सब्सक्राइब करे youtube चैनल

blue appearance of sky in hindi आकाश का नीला रंग दिखाई देना : हम प्रकाश का प्रकीर्णन पढ़ चुके है जिसके अनुसार वायुमण्डल में उपस्थित कण प्रकाश को अवशोषित करके उस प्रकाश को सभी दिशाओं में विसरित कर देते है।  विसरण की यह घटना कणों के आकार तथा प्रकाश के रंग की तरंगदैध्र्य पर निर्भर करती हैं।

जब हम आसमान को देखते है तो हमें यह नीला दिखाई देता है इसका कारण भी प्रकाश का प्रकीर्णन हैं।

प्रकाश वायुमण्डल से होकर प्रकीर्णित हो जाता है और जो प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचता है वह वायुमंडल से प्रकीर्णन के बाद हमारे तक आता है।

हम यह जानते है की जिन रंगों की तरंगदैध्र्य कम होती है उनका प्रकीर्णन उतना ही अधिक होता हैं। रैले ने अपने नियम में बताया था की प्रकीर्णन का मान तरंगदैध्र्य के चार घात के व्युत्क्रमानुपाती होता हैं।

चूँकि नीले रंग की तरंगदैध्र्य कम होती है इसलिए यह सबसे ज़्यादा प्रकीर्णित होता है जिससे चारो तरफ आसमान में नीला रंग दिखाई देता है।

यही कारण है की जब प्रकाश प्रकीर्णित होकर हमारी आँखों तक पहुँचता है तो हमें आसमान (आकाश) का रंग लाल दिखाई देता है क्योंकि प्रकीर्णन से चारो तरफ नीला रंग बिखर जाता हैं।

यदि वायुमंडल न हो अर्थात हमारे चारों तरफ गैसे , कण इत्यादि न हो तो प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं होगा जिससे आसमान हमें काला दिखाई देगा और हमें दिन में भी तारे दिखाई देंगे।