आ जाता है इनको आगे विस्तार से पढ़ते है।
परावैद्युत पदार्थ को दो प्रकार के होते है
1. ध्रुवीय परावैद्युत
2. अध्रुवीय परावैद्युत

1. ध्रुवीय परावैद्युत (polar dielectrics )

इस प्रकार के पदार्थो में धनावेश व ऋणावेश का केंद्र अलग अलग होता है अर्थात वे पदार्थ जिनमे धनावेश व ऋणावेश एक केंद्र पर न होकर अलग अलग होता है। उन पदार्थों को ध्रुवीय परावैद्युत पदार्थ कहते है , चूँकि इनमे एक धनावेश व एक ऋणावेश होता है इसलिए ये द्विध्रुव की भाँती व्यवहार करते है।
उदाहरण – HCl , H2O  इत्यादि
बाह्य विद्युत क्षेत्र की अनुपस्थिति में ध्रुवीय परावैद्युत पदार्थ के अणु तापीय ऊर्जा के कारण अनियमित रूप से व्यवस्थित रहते है और इसलिए पदार्थ में परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण का मान शून्य होता है।
जब ध्रुवीय परावैद्युत पदार्थ को बाह्य विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है तो विद्युत द्विध्रुव पर एक बलाघूर्ण कार्य करता है जो इनके क्षेत्र की दिशा में करने का प्रयास करता है। और जब बाह्य क्षेत्र को बढ़ाया जाता है तो अधिक से अधिक द्विध्रुव क्षेत्र की दिशा में व्यवस्थित हो जाते है जिससे परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण का मान प्राप्त होता है।

2. अध्रुवीय परावैद्युत (Non polar dielectrics)

वे पदार्थ जिनमे अणुओं में धनावेश व ऋणावेश का केंद्र एक ही होता है उन पदार्थो को अध्रुवीय परावैद्युत कहते है।
उदाहरण – H2 , CO2 , N2 , O2 आदि
इन पदार्थों में प्रत्येक अणु का द्विध्रुव शून्य होता है अतः पदार्थ का कुल परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण का मान भी शून्य होता है।
जब अध्रुवीय परावैद्युत पदार्थ को बाह्य विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है तो विद्युत क्षेत्र के कारण धनावेश क्षेत्र की दिशा में व ऋणावेश क्षेत्र के विपरीत दिशा में विस्थापित हो जाता है जिससे प्रत्येक अणु में कुछ द्विध्रुव आघूर्ण का मान प्राप्त होता है।
जब परावैद्युत पदार्थ को विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है तो पदार्थ में विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण प्रेरित होता है इसे पदार्थ का ध्रुवण कहते है।
यदि प्रेरित द्विध्रुव आघूर्ण , बाह्य विद्युत क्षेत्र के समानुपाती होता है तो इस प्रकार के पदार्थो को रेखीय समदैशिक परावैद्युत पदार्थ कहते है।
बाह्य विद्युत क्षेत्र की उपस्थिति में पदार्थ के इकाई आयतन में प्रेरित द्विध्रुव आघूर्ण को पदार्थ का ध्रुवण सदिश कहते है।
ध्रुवण सदिश को P से व्यक्त करते है अतः हम कहते है की रेखीय सम दैशिक पदार्थो में P का मान E (विद्युत क्षेत्र ) के समानुपाती होता है अतः
P E

P = E

 यहाँ  को वैद्युत प्रवृति कहते है।
 एक विमाहीन राशि है।

ध्रुवी और अध्रुवी परावैद्युत (polar and nonpolar dielectrics in hindi)

]हम जानते है कि परमाणु विद्युतत: उदासीन होता है। उसका समस्त धनावेश नाभिक में निहित रहता है तथा ऋण आवेश नाभिक के परित: वितरित इलेक्ट्रॉनों के रूप में होता है। दोनों आवेश परिमाण में समान होते है। इन दोनों आवेशो के गुरुत्व केंद्र समान भी हो सकते है और अलग अलग भी हो सकते है।

यदि दोनों के केंद्र समान है तो परमाणु या अणु अध्रुवी कहलाता है और दोनों के केंद्र यदि अलग अलग है तो ध्रुवी कहलाता है।
अध्रुवी परावैद्युत : ऐसा परावैद्युत जिसके परमाणुओं या अणुओं में धनात्मक और ऋणात्मक आवेशो के गुरुत्व केन्द्र समान होते है , अध्रुवी परावैद्युत कहलाता है। इस प्रकार अध्रुवी परावैद्युत पदार्थ के परमाणु या अणुओं में धन और ऋण आवेशो का उनके केन्द्रों के परित: वितरित सममित होता है।
ऋण और धन आवेशो के केन्द्रों के मध्य शून्य दूरी होने के कारण इन परमाणुओं या अणुओं का विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण भी शून्य होता है।
ध्रुवी परावैद्युत : ऐसे परावैद्युत जिसके परमणु या अणुओं में धन और ऋण आवेशो के गुरुत्व केंद्र अलग अलग होते है , ध्रुवी परावैद्युत कहलाते है।
अत: ध्रुवी पराविद्युत के परमाणुओं या अणुओं में धन और ऋण आवेशो का उनके केन्द्रों के परित: वितरण सममिति में नहीं होता है।
इस प्रकार दोनों आवेशो के केन्द्रों के मध्य एक निश्चित दूरी होने के कारण इन परमाणुओं या अणुओं का एक निश्चित वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण भी होता है।
NH3 , HCl , H2O , CO2 इत्यादि के अणु ध्रुवी अणुओं की श्रेणी में आते है। जल के अणु का एक स्थायी द्विध्रुव आघूर्ण 6 x 10-28 Cm की कोटि का होता है।
वास्तव में अणुओं में आवेश का वितरण असममित होता है। उदाहरण के लिए एक आयनिक अणु में एक परमाणु से दुसरे परमाणु में इलेक्ट्रॉन स्थानांतरित हो जाते है।
फलस्वरूप अणु धनात्मक और ऋणात्मक आयनों के भिन्न स्थितियों में होने के कारण ध्रुवी हो जाता है और एक स्थायी द्विध्रुव आघूर्ण रखता है।

विद्युत क्षेत्र में अध्रुवी परमाणु का ध्रुवण (polarisation of non polar atom in electric field) : जब एक अध्रुवी परमाणु किसी विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है तो इसका नाभिक क्षेत्र की दिशा में थोडा विस्थापित हो जाता है और ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉनों पर विद्युत क्षेत्र की विपरीत दिशा में बल लगता है। जिससे उनका केंद्र क्षेत्र की विपरीत दिशा में थोडा विस्थापित हो जाता है।

इस कारण प्रत्यानयन बल उत्पन्न हो जाता है जो इलेक्ट्रॉनों को पुनः उनकी पूर्व स्थिति में लाने का प्रयास करता है। जब यह प्रत्यानयन बल विद्युत क्षेत्र द्वारा आवेशो पर लगने वाले खिंचाव बल के बराबर हो जाता है तो संतुलन की स्थिति आ जाती है और परमाणु ध्रुवित हो जाता है।
इस प्रकार परावैद्युत परमाणुओं में आवेशो के विस्थापन के कारण उनमे खिंचाव उत्पन्न होने की घटना ध्रुवण कहलाती है।
स्पष्ट है कि परमाणुओं में खिंचाव उत्पन्न होने के कारण उनके धन और ऋण आवेशों के केंद्र भिन्न हो जाने से उनमे द्विध्रुव आघूर्ण उत्पन्न हो जाता है।

परावैद्युत गुटके का ध्रुवण (electric polarization of dielectric slab)

माना एक समान्तर प्लेट संधारित्र की प्लेटों को एक बैटरी द्वारा आवेशित किया जाता है। प्लेटों के मध्य निर्वात है और यदि आवेश का पृष्ठ घनत्व ±σ है तो प्लेटों के मध्य उत्पन्न विद्युत क्षेत्र की तीव्रता –
E0
= σ/ε0
माना अब अध्रुवी परमाणुओं वाला एक परावैद्युत गुटका प्लेटों के मध्य रख दिया जाता है। जैसे ही गुटका प्लेटो के मध्य रखा जाता है , इसके अणु ध्रुवित हो जाते है।
फलस्वरूप गुटके के बायां फलक AB , -q और दायाँ फलक CD , +q आवेश व्यक्त करने लगता है। बिन्दुवत रेखाओं से व्यक्त पराविद्युत के अन्दर कोई नेट आवेश नहीं होता है। परावैद्युत गुटके के फलकों पर आवेश -q और +q प्रेरित आवेश कहलाता है। इन प्रेरित आवेशो के कारण परावैद्युत गुटके के अन्दर एक विद्युत क्षेत्र Ep उत्पन्न हो जाता है जिसकी दिशा CD फलक से AB फलक की ओर होती है।
स्पष्ट है कि Ep की दिशा E0 की दिशा के विपरीत होती है।
अत: परावैद्युत के अन्दर परिणामी विद्युत क्षेत्र E =  E0 – Ep
इस प्रकार परावैद्युत गुटके को एक विद्युत क्षेत्र में रखने पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता कम हो जाती है और विद्युत क्षेत्र E को विद्युत क्षेत्र का घटा हुआ मान कहते है।
परावैद्युत नियतांक (dielectric constant) : लगाए गए विद्युत क्षेत्र की तीव्रता और संधारित्र की प्लेटो के मध्य पराविद्युत माध्यम रखने पर घटे हुए विद्युत क्षेत्र की तीव्रता के अनुपात को ही परावैद्युत माध्यम का परावैद्युत नियतांक कहते है।
इसे सापेक्ष वैद्युतशीलता या विशिष्ट प्रेरित धारिता भी कहते है तथा इसे K के द्वारा व्यक्त किया जाता है।
अत: परावैद्युत नियतांक (K) = E0/Ep

ध्रुवण घनत्व (polarization density)

परावैद्युत गुटके को विद्युत क्षेत्र में रखने पर उसके प्रति एकांक आयतन में प्रेरित द्विध्रुव आघूर्ण को ध्रुवण घनत्व कहते है। इसे P के द्वारा व्यक्त किया जाता है।
यदि एक परमाणु का प्रेरित द्विध्रुव आघूर्ण p हो और एकांक आयतन में परमाणुओं की संख्या N हो तो ध्रुवण घनत्व –
P = np
यदि संधारित्र की प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल A हो और प्लेटो के मध्य दूरी d हो तो –
पराविद्युत गुटके का आयतन = A.d
चूँकि परावैद्युत गुटके के फलकों पर +q और -q आवेश प्रेरित होता है अत: पूरे गुटके का तुल्य द्विध्रुव आघूर्ण = qd
ध्रुवण घनत्व की परिभाषा से –
P = qd /A.d  = q/A
चूँकि q/A =  σ = ध्रुवण आवेश पृष्ठ घनत्व
अत: P = σ
अत: संधारित्र की प्लेटो के मध्य परावैद्युत गुटका रखने पर घटे हुए विद्युत क्षेत्र की तीव्रता –
E = E0 – P/ε0

वैद्युत प्रवृत्ति (electric susceptibility)

किसी परावैद्युत गुटके का ध्रुवण घनत्व घटे हुए विद्युत क्षेत्र की तीव्रता के अनुक्रमानुपाती होता है और इसे निम्न सूत्र द्वारा प्राप्त किया जाता है –
P = Xε0E
इसमें नियतांक X को परावैद्युत गुटके की वैद्युत प्रवृति कहते है। यह एक विमाहीन नियतांक है।