नगरीय औद्योगिक सामाजिक संरचना की प्रमुख विशेषता characteristics of urban social structure

By   December 29, 2020

characteristics of urban social structure in hindi नगरीय औद्योगिक सामाजिक संरचना की प्रमुख विशेषता ?

आरंभिक दृष्टिकोण
ऐतिहासिक अर्थ में सत्रहवीं शताब्दी से उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभ तब जब राज्य तथा शासकीय अभिजन का प्रमुख संबंध कानून एवं व्यवस्था से था, मुख्य सामाजिक समस्या के रूप में अपराध की ही गणना होती थी। एक समस्या के रूप में अपराध ने पूर्वकालीन सामाजिक विचारकों का ध्यान आकर्षित किया। उस समय के अनेक अभ्यास या तो विश्वासों एवं अंधविश्वासों के रूप में थे या अकाल, महामारी एवं अपराध की समस्याओं के गंभीर तथा व्यवस्थित अर्थ समझने से संबंधित थे। समझने के उद्देश्य से उनका वर्गीकरण निम्नलिखित प्रकार से किया जा सकता है:
ऽ विश्वास एवं अंधविश्वास
ऽ शास्त्रीय दृष्टिकोण
ऽ भौतिक शारीरिक दृष्टिकोण

 आस्थाएं और अंधविश्वास
मानव जीवन की आदिम अवस्था से आरंभ होकर आज तक मानव अकाल, दुर्लभता, महामारी, हिंसा, हत्या एवं अपराध का सामना करता रहा है। अनेक पूर्वकालीन समाजों में या समाज के कछ भागों में आज भी इन समस्याओं को आत्माओं, प्रेतों, जादूगरनियों के प्रभावों का परिणाम माना जाता है। कार्य-कारण संबंध के मध्य उचित समझ का न होना ऐसे विश्वासों का आधार है।

क्लासिकी दृष्टिकोण
अठारहवीं शताब्दी से प्रांरभ होकर अपराधों को अधिक व्यवस्थित रूप से समझने के प्रयास किए गए। सर्वप्रथम सीजर बीकारियाँ (1764) जो एक इटली निवासी था तथा जेरमी बेन्थम (1823) जो एक अंग्रेज था, इन दोनों ने एक सामाजिक समस्या के रूप में अपराध के कारणों की व्याख्या के गंभीर प्रयास किए। उनके निरूपण शास्त्रीय सिद्धांत या दृष्टिकोण के रूप में जाने जाते हैं। इस सिद्धांत में सुखवाद या मानव में सुख के खोज की प्रकृति पर बल था। सुखवादी दृष्टिकोण स्वीकृत सामाजिक प्रतिमान के उल्लंघन को अभिप्रेरित करते हैं। इस प्रकार से परिणामतः अपराध होते हैं। दूसरे शब्दों में, कुछ लोगों को अपराध करने में सुख मिलता है अर्थात् अपराध उनके लिए उपयोगितावादी हैं।

 भौतिक शारीरिक दृष्टिकोण
बाद में कुछ आनुभविक या प्रत्यक्षवादी प्रयास किए गए जिससे अपराध की एक सामाजिक समस्या के रूप में व्याख्या की गई। सीजर लोम्ब्रोसो ने (1836-1909), जो इटली निवासी था, भौतिक शारीरिक गुणों से अपराध के संबंध का अध्ययन किया। इसलिए, यह दृष्टिकोण भौतिक शारीरिक दृष्टिकोण या अपराध के सिद्धांतों के इटेलियन सम्प्रदाय के रूप में प्रसिद्ध है।चूंकि उसने अपने कल्पित अभिग्रहों को आनुभविक पद्धतियों से सत्यापित करने का प्रयास किया, इसे अपराध की व्याख्या का प्रत्यक्षवादी दृष्टिकोण भी कहा गया है। लोम्ब्रोसो के अनुसार:
ऽ अपराधियों के कुछ निश्चित जन्मजात शारीरिक गुण होते हैं,
ऽ अपराधियों के शारीरिक गुण सामान्य व्यक्तियों से भिन्न होते हैं,

 आलोचनात्मक समीक्षा
इन दृष्टिकोणों की आलोचनात्मक समीक्षा इनकी परिसीमाओं को दर्शाती है जो निम्नलिखित हैं:
ऽ प्रथम दृष्टिकोण अंधविश्वासों और अज्ञानता पर आधारित था,
ऽ बाद के दोनों दृष्टिकोण आज केवल ऐतिहासिक महत्व रखते हैं,
ऽ वे अपराध के वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित नहीं हैं,
ऽ शास्त्रीय तथा भौतिक शारीरिक दृष्टिकोण व्यक्ति पर केंद्रित हैं,
ऽ उन्होंने सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक कारकों पर दृष्टि नहीं रखी है।

बोध प्रश्न 1
I) नगरीय औद्योगिक सामाजिक संरचना की प्रमुख विशेषताओं का तीन पंक्तियों में वर्णन कीजिए।
II) अपराध के शास्त्रीय दृष्टिकोण के दो प्रमुख प्रतिपादकों का जिस देश में उनका जन्म हुआ था – उसके सहित उल्लेख कीजिए।
III) अपराध को सामाजिक समस्या के रूप में मानने वाले भौतिक शारीरिक दृष्टिकोण के एक प्रमुख प्रतिपादक का नाम उनके मूल देश सहित इंगित कीजिए।
IV) पूर्वकालीन दृष्टिकोणों की परिसीमाओं का विवेचन आठ पंक्तियों में कीजिए।

बोध प्रश्न 1 उत्तर
प) नगरीय औद्योगिक सामाजिक संरचना की विशेषता त्वरित सामाजिक रूपांतरण, नगरों, उच्च प्रौद्योगिकी, आधुनिक उत्पादन, उपभोक्तावाद, परिवहन एवं संचार के त्वरित साधन, प्रवासन, गतिशीलता, द्वितीयक समूह तथा अवैयक्तिक संबंधों का होना है।
पप) क) सीजर बेकारिया (1786), इटली
ख) जेरमी बेन्थम (1823), इंग्लैंड
पपप) सीजर लाब्रोसो (1936-1909), इटली।
पअ) ऽ अपराध तथा अन्य सामाजिक समस्याओं का पूर्वकालीन बोध अंध विश्वास एवं अज्ञानता पर आधारित था।
ऽ शास्त्रीय तथा भौतिक शारीरिक दृष्टिकोणों की आज केवल ऐतिहासिक महत्ता है। वे व्यक्तियों पर केंद्रित हैं।
ऽ उन्होंने सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक तत्वों पर पर्याप्त बल नहीं दिया है।