विदलन गुण क्या है , विदलन के उदाहरण , परिभाषा (Cleavage property in hindi)

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(Cleavage property in hindi) विदलन गुण क्या है , विदलन के उदाहरण , परिभाषा : कभी कभी जब हम किसी पदार्थ के गुणों या प्रकृति का अध्ययन कर रहे होते है तो हम पाते है कि कही किसी पदार्थ को विदलन प्रकृति का बताया जाता है और कभी किसी पदार्थ में विदलन गुण का आभाव बताया जाता है , पर क्या आप जानते है कि किसी पदार्थ का विदलन गुण होता क्या है ? हम यहाँ किसी पदार्थ के विदलन गुण के बारे में अध्ययन करेंगे।
विदलन : जब किसी पदार्थ को काटा जाता है या दबाव डाला जाता है और यदि वह पदार्थ चिकनी और सपाट सतहों में टूट जाता है अर्थात काटने के बाद पदार्थ की सतहें सपाट और चिकनी प्राप्त होती है इसका तात्पर्य है कि वह पदार्थ विदलन का गुण रखता है।
और जब किसी पदार्थ को काटने पर जो सतहें प्राप्त होती है वे चिकनी और सपाट प्राप्त नहीं होती है तो इस पदार्थ में विदलन का गुण नहीं पाया जाता है।

जैसा की चित्र में पहली स्थिति में दर्शाया गया है कि इसे चाक़ू से काटने पर इसकी दोनों सतहें सपाट और चिकनी प्राप्त होती है इसका तात्पर्य है कि प्रथम स्थिति में दिखाया गया पदार्थ विदलन गुण दर्शाता है।
दूसरी स्थिति में पदार्थ को जब चाक़ू से काटा गया तो काटने के बाद प्राप्त पदार्थ की सतहें सपाट और चिकनी प्राप्त नहीं होती है इसका मतलब है कि दूसरी स्थिति में दर्शायें गए पदार्थ में विदलन गुण अनुपस्थित है।
उदाहरण : क्रिस्टलीय ठोस में विदलन स्पष्ट देखने को मिलता है तथा अक्रिस्टलीय ठोस में विदलन गुण अनुपस्थित रहता है।
अत: जब किसी क्रिस्टलीय ठोस को तेज धार वाले चाकू से काटने पर इसकी नयी बनी सतहें सपाट और चिकनी होती है जबकि अक्रिस्टलीय ठोस को तीज धार वाले यन्त्र से काटने पर नयी प्राप्त सतहें सपाट और चिकनी प्राप्त नहीं होती है इसलिए अक्रिस्टलीय ठोसों में विदलन नहीं पाया जाता है।
जब किसी पदार्थ पर दाब डाला जाता है या काटा जाता है और इससे नयी बनने वाली सतहें पूर्ण रूप से चिकनी और सपाट प्राप्त होती है तो उन पदार्थों को पूर्ण विदलन पदार्थ कहते है और यदि कुछ कम चिकनी सतहें प्राप्त होती है तो उन्हें कम विदलन वाला प्राप्त कहते है और यदि सतहें बहुत अधिक कम चिकनी हो तो इन्हें विदलन गुण रहित पदार्थ कहा जाता है।

विदलन का कारण

चूँकि क्रिस्टलीय ठोसों में अवयवी कण जैसा अणु , परमाणु तथा आयन एक निश्चित व्यवस्था में व्यवस्थित रहते है इसलिए इनमें विदलन प्लेन पाए जाते है अर्थात इनमें ऐसे प्लेन पाए जाते है तो बहुत कमजोर होते है और एक सीधी व्यवस्था में होते है अत: जब इन पर दाब डाला जाता या चाकू से काटा जाता है तो यह इस विदलन प्लेन के सापेक्ष अलग हो जाते है और चूँकि यह विदलन अक्ष एक सीधी व्यवस्था में है इसलिए ये भाग सपाट और चिकने प्राप्त होते है।
अक्रिस्टलीय ठोसों में विदलन प्लेन नहीं पाया जाता है और यही कारण है कि इसमें विदलन गुण का अभाव रहता है।