परमाणु क्रमांक , द्रव्यमान संख्या , परमाणु संरचना का एतिहासिक विकास या परमाणु मॉडल , atomic model in hindi

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परमाणु क्रमांक : नाभिक में उपस्थित प्रोटोन की संख्या को ही परमाणु क्रमांक कहते है , इसे Z/P से व्यक्त करते है।
द्रव्यमान संख्या : नभिक में उपस्थित न्यूट्रॉन और प्रोटोन की कुल संख्या को द्रव्यमान संख्या कहते है इसे A से व्यक्त करते है।
द्रव्यमान संख्या = प्रोटोन की संख्या + न्यूट्रॉन की संख्या
A = P + N
या
A = Z + N
नाभिक का आकार लगभग 10-13 सेंटीमीटर या 10-15 मीटर होती है , इसकी खोज रदरफोर्ड ने की थी।
परमाणु का आकार 10-8 सेंटीमीटर या 10-10 मीटर  होता है , इसकी खोज डाल्टन ने की थी।
किसी भी तत्व को निम्नलिखित तरीके से व्यक्त किया जाता है।
तत्व को AXZ द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है।
यहाँ A = द्रव्यमान संख्या और Z = परमाणु क्रमांक और X = तत्व या परमाणु या अणु या आयन को प्रदर्शित करता है।
नोट :

  1. किसी उदासीन तत्व में जितना उसका परमाणु क्रमांक होता है उसमें उतने ही इलेक्ट्रॉन होते है।
  2. किसी ऋण आवेशित आयन में इलेक्ट्रॉन की संख्या ज्ञात करने के लिए उसके परमाणु क्रमांक में से दिया गया ऋण आवेश हटा देते है।
  3. किसी धनावेशित आयन में इलेक्ट्रॉन की संख्या ज्ञात करने के लिए उसके परमाणु क्रमांक में से दिया गया धनावेश हटा देते है।

निम्न में प्रोटोन , इलेक्ट्रॉन और न्यूट्रॉन की संख्या ज्ञात करो।
1. 37C17
उत्तर  : परमाणु क्रमांक या प्रोटोन की संख्या = 17
परमाणु द्रव्यमान = 37
न्यूट्रॉन की संख्या = परमाणु द्रव्यमान – प्रोटोन
N = 37 – 17 = 20
इलेक्ट्रॉन = 17
2. 235U92

उत्तर  : परमाणु क्रमांक या प्रोटोन की संख्या = 92
परमाणु द्रव्यमान = 235
न्यूट्रॉन की संख्या = परमाणु द्रव्यमान – प्रोटोन

न्यूट्रॉन = 235 – 92 = 143

3. 199F-1

उत्तर  : परमाणु क्रमांक या प्रोटोन की संख्या = 9
परमाणु द्रव्यमान = 19
न्यूट्रॉन की संख्या = परमाणु द्रव्यमान – प्रोटोन

न्यूट्रॉन = 19 – 9 = 10
इलेक्ट्रॉन = 9 + 1 = 10
4. 2713Al3+
उत्तर  : परमाणु क्रमांक या प्रोटोन की संख्या = 13
परमाणु द्रव्यमान = 27
न्यूट्रॉन की संख्या = परमाणु द्रव्यमान – प्रोटोन
न्यूट्रॉन = 27 – 13 = 14
इलेक्ट्रॉन = 13 – 3 = 10

परमाणु संरचना का एतिहासिक विकास या परमाणु मॉडल

1. डाल्टन का परमाणु मॉडल : “पदार्थ का वह छोटे से छोटा कण जिसे आगे विभाजित नहीं किया जा सकता है उसे परमाणु कहते है। “
कमियाँ : आधुनिक प्रयोगों से स्पष्ट है कि परमाणु को विभाजित किया जा सकता है।
2. थोमसन का परमाणु मॉडल : थोमसन के अनुसार परमाणु विद्युत का धनावेशित गोला होता है इसमें इलेक्ट्रॉन और प्रोटोन इस प्रकार स्थित होते है जैसे तरबूज के अन्दर बीज स्थित रहते है , इसे प्लम पुडिंग मॉडल भी कहते है।
कमियां : इस सिद्धांत में नाइट्रोजन को कोई निश्चित स्थान नहीं दिया गया , परमाणु धनावेशित न होकर उदासीन होता है , रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल या प्रयोग को नहीं समझा सका।
प्रयोग का वर्णन : रदरफोर्ड ने एक सोने की पतली पन्नी ली और उस पर अल्फा कणों की बौछार की , यह जानने के लिए की अल्फा कण टकराने के बाद किस दिशा में जाते है। इसलिए एक पर्दे पर जिंक सल्फाइड का लेप किया।
परिणाम : अधिकतर अल्फा कण सीधे निकल गए।
कुछ अल्फा कण अपने मार्ग से विचलित हो जाते है।
20 हजार अल्फा कणों में से एक अल्फा कण जिस मार्ग से जाता है उसी मार्ग से वापस लौट जाता है।
निष्कर्ष : परमाणु का अधिकाँश भाग रिक्त होता है।
परमाणु के केंद्र में एक भारी धनावेशित भाग होता है जिसे नाभिक कहते है।
नाभिक का आकार परमाणु के आकार की तुलना में नगण्य होता है।
इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारो ओर वृत्ताकार कोशों या कक्षाओं में चक्कर लगाते है।
कमियां :
क्लार्क मैक्सवेल के विद्युत चुम्बकीय सिद्धांत अनुसार जब कोई कण नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाता है तो उसकी ऊर्जा लगातार कम होनी चाहिए जिससे इलेक्ट्रॉन को अंत में नाभिक में गिर जाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं होता है , रदरफोर्ड ने इस तथ्य को नहीं समझाया।
कोश में घूमते हुए इलेक्ट्रॉन की संख्या के बारे में नहीं बता सका।
कोश में घूमते हुए इलेक्ट्रॉन के वेग के बारे में नहीं बता सका।
उसकी सहायता से हाइड्रोजन के रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं की जा सकती है।
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