बैंक ऑफ हिंदुस्तान की स्थापना कब हुई ? bank of hindustan established in hindi in which year

By   March 28, 2021
bank of hindustan established in hindi in which year ?
प्रश्न : बैंक ऑफ हिंदुस्तान की स्थापना कब हुई ?
उत्तर : भारत में यूरोपीय पद्धति पर आधारित बैंक , बैंक ऑफ़ हिंदुस्तान था | बैंक ऑफ़ हिंदुस्तान स्थापना 1770 में की गयी | पहला भारतीय बैंक पंजाब नेशनल बैंक था जिसकी स्थापना 1894 में की गयी |
1806 ईस्वीं में बैंक ऑफ बंगाल की स्थापना |
1840 ईस्वीं बैंक ऑफ़ बोम्बे |
1843 ईस्वीं बैंक ऑफ़ मद्रास |
उपर्युक्त तीनों बैंक प्रेसिडेंसी की सरकारों के सहयोग से स्थापित किये गए थे , अत: ये निजी क्षेत्र के बैंक नहीं थे | 1921 में तीनों बैंकों का विलय कर दिया गया और इसका नया नाम “इम्पीरियल बैंक ऑफ इण्डिया” रखा गया | इसको RBI के स्वामित्व में रखा गया |
2008 में SBI को RBI से भारत सरकार ने खरीद लिया | 2008 को बैंक ऑफ़ सौराष्ट्र का विलय SBI में कर दिया | 2010 में बैंक ऑफ इन्दौर का भी विलय कर दिया गया |
अनुसूचित बैंक : वे बैंक जिनका उल्लेख RBI एक्ट 1934 की दूसरी अनुसूची में किया जाता है | इन बैंकों को RBI से वित्तीय सहायता प्राप्त करने का अधिकार होता है |
इसके बदले में इन्हें RBI के दिशानिर्देशों को मानना पड़ता है | सामान्यतया सभी बैंक अनुसूचित होते है |
सहकारी बैंक : ये वाणिज्यिक बैंकों से अलग होते है | वाणिज्यिक बैंकों की स्थापना केन्द्रीय विधानमण्डल के द्वारा प्रेरित बैंकिंग एक्ट के तहत की जाती है जबकि सहकारी बैंक की स्थापना राज्य विधानमण्डल के पारित सहकारिता अधिनियम के तहत की जाती है |
वाणिज्यिक बैंक एकस्तरीय होते है , जबकि सहकारिता बैंक त्रिस्तरीय होते है |
त्रिस्तरीय ढाँचा : राज्य स्तरीय सहकारिता बैंक को अपेक्स बैंक कहते है | जिला स्तर पर केन्द्रीय बैंक , ग्राम पंचायत स्तर पर सहकारिता सोसायटी होती है | वाणिज्यिक बैंकों का कार्यक्षेत्र निश्चित नहीं होता जबकि सहकारी बैंक का कार्य निश्चित होता है |
वाणिज्यिक बैंक की शीर्ष संस्था RBI होती है जबकि कोपरेटिव बैंक की शीर्ष संस्था नॉबार्ड है | वाणिज्यिक बैंक प्राय: अनुसूचित होते है जबकि कॉपरेटिव बैंक अनुसूचित बैंकों की श्रेणी में नहीं आते है |

मुद्रा बाजार का अर्थ और अंग (meaning and organs of money market in hindi)

मुद्रा बाजार उस संगठन को कहा जाता है , जहाँ वित्तीय और अन्य संस्थानों और व्यक्तियों के पास उपलब्ध विनियोज्य निधियाँ (investible funds) उधार प्राप्त करने वालों द्वारा अल्पकाल के लिए उधार ली जाती है | इस प्रकार कोई भी व्यक्ति या संस्था , जो अल्पकाल के लिए मौद्रिक ऋण उपलब्ध कराने को तत्पर है , मुद्रा बाजार का अंग होती है |
भारतीय मुद्रा बाजार में रिजर्व बैंक को केन्द्रीय स्थान प्राप्त है क्योंकि वही देश में साख का नियमन और नियंत्रण करता है |
भारतीय मुद्रा बाजार को प्राय: दो भागों में विभाजित किया जाता है :- संगठित क्षेत्र और असंगठित क्षेत्र |
संगठित क्षेत्र में स्टेट बैंक , उसके 5 अनुशंगी बैंक , 19 राष्ट्रीयकृत बैंक , क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक , सहकारी बैंक और गैर सरकारी क्षेत्र के अन्य बैंक सम्मिलित किये जाते है |
जबकि असंगठित क्षेत्र में साहूकार , महाजन आदि आते है |