संतुलित रासायनिक समीकरण balancing chemical equations in hindi and steps

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इससे पहले के article मे उपचयन एवं अपचयन को discuss किया है अब इस article मे उपचयन एवं अपचयन के आधार और भी पक्रिया को discuss करेग और किसि  अभिक्रिया को किस तरह से संतुलित करते है | को discuss करेगे |
संक्षारण
आपने निन्म उदाहरन को consider किया होगा :
1. लोहे की कील  चमकीली होती हैं लेकिन कुछ समय बाद कील पर भूरे रंग की परत चढ़ जाती है। अतः लोहे की कील पर भूरे रंग की  परत चड़ना को जंग लगाना कहते है |
2. कुछ अन्य धातुओं के साथ भी येसा परिवर्तन होता है। जैसे चाँदी की परत offwhite हो जाती है और 
3.Cu के उपर हरे रंग की परत चढ़ जाती है |
जब कोई धातु अपने आसपास अम्ल, आर्द्रता आदि के संपर्क में आती है तब ये संक्षारित होती हैं और इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं। चाँदी के ऊपर काली पर्त व ताँबे के ऊपर हरी पर्त चढ़ना संक्षारण के उदाहरन है 
धातु के संक्षारण से बचने के लिए धातुओ पर पेंट और किसी धातु की परत को चढ़ा कर संक्षारण से बच्या जाता है |
विकृतगंधिता
वसायुक्त अथवा तैलीय खाद्य सामग्री जब लंबे समय तक वातावरण मे खुला रखा जाता है तब  उपचयित होने के बाद  तेल एवं वसा विकृतगंधी हो जाते हैं तथा उनके स्वाद तथा गंध बदल जाते हैं।विकृतगंधिता का मतलब है  वसायुक्त खाद्य वस्तु की रसायनिक गुण मे परिवर्तन होना और इसका दुस्प्रभाव पड़ता है | वसायुक्त खाद्य वस्तु  में उपचयन रोकने वाले पदार्थ (प्रति ऑक्सीकारक रोधी ) मिलाए जाते हैं। वायुरोधी बर्तनों में खाद्य सामग्री रखने से उपचयन की गति धीमी हो जाती है। और वसायुक्त खाद्य वस्तु को नाइट्रोजन वातावरण मे रखा जाता है जिससे वसायुक्त खाद्य वस्तु का ऑक्सीजन से अभिकिया की गति कम हो जाती है | और वसायुक्त खाद्य वस्तु को विकृतगंधिता से बचाया  जाता है |
अभिक्रिया  के   प्रकार निन्म हैः
(1.) संयोजन अभिक्रिया
(2.) द्विविस्थापन अभिक्रिया
(3.) वियोजन अभिक्रिया
(4.) विस्थापन अभिक्रिया
अब तक हमने नीं पॉइंट्स को discuss किया है | अतः आप सभी के recape के लिए निन्म points को दुबारा consider किया गया है :-
1.वियोजन अभिक्रिया संयोजन अभिक्रिया के विपरीत होती है। वियोजन अभिक्रिया में एकल पदार्थ टूट जाता है और दो या दो से अधिक पदार्थ देता है।
2. जिन अभिक्रियाओं में उत्पाद के साथ ऊष्मा का भी generate होता है उन्हें ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ कहते हैं।
3. जिन अभिक्रियाओं में ऊष्मा का observed होता है उन्हें ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ कहते हैं।
4.जब कोई एक तत्व दूसरे तत्व को उसके यौगिक से replace कर देता है, विस्थापन अभिक्रिया होती है।
5.द्विविस्थापन अभिक्रिया में दो अलग-अलग परमाणु या परमाणुओं के समूह (आयन) का आपस में interchage होता है।
6.अवक्षेपण अभिक्रिया से अविलेय लवण प्राप्त होता है।
7.अभिक्रिया में पदार्थों से ऑक्सीजन या हाइड्रोजन का योग अथवा हार्स भी होता है। ऑक्सीजन का योग या हाइड्रोजन का हार्स ऑक्सीकरण या उपचयन कहलाता है। ऑक्सीजन का हार्स  या हाइड्रोजन
का योग अपचयन कहलाता है।

संतुलित रासायनिक समीकरण का महत्व
 द्रव्यमान के संरक्षण का नियम  : किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो निर्माण होता है न ही विनाश। अर्थात किसी भी रासायनिक अभिक्रिया के उत्पाद तत्वों का कुल द्रव्यमान की सख्या अभिकारक तत्वों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है।
संतुलित रासायनिक समीकरण हमेशा  द्रव्यमान के संरक्षण का नियम कोपालन करता है | इसका मतलब है  रासायनिक अभिक्रिया के पहले एवं उसके पश्चात प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या equal रहती है।  उदाहरन 1 
जिक + सल्फ्ऱयूरिक अम्ल ———–> जिक सल्प़ फ़ेट + हाइड्रोजन
उपरोक्त शब्द-समीकरण को निम्नलिखित रासायनिक समीकरण से दर्शाया जा सकता हैः
Zn + H2SO4 ———> ZnSO4 + H2 ……………….समीकरण (1)
समीकरण (1) में तीर के निशान के दोनों ओर के तत्वों के परमाणुओं कीसंख्या की तुलना करें।
Zn और H2SO4 की सख्या एक एक है इसलिए total अभिकारक की सख्या 2 है और उत्पाद मे  ZnSO4 और H2 की सख्या भी एक – एक है और इनकी भी सख्या 2 है | और 
अभिकारक मे 
Zn :-  1 
H :- 2 
S :- 1 
O :- 4
होती है 
उत्पाद मे ,
Zn :-  1 
H :- 2 
S :- 1 
O :- 4
है इसलिए ये अभिकिया संतुलित है |
उदाहरन 2 :
Fe + H2O ——–> Fe3O4 + H2 को संतुलित करना है :
Step 1 रासायनिक समीकरण को संतुलित करने के लिए सबसे पहले प्रत्येक सूत्र के चारों ओर एक ब्रैकेट बना लीजिए। समीकरण को संतुलित करते समय ब्रैकेट के अंदर कुछ भी परिवर्तन नहीं कीजिए।
( Fe )+ ( H2O ) ———> ( Fe3O4 ) + (H2) 
Step 2 असंतुलित समीकरण (1-5) में उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की संख्या की सूची बना लीजिए।
अभिकारक मे ,
Fe  : 1 
H  : 2 
O : 1
और उत्पाद मे ,
Fe  : 3
H  : 2 
O : 4
Step 3 सबसे अधिक परमाणु वाले यौगिक को पहले संतुलित करते है  | वह अभिकारक हो या उत्पाद हो सकता है । उस यौगिक में सबसे अधिक परमाणु वाले तत्व को सेलेक्ट करते है । इस आधार पर हम Fe3O4 और उसके ऑक्सीजन तत्व को चुनते हैं। दाईं ओर ऑक्सीजन के चार परमाणु हैं जबकि बाईं ओर केवल एक है | ऑक्सीजन परमाणु को संतुलित करने के लिएः H2O को 4 से गुणा कर देते है |
( Fe )+ 4( H2O ) ———> ( Fe3O4 ) + (H2) 
Step 4 H तथा Fe परमाणु अब भी संतुलित नहीं हैं। इनमें से किसी एक तत्व को चुनकर आगे बढ़ते हैं। अब step 3 से प्राप्त संतुलित समीकरण में हाइड्रोजन परमाणु को संतुलित करते हैंः हाइड्रोजन परमाणु को बराबर करने के लिए दाईं ओर हाइड्रोजन अणु की संख्या को ‘4’ कर देते हैं।
( Fe )+ 4( H2O ) ———> ( Fe3O4 ) + 4(H2)
Step 5  Fe परमाणु अब भी संतुलित नहीं हैं। इनमें से किसी एक तत्व को चुनकर आगे बढ़ते हैं। अब अब step 4 से प्राप्त संतुलित समीकरण में हाइड्रोजन परमाणु को संतुलित करते हैंः Fe परमाणु को बराबर करने के लिए दाईं ओर Fe अणु की संख्या को ‘3’ कर देते हैं।
3( Fe )+ 4( H2O ) ———> ( Fe3O4 ) + 4(H2)
Step 6 अंत में, इस संतुलित समीकरण की जाँच के लिए हम समीकरण में दोनों ओर के तत्वों के परमाणुओं की संख्याओं का calculate करते हैं।
3( Fe )+ 4( H2O ) ———> ( Fe3O4 ) + 4(H2)
समीकरण  में दोनों ओर के तत्वों के परमाणुओं की संख्या बराबर है। अतः यह समीकरण संतुलित है। रासायनिक समीकरणों को संतुलित करने की इस विधि को हिट एंड ट्रायल विधि कहते हैं क्योंकि सबसे छोटी whole number का use करके समीकरण को संतुलित करने का प्रयत्न करते हैं।


इस तरह से हम किसी अभिकिया  को संतुलित कर लेते है | अब आगे के article मे दिए गये practice questions को खुद try करे | जिससे आप सभी के लिए 10 के board पेपर का एक महत्वपूर्ण question की प्रैक्टिस होगी |

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