दलपुंज किसे कहते हैं | दलपुंज की परिभाषा क्या है , कार्य , चित्र बताइए Corolla in hindi in plants flower

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Corolla in hindi in plants flower दलपुंज किसे कहते हैं | दलपुंज की परिभाषा क्या है , कार्य , चित्र बताइए ?

दलपुंज (Corolla)

यह पुष्पीय अवयवों का दूसरा चक्र है जो बाह्यदलपुंज के अन्दर की तरफ संचित होता है | दलपुंज के सदस्य दल कहलाते है |

दलों का ससंजन (Cohesion) :

  1. पृथकदली (Polypetalous) : जब दल एक दूसरे से स्वतंत्र हो , जैसे – गुडहल , सरसों आदि |
  2. संयुक्तदली (Gamopetalous) : जब दल आपस में एक दूसरे से किनारों से जुड़े रहते है , जैसे – नीरियम , धतूरा आदि |

दल विन्यास (Aestivation) :

यह बाह्यदल (K) और दलपुंज (C) दोनों में लागू होता है जो निम्नलिखित प्रकार का हो सकता है –

  1. कोरस्पर्शी (Valvate) : कोनो को स्पर्श करते हुए किनारे जो एक दूसरे को ढके नहीं , जैसे सोलेनम |
  2. व्यावर्तित (Twisted or contorted) : बाह्यदल का एक सिरा अपने निकटवर्ती बाह्यदल के सिरे को ढके हुए और इसके दूसरी तरफ का सिरा तीसरे बाह्यदल से ढका हुआ जैसे – दलपुंज में गुडहल का दलपुंज विन्यास |
  3. कोरछादी (Imbricate) : पाँच बाह्यदलों में एक पूरी तरह बाहर और एक पूरी तरह अन्दर तथा शेष का एक कोना बाहर और दूसरा कोना अन्दर , जैसे – जिप्सोफिला |
  4. कोर छादी पंचकी अथवा क्विनाक्विंशियल (Quincuncial) : कोरछादी पुष्पदल और बाह्यदल विन्यास की दूसरी अवस्था अब पाँच बाह्यदलों में से दो पूरी तरह बाहर और दो पूरी तरह अन्दर और शेष एक का कोना बाहर और दूसरा अन्दर , जैसे – साइट्रस |
  5. अवरोही कोरछादी अथवा ध्वजीय (Descending imbricate or vexillary) : इसमें पांच दलों में पश्च दल सबसे बड़ी होती है जो अपने पाशर्व के दोनों दलों को ढकती है | ये दोनों पाशर्व दल दो आगे की तरफ के और सबसे छोटे दलों को ढकते है | इस प्रकार का दलपुंज विन्यास पेपिलियोनेसी कुल का विशेष लक्षण है |
  6. आरोही कोरछादी (Ascending imbricate) : जब पश्च दलपत्र पूरी तरह ढका हुआ हो और दो पाशर्व दलों की पिछली सतह बाहर और अगले सिरे ढके हुए और दो अग्रतम दलों की दोनों सतहें बाहर होती है |

दलपुंज के आकार (shape of the corolla) :

  1. क्रॉस रूप अथवा स्वस्तिकाकार (cruciform) : जब चार स्वतंत्र दलपत्र क्रॉस बनाते हुए व्यवस्थित हो तथा प्रत्येक दलपत्र फलक और नखर में विभेदित हो , जैसे – सरसों |
  2. केरियोफिल्लेशियस (Caryophyllaceous) : पाँच दलपत्र जिनके नखर अपेक्षाकृत लम्बे तथा उनके दल फलक नखरों के साथ समकोण पर मुड़े हुए हो , जैसे – डाइएन्थस |
  3. गुलाबवत (Rosaceous) : पाँच अथवा अधिक पृथक दल जिनमें नखर और दल फलक भाग स्पष्ट नहीं होते तथा दलपत्र नियमित रूप से बाहर को फैले होते है , जैसे गुलाब |
  4. घंटाकार (campanulate or bell shaped) : पाँच दलपत्र परस्पर जुड़कर घंटे के समान आकृति बना लेते है , जैसे – कस्कुटा |
  5. नलिकाकार (Tubelar) : संयुक्त दलीय दलपुंज जो बेलनाकार अथवा नली के समान हो जाता है अर्थात आधार से शीर्ष तक समान लम्बाई चौड़ाई का होता है , जैसे – सूरजमुखी के बिम्ब पुष्पक |
  6. कीपाकार (infundibuliform or funnel shaped) : एक संयुक्तदलीय दलपुंज जिसका आकार कीप के समान होता है , जैसे – आइपोमिया |
  7. दीवटरूपी (Hypercrateriform or salver shaped) : ऐसा संयुक्तदलीय दलपुंज जिसमें एक कृश नली तथा एक अचानक फैला हुआ चपटा दलफलक हो , जैसे – इक्जोरा और सदाबहार अथवा बारहमासी |
  8. चक्राकार (Rotate or wheel shaped) : ऐसा संयुक्तदलीय दलपुंज जिसमें चपटा तथा वृताकार दलफलक अपनी छोटी नली के साथ समकोण बनाता है , जैसे – नीरियम और बैंगन |
  9. मटरकुलीय अथवा तितल्याकार (papilionaceous or butterfly like) : एकव्यास सममित पृथकदलीय दलपुंज जिसमें एक पश्च विशाल ध्वज उसके पाशर्व में दो पक्ष और सबसे अन्दर के दो दलपत्र जो छोटे होते है और संयुक्त से दिखाई पड़ते है , नौतल अथवा कूटक कहलाते है , जैसे – मटर |
  10. द्विओष्ठी (Bilabiate) : एकव्यास सममित , संयुक्तदलीय दलपुंज जो ऊपरी और निचले दो ओष्ठों के समान भागों में विभाजित हो जाता है तथा जिनका मुखद्वार चौड़ा खुला होता है , जैसे – तुलसी |
  11. मुहबंद अथवा अवगंठ (personate or masked) : एकव्यास सममित संयुक्तदलीय दलपुंज जिसके दोनों ओष्ठ एक दुसरे के इतने निकट हो जाते है कि दलपुंज का मुख द्वार बंद सा प्रतीत होता है , जैसे – डागफ्लावर |
  12. जीभिकाकार (Ligulate or strap shaped) : एकव्यास सममित संयुक्तदलीय दलपुंज जिसमें निचे की तरफ एक संकरी नली होती है लेकिन ऊपर वह पट्टी की भाँती चपटा हो जाता है , जैसे – सोन्कस और सूरजमुखी के रश्मि पुष्पक |

परिदलपुंज (Perianth)

जब किसी पुष्प के बाह्यदल और दलपुंज परस्पर विभेदित न होकर एकसमान दिखाई देते है तो इनको सामूहिक रूप से परिदलपुंज कहा जाता है |

जब परिदल पत्र स्वतंत्र हो तो ऐसे परिदल पुंज को पृथक परिदलीय कहा जाता है | इसके विपरीत परिदल पत्र संयुक्त हो तो ऐसे परिदलपुंज को संयुक्त परिदलीय (Gamophyllous) कहा जाता है |

दलाभ (Petaloid) : जब परिदल पत्र हरे रंग के नहीं होकर दलपत्रों के समान रंगीन होते है , ऐसे परिदलपुंजों को दलाभ कहते है और ऐसे परिदलपत्रों को टेपल (tepal) भी कहा जाता है |